क्या है पायरिया! कारण, निवारण और बचाव

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क्या है पायरिया

दांतों की सही तरीके से अगर देखभाल न की जाए तो पायरिया हो सकता है। दांतों को सेहत और सुंदरता का आईना माना जाता है। लेकिन, खाने के बाद मुंह की साफ-सफाई न करने से दांतों में कई प्रकार की बीमारियां शुरू हो जाती हैं। दांतों की साफ सफाई में कमी के कारण जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां पायरिया के लक्षण हैं। दातों की साफ-सफाई न करने के कारण पायरिया एक सामान्य बीमारी बन गई है। पायरिया के कारण असमय दांत गिर सकते हैं।

आखिर क्यों होता है पायरिया?

पायरिया शरीर में कैल्शियम की कमी होने, मसूड़ों की खराबी और दांत-मुंह की साफ सफाई में कमी रखने से होता है। इस रोग में मसूड़े पिलपिले और खराब हो जाते हैं और उनसे खून आता है। सांसों की बदबू की वजह भी पायरिया को ही माना जाता है।

असल में मुंह में 700 किस्म के बैक्टीरिया होते हैं। इनकी संख्या करोड़ों में होती है। अगर समय पर मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई नहीं की जाए तो ये बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। पायरिया होने पर दांतों को सपोर्ट करने वाले जॉ बोन को नुकसान पहुंचता है।

पायरिया के लक्षण

पायरिया होने पर सांसो में तेज दुर्गंध शुरू हो जाती है। मसूडों में सूजन होने लगती है। दांत कमजोर होकर हिलने लगते हैं। गर्म और ज्यादा ठंडा पानी पीने पर दांत संवेदनशील हो जाते हैं और लोग उसे बर्दास्त नही कर पाते हैं। पायरिया होने पर मसूडों से मवाद आना शुरू हो जाता है। मसूडों को दबाने में और छूने पर दर्द होता है। पायरिया की शिकायत होने पर मसूडों से खून निकलने लगता है। दो दांतों के बीच की जगह बढ जाती है, दांतों में गैप होने लगता है।

पायरिया का इलाज मुमकिन

पायरिया के बारे में एक गलत धारणा ये है कि इसका इलाज मुमकिन नहीं जबकि हकीकत ये है कि इसका इलाज मुमकिन है। पायरिया की वजह से हिलते दांतों को भी पक्का किया जा सकता है। अच्छी तरह से मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई से ये बीमारी दूर हो सकती है। मसूड़ों को अगर ज्यादा नुकसान पहुंचा हो तो सर्जरी के जरिए उसे भी ठीक किया जा सकता है। अगर मसूड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच गया हो और दांत मसूड़ों से निकलने के करीब हों तो डेंटल इम्प्लांट के जरिए फिर से दांत लगाए जा सकते हैं।

अच्छे दांत सेहत और सुंदरता की निशानी होती है। इसलिए अपने दांतों का ख्याल जरूर रखें।

क्या है सावधानी

  • मुंह की अंदरुनी साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • दांतों को अच्छी तरह साफ करें।
  • रात को सोने से पहले भी ब्रश करें।
  • जीभ को अच्छी तरह साफ करें।
  • हार्ड टूथब्रश का इस्तेमाल नहीं करें।

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क्या है घरेलू उपचार

  • आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं । इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें।
  • नीम की पत्तियां, काली मिर्च और काला नमक मिलाकर पीस लें ।इसका नियमित सेवन करें।
  • खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं।
  • जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी, दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें ।इसे बंद बर्तन में जलाकर पीस लें इस मंजन का नियमित प्रयोग करें।
  • फिटकरी और काला नमक बारीक पीसकर दांतों पर मलें।

माइग्रेन में क्या करें क्या ना करे

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माइग्रेन के दौरान सिर में बहुत तेज दर्द होता है। यह मस्तिष्‍क में सूजन के कारण होने वाली समस्‍या है। माइग्रेन होने पर क्या किया जाए यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि माइग्रेन होने पर क्या किया जाए। माइग्रेन एक प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन के दौरान सिर में पहला हल्का दर्द होता है, जो धीरे-धीरे तेज होता जाता है। यह सिरदर्द चार घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी बना रह सकता है। इसमें सिर के पिछले हिस्से में गर्दन के पास से लेकर पूरे सिर में भंयकर दर्द होता है। माइग्रेन किसी भी आयु में हो सकता है। माइग्रेन का प्रुख कारण आजकल की अव्यवस्थित और तनावपूर्ण जिंदगी है। जिसके चलते हम न तो अपने खान-पान पर ध्यान दे पाते हैं और न ही सेहत पर। परिणामस्वरूप जाने अनजाने माइग्रेन जैसे रोगों के शिकार बन जाते हैं।

