जानिए पीले दांतों को घर पर कैसे चमकदार बनाए

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सफेद और चमकते दांत किसी की भी पर्सनेलिटी में निखार ला सकते हैं। बहुत से लोग पीले दांतों के कारण लोगों के सामने हंसने से बचते हैं या मुंह पर हाथ रखकर हंसते हैं। दांत ज्यादातर उम्र के कारण, दांतों की ठीक से सफाई न होने के कारण, बहुत ज्यादा चाय या कॉफी पीने के कारण अथवा तंबाकू और सिगरेट पीने के कारण पीले हो जाते हैं।

कभी कभी किसी बीमारी के कारण भी दांत पीले हो जाते हैं। हालांकि पीले दांतों को सफेद बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है। थोड़ी सी मेहनत से आप पीले दांतों को सफेद बना सकते हैं।

यदि आप भी दांतों के पीलेपन से परेशान हैं तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे

तुलसी

तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है। साथ ही, तुलसी मुंह और दांत के रोगों से भी बचाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं।

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नमक

नमक से दांत साफ करने का नुस्खा बहुत पुराना है। नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है और दांत चमकने लगते हैं।

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गाजर

रोजाना गाजर खाने से भी दांतों का पीलापन कम हो जाता है। दरअसल, भोजन करने के बाद गाजर खाने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं।

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स्ट्रॉबेरी

स्ट्रॉबेरी में भी विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है जो कि दांतों को सफेद बनाने में सहायक है। स्ट्रॉबेरी के कुछ टुकड़ों को पीसकर, इस लेप को दांतों पर लगाकर मसाज करें। इसे दिन में दो बार करने से कुछ ही दिनों में पीले दांत सफेद होने लगते हैं।

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नींबू

एक नींबू का रस निकालकर उसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिला लें। खाने के बाद इस पानी से कुल्ला करें। यह उपाय रोज करने से दांतों का पीलापन चला जाता है और सांसों की दुर्गंध भी दूर हो जाती है।

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नीम

नीम का उपयोग प्राचीन काल से ही दांत साफ करने के लिए किया जाता रहा है। नीम में दांतों को सफेद बनाने व बैक्टीरिया को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं। यह नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक है। रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांतों के रोग नहीं होते व दांतों का पीलापन भी दूर हो जाता है।

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संतरे का छिलका

संतरे के छिलके से रोज दांतों की सफाई करने से कुछ ही दिनों में पीले दांत चमकने लगेंगे। रोज रात को सोते समय संतरे के छिलके को दांतों पर रगड़ें। संतरे के छिलके में विटामिन सी और कैल्शियम के साथ माइक्रोऑर्गेनिज्म  होता है जो दांतों की मजबूती और चमक बनाए रखता है।

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बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा पीले दांतों को सफेद बनाने का सबसे अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा-सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली पर्त धीरे-धीरे साफ हो जाती है। बेकिंग सोडा और थोड़ा नमक टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से भी दांत साफ हो जाते हैं।

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सेब

सेब को डाइट में शामिल करने से भी दांतों की सफेदी लौटाई जा सकती है। सेब की क्रंचीनेस दांतों को प्राकृतिक तौर पर स्क्रब करती है। रोजाना एक या दो सेब जरूर खाएं और खूब चबा चबा कर खाएं। इसी तरह गाजर और खीरा भी कच्चा खाने से दांत सफेद तथा मजबूत बनते हैं।

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जानिए कैसे आप 18 साल के बाद भी लम्बाई बढ़ा सकते है

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ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि हम लोगों की लंबाई केवल 18 साल तक ही बढ़ सकती है पर ऐसा भी नहीं है कि 18 साल के बाद लम्बाई बिल्कुल नहीं बढ़ाई जा सकती हैं नियमित रूप से व्यायाम, पौष्टिक आहार के सेवन और कुछ नियमों का पालन करके हम अपनी लम्बाई को अवश्य ही कुछ और इंच तक बढा सकते हैं।इसके अलावा अगर लंबाई बढानी है तो एक्सरसाइज करें और हेल्दी डाइट अपनाएं।

इसके अलावा कई लोग अपनी लंबाई बढाने के लिये बाजार में मिलने वाली कई तरह की दवाइयों का भी सेवन करने लगते हैंजिससे तमाम साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। नीचे कुछ प्राकृतिक तरीके दिये जा रहे हैं जिसके बिल्कुल भी साइड इफेक्ट नहीं होगें और आपकी हाइट 18 साल के बाद भी बढ़ सकती है।

