शरीर के किसी भी अंग में पथरी हो, ये 15 बूँदे उसको जड़ से ख़त्म कर देगी

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दोस्तों पथरी आजकल की आम समस्या हो गयी हैं जिसका इलाज भी हमारे घर आंगन में ही हैं लेकिन हमारी मानसिकता हो गयी हैं डोक्टर के पास भागने की। ये पोधा हैं पथर चट्टा का जिसे पाखाण भेद भी कहते हैं जिसका अर्थ हैं पथर को तोड़ने वाला ।इस पौधे को आयुर्वेद में भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही आयुर्वेद में पत्थरचट्टा को प्रोस्टेट ग्रंथि और किडनी स्टोन से जुड़ी हुई समस्याओं के इलाज की औषधि माना गया है। मेडिकल साइंस में इसे bryophyllum pinnatum कहा जाता है। आयुर्वेद हीलिंग आपको पथरचट्टे की पूरी जानकारी दे रही है।

पत्थर चट्टा का पौधा

पत्थर चट्टा का पौधा खाने में खट्टा और नमकीन होता है। यह स्वाद में भी स्वादिष्ट भी है।

पत्थर चट्टा उगाने का तरीका

आप इसके पत्तों को किसी भी तरह की जमीन के अंदर डाल दें। यह उस जगह पर उग जाता है। पत्थर चट्टा की तासीर बहुत ही सामान्य होती है इसलिए हर मौसम में आप इसका सेवन कर सकते हैं।

कैसे प्रयोग करें

पत्थरचट्टा के दो पत्तों को तोड़कर उसे अच्छे से पानी में साफ कर लें। और सुबह व् शाम को खाली पेट गरम पानी के साथ 20 से 25 दिन सेवन करने से पत्थरी टूट कर निकल जाती हैं । आयुर्वेद अपनाये स्वास्थ्य बचाए। अगर आपको यह पौधा ना मिले तो आप होमियोपैथी उपचार करे ।

- homeopathic medicine of all kind of stones in Kidney Gall Bladder etc - शरीर के किसी भी अंग में पथरी हो, ये 15 बूँदे उसको जड़ से ख़त्म कर देगी

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होमियोपेथी इलाज राजीव दीक्षित जी द्वारा

अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी है। वो दुकान वाला समझ जायेगा। यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये।

ध्यान दे : ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पत्थरचट्टा नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है।

इस दवाई की प्रयोग विधि

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है। चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार। इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है।

इससे जीतने भी Stone है, कही भी हो गॉल ब्लेडर (Gall bladder) मे हो या फिर किडनी मे हो, या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो। वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे।

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महिने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है। अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए। यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है।

ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000 प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए। सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा।

सावधानियां व परहेज

  • इस औषधि का सेवन करते समय चूना, बिना साफ किये हुए फल और अधिक चावल आदि का सेवन न करें।
  • पथरी की मुख्य वजह कैल्शियम होती है। शरीर में अधिक कैल्शियम का होना पथरी का कारण बनता है।
  • यह औषधि बेहद काम की है। पथरी से परेशान लोगों को इसका नियमित सेवन करना है।

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इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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