जानिए गुलाब के फूल के औषधीय लाभ

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गुलाब के फूल को भला कौन नहीं जानता हैं। फूलों का राजा माना जाने वाला गुलाब एक जाना पहचाना फूल है। यह फूल होने के साथ-साथ एक जड़ी बूटी भी है। गुलाब का हमारे जीवन में अपना ही महत्‍व है। सौंदर्य अपील और सुखदायक खुशबू के अलावा, गुलाब का फूल हमें कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता हैं।  स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है जो आपको गुलाब जल, गुलाब के फल और तेल से मिलती हैं।

त्वचा की देखभाल

त्वचा के लिए फायदेमंद विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराने के कारण गुलाब जल त्‍वचा की देखभाल के लिए बहुत लोकप्रिय है। गुलाब जल के इस्‍तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी है। गुलाब जल में प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट होने के यह एक सर्वश्रेष्‍ठ टोनर भी है। रोज रात को इसे चेहरे पर लगाने से त्‍वचा टाइट होती। यह त्वचा के पीएच संतुलन को बनाएं रखता है, मुंहासों को दूर करने में मदद करता है और बैक्टीरिया के संक्रमण से त्वचा की रक्षा करता है।

बालों की देखभाल

गुलाब जल का एक और आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ है इसमें बालों की देखभाल के प्रभावी गुण होते है। बालों की जड़ों में ब्‍लड के सर्कुलेशन में सुधार करता है जिससे बालों के स्‍वस्‍थ विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा यह बालों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक कंडीशनर भी है।

एंटीडेप्रेसेंट

हालांकि गुलाब आपके चेहरे पर एक प्‍यारी से मुस्‍कान ला सकता है, लेकिन इसका तेल भी कम नहीं है। इसका तेल आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति बढ़ा सकता हैं। गुलाब का तेल अवसाद और चिंता से लड़ने में मदद करता हैं। यह गुलाब का तेल अवसाद को कम करने के लिए एक कारगर उपाय के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है क्‍योंकि यह सकारात्‍मक विचारों और भावनाओं को आह्वान करता है।

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हर्बल चाय

गुलाब जल का इस्‍तेमाल एक हर्बल चाय के रूप में किया जाता है। यह पेट के रोगों और मूत्राशय में होने वाले संक्रमण को दूर करने के काम आती है। हर्बल गुलाब जल चाय एक शांत प्रभाव प्रदान करती है। इस सुखदायक चाय को घूंट आप कभी भी भर सकते हैं यह आपको आराम महसूस कराने में मदद करेगी।

एंटीसेप्टिक

घावों के इलाज के लिए गुलाब का तेल बहुत अच्‍छा उपाय है। गुलाब के तेल में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घावों को भरता है और इसकी खुशबू से आपको रिलैक्‍स महसूस होता है। घाव पर गुलाब के तेल के इस्‍तेमाल से सेप्टिक बनने और संक्रमण के विकास से बचाने में मदद मिलती है।

गुलाब का फल

गुलाब के फल विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर होता है। इसमें उच्‍च मात्रा में मौजूद विटामिन सी के कारण डायरिया के इलाज के लिए इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। गुलाब के फल में फ्लवोनोइड्स, बायोफ्लवोनोइड्स, सिट्रिक एसिड, फ्रुक्टोज, मैलिक एसिड, टैनिन और जिंक भी होता है।

एंटी फ्लॉजिस्टिक (सूजन कम करने वाला)

बुखार आने से रोकना भी गुलाब के तेल का एक अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभ है। इसमें मौजूद एंटी इंफ्मेंटेरी तत्‍व सूक्ष्म जीवाणु संक्रमण के कारण सूजन, रसायन, अपच और निर्जलीकरण को कम करने में मदद करता हैं।

अन्य फायदे

  • अस्थमा, डायरिया, कफ, हाई ब्लड प्रेशर, फिवर, पेट की गडबडी में गुलाब का सेवन बेहद उपयोगी होता है।
  • गुलाब में शरीर के विकास के लिए जरूरी विटामिन, अम्ल और रसायन है। गुलाब की पंखुडियों से गुलाब का शर्बत, इत्र, गुलाबजल और गुलकन्द बनाया जाता है। मुंह में छाले होने पर गुलाब के फूलों का काढा बनाकर कुल्ला करने से छाले दूर होते हैं। गुलकन्द खाने से पका हुआ मुंह और शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