आज के बदलती जीवनशैली में हर व्यक्ति के जीवन में भागदौड़ और बहुत सारा तनाव है। इस वजह से जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है। और इस बदलाव के कारण हमें कई शारीरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इन्हीं समस्याओं में से एक है माइग्रेन। यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है और इसमें सिर में एकतरफा दर्द होता है। इसलिए आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।

माइग्रेन होने पर क्या करें

  • जब भी घर से बाहर निकले छाता लें और सूरज की सीधी रोशनी से बचें।
  • मौसम के बदलाव से खुद को बचाना चा‍हिए और अपना ख्याल रखना चाहिये।
  • आप कम से कम 6-8 घंटे की गहरी नींद जरूर ले।
  • योग, मेडिटेशन और मार्निंग वॉल्क, खासकर नियमित रुप से व्यायाम करें।
  • भोजन समय पर करें।
  • माइग्रेन होने पर नियमित रुप से, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेनी चाहिये।
  • बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी सिर पर रखें। इससे जो रक्त धमनियां फैल गयी हैं, वे फिर से अपनी पूर्व स्थिति पर वापस आ जायेगी।
  • सिर पर मेहंदी का लेप लगायें। इससे बहुत आराम मिलता है।
  • दालचीनी को पीसकर इसका लेप माथे पर लगायें इससे दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।
  • दालचीनी को पाउडर बनाकर दिन में चार बार ठंडे पानी के साथ खाने से भी आराम मिलेगा।
  • माइग्रेन सिर दर्द में अदरक बहुत फायदेमंद है। अदरक के सेवन से मिचली और उल्टी आना बंद हो जायेगी।
  • रात में हल्का एवं फारबर युक्त भोजन करें, रात को सोते समय एक चम्मच त्रिफला तथा आंवले के चूर्ण का गुनगुने पानी से सेवन करें, पेट साफ रहेगा और आप काफी आराम महसूस करेंगें।
  • सिर दर्द शुरू होते ही जीभ की नोक पर एक चुटकी नमक रख लें आधा मिनट बाद पानी पी लें सिर दर्द गायब हो जायगा।
  • पिसी दालचीनी, अदरक का पाउडर, पिसी काली मिर्च और तुलसी पत्ती को मिलाकर पीसकर पाउडर बना लें। इस मिश्रण का सेवन शहद के साथ करें। आपको तुरंत फायदा होगा।
  • माइग्रेन सिर दर्द होने पर आराम करने की सख्त जरूरत है। रोशनी और आवाज से दूर रहें। आंख बंद करके सोने की कोशिश करें।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों और वजिटेबल जूस जैसे गाजर, पालक, खीरा खाए। मौसमी फल व सब्जियां खायें।

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क्या न करें

  • माइग्रेन हो तो तेज रोशनी एवं तेज शोर से दूर रहे।
  • माइग्रेन होने पर धूप में या फिर ठंडक में घर से बाहर न निकलें।
  • माइग्रेन का दर्द होने पर अपना मुंह ठंडे पानी से धोने के बाद अंधेरे कमरे में आराम करे।
  • आंखों पर ज्यादा जोर न डालें।
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। दिन भर में कम से कम 9 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं।
  • कुछ समय के अंतराल पर नियमित रूप से थोड़ा-थोड़ा भोजन करे। एक बार में पेट भर न खाएं।
  • अगर आपको खाद्य पदार्थो से एलर्जी के कारण माइग्रेन हो, तो उन फलों-सब्जियों और अनाज से परहेज़ करें।
  • माइग्रेन पेशेंट कभी भी व्रत ना करें, और ना ही ऐसा भोजन करें जिसमें वसा हो।
  • दबाव या स्ट्रेस से दूर रहे।
  • माइग्रेन से पीडि़त 16 साल से कम उम्र वाले बच्चों को एसप्रिन नहीं लेनी चाहिये।
  • तेज इत्र या पर्फ्यूम ना लगाए।

जानिए विटामिन सी कितना मददगार है हाई ब्लड प्रेशर कम करने में

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एक ब्लड प्रेशर का मरीज ही हाई ब्लड प्रेशर के रोग की गंभीरता को समझ सकता है। यह बीमारी तेजी से पूरी दुनिया में अपनी जड़ें फैला रही है। आजकल हर घर में किसी ना किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। परहेज ना करने पर यह बिमारी भयंकर रूप भी ले सकती है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को अपने खाने में स्वाद से भी समझौता करना पड़ता है। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी इन बातों को जानना जरूरी है।

ब्लड प्रेशर की समस्या क्यों होती है?