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  1. लम्बाई और स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गेहूँ के दाने के बराबर मात्रा में चूना रोज दही, दाल या सब्जी में मिलाकर खाना चाहिए । या पानी में मिलाके पीना चाहिए । इससे लम्बाई और स्मरण शक्ति दोनों का ही विकास होता है। शरीर में चैतन्यता और चपलता आती है। ( लेकिन पथरी के मरीज चूने का सेवन ना करें )
  2. कद बढ़ाने के लिये सूखी नागौरी, अश्वगंधा की जड़ को कूटकर बारीक कर चूर्ण बना लें। बराबर मात्रा में खांड मिलाकर किसी टाईट ढक्कन वाली कांच की शीशी में रखें। इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध केसाथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भीमोटे हो जायेंगे। कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं। इससे नया नाखून भी बनना शुरू होता है। इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें। इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।
  3. 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण, 1 से 2 ग्राम काले तिल, 3 से 5 खजूर को 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एकमहीने तक खाने से लाभ होता है। साथ में पादपश्चिमोत्तानासन,’पुल्ल-अप्स’करने से एवं हाथ से शरीर झुलाने से ऊँचाई बढ़ती है।इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो,तो अश्वगंधा न लें।
  4. मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है तथा पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।
  5. हाइट बढाने के लिये एंटीबायोटिक्स का सेवन ज्यादा नहींकरना चाहिये, नहीं तो इसके अधिक प्रयोग से हाइट रुक भी सकतीहै।
  6. प्रोटीन, कैल्शियम, वसा और आयरन को अपने आहार में शामिल करें । इसके अलावा खूब सारी सब्जियां और फल का भी नियमित रूप से सेवन करें।
  7. लम्बाई बढ़ाने हेतु नित्य 2 काली मिर्च के टुकड़े 20 ग्राम मक्खन में मिलाकर उसे निगल जायें। देशी गाय का दूध कद बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक है।
  8. अपनी गर्दन और सिर को हमेशा सीधा और तान कर रखे। यदि आप हमेशा अपने सिर को झुका कर रखेगें तो आपका स्पाइनल कार्डदब जाएगा और पूरा शरीर छोटा लगेगा।
  9. खूब पानी और दूध पियें।
  10. अपने वजन को नियंत्रित करें, क्योंकि अगर आपका वजन कम है तो आपकी हाइट ठीक से नहीं बढेगी।
  11. न सोने या कम नींद लेने का प्रतिकूल प्रभाव हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है। पर्याप्त नींद यह सुनिश्चित करती है कि आपकी लम्बाई और वजन ठीक रहेंगे। क्योंकि नींद के दौरान शरीर में ऊतकों का विकास और निर्माण होता है। साथ ही पर्याप्त नींद लेने से लम्बाई को नियंत्रण करने वाले हार्मोन की वृद्धि होती है। इसलिए, एक दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है।
  12. शरीर में ग्रोथ हार्मोन को बढाने के लिये आपको दिन में 3 बार खाना खाने के अलावा 6 बार छोटे छोटे मील अवश्य ही खाने चाहिये।
  13. खनिज से भरपूर तत्वों का इस्तेमाल करें। यह पालक, हरी बीन्स, फलियां, ब्रोकोली, गोभी, कद्दू, गाजर, दाल, मूंगफली, केले, अंगूर और आड़ू में पाया जाता है। लंबाई बढ़ाने के लिए जिस विटामिन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह विटामिन डी। यह दाल, टोफू, सोया मिल्कर, सोया बीन, मशरूम और बादाम आदि में पाया जाता है। इसके साथ ही टेनिस व बास्केट बॉल भी अनिवार्यरूप से खेलें।
  14. कद लम्बा करने के लिए अंगूठों को खीचिए ताकि मांसपेशियों में खिंचाब बढे़ इससे शरीर में रक्त का दौरा भी बढ़ता है।
  15. बच्चों को कंप्यूटर पर गेम खेलने के बजाय बाहर बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, दौड़, स्विमिंग और साइकिलिंग जैसे खेल खेलने के प्रोत्साहित करें। इससे उनकी मांसपेशियांभी प्राकृतिक तरीके से मजबूत होती हैं और लंबाई बढ़ती है।
  16. कैल्शियम शरीर के लिए एक आवश्यक खनिज है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है। कैल्शियम हमें दूध, चीज़, दही आदि में मिलता है। ऊंचा लंबा कद पाने के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी है। मिनरल-खनिज हड्डी के ऊतकों का निर्माण करता है। ये हड्डी के विकास और शरीर में रक्त के प्रवाह में सुधार करते हैं।
  17. कभी भी झुककर बैठना या झुककर चलना नहीं चाहिए । चलतेऔर बैठते समय अपनी कमर और छाती को सीधा रखे ।
  18. 16 से 18 वर्ष की आयु के बाद ज्यादातर बच्चों के शरीर में कार्टिलेज फैलने के बजाय जमा होने लगता है जिससे हड्डियों का विकास रुक जाता है। ऐसे में कम उम्र से ही अगर बच्चों को स्ट्रेचिंग करने अभ्यास कराएं तो बहुत लाभमिलता है । स्ट्रेचिंग से रीढ़ की हड्डी को बल व मांसपेशियों को विस्तार मिलता है।इसके लिए बच्चे को सीधा दीवार की ओर मुंह करके खड़ा करें औरउसके कद को मार्क करें। अब बच्चे को हाथ ऊपर करके खुद को ऊपर की ओर जितना हो सके खींचने को कहें। शरीर का सारा भार सिर्फ पैर के अंगूठों पर ही होना चाहिए। फिर उसकी हाथ के छोर को भी मार्क करें। बच्चे से रोजाना यह स्ट्रेचिंग करवाएं और साथ-साथ उसकी हाइट व स्ट्रेचिंग की क्षमता को भी चेक करते रहें।

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व्यायाम 

  • भुजंग आसन करें, इससे आपके सीने और पेट की मांसपेशियों में खिंचाव होगा। इसको रोजाना करने से लंबाई बढाई जा सकती है। इसको करते समय जितना पीछे हो सके उतना हों। इसी पोजीशन में करीब 20 सेकेंड तक रहें और कम से कम3-4 बार करें।
  • लम्बाई बढ़ाने के लिए प्रातःकाल दौड़ लगायें, नित्य सूर्य नमस्कार करें,किसी चीज़ से लटक कर पुल अप्स करें वा ताड़ासन करें ।
  • जमीन से 7 फुट पर एक छंड गाडे़ और उस पर जितनी देर हो सके उतनी देर तक रोज लटकें। इससे रीढ़ की हड्डी लचीली बनेगी और आपकी लंबाई बढे़गी।
  • प्रतिदिन 10 से 20 मिनट रस्सी अवश्य ही कूदें इससे भी लम्बाई बढ़ती है ।

