यह पौधा लाखों लोगो की किडनी ट्रांसप्लांट और किडनी डायलिसिस रुकवा चुका है

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पुनर्नवा का  बोटैनिकल नाम BOERHAHAVIA DIFFUSSA है . अंग्रेज़ी में इसे HOG WEED भी कहते है . यह NYCTAGINACEAE FAMILY से आता है .पुनर्नवा के पुरे पोधे में ही औषधीय गुण होते है . विशेषकर इसके जड़ो ओर पतियों मेंऔषधीय गुण काफी मात्र में गुण पाए जाते है. खेतों में पैदा होने वाले या अक्सर ही किसी भूमि पर अपने आप उग जाने वाले इस खरपतवार के गुण देख कर आप वाकई हैरान हो जायेंगे. हम आज आपको एक ऐसा ही इसका प्रयोग बताने जा रहें हैं जिसको करने से किडनी के समस्त रोग सही हो सकता है, यहाँ तक के जिन रोगियों का डायलिसिस चल रहा है, वो भी अपने रोग से मुक्ति पा सकते हैं. अगर यूँ कहें के ये किडनी के समस्त रोगों के लिए रामबाण हैं तो ये गलत नहीं होगा.

पुनर्नवा की पहचान और अन्य भाषाओँ में नाम.

वानस्पतिक नाम – Boerhavia Diffusa Linn

संस्कृत – पुनर्नवा, शोथघ्नी, विशाख, श्वेतमूला, दिर्घपत्रिका, कठिल्ल्क,, शशिवाटिका, चिराटका

हिंदी – लाल पुनर्नवा, सांठ, गदहपूरना,

उर्दू – बाषखीरा

कन्नड़ – सनाडीका Sanadika

गुजरती – राती साटोडी (Rati Satodi), Vasedo (वसेड़ो)

तमिल – mukurattei, Mukaratte

Telugu – Atianamidi

Bangali – Punarnoba, sveta punarnaba

nepali – onle sag

punjabi – khattan

marathi – punarnava, ghentuli

malyalam – Thazuthama, Tavilama

English – Erect Boerhavia, Spiderling, Spreading hog weed, Horse Purslane, Pigweed,

Arbi – Handakuki, Sabaka

Farsi – Devasapat

पुनर्नवा में पाए जाने वाले मुख्य रसायन –

PUNARNAVOSIDE, PUNARNAVINE  नामक ALKALOID पाए जाते है. LIRIODENDRIN  नामक lignans पुनर्नवा की जड़ में पाए जाते है. Potasium nitrate, ursolic acid, rotenoid भी पुनर्नवा में पाए जाते है. इसके अतिरिक्त पुनर्नवा के धरती के उपरी हिस्से   में 15 amino acid पाए जाते है .जिनमे 6 अवश्यक एमिनो अम्ल है जो हमारे शरीर में नहीं बनते हमें बाहर  से भोजन के रूप में लेने पड़ते हैं. पुनर्नवा के जड़ में 14 एमिनो अम्ल पाए जाते है, जिनमे 7 अवश्यक एमिनो अम्ल है. जो हमारे शरीर में नहीं बनते और इनको हमें बाहर से ही लेना पड़ता है.

पुनर्नवा के kidney रोगों में लाभ

पुनर्नवा chronic renal failure ,chronic kidney diseases, nephrotic syndrome, urinary tract infection अर्थात kidney की बड़ी से बड़ी बीमारी को अकेले ठीक करने की क्षमता रखता है.

पुनर्नवा में मौजूद  punarnavoside जो कि एक alkaloid है, एक बहुत अच्छा diuretic है. Diuretic एक तरह का रसायन होता है जो urine की मात्रा को बढाता है जिससे urine खुलकर आ जाता है ओर शरीर में किडनी के बीमारी होने से पैदा होने वाली सुजन (जिसको edema कहा जाता है) कम हो जाती है इसके साथ ही punarnavoside एक बहुत अच्छा antibacterial, anti-inflamatory और antispasmodic antifibronolytic है.