रक्त नलिकाओं पर पड़ने वाले खून के दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं। पूरे शरीर में ब्लड का सर्कुलेशन दिल तथा धमनियों के द्वारा होता है। जब शरीर में धमनियों की दीवारें अपने नार्मल आकर से मोटी और संकुचित हो जाती हैं, तो शरीर में ब्लड का नार्मल सर्कुलेशन नहीं हो पाता। इससे दिल को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और यह समस्या ब्लड प्रेशर का कारण बनती है।

शोध के अनुसार

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए केलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया। इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने 18 से 21 साल की 242 लड़कियों को शामिल किया, जब उन्हें शामिल किया गया तब उनकी उम्र 8 साल की थी औऱ लगभग 10 साल तक चले शोध के बाद विटामिन सी में प्लाज्मा के स्तर व ब्लड प्रेशर की जांच की गई।

इस जांच के बाद सामने आया कि विटामिन सी हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में बहुत कारगार है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रमुख रिसर्चर डा. ग्लेडिस ब्लाक, विटामिन सी को हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मददगार बताते हैं। इससे पहले भी हाई ब्लड प्रेशर को लेकर जो रिसर्च हुए हैं उनमे भी विटामिन सी को इस रोग के इलाज के लिए उपयोगी बताया गया है। पहले के रिसर्च में पाया गया कि विटामिन सी (एस्कार्बिक एसिड) में मौजूद प्लाज्मा का उच्च स्तर अधेड़ व वृद्ध महिलाओं में ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार है।

शोध के परिणाम

जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन सी की अधिकता पाई गई, उनमें सिस्टोलिक यानि (हृदय में संकुचन) ब्लड प्रेशर में 4.66 मिली व डायस्टोलिक यानि (हृदय में फैलाव) में 6.04 मिली की कमी देखी गई। रिसर्च में सामान्य से ज्यादा फलों, सब्जियों या मल्टीविटामिन (विटामिन सी सप्लीमेंट्स) लेने पर एस्कार्बिक एसिड का स्तर ज्यादा पाया गया। एस्कार्बिक एसिड विटामिन सी का एक मुख्य स्रोत होता है। शरीर में इसकी अधिकता से हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।

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विटामिन सी के अच्छे स्रोत –

विटामिन सी कई चीज़ों से प्राप्त होता है। खट्टे रसदार फल जैसे आंवला, नारंगी, नींबू, संतरा, अंगूर, टमाटर, आदि में विटामिन सी भरपूर मात्रा होती है। इसके अलावा अमरूद, सेब, केला, बेर, कटहल, शलगम, पुदीना, मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया और पालक विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। दालें भी विटामिन सी का स्रोत होती हैं। असल में सूखी अवस्था में दालों में विटामिन सी नहीं होता लेकिन भीगने के बाद दाल में विटामिन सी के गुण आ जाते हैं।

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हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के अन्य उपाय-

  1. कैल्यिशम- हाई ब्लड प्रेशर में कैल्यिशम जरूरी है, इसलिए कम से कम 800 मिलीग्राम कैल्शियम अवश्य लें। यह तीन कप दूध से प्राप्त हो जाता है।
  2. लहसुन- लहसुन की 3-4 कलियां रोज़ लेने से भी ब्लड प्रेशर ठीक रहता है।
  3. फाइबर- रोज़ 20 ग्राम फाइबर लेने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल घटता है। साथ ही हाई बीपी भी कम होती है। चोकर वाले आटे की रोटी, दाल, फल जैसे सेब, आम, केले, आडू, दलिया, कॉर्न आदि से फाइबर प्राप्त होता है।
  4. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए गुस्सा कम करें, नियमित व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।

जाने कैसे करे अस्थमा या दमा को नियंत्रित

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अस्थमा के कारण श्वासनली या इसके आसपास के जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। जिस कारण सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। इतना ही नहीं, इससे फेफडों में हवा ठीक से नहीं जा पाती। नतीजतन सांस की समस्या, खांसी इत्यादि होने लगती है। यही अस्थमा की शुरुआत है। अस्थमा के कई लक्षण हैं, इनको आराम से पहचाना जा सकता है। जैसे जब आप जल्दी-जल्दी सांस लेने लगें, सांस लेने में दिक्कत हो, खांसी हो, पसलियां चल रही हों आदि…