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विटामिन

  • विटामिन ए- शरीर के अंगों के सही प्रकार से कार्य करें इसके लिए आपको विटामिन ए से भरा हुआ आहार अपने रोजाना आहार में शामिल करना चाहिए। इससे हड्डियां मजबूत रहेंगी और साथ ही लम्बाई भी बढ़ेगी। तो विटामिन ए का सेवन जरूर करें। पालक, चुकदंर, गाजर, दूध, टमाटर आदि के अलावा सब्जियों के जूस का भी सेवन करें।
  • विटामिन डी- लंबाई बढ़ाने के लिए जिस विटामिन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है उनमें से एक है विटामिन डी। अच्छी तरह से कैल्शियम को हड्डी में अवशोषित करने के लिए, हड्डी के विकास के लिए और प्रतिरक्षा प्रणाली के बेहतर कार्य करने के लिए आपको विटामिन डी की जरूरत होती है जो दाल, सोया मिल्कर, सोया बीन, मशरूम और बादाम आदि में पाया जाता है।

दांतों से कीड़ा हटाने के घरेलु उपचार

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दांतों की नियमित सफाई न करने से दांतों के बीच में अन्न कण फंसे रहते हैं और इन्ही अन्न कणों के सड़ने की वजह से दांतों में कीड़े लग जाते हैं जिससे दांतों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं | इसी कारण दांत खोखले हो जाते हैं,मसूड़े ढीले पड़ जाते हैं तथा दांत टूटकर गिरने लगते हैं | दांतों की नियमित सफाई करके इस समस्या से बचा जा सकता है | इस रोग में दांतों में तेज़ दर्द होता है और मसूड़े सूज जाते हैं | दांतों में कीड़े लगने पर कुछ घरेलू उपचारों द्वारा आराम पाया जा सकता है –

  1. पिसी हुई हल्दी और नमक को सरसों के तेल में मिला लें | इसे प्रतिदिन २-४ बार दांतों पर मंजन की तरह मलने से दांतों के कीड़े मर जाते हैं
  2. कीड़े लगे दांतों के खोखले भाग में लौंग का तेल रुई में भिगोकर रखने से भी दांत के कीड़े नष्ट होते हैं |
  3. दांत में कीड़े लगने से दांत खोखले हो जाते हैं तथा जगह-जगह गढ्ढे बन जाते हैं | फिटकरी,सेंधानमक,तथा नौसादर बराबर मात्रा में लेकर बारीक पाउडर बना लें | इसे प्रतिदिन सुबह-शाम दांत व मसूड़ों पर मलने से दांतों के सभी रोग ठीक होते हैं |
  4. फिटकरी गर्म पानी में घोलकर प्रतिदिन कुल्ला करने से दांतों के कीड़े और बदबू ख़त्म हो जाती है |
  5. कीड़े युक्त या सड़े हुए दांतों में बरगद (बड़) का दूध लगाने से कीड़े और पीड़ा दूर होती है |
  6. दालचीनी का तेल रूई में भरकर पीड़ायुक्त दांत के गढ्ढे में रखकर दबा लें | इससे दांत के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में शांति मिलती है |

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तुरई का सेवन लिवर के लिए वरदान है,जानिए इसके और भी बहुत सारे फायदे

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तुरई की सब्जी से सभी लोग परिचित होंगे लेकिन ये सब्जी गर्मी से लड़ने और रक्त की मात्रा बनाये रखने के लिए भगवान का दिया सबसे बड़ा वरदान है, शायद कम लोग ही जानते होंगे। लिवर कमज़ोर हो तो इसके कई साइड इफेक्ट्स होते हैं, जैसे एनीमिया, स्किन प्रॉब्लम्स, पीलिया, आंखों में दिक्कत। लेकिन तोरी इसके लिए किसी रामबाण से कम नहीं। लगातार तुरई खाने से हमारे शरीर में रक्त की कमी से लेकर गैस, सांस, बालों का सफ़ेद होना और आँखों की समस्याएं हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। इन सब बीमारियों के अलावा इसे खाने से मस्से भी ठीक हो जाते हैं।तोरई में विटामिन सी, जिंक, आयरन, राइबोफ्लेविन, मैग्नीशियम, थायमिन, फॉस्फोरस और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

तुरई या तोरी (नेनुआ) एक ऐसी सब्जी है जिसे लगभग संपूर्ण भारत में उगाया जाता है। तुरई का वानस्पतिक नाम लुफ़्फ़ा एक्युटेंगुला है। तुरई को आदिवासी विभिन्न रोगों के उपचार के लिए उपयोग में लाते हैं। मध्यभारत के आदिवासी इसे सब्जी के तौर पर बड़े चाव से खाते हैं और हर्बल जानकार इसे कई नुस्खों में इस्तमाल भी करते हैं। चलिए आज जानते हैं तोरई के लाभ के बारे में –

लिवर के लिए गुणकारी

आदिवासी जानकारी के अनुसार लगातार तुरई का सेवन करना सेहत के लिए बेहद हितकर होता है। तुरई रक्त शुद्धिकरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। साथ ही यह लिवर के लिए भी गुणकारी होता है।

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पेट दर्द में

यदि पेट में दर्द हो रहा हो तो आप तुरई की सब्जी का सेवन करें। यह पेट दर्द दूर करने का आसान उपाय है। पेट दर्द की मुख्य वजह है अपच है। तुरूई अपच को खत्म कर देती है। जो लोग लंबे समय से तोरी की सब्जी खाते हैं उन्हें कब्ज और पेट दर्द नहीं होता है।