जानिए केसर सौंदर्य से लेकर और किन चीजों में फायदेमंद है|

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केसर के रेशों को आमतौर पर डिप्रेशन की हालत में इस्‍तेमाल किया जाता हे ताकि व्‍यक्ति को जल्‍द से जल्‍द आराम मिल जाये। आयुर्वेदिक दवाओं में केसर को अह्म स्‍थान दिया गया है। चरक और सुश्रुत संहिता में केसर के उपयोग का उल्‍लेख मिलता है।

इसे एक प्रकार की जादुई जड़ी-बूटी माना जाता है जो लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए वरदान है। कई लोग इसे जफ़रान भी कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह हर्ब, कुंकुम नाम से जानी जाती है जो वर्णनया गण के अंतर्गत आती है।

इसका उपयोग विभिन्‍न व्‍यंजनों और मिठाईयों में किया जाता है। केसरिया रंग का केसर गर्म पानी में डालने पर गहरे पीले रंग का हो जाता है। इसमें मौजूद उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ नाशक गुणों के कारण इसका उपयोग कई बीम‍ारियों में किया जाता है। साथ ही यह उत्तेजक, यौनशक्ति वर्धक, त्रिदोष नाशक, वातशूल शमन करने वाला भी होता है।

केसर के फायदे-

भूख बढाने वाला

केसर के सेवन से भूख खुलकर लगने लगती है। अगर कोई व्‍यक्ति कम भोजन करता है या उसे भूख नहीं लगती है तो केसर का इस्‍तेमाल भोजन बनाने में करने से लाभ मिलता है। इससे पाचन क्रिया भी दुरूस्‍त रहती है।

त्‍वचा के दाग-धब्‍बे दूर करें

केसर के सेवन से चेहरे के दाग-धब्‍बे दूर हो जाते हैं। अगर आंखों के नीचे काले गड्डे हो गए हैं तो वे भी ठीक हो जाते हैं। साथ चेहरे पर दमक आ जाती है।

पाचन क्रिया दुरुस्‍त रखें

पेट संबंधित बीमारियों के इलाज में केसर बहुत फायदेमंद होता है। बदहजमी, पेट-दर्द, पेट में मरोड़, गैस, एसिडिटी आदि हाजमे से संबंधित शिकायतों से राहत दिलाने में काफी मदद करता है। यह हमारी पाचन क्रिया को भी दुरुस्‍त रखता है।

नवजात के लिए अमृत

अक्‍सर नवजात को सर्दी-जुकाम की समस्‍या घेर लेती है। इस समस्‍या से नवजात को बचाने के लिए मां के दूध में केसर मिलाकर उसके नाक और माथे पर मलने से लाभ होता है। या केसर, जायफल और लौंग का लेप बनाकर नवजात की छाती और पीठ पर लगाने से फायदा होता है। सर्दी का प्रकोप कम होता है और उसे आराम मिलता है।

दमकती त्‍वचा

केसर के सेवन या त्‍वचा पर इस्‍तेमाल से त्‍वचा की दमक में काफी वृद्धि हो जाती है। शहद के साथ केसर को मिलाएं और उस लेप को चेहरे पर लगा लें, इससे स्‍कीन में ग्‍लो आ जाता है।

बालों को झड़ने से रोके

केसर के इस्‍तेमाल से बालों को झड़ने से रोका जा सकता है। एक कटोरे में एक चुटकी केसर, लिकोरिक पाउडर और दूध को अच्‍छे से मिला लें और इसे बालों पर लगाएं। बाद में धो लें। बालों का झड़ना बंद हो जाएा।

पेप्टिक अल्‍सर का इलाज करे

पेट में अल्‍सर या पेप्टिक अल्‍सर की समस्‍या होेने पर केसर का सेवन, रोगी को सही कर देता है। इसे दूध में मिलाकर पीने से अल्‍सर की समस्‍या से आराम मिल जाता है।