सर्दियों के आते ही एलर्जी, सर्दी, खांसी, जुकाम होना आम बात है। ऐसे में उन लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है, जो दमा यानी अस्थमा से पीडि़त हैं। क्या आप जानते हैं विश्व में लगभग तीस करोड़ लोग दमा से पीडि़त हैं। ऐसे में सर्दियां आते ही दमा पीडि़त लोगों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। क्या आप जानते हैं अस्थमा या दमा को नियंत्रण में करने के तरीके क्या हैं। तो आइए जानें दमा पर काबू पाने के लिए क्या करें।

- hindihealthhindi - जाने कैसे करे अस्थमा या दमा को नियंत्रित

अस्थमा नियंत्रण के तरीके

  1. अस्थमा रोगियों के लिए व्यायाम करना बेहद जरूरी होता है।
  2. समय-समय पर अपनी जांच करवाएं।
  3. पालतू जानवरों के बहुत करीब न जाएं और उन्हें हर सप्ताह नहलाएं।
  4. अस्थमा होने पर धूम्रपान से दूर रहें और धूम्रपान करने वाले लोगों से भी दूरी बनाएं।
  5. अस्थमा अटैक होने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करें अन्यथा इनहेलर का प्रयोग करें।
  6. अस्थमा रोगी के लिए बचाव बेहद जरूरी है, ऐसे में आप धूल-मिट्टी से दूर रहें। साफ.-सफाई करने से बचें और पुराने धूल-मिट्टी के कपड़ों से दूर रहें।

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घरेलू नुस्खे अपनाये

यदि आप अस्थमा से पीडि़त हैं तो आपको चाहिए कि आप कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाएं जिससे आप अस्थमा को नियंत्रि‍त कर सकें।

  • उबले हुए लौंग के गर्म पानी में शहद मिलाकर काढ़ा बनाकर पीएं। ये बहुत लाभकारी है।
  • अदरक की गर्म-गर्म चाय भी अस्थमा के दौरान बहुत लाभकारी होती है। इसके साथ ही आप गर्म चाय में लहसुन की कुछ कलियां मिलाकर चाय का सेवन करें ये भी अच्छा उपाय है।
  • अस्थमा के इलाज के लिए सबसे कारगर होता है लहसुन। यदि आप दूध में लहसुन की कुछ उबालें और प्रतिदिन दूध के साथ इसका सेवन करें तो आपको अस्थमा नियंत्रण में बहुत आराम मिलेगा।
  • अजवायन का गर्म पानी और इसकी भाप भी अस्थमा रोगियों के लिए फायदेमंद होती है।

सावधान! ये सात चीज़ें आपको डायबिटीज़ का शिकार बना सकती हैं

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मधुमेह या डायबिटीज हाल के सालों में होने वाला सबसे खतरनाक जीवनशैली रोग माना जाता है। यह ना केवल परिवार में पहले से किसी के डायबिटीज़ होने पर होती है बल्कि यह स्वास्थ्य के अनुकूल जीवनशैली नहीं रखने से होती भी है।

मीठे पेय पदार्थ

मीठे पेय पदार्थों में कैलोरी और शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए आपको सोडा और बोतल बंद पेय पदार्थों का सेवन कम से कम करना चाहिए ताकि मोटापा और डायबिटीज़ से बचा जा सके।

देर से खाना खाना

क्या आपको देर से खाना खाने की आदत है? आपको समझना चाहिए कि देर से खाना खाना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। देर से खाना खाने से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है जिससे डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।

- stress - सावधान! ये सात चीज़ें आपको डायबिटीज़ का शिकार बना सकती हैं

फाइबर की कमी

फाइबर वाले फलों को कम खाना भी आपके पाचन के लिए सही नहीं है। इससे ना केवल पाचन क्षमता को कमजोर होती है बल्कि डायबिटीज़ का खतरा भी ज्यादा होता है।

धूम्रपान

एक शोध में यह बात सामने आई है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज होने का खतरा आम लोगों की तुलना में 44 फीसदी अधिक होता है। जापान के नेशनल कैंसर के शोधकर्ताओं ने पाया कि दिन में 20 से ज्यादा सिगरेट पीने वालों में यह खतरा 61 फीसदी तक बढ़ जाता है। जबकि कम धूम्रपान करने वालों में यह खतरा 29 प्रतिशत पाया गया।

- smoking - सावधान! ये सात चीज़ें आपको डायबिटीज़ का शिकार बना सकती हैं

देर रात को स्नैक्स खाना

यदि आपको रात में नींद देर आती है तो टाइम पास करने के लिए आपको ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स खाने पड़ते हैं। यह अच्छी आदत नहीं है इससे डायबिटीज़ हो सकता है।