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पीलिया समाप्त हो जाता है

यदि किसी कारणवश पीलिया रोग हो जाए तो आप तोरी के फल के रस की कम से कम दो बूंदे रोगी के नाक में डालें। इस उपाय से नाक से पीले रंग का पदार्थ बाहर आ जाता है और पीलिया जल्दी ठीक हो जाता है।

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पथरी निकाले

पथरी को ठीक करने के लिए और इसके दर्द से बचने के लिए आप तुरई के बेल को पानी या फिर दूध के साथ घिसकर एक सप्ताह तक सेवन करें।

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डायबिटीज रोग में तुरई

मधुमेह यानि डायबिटीज में तुरई एक कारगर औषधि का काम करती है। इसमें इंसुलीन की तरह पेपटाइडस होता है। इसलिए जो लोग शुगर से परेशान हैं वे तुरई की खूब सब्जी खाएं।

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बालों को काला करने के लिए 

यदि बाल समय से पहले सफेद हो गए हों तो आप तुरई के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर इसे सुखा लें और इसके सुखे हुए टुुकड़ों को नारियल तेल में मिला लें और कम से कम पांच दिनों तक इसे रखे रहें। और इस तेल को हल्का गरम करने के बाद बालों पर लगाएं । इस तेल कि नियमित मालिश करने से बाल जल्दी काले हो जाते हैं।

दाद, खुजली और खाज

दाद, खाज और खुजली की समस्या यदि आप परेशान हैं तो तुरई के बीजों और पत्तों को पानी के साथ पीसकर इसका पेस्ट बनाएं और इसका लेप त्वचा पर लगाएं। यह खुजली और दाद से तुरंत राहत देती है। इसके अलावा आप तुरई के इस पेस्ट को कुष्ठ रोग पर भी लगा सकते हो।

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मुँहासे और अन्य त्वचा संबंधी रोगों

यह मुँहासे, एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा संबंधी रोगों के उपचार में सहायक होता है, साथ ही कुष्ठ आदि चर्म रोगों में भी करते हैं।

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जानिए ककड़ी पथरी से लेकर और किन चीजों में फायदेमंद है

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गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, ऎसे में आपकी बॉडी को पानी की बहुत जरूरत रहती है। गर्मी के मौसम में आप अपनी बॉडी को जितना हाईड्रेट रखेंगे, उतना ही सेहत के लिए अच्छा है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ककड़ी बहुत अच्छा ऑप्शन है।इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम तथा मैग्नीशियम पाया जाता है। कम पैसों में आने वाली ककड़ी बड़े-बड़े समस्याओं का समाधान कर सकती है।

बात करते हैं ककड़ी का सेवन किस तरह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

पथरी की समस्या

ककड़ी खाने से शरीर के विषैले पदार्थो का खात्मा होता है। अगर आपको पथरी की समस्या है तो ककड़ी का नियमित रूप से सेवन करें। इससे पथरी की समस्या बहुत हद तक कम हो जाती है। ककड़ी में मौजूद पानी शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालता है।

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मोटापा घटाने में मददगार

यदि आपको ज्यादा भूख लगती है और आपका वजन दिन पर दिन बढ़ रहा है तो ककड़ी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। भूख लगने पर ककड़ी का सेवन कीजिए। इसमें पर्याप्त मात्रा में पानी और फाइबर पाया जाता है, जबकि कैलोरी की मात्रा इसमें नहीं होती। इसके सेवन से वजन नियंत्रित रहेगा।

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पानी की कमी दूर करने में सहायक

ककड़ी में खीरे की अपेक्षा जल की मात्रा ज्यादा होती है। इसके सेवन से तेज गर्मी में भी शरीर तर रहता है। यह शरीर से गंदगी को बाहर निकालती है। इस मौसम में खीरे, खरबूजे और तरबूज के सेवन से भी पानी की कमी दूर होती है।

पाचनशक्ति बढ़ती है

गर्मियों में ककड़ी का सेवन पेट संबंधी रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ ही पाचन शक्ति भी बढ़ाता है। यह पित्त से उत्पन्न होने वाले दोषों को भी दूर करती है। यह कब्ज, एसिडिटी, सीने में जलन या गैस्‍ट्रिक की समस्या को भी ठीक करती है।

मस्तिष्क की गर्मी दूर भगाएं

ककड़ी के बीज भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके बीज मस्तिष्क की गर्मी को दूर करने में मददगार होते हैं। इसके सेवन से बौखलाहट, चिड़चिड़ापन और उन्माद आदि मानसिक विकार दूर होते हैं। मस्तिष्क की गर्मी मिटाने और इसे ठंडक पहुंचाने के लिए ककड़ी के बीज को ठंडाई के रूप में भी इस्तेमाल करते है।

- fast brain - जानिए ककड़ी पथरी से लेकर और किन चीजों में फायदेमंद है

डायबिटीज और कोलेस्‍ट्रॉल कंट्रोल

ककड़ी के सेवन से डायबिटीज और कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा सामान्‍य रहती हैं। ककड़ी का सेवन इन्‍सुलिन के लेवल को कंट्रोल करता है। साथ ही ककड़ी में स्‍टीरॉल भी पाया जाता है जो कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को भी कम करता है।

- diabetes - जानिए ककड़ी पथरी से लेकर और किन चीजों में फायदेमंद है

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बालों के लिए लाभकारी

ककड़ी का नियमित रूप से सेवन करने से छोटे बाल बड़े हो जाते हैं। इसमें सिलिकॉन और सल्फर की मात्रा होती है। सिलिकॉन और सल्फर बालों की लंबाई बढ़ाने में सहायक हैं। ककड़ी, गाजर और पालक का जूस मिलाकर पीने से बालों की लंबाई बढ़ेगी। ककड़ी के रस से बाल धोना भी लाभकारी होगा।