सीने में जलन

अगर किसी को सीने में जलन की समस्‍या होती है तो उसे केसर का सेवन लाभ पहुँचा सकता है।

कैंसर के खतरे से बचाये

केसर के सेवन से कैंसर होने का खतरा काफी कम हो जाता है। बच्‍चों के दांतों में दर्द होने पर भी केसर को पीसकर लगाने से आराम मिलता है। इस तरह केसर के कई लाभ होते हैं जिनका आयुर्वेद में उल्‍लेख किया गया है।

गंजापन दूर करें

गंजे लोगों के लिये तो केसर संजीवनी बूटी की तरह काम करती है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, वह थोड़ी सी मुलेठी को दूध में पीस कर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर पेस्ट बना लें। सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है। रूसी की समस्या हो या फिर बाल झड़ रहे हों, सभी समस्‍याओं में यह नुस्‍खा काम आता है।

बुखार में उपयोगी

केसर में ‘क्रोसिन’ नाम का तत्‍व पाया जाता है, जो वैज्ञानिक रूप से बुखार को दूर करने में उपयोगी माना जाता है। इसके साथ ही यह एकाग्रता, स्‍मरण शक्ति और रिकॉल क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है।

याद्दाश्‍त मजबूत करे

केसर से सेवन से मेमोरी स्‍ट्रांग हो जाती है। कमजोर याद्दाश्‍त अच्‍छी हो जाती है। सीखने की प्रक्रिया में भी केसर का सेवन लाभप्रद होता है।

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आंखों की परेशानी में लाभकारी

आंखों की परेशानी को दूर करने में भी मददगार होता है केसर। एक हालिया शोध में यह बात सामने आयी है‍ कि जिस प्रतिभागी ने केसर का सेवन किया उसकी नजरें बेहतर रहीं। यह मोतियाबिंद को दूर करता है।

अनिद्रा दूर करें

अनिद्रा की शिकायत को दूर करने में भी केसर काफी उपयोगी होता है। इसके साथ ही यह अवसाद को भी दूर करने में मदद करता है। रात को सोने से पहले दूध में केसर डालकर पीने से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है।

त्‍वचा को टोन करें

केसर से नेचुरल टोनर बनाएं और उसे ही स्‍कीन पर टोनर की तरह इस्‍तेमाल करें। इससे धूल और गंदगी साफ हो जाएगी और मृत त्‍वचा भी निकल जाएगी।

श्‍वास सम्‍बंधी समस्‍या को दूर करे

केसर के सेवन से श्‍वास सम्‍बंधी समस्‍या से छुटकारा मिल जाता है। अस्‍थमा होने पर केसर का सेवन अवश्‍य करना चाहिए, इससे काफी राहत मिलती है। गर्म दूध में केसर को मिलाकर पीने से शरीर का स्‍वास्‍थ्‍य बढ़ जाता है। नाक में बहुत ज्‍यादा कफ भरा होने पर भी केसर के सेवन से आराम मिलता है।

सिर दर्द से राहत

सिर दर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिर दर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से सिर दर्द में राहत मिलती है।

बेहतर सेक्‍स लाइफ

आपने अक्‍सर फिल्‍मों या सोप ओपेरा में देखा होगा कि सुहागरात के दिन दूध में केसर डालकर दुल्‍हे को पिलाया जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि केसर में कई शक्तिवर्धक गुण होते हैं जो शरीर को ताकत प्रदान करते हैं। इसके सेवन से स्‍पर्म की संख्‍या में वृद्धि होती है, पसीना कम होता है और अवसाद भी नहीं रहता है।

किडनी स्‍टोन के उपचार में लाभप्रद

केसर के इस्‍तेमाल से किडनी में होने वाली पथरी का इलाज संभव है। यह रक्‍त परिसंचरण को दुरूस्‍त बनाये रखता है और पेट दर्द में भी राहत मिलती है।

दाने दूर करें

केसर के इस्‍तेमाल से चेहरे पर होने वाले पस भरे दानेकील-मुहांसे भी ठीक हो जाते हैं। तुलसी, केसर और शहद को मिलाकर चेहरे पर 15 मिनट लगाएं, बाद में गुनगुने पानी से धो लें।