अभी आइये जानते हैं ऊपर बताये गए Effect की व्याख्या और फायदे.

antibacterial effect– bacterial infection को रोकता है .

anti-inflammatory effect -सुजन को कम करता है जो इन्फेक्शन से हो जाती है .

antispasmodic effect -यह खिचाव को कम करता है, जिससे दर्द कम होता है.

antifibronolytic effect -यह urine में आने वाले blood  को रोकता है जो कि urinary tract इन्फेक्शन में अक्सर हो जाता है इसे haematuria कहते है. जिसमे RBC urine में आना शुरू हो जाते है.

जो कि urinary tract infection मुख्यता  बार बार होनर वाले uti में काफी लाभकारी है । इसमें मौजूद पोटैशियम नाइट्रेट भी diuretic का काम करता है।जो मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है।जिससे kidney failure के मुख्य लक्षण edema में आराम मिलता है।

गर्भावस्था में होने वाले urinary tract इन्फेक्शन में भी पुनर्नवा बहुत उपयोगी है.

Nephrotic sndrome Treatment in Ayurved

यह एक प्रकार कि kidney कि समस्या होती है जिसमे शरीर से प्रोटीन urine के माध्यम से बहार निकलना शुरू हो जाता है ओर शरीर पर सुजन आ जाती है ओर kidney का फिल्ट्रेशन system ख़राब हो जाता है .इस समय पुनर्नावा का उपयोग किसी संजीवनी से कम नही है क्योकि इसमें मोजूद एमिनो अम्ल शरीर में हुए प्रोटीन कि कमी को पूरी करते है तथा urine में होने वाले protein lose को भी कम करते है और kidney dysfunctionसे होने वाली सूजन जिसे edema कहते है को भी कम करता है.

किडनी की बड़ी से बड़ी बीमारी इलाज

पुनर्नवा chronic renal failure, chronic kidney diseases, urinary tract infection अर्थात kidney की बड़ी से बड़ी बीमारी को अपने अन्दर पाए जाने वाले विशेष रसायनों की वजह से अकेले ही ठीक करने की क्षमता रखता है.

किडनी डायलिसिस को रोकें

पुनर्नवा urine output को काफी बढ़ा देता है, जिससे वो रोगी जो पेशाब ना उतरने की वजह से dialysis करवाते हैं उनको इसकी  जरुरत भी नहीं पड़ती है.

किडनी ट्रांसप्लांट को रोकें

अगर आपको डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के लिए कह भी दिया हो, तो आप रोजाना इस पुरे पौधे का जड़ समेत रस निकाल कर सुबह शाम पियें. 50 – 50 मि.ली. एक से 6 महीने तक लें, ये अवधि रोगी के रोग की स्थिति के अनुसार कम या बढ़ सकती है. और वो इसको अपनी चल रही दवाई के साथ निसंकोच ले सकता है.

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किडनी रोगी के लिए रक्तचाप को नियंत्रित करें

Nephrotic syndrome, chronic renal failure ओर chronic kidney disease में blood presssure बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, पुनर्नावा में पाए जाने वाला lignane  LIRIODENDRIN एक प्राकर्तिक calcium channel blocker है जोकि blood vessel को relax रखता है जिससे blood pressure नार्मल हो जाता है. Diuretic होने के कारण पुनर्नवा मूत्र की अधिक मात्रा किडनी से निकलता है। इसलिए Blood pressure संतुलित रखता है। यह एलॉपथी में बी पी को कम करने के लिए दी जाने वाली Calcium Channel Blocker – Nifedipine की तरह काम करती है. जो के मुख्यतः किडनी रोगी को Renal Failure के केस में दी जाती है.

कैसे करें सेवन.

इसको सुबह खाली पेट इसके पूरे पौधे का स्वरस निकाल कर 50 मिली सुबह और 50 मिली शाम को दीजिये. यह रोगी के रोग के अनुसार 1 से 6 महीने तक दीजिये.

स्वरस निकालने की विधि.

किसी भी पौधे का स्वरस निकालने के लिए पहले उसको अच्छे से साफ़ कर लो, उसके बाद में पौधे को अच्छे से पत्थर पर कूट कर इसको चटनी जैसा बना लो, और फिर इसको किसी सूती कपडे से छान लीजिये. या फिर ऐसा करें, घर में मिक्सर ग्राइंडर में अच्छे से थोडा पानी मिला कर ग्राइंड कर लो और फिर इसको किसी सूती कपडे से छान लो. और यह ही रोगी को दीजिये.

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।

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