त्वचा के लिए फायदेमंद

चेहरे की त्वचा चिकनी हो तो चेहरे पर ककड़ी रगड़ कर पानी से धोयें। इससे चेहरे की चिकनाई दूर हो जाएगी। ककड़ी का रस चेहरे पर लगाने से दाग धब्बे साफ हो जाते हैं। इसका रस लगाने से मुंह, हाथ व पैर कम फटते हैं और आप खूबसूरत लगते हैं।

- Black Spot on Your Face - जानिए ककड़ी पथरी से लेकर और किन चीजों में फायदेमंद है

तरबूज में छिपा है कई बीमारियों का इलाज

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गर्मी के मौसम का आकर्षक और आवश्यक फल है तरबूज। आवश्यक इसलिए क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है । इस मौसम में हमें वही फल ज्यादा खाने चाहिए जो शरीर में पानी की आपूर्ति भी करते रहें । तरबूज रक्तचाप को संतुलित रखता है और कई बीमारियाँ दूर करता है । इसके और भी फायदे हैं जैसे : खाना खाने के उपरांत तरबूज का रस पीने से भोजन शीघ्र पच जाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है। इसके रस से लू लगने का अंदेशा भी नहीं रहता। मोटापा कम करने वालों के लिए यह उत्तम आहार है।

पोलियो रोगियों को तरबूज का सेवन करना बहुत लाभकारी रहता है, क्योंकि यह खून को बढ़ाता है और उसे साफ भी करता है। त्वचा रोगों के लिए यह फायदेमंद है। तपती गर्मी में जब सिरदर्द होने लगे तो तरबूज के आधा गिलास रस को पानी में मिलाकर पीना चाहिए।

दिल को स्वस्थ रखता है

तरबूज में कई बायोएक्टिव कम्पाउन्ड जैसे सिट्रुलीन नाम का एमिनो एसिड होता है जो मेटाबॉलाइज़्ड होकर आर्जनीन में बदल जाता है। आर्जनीन का इस्तेमाल नाइट्रिक ऑक्साइड नामक यौगिक के बनने में होता है जो हृदय के सही तरह से काम करने में अहम् भूमिका निभाता है। यह रक्त में कोलेस्ट्रोल के लेवल को कम करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसमें उच्च मात्रा में पोटैशियम भी होता है जो हाइपरटेनशन को नियंत्रित करके हृदय रोग होने के खतरे को कम करता है।

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वज़न घटाने में मदद करता है

अगर वज़न घटाने के लिए डायटिंग कर रहे हैं तो दिल खोलकर तरबूज का लुत्फ़ उठाइए। क्योंकि इसमें पानी के साथ-साथ फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जिससे पेट देर तक संतृप्त भी रहता है और कमजोरी भी महसूस नहीं होती है।

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प्रतिरक्षी क्षमता  को उन्नत करता है

तरबूज जो विटामिन ए, सी, बी-6 और मिनरल होते हैं वे प्रतिरक्षी क्षमता को उन्नत करने में मदद करते हैं। इससे शरीर अनेक प्रकार के रोगों से स्वयं ही लड़ पाता है।

बुद्धि को तेज करता है

तरबूज में जो विटामिन बी-6 होता है वह बुद्धि को प्रखर करने में सहायता करता है। जो स्टूडेंट्स अपना ज़्यादातर समय पढ़ने में लगाते हैं उनके लिए यह उपयोगी होता है।

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कैंसर होने की संभवना को कम करता है

तरबूज में ल्यूटीन, लाइकोपेन, बीटा-कैरोटीन, क्रीपटोजैक्थीन होते हैं जो फ्री-रैडिकल्स से सेलुलर डी.एन.ए. को होने वाले क्षति से बचाकर कैंसर होने के संभावना को कम करने में मदद करता है।

किडनी को स्वस्थ रखता है

तरबूज नैचरल डिटॉक्सफाईंग एजेन्ट का काम करता है। इसमें पानी और मिनरल उच्च मात्रा में होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालकर किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

यौन शक्ति को बढ़ाता है

तरबूज वियाग्रा दवा जैसा काम करता है, इसलिए जिन्हें इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्या होती है उनके लिए ये मददगार साबित होता है।

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आँखों को स्वस्थ रखता है

तरबूज में जो बीटा कैरोटीन होता है उसको शरीर विटामिन ए में बदल देता है। जो आँखों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ज़रूरी होता है। साथ ही बढ़ते उम्र में होने वाली रतौंधी  या मैक्युलर डिजनरेशन के होने की संभावना को रोकने में भी मदद करता है।

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पेशाब में जलन

पेशाब में जलन हो तो ओस या बर्फ में रखे हुए तरबूज का रस निकालकर सुबह शकर मिलाकर पीने से लाभ होता है।

सौंदर्य निखरता है

गर्मी में नित्य तरबूज का ठंडा-ठंडा शरबत पीने से शरीर को शीतलता तो मिलती ही है, चेहरे पर गुलाबी-गुलाबी आभा भी दमकने लगती है। इसके लाल गूदेदार छिल्कों को हाथ-पैर, गर्दन व चेहरे पर रगड़ने से सौंदर्य निखरता है।

सूखी खाँसी

सूखी खाँसी में तरबूज खाने से खाँसी का बार-बार चलना बंद होता है।

खाना खाने के उपरांत तरबूज का रस पीने से भोजन शीघ्र पच जाता है। इससे नींद भी अच्छी आती है। इसके रस से लू लगने का अंदेशा भी नहीं रहता।

गर्मियों में खरबूजे खाने के अनोखे फायदे

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गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की अक्सर कमी हो जाती है जिसे खरबूजा खाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही ये लू से भी बचाता है। इसके साथ ही खरबूजा खाकर आपको कितने तरह के फायदे हो सकते हैं, आइए जानते हैं।