मासिक धर्म की औषधि

केसर का नियमित सेवन महिलाओं के लिए बहुत अच्‍छा रहता है। महिलाओं की कई शिकायतें जैसे – मासिक चक्र में अनियमिता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है।

इसके कोई दुष्‍परिणाम भी नहीं होते हैं। यह उन दिनों में हारमोन्‍स को संतुलित बनाये रखने में मददगार साबित होता है।

गर्भावस्‍था में लाभकारी

चिकित्सा गुणों से प्रचुर केसर ऐंठन दूर करता है। गर्भावस्था में इसको लेने से ऐंठन और पेट दर्द में आराम मिलता है। साथ ही यह पाचन-प्रणाली को सुधारने के अलावा गर्भवती महिला की भूख की वृद्धि भी करता है|

नकसीर या नाक से खून बहने का आयुर्वेदिक इलाज

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अक्सर देखा जाता है कि गर्मियां शुरू होते ही कुछ लोगों को नकसीर की प्रॉब्लम होने लगती है। नाक से खून बहने की समस्या हममें से कई लोगों को परेशान करती है। इस समस्या को नकसीर के नाम से भी जाना जाता है। अगर आपके नाक की एक तरफ से बिना चेतावनी के, खून बहने लगता है, तो वह मौसम, शारीरिक व्यायाम, छींकें, और सर्दी-जुकाम के कारण होता है। अगर आपकी उम्र 50 से अधिक है और आप अनवरत रूप से रक्तस्राव के शिकार हैं तो अपने रक्तचाप का परिक्षण कराएँ, क्योंकि उच्च रक्तचाप रक्त पात्रों को हानि पहुँचाता है, जिससे प्रचुर मात्रा में रक्तस्राव होने लगता है। लेकिन अब घबराइए नहीं कुछ आयुर्वेदिक नुस्खों को अपना कर आप पुरानी से पुरानी नकसीर से छुटकारा पा सकते हैं।

नकसीर के लक्षण और कारण

कारण: संक्रमण, उच्च रक्तचाप, रक्त को पतला करने की औषधि का सेवन करना, मदिरापान, नाक में हल्की सी चोट, नाक को ज़ोर लगाकर साफ़ करना, सर्दी-ज़ुकाम या फ्लू, कोकेन का अधिक मात्रा में प्रयोग करना, साइनस संक्रमण वगैरह।
लक्षण: एक या दोनों नथुनियों से रक्तस्राव, उनींदापन, नकसीर के कारण सदमा या असमंजस।

नाक से खून या नकसीर रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. सुहागे को पानी में घोलकर नथुनों पर लगाने से नकसीर बंद हो जाती है|
  2.  गर्मियों के मौसम में सेब के मुरब्बे में इलायची डालकर खाने में नकसीर बंद हो जाती है|
  3.  बेल के पत्तों को पानी में पकाकर उसमें मिश्री या बताशा मिलाकर पीने से नकसीर बंद हो जाती है|
  4.  लगभग 15-20 ग्राम गुलकंद को सुबह-शाम दूध के साथ खाने से नकसीर का पुराने से पुराना मर्ज भी ठीक हो जाता है|
  5. करीब 20 ग्राम मुल्तानी मिट्टी को कूट कर रात के समय मिट्टी के बर्तन में करीब एक गिलासपानी में डालकर भिगो दें। सुबह पानी को निथारकर छान लें। इस साफ पानी को दो तीन दिन पिलाने से वर्षों का पुराना रोग हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।विशेष- बच्चों को इस पानी में मिश्री या बताशा मिलाकर पिलाने से किसी भी तरह की नकसीर हमेशा के लिए बन्द हो जाती है।
  6. थोडा सा कपूर, धनिये के पत्तों के रस में मिला दें और इस मिश्रण को नाक में डालें। इस मिश्रण को नाक में  डालने से नाक से खून बहना जल्दी बंद हो जाता है।
  7. अनार के सूखे पत्तों का चूरा बनाकर सूंघने से भी नाक से रक्त का बहना काफी हद तक रुक सकता है।
  8. 20 ग्राम आंवले को पूरी रात पानी में सोख कर रखें, और सुबह उस पानी को छान कर पी लें और आमला की लेई को अपने माथे और नाक के आसपास मल दें। इससे भी नाक का ख़ून रुकने में आपको काफी मदद मिलेगी।
  9. आम की गुठली के रस को सूंघने से भी नकसीर में लाभ मिलता है।
  10. 2 ग्राम केले के पेड़ के पत्ते, 20 ग्राम क्रिस्टल शुगर और 1-1/2 लीटर पानी का मिश्रण दिन में एक बार पीने से गंभी से गम्भीर नकसीर में भी लाभ मिलता है।
  11. एक दो बूँदें नींबू का रस नथुने में डालने से भी नाक से रक्तस्राव काफी हद तक रुक जाता है।
  12. एक ग्लास पानी में एक चुटकी नमक डाल दें और इस पानी को नाक में स्प्रे करें। ऐसा करने से नाक में से रक्तस्राव कम हो जाता है।