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तनाव

यदि आपके परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज़ रहा है तो आपको तनाव पर ध्यान देना होगा। ऐसा कोर्टिसोल नामक स्ट्रैस हार्मोन के कारण होता है, जिससे कि आपका ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है।

कम या ज्यादा सोना

एक अध्ययन से यह पता चला है कि बहुत कम या बहुत ज्यादा सोने से डायबिटीज हो सकता है।

इन आदतों से आप हो सकते हैं डायबिटीज़ के शिकार

ये कुछ आदतें हैं जिनसे डायबिटीज़ हो सकता है। इसलिए रात को ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थ और और स्नैक्स ना लें। अपने अपने स्वास्थ्य से ऐसे प्यार करो जैसे आप परिवार से करते हो।

वजन घटाने के लिए दालचीनी का प्रयोग करें

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क्या दालचीनी वजन घटाने में मदद करती है? क्या यह वास्तव में काम करती है? यदि ऐसा है, तो कितना? क्या यह आपके फैट को पूरी तरह से बर्न करती है? और क्या दालचीनी वजन घटाने के लिए सबसे अच्छी है? ये सवाल ज्यादातर लोगों के मन मे होते हैं जब वह वजन घटाने में मदद के रूप में दालचीनी लेने पर विचार कर रहे होते हैं।

हालांकि इस सवाल का जवाब बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि दालचीनी वजन घटाने में कैसे मदद करता है इसके पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत नहीं है। हमारे व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार दालचीनी कुछ हद तक कुछ लोगों के लिए वजन घटाने के लिए काम करती है, लेकिन इसके साथ स्वस्थ आहार और नियमित एक्सरसाइज को शामिल करना भी बहुत जरूरी है।

वजन घटाने के लिए दालचीनी

  • दालचीनी से आपको भरा हुआ महसूस होता है।
  • दालचीनी प्राकृतिक पाचन है जो भोजन को पचाने में मदद करती है।
  • दालचीनी पेट के स्वास्थ्य में सुधार करती है।
  • दालचीनी एक शक्तिशाली एंटी बैक्टीरियल होने के कारण पेट के बुरे बैक्टीरिया से छुटकारा दिलाने में मदद करती है।
  • दालचीनी फैटी एसिड को कम स्टोर करती है।
  • दालचीनी ऊर्जा का स्तर, एकाग्रता और सतर्कता में मदद करती है।

- cinnamon - वजन घटाने के लिए दालचीनी का प्रयोग करें

कैसे करें इस्तेमाल

वजन घटाने के लिए शहद के साथ दालचीनी का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। शहद में पाए जाने वाले तत्व वजन घटाने में सहायक होते हैं।

शहद में मिलने वाला फ्रक्टोज वजन घटाने में सहायक होने के साथ ही ऊर्जा के स्तर को भी बरकरार रखता है। यह अतिरिक्त चर्बी को घटाने में मददगार हॉर्मोन्स की मात्रा को बढ़ा देता है। रही बात दालचीनी की तो यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय कर देती है जिसकी वजह से कैलोरीज ज्यादा और जल्दी बर्न होती हैं।

वहीं दालचीनी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करने का काम करता है। आप चाहें तो दालचीनी और शहद को इन तरीकों से इस्तेमाल में लाकर वजन घटा सकते हैं:-

1. शहद, दालचीनी और पानी

वजन कम करने के लिए आप शहद, दालचीनी और पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह बेहद आसान और कारगर उपाय है. उबले हुए पानी में समान मात्रा में दालचीनी और शहद डालकर इसे अच्छी तरह मिला लें. इस पेय को खाली पेट पीने से कुछ ही दिनों में आपको फर्क दिखना शुरू हो जाएगा.

2. शहद और दालचीनी

शहद और दालचीनी को एक साथ इस्तेमाल में लाकर भी वजन घटाया जा सकता है. दालचीनी को बारीक पीस लें और इसे शहद में मिलाकर खाएं. हर रोज एक चम्मच ये पेस्ट खाने से कुछ ही दिनों में परिणाम नजर आने लगेंगे.

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3. शहद, दालचीनी और नींबू का रस

वजन कम करने के लिए नींबू का रस भी काफी कारगर है. नींबू के रस को दालचीनी और शहद के साथ मिलाकर इस्तेमाल में लाने से दोगुना फायदा होता है. वजन कम करने के साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी संतुलित रखने में मददगार होता है.

4. शहद, दालचीनी और ग्रीन टी

वजन कम करने के लिए बहुत से लोग ग्रीन टी पर भरोसा करते हैं. इसे शहद और दालचीनी के साथ मिलकार पीने से इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं. आप हर रोज इसे खाली पेट ले सकते हैं.

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