कैंसर से करे बचाव

खरबूजे में बड़ी मात्रा में आर्गेनिक पिगमेंट केरोटेन्वाइड पाया जाता है, जो कैंसर से बचाने के साथ ही लंग कैंसर की संभावना को भी कम करता है। यह शरीर में पनप रहे कैंसर के मूल को नष्ट कर देता है।

पाचन के लिए अच्छा

खरबूजे से शौच की समस्या भी दूर होती है। अगर आप पाचन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो खरबूजा खाइए। इससे शौच की समस्या दूर हो जाएगी। खरबूजे में मौजूद पानी की मात्रा पाचन में सहायक होती है। इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स पेट की एसीडीटी को खत्म करते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया दुरुस्त रहती है।

ऊर्जा को बढ़ाता है

अधिकतर खरबूज में विटामिन ‘बी’ पाया जाता है। विटामिन ‘बी‘ शरीर में ऊर्जा के निर्माण में सहायक होता है। सूगर और कार्बोहाइड्रेट को संसाधित करने में यह ऊर्जा शरीर के लिए आवश्यक होती है।

किडनी को स्वस्थ बनाए रखता है

खूरबूजे में डाइयुरेटिक (मूत्रवर्धक) क्षमता काफी अच्छी होती है। इस कारण इससे किडनी की बीमारियां ठीक होती हैं और यह एक्जिमा को कम करता है। अगर खरबूजे में नींबू मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो इससे गठिया की बीमारी भी ठीक हो सकती है।

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त्वचा को बनाएं जवान

खरबूजे में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। साथ ही, पर्याप्त मात्रा में विटामिन सीविटामिन ए पाया जाता है। इसीलिए इसके नियमित सेवन से त्वचा जवां बनी रहती है।

तनाव से मुक्ति दिलाता है

खरबूजे में काफी मात्रा में पोटैशियम मौजूद होता है। पोटेशियम दिल को सामान्य रूप से धड़कने में मदद करता है, जिससे मस्तिष्क में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है।

चेहरा चमकने लगता है

स्किन में कनेक्टिव टिशू पाए जाते हैं। खरबूजे में पाया जाने वाले कोलाजन प्रोटीन इन कनेक्टिव टिशू में कोशिका की संरचना को बनाए रखता है। कोलाजन से जख्म भी जल्दी ठीक होते हैं और त्वचा को मजबूती मिलती है। अगर आप लगातार खरबूजा खाएंगे तो चेहरा चमकने लगेगा।

दिल को सुरक्षित रखता है

खरबूजे में एडेनोसीन नामक एंटीकोएगुलेंट पाया जाता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और खून का थक्का नहीं जमने देता है। इसीलिए इसके नियमित सेवन से दिल से संबंधित बीमारियां दूर ही रहती हैं।

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डायबिटीज में भी है फायदेमंद

डायबिटीज के रोगियों के लिए खरबूजा बहुत फायदेमंद होता है। माना जाता है कि जो डायबिटीज रोगी गर्मी में रोज एक गिलास खरबूजे का जूस लेते हैं, उनका कोलेस्ट्राल हमेशा कंट्रोल में रहता है।

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आंखें भी रहती हैं सुरक्षित

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन ‘ए’ की आवश्यकता होती है। खरबूजा यह विटामिन बीटा-कारोटीन के रूप में उपलब्ध कराता है। डब्ल्यूएचएफ के अनुसार रोज तीन बार उच्च बीटा-कारोटीन फल खाने से मैकुलर डीजेनेरेशन का खतरा 1.5 बार खाने वालों की तुलना में 36 प्रतिशत कम हो जाता है। मैकुलर डीजेनेरेशन ढलती उम्र के साथ होने वाली समस्या है, जिससे आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

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वजन कम करने में होता है मददगार

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें गर्मी में रोज खरबूजे का सेवन करना चाहिए। इसमें काफी कम मात्रा में सोडियम पाया जाता है। साथ ही, यह फैट और कोलेस्ट्रोल से भी मुक्त होता है। इसमें कम मात्रा में कैलोरी होती है। एक कप खरबूजे में सिर्फ 48 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसीलिए यह बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में काफी मददगार होता है।

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सावधानियां

खाना खाने से एकदम पहले या एकदम बाद में खरबूजा नहीं खाना चाहिये। खरबूजा और दूध एक साथ नहीं लेना चाहिए। खरबूजा और दूध एक साथ लेने से हैजा हो सकता है।

जानिए ऐसे हर्ब्स जो कैंसर को रोकने में मदद करते है

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भारत में कैंसर के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं| सेल्स के अनियंत्रित वृद्धि के कारण कैंसर होता हैं।

यह बात को शायद हम सभी जानते हैं कि हर्ब्‍स की चुटकी डालने मात्र से ही साधारण पकवान भी जादूई हो जाता है। लेकिन हम इस बात से अनजान हैं कि यह हर्ब्स कैंसर को रोकने में भी मददगार होते है। वैज्ञानिकों ने पाया कि बहुत से खाद्य पदार्थों में मौजूद जड़ी बूटियों और मसालों में फाइटो‍केमिकल्स होते हैं, जो हमारे शरीर को जैविक रूप से प्रभावित करता है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को सही रखने में मदद करते हैं और इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स कैंसर को दूर करने में मदद करते हैं। यहां पर ऐसे ही हर्ब्स के बारे में जानकारी दी गई है।