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नकसीर के अन्य उपचार

  • ठंडा पानी सिर पर धार बनाकर डालने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है|
  • नाक से बहने पर सिर को आगे की ओर झुकाना चाहिए|
  • नकसीर आने पर नाक की बजाय मुंह से सांस लेना चाहिए|
  • अगर आप धूम्रपान के आदि हैं, तो उसे तुरंत रोक दें।
  • प्याज को काटकर नाक के पास रखने और सूंघेने से नाक से खून आना बंद हो जाता है|
  • ज्यादा तेज धूप में घूमने की वजह से नाक से खून बह रहा हो तो सिर पर ठंडा पानी डालने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है|
  • नकसीर आने पर कपड़े में बर्फ लपेटकर रोगी की नाक पर रखने से भी नकसीर रूक जाती है|
  • गर्भनिरोधक गोलियों के प्रयोग में सावधानी बरतें, क्योंकि गलत गोलियों के प्रयोग से नाक से रक्तस्राव शुरू हो सकता है।

होठों का कालापन दूर करने के घरेलु नुस्खे

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होठों के कालेपन से महिलाएं ही नहीं पुरूष भी परेशान हैं। जिसकी मुख्य वजह है अनियमित खान-पान, धूम्रपान, टेंशन आदि हैं। जिसकी वजह से लोग तरह तरह के केमिकल युक्त प्राडक्ट इस्तेमाल करते हैं। जो कई प्रकार के गंभीर रोग उत्पन्न कर सकता है। इसलिए प्रकृति ने हमें पहले से ही कुछ चीजें उपलब्ध कराई हैं जो आपके होठों को मुलायम और सुंदर बनाती है। आइये जानते हैं उन प्राकृतिक चीजों के बारे मे।

दूध की मलाई

होंठों से रूखापन हटाने के लिए थोडी सी मलाई में चुटकी भर हल्दी‍ मिलाकर नियमित रूप से धीरे-धीरे होठों पर मालिश करें। आप देखेंगे कि इस घरेलू उपाय से कुछ ही दिनों में आपके होठ मुलायम और गुलाबी होने लगेंगे।

गुलाब की पंखुडियां

होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए गुलाब की पंखुडि़यां बहुत ही फायदेमंद होती है। इसके नियमित इस्‍तेमाल से होठों का रंग हल्‍का गुलाबी और चमकदार हो जाएगा इसके लिए गुलाब की पंखुडियों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिलाकर इस घोल को रोज रात को सोते समय अपने होंठों पर लगाकर सो जायें और सुबह धो लें।

नींबू

क्‍या आप जानते है होंठों का कालापन नींबू से भी दूर हो सकता है। इसके लिए आप निचोड़े हुए नींबू को अपने होठों पर सुबह और शाम को रगड़ें।

खीरे के टुकड़े

होंठों का रंग निखारने के लिए इन पर खीरे के टुकड़ों को 2 मिनट तक रगड़ें ।

संतरे का छिलका

क्या आप संतरा खा कर छिलका फेंक देते हैं? इसे आप होंठों को अतिरिक्त चमक देने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

