कौन सी धातु के बर्तन खाने के लिए फायदेमंद है और नुकसानदेह है!

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आहार का चुनाव हम अपने  स्वस्थ को ध्यान में रख कर करते हैं, ताकि खाना शरीर में जाने के बाद हमे ऊर्जा प्रदान करे, शरीर स्वस्थ रहे और शरीर का संतुलन बना रहे.

जिस तरह खाने के अंदर पोषक तत्व रहते हैं, वैसे ही हम खाने के लिए जो पात्र उपयोग में लाते है, उसके भी हमे फायदे और नुक्सान को ध्यान में रखना चाहिए.

इसलिए सही भोजन के साथ सही धातु के बर्तन का चुनाव भी जरूरी होता है, ताकि खाने के गुणों में वृद्धि हो और हमारा शरीर रोगों से दूर रहे.

आप भोजन पकाने और परोसने के लिए कई तरह के पात्र का प्रयोग करते होंगे लेकिन आपको उन पात्रों में गुणों का पता है?

क्या आप जानते है कि किस धातु के बर्तन में खाना खाने से क्या फायदा और क्या नुक्सान होता है?

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तो आइये जानते है कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.

तांबा

कांस के बर्तन के बाद तांबे के बने बर्तन का प्रयोग होता  है. तांबा के बने बर्तन का हर घर में पूजा पाठ में भी प्रयोग लाया जाता है. इस पात्र का पानी रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध करता है, स्मरण-शक्ति अच्छी रखता है, लीवर संबंधी समस्या दूर करता है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है.

लोहा

लगभग हर घर में लोहे के बर्तन का प्रयोग भी होता है. इसमें बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, इसमें लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है. लोहा कई रोग को खत्म करता है , पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है. इसके पात्र में दूध पीना अच्छा होता है.

स्टील

वर्तमान समय में स्टील के बर्तन का उपयोग कुछ ज्यादा होता है. यह बहुत सुरक्षित और किफायती होता है. स्टील के बर्तन नुक्शान्देह नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता.

सोना

सोना एक महँगी धातु है. सोना लाल, सफ़ेद, और पीले रंग में उपलब्ध होता है. लेकिन भारत में सबसे ज्यादा पीला सोना प्रयोग में लाया जाता है.  सोने के बर्तन में पहले के राजा महाराजा भोजन करते थे. सोना एक गर्म धातु है. सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है. और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है – आँखों को तेज करता है.

चाँदी

सोने के बाद चाँदी की धातु मूल्य में दुसरे नंबर पर होती है. चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है. शरीर को शांत रखती है. इसके पात्र में भोजन बनाने और करने के कई फायदे होते हैं,  जैसे दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष , कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है.

कांस

चाँदी के बाद काँसे के बर्तन का मूल्य आता है. यह चाँदी से थोड़ी सस्ती होती है और इसके बर्तन का प्रयोग माध्यम वर्गीय परिवार में अधिक होता है. खास कर गाँव में मेहमान नवाजी के लिए इन्हीं से बने पात्र में भोजन परोसा जाता है. इसके बने पात्र में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है. लेकिन कांस्य खट्टी चीजे नहीं परोसना चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है.

पीतल

अनेक घरों में पीतल के बर्तन का भी उपयोग होता है. यह सामान्य कीमत की धातु है. इसमें भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बिमारी नहीं होती.

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है. इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है. यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. इससे हड्डियां कमजोर होती है , मानसिक बीमारियाँ होती है, लिवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है. उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है. इन बीमारियों का जड़ से इलाज नहीं हो पाता. इसलिए अंग्रेज जेल के कैदी को इसमें खाना परोसा करते थे.

इन सब बर्तनों में खाना पकाने और खाने से कुछ फायदे और कुछ नुकशान होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है.

इसलिए इन सारी बातों को ध्यान में रखकर खाना पकाने और खाने के लिए सही बर्तनों को चुनिए.

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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