गेहूं का ज्वारा

गेहूं के ज्वारे में सुपाच्य, पौष्टिक और संपूर्ण आहार है। इसमें भरपूर क्लोरोफिल, एंजाइम, अमिनो एसिड, शर्करा, वसा, विटामिन और खनिज होते हैं। कैंसर जैसे घातक रोगों पर विजय पाने में गेहूं के ज्वारे का रस बहुत फायदेमंद होता है। यह कैंसर युक्त सेल्स को कम करने में भी सहायता करता हैं। साथ ही यह शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है। और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।

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लहसुन

कैंसर को एक लाइलाज बीमारी माना जाता है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार रोजाना थोड़ी मात्रा में लहसुन का सेवन करने से कैंसर होने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत कम हो जाती है। कैंसर के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। लहसुन में मौजूद कैंसर विरोधी तत्व शरीर में कैंसर बढऩे से रोकते है। लहसुन में मौजूद अलिसिन नामक रसायन फेफड़ों के कैंसर से बचाव में मददगार है।

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अदरक

कैंसर के लिए अदरक बहुत फायदेमंद है। यह कैंसर के मरीजों के लिए अचूक औषधि की तरह काम करता है। अदरक कोलेस्ट्राल का स्तर कम करता है। यह खून का थक्का जमने से रोकता है, इसमें एंटी फंगल और कैंसर के प्रति प्रतिरोधी होने के गुण भी पाए जाते हैं।

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गिलोय

गिलोय एक बहुत ही उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। वायरस की दुश्मन गिलोय रोग संक्रमण रोकने में सक्षम होती है। यह एक श्रेष्ठ एंटीबयोटिक है। गिलोय की जड़ों में मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग किया जाता है।

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हल्दी

सदियों से हल्दी भारतीय मसालों का अभिन्न अंग रहा है। हल्दी का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार में प्राचीन काल से ही किया जाता रहा है। हल्दी को बहुत अच्छा रोगाणुनाशक माना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतिदिन हल्दी का सेवन करने से कैंसर जैसे असाध्य रोगों को भी दूर भगाया जा सकता है। हल्दी में कैंसररोधी गुण होते हैं और यह शरीर को कैंसर से बचाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला कुर्कुमिन नामक तत्व कैंसर को समाप्त करने में मदद करता है।

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एलोवेरा

एलोवेरा के पौधे में वो सारे गुण समाहित है जिससे इसे आप संजीवनी बूटी कह सकते है। एलोवेरा में अमिनो एसिड और 12 तरह के विटामिन मौजूद होते हैं, जो खून की कमी को दूर कर रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं। कब्ज से लेकर कैंसर तक के मरीजों के लिए एक अत्यंत लाभकारी औषधि है। एलोवेरा बढि़या एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक के रूप में काम करता है। एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसमें अन्य सभी जड़ी-बूटियों के मुकाबले अधिक गुण होती है। यानी व्यक्ति को फिट रखने में एलोवेरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

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आंवला

आंवला में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है। जो कार्सिनोजेनिक कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं और कैंसर से बचाव करते हैं। आंवला विटामिन सी का बहुत अच्‍छा स्रोत है। एक आंवले में लगभग 3 संतरों के बराबर विटामिन सी होता है। आंवला खाने से लीवर को शक्ति मिलती है जिससे लीवर शरीर से टॉक्सिन्‍स को बाहर निकालता है।

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ग्रीन टी

ग्रीन टी के नियमित सेवन से न सिर्फ वजन नियंत्रित होता है, बल्कि उनमें कई तरह की बीमारियों के होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसके सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है। कई रोगों के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है। ग्रीन टी एंटी-एजिंग के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट का काम भी करती है।

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लाल शिमला मिर्च

लाल शिमला मिर्च कैंसर को रोकने में मदद करता है। इसमें मौजूद कैप्सासिन तत्व की मौजूदगी के कारण लाल शिमला मिर्च शरीर, फेफड़े और अग्न्याशय में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को मारता है। इस के अलावा लाल मिर्च में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट कैंसररोधी कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।

 

काली मिर्च

हाल ही में कैंसर पर हुए शोध से यह बात सामने आई कि महिलाओं के लिए कालीमिर्च का सेवन बहुत लाभकारी होता है। काली मिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लैवोनॉयड्स, कारोटेन्स और अन्य एंटी-ऑक्सीडेंट आदि जैसे तत्व पाए जाते है। जो कैंसर को दूर करने में आपकी मदद करते हैं। कालीमिर्च ब्रेस्ट कैंसर को रोकने के साथ-साथ त्वचा के कैंसर से शरीर की रक्षा करता है।

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जानिए किन चीजों को खाने से हीमोग्लोबिन तेजी से बढ़ जाता है

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अक्सर थकान, कमजोरी रहना, त्वचा का रंग पीला पड़ जाना, हाथ-पैरों में सूजन आदि एनीमिया के लक्षण हैं। इस समस्या से पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा परेशान रहती हैं। जिन लोगों के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है, वो लोग एनीमिया के शिकार हो जाते हैं। एनीमिया के रोगी को लौह तत्व, विटामिन बी, फोलिक एसिड की कमी होती है। कभी-कभी अनुवांशिक कारणों से भी यह रोग हो सकता है। यदि आपके शरीर में भी खून की कमी है तो अपनेआहार पर खास ध्यान दें। आइये जानते हैं किन चीजों को खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है और एनीमिया दूर हो जाता है।

सेब

सेब एनीमिया जैसी बीमारी में लाभकारी होता है। सेब खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन बनता है।

अंगूर

अंगूर में भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाता है, और हीमोग्लोबिन की कमी संबंधी बीमारियों को ठीक करने में सहायक होता है।

सब्जियां

शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियां को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। हरी सब्जियों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले तत्व ज्यादा मात्रा में पाये जाते है।

गुड़

गुड़ में अधिक खनिज लवण होते है। जो हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है।

तुलसी

तुलसी रक्त की कमी को कम करने के लिए रामबाण है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।

तिल

तिल हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। तिल खाने से रक्ताअल्पता की बीमारी ठीक होती है।

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नारियल

नारियल शरीर में उत्तकों, मांसपेशियों और रक्त जैसे महत्वपूर्ण द्रव्यों का निर्माण करता है, यह संक्रमण का सामना करने के लिए इन्जाइम और रोग प्रतिकारक तत्वों के विकास में सहायक होता है।

पालक

सूखे पालक में आयरन काफी मात्रा होती है। जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को ठीक करता है।

चुकन्दर

चुकन्दर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता का लोह तत्व रक्त में हीमोग्लोबिन का निर्माण व लाल रक्तकणों की सक्रियता के लिए बेहद प्रभावशाली है। खून की कमी यानी एनीमिया की शिकार महिलाओं के लिए चुकंदर रामबाण के समान है। चुकन्दर के अलावा चुकन्दर की हरी पत्तियों का सेवन भी बेहद लाभदायी है। इन पत्तियों में तीन गुना लौह तत्व अधिक होता है।

अमरूद

अमरूद जितना ज्यादा पका हुआ होगा, उतना ही पौष्टिक होगा। पके अमरूद को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती। इसलिए महिलाओं के लिए यह और भी लाभदायक हो जाता है।

आम

आम खाने से हमारे शरीर में रक्ति अधिक मात्रा में बनता है, एनीमिया में यह लाभकारी होता है।

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फालसा

फालसा खाने से खून बढ़ता है। फालसे के फल या शर्बत को सुबह-शाम लेने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।

टमाटर का रस

रोजाना एक गिलास टमाटर का रस पीने से भी खून की कमी दूर होती है। टमाटर का सूप भी बनाकर पीया जा सकता है।

सिंघाड़ा

सिंघाड़ा शरीर को शक्ति प्रदान करता है और खून बढ़ाता है। इसमें कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। कच्चे सिंघाड़े का सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा तेजी से बढ़ती है।

लौकी

लौकी का जूस बनाकर पीने से भी खून बढ़ता है।

मुनक्का

मुनक्का को रात में पानी भिगो दें। सुबह पानी को पी लें और मुनक्का चबाकर खा लें। कुछ ही दिनों में हीमोग्लोबिन सामान्य हो जाएगा।

ये घरेलू नुस्खे पूरी तरह से आयुर्वेद पर आधारित हैं। ये पूरी तरह से प्राकृतिक, नुकसान ना पहुंचाने वाले और आसानी से घर में बनाए जा सकने वाले हैं। अगर आपको लगे कि इसे लेने से आपको कोई नुकसान हो रहा है, तो डॉक्टर से परामर्श करें।

आयुर्वेद से कैसे करें एसिडिटी की समस्या को छूमंतर

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शायद ही कोई एसिडिटी शब्द से अपरिचित होगा।आजकल की भागदौड भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण पेट की समस्या आम हो चली है। एसिडिटी को चिकित्सकीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (GERD) के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे अम्ल पित्त कहते हैं। आज इससे हर दूसरा व्यक्ति या महिला पीडि़त है। एसिडिटी होने पर शरीर की पाचन प्रक्रिया ठीक नहीं रहती।

आइए जानें  एसिडिटी के लिए आयुर्वेदिक ईलाज के बारे में।

एसिडिटी के कारण और लक्षण

नियमित रूप से चटपटा मसालेदार और जंकफूड का सेवन, अधिक एल्‍‍कोहल और नशीले पदार्थों का सेवन, लंबे समय तक दवाईयों का सेवन, शरीर में गर्मी बढ़-बढ़ जाना, बहुत देर रात भोजन करना,  भोजन के बाद भी कुछ न कुछ खाना या लंबे समय तक भूखे रहकर एकदम बहुत सारा खाना खाना एसिडिटी के मुख्य कारण होते है। एसीडिटी के तुरंत बाद अक्सर पेट में जलन होने लगती है। कड़वी और खट्टी डकारें आना, लगातार गैस बनना और सिर दर्द की शिकायत, उल्टी होने का अहसास और खाने का बाहर आने का अहसास होना, थकान और भारीपन महसूस होना आदि इसके लक्षण माने जाते है।

आयुर्वेद से एसीडिटी का इलाज

आंवला चूर्ण

आंवला चूर्ण को एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आपको एसीडिटी की शिकायत होने पर सुबह- शाम आंवले का चूर्ण लेना चाहिए।

अदरक

अदरक के सेवन से एसीडिटी से निजात मिल सकती हैं, इसके लिए आपको अदरक को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर गर्म पानी में उबालना चाहिए और फिर उसका पानी अदरक की चाय भी ले सकते हैं।

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मुलैठी का चूर्ण

मुलैठी का चूर्ण या फिर इसका काढ़ा भी आपको एसीडिटी से निजात दिलाएगा इतना ही नहीं गले की जलन भी इस काढ़े से ठीक हो सकती है।

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नीम की छाल

नीम की छाल को पीसकर उसका चूर्ण बनाकर पानी से लेने से एसीडिटी से निजात मिलती है। इतना ही नहीं यदि आप चूर्ण का सेवन नहीं करना चाहते तो रात को पानी में नीम की छाल भिगो दें और सुबह इसका पानी पीएं आपको इससे निजात मिलेगी।

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मुनक्का या गुलकंद

मुनक्का या गुलकंद के सेवन से भी एसीडिटी से निजात पा सकते हैं, इसके लिए आप मुनक्का को दूध में उबालकर ले सकते हैं या फिर आप गुलकंद के बजाय मुनक्का भी दूध के साथ ले सकते हैं।

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