गाजर का रस

गाजर का रस बीटरूट के रस जैसा एक बेहतरीन उत्पाद है जो आपके होंठों को काफी गुलाबी रंग प्रदान करता है तथा इसे सुन्दर और आकर्षक बनाता है। गाजर को अच्छे से पीसकर इसका रस निकालें। इसके बाद इस रस में रुई के एक गोले को डुबोएं तथा इसका प्रयोग होंठों पर करें। गाजर में मौजूद विटामिन की मात्रा होंठों को पोषण प्रदान करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

केसर

होंठों का कालापन दूर करने के लिये कच्चे दूध में केसर पीसकर होंठों पर मलें। इसके इस्‍तेमाल से होंठों का कालापन तो दूर होता ही है साथ ही वे पहले से अधिक आकर्षक बनने लगते हैं।

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किशमिश

होंठों के लिए एक आयुर्वेदिक नुस्खे के तौर पर आप किशमिश को रातभर पानी में सोखकर सुबह खाली पेट में खाएं।

जैतून का तेल

यदि होंठ पूरी तरह से फट चुके हैं और उनमें कालापन भी आ रहा है तो जैतून का तेल यानी ऑलिव ऑयल और वैसलीन मिलाकर दिन में तीन या चार बार फटे होंठों पर लगाने से फायदा होता है। इनका लेप होंठों पर 4-5 दिन लगातार लगाने से होठों की दरारें भी भरने लगती हैं और होंठ हल्‍के गुलाबी भी होने लगते हैं।

चुकंदर

चुकंदर को ब्‍लड बनाने वाली मशीन भी कहते है। चुकंदर होंठ के लिए भी उतना ही फायदेमंद होता है। चुकंदर को काटकर उसके टुकड़े को होंठों पर लगाने से होठ गुलाबी व चमकदार बनते हैं।

शहद

शहद के इस्‍तेमाल से कुछ ही दिनों में आपके होंठ चमकदार और मुलायम हो जाते हैं। इसके लिए थोड़ा-सा शहद अपनी उंगली में लेकर धीरे-धीरे अपने होंठों पर मलें या फिर शहद में थोड़ा सा सुहागा मिलाकर अपने होंठों पर लगाएं। ऐसा एक दिन में दो बार करें फिर देखें इसका असर।

इन चीजों का जरूर ध्यान दे

  1. निकोटीन से होंठ काले और रंगहीन हो जाते हैं, अतः धूम्रपान छोड़ दें। इससे होंठ गुलाबी और स्वस्थ रहेंगे।
  2. कैफीन में मौजूद पदार्थों से होंठ काले हो जाते हैं, अतः चाय और कॉफ़ी कम मात्रा में पियें।
  3. संतुलित आहार ग्रहण करें जिसमें फल और सब्ज़ियों की अच्छी मात्रा हो। विटामिन सी प्राकृतिक रूप से होंठों को नमी देता है और रंजकता कम करता है।

आंखों के नीचे काले घेरे दूर करने के घरेलु नुस्खे

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आंखें चाहे आपकी बेहद ही खूबसूरत क्यों न हो, पर अगर उसके नीचे काले घेरे हैं तो आंखों की खूबसूरती के साथ-साथ आपकी खूबसूरती पर भी ग्रहण लग जाता है।

डार्क सर्कल न सिर्फ आपके चेहरे की सुंदरता को कम करते हैं, बल्कि आपके खराब स्वास्थ्य और अनियमित दिनचर्या की चुगली भी करते हैं। इसके कारण सुंदर चेहरा भी थका और मुरझाया हुआ सा लगता है। आंखों के आसपास होने वाले ये काले घेरे कोई ऐसी समस्या नहीं है जिनका उपचार न हो। इन्हें कम करने के साथ इनका पूरी तरह उपचार भी संभव है।

क्यों हो जाते हैं डार्क सर्कल

आंखों के नीचे काले घेरे सभी व्यक्ति को जीवन में किसी न किसी स्तर पर प्रभावित करते हैं। लेकिन युवावस्था में आंखों के आसपास जब ये घेरा डेरा जमा लेते हैं तो यह चिंता का कारण बन जाते हैं। डार्क सर्कल के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें ये प्रमुख हैं:

  1. नींद और पोषक तत्वों की कमी।
  2. अनुवांशिक रूप से मिला स्किन पिग्मेंटेशन
  3. लगातार सूर्य की किरणों के संपर्क में रहना।
  4. कई चिकित्सकीय अवस्थाएं जैसे एलर्जी,अस्थमा, किडनी और लीवर संबंधी गड़बडिया भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डार्क सर्कल का कारण बन जाती हैं।
  5. शरीर में पोषक तत्वों की कमी विशेषकर विटामिन के और पानी की कमी
  6. तनाव, थकान और उम्र बढ़ने के साथ रक्त संचार प्रभावित होना।
  7. ऐसी दवाइयों का सेवन जिससे रक्त नलिकाएं फैल जाती हैं।

काले घेरे दूर करने के घरेलु नुख्से

गुलाब जल

गुलाब जल की मदद से डार्क सर्कल की समस्या से निजात पा सकते हैं। बंद आंखों पर गुलाब जल में भिगोई हुई रूई को आंखों पर रखें। ऐसा केवल 10 मिनट तक करें। ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्‍वचा चमक उठेगी।

टमाटर

टमाटर के रस में, नींबू का रस,चुटकीभर बेसन और हल्‍दी मिला लें। इस पेस्‍ट को अपनी आंखों के चारों ओर लगाएं और 20 मिनट के बाद चेहरे को धो लें। ऐसा हफ्ते में 3 बार जरुर करें। इससे डार्क सर्कल धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

आलू

यह बहुत ही असरकारी नुस्खा है। रात में सोने से पहले चेहरा को अच्छे से साफ करें। इसके बाद आलू की पतली स्लाइस काटकर उन्हें आंखों पर 20 से 25 मिनट रखें। इसके बाद चेहरा को अच्छे से साफ कर लें।

संतरे का रस और ग्‍िलसरीन

संतरे का रस विटामिन सी से भरपूर होता है जो कि त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। संतरे के रस में ग्लिसरीन की कुछ बूंदे मिलाएं और इस पेस्ट को हर रोज आंखों और आस पास के एरिया पर लगाएं। यह डार्क सर्कल से निजात दिलाने का प्रभावशाली तरीका है।

जैतून तेल

जैतून का तेल सौंदर्य से जुड़ी कई समस्याओं में काफी फायदेमंद है। इससे आंखों के आसपास हल्के हाथों से मालिश करें, इससे रक्त संचार ठीक रहता है और आंखों की थकान कम होती है जिससे डार्क सर्कल की समस्या दूर होती है।

बादाम का तेल

काले घेरे से छुटकारा पाने के लिए बादाम के तेल बहुत फायदेमंद है। बादाम के तेल को आंखों के आस-पास लगाकर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। फिर उंगलियों से 10 मिनट तक हल्की मालिश करें। इसके बाद चेहरा साफ कर लें।

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शहद और बादाम का तेल

बादाम के तेल और शहद को अच्छी तरह मिलाकर सोने के पहले आंखों के आसपास लगाएं और सारी रात लगा रहने दें। सुबह उठकर सामान्य पानी से चेहरा धो लें। हर रोज इस नुस्खे को आजमाने से कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल दूर हो जाएगा।

टी बैग

डार्क सर्कल्स को दूर करने के लिए प्रयोग किए गए ठंडे टी-बैग्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। टी-बैग्स में मौजूद तत्व टैनिन आंखों के आसपास की सूजन और  काली त्वचा को पहले जैसे करता है और आपको डार्क सर्कल से निजात मिलता है।

पुदीना पत्‍ता

पुदीने की पत्‍तियों को पीस लें और आंखों के आस पास लगा लें। इसे कुछ देर तक इस पेस्ट को ऐसे ही छोड़ दें और फिर आंखों को पानी से धो लें। इससे आपको डार्क सर्कल से निजात पाने में काफी सहायता मिलेगी।

चाय का पानी

चायपत्ती को पानी के साथ उबाल लें और फिर ठंडा होने के लिए रख दें। इसके बाद रुई के फाहे को उसमें भिगोकर आंखों के नीचे और आस-पास लगाएं। थोड़ी देर बाद पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे के काले घेरे तेजी से कम हो जाएंगे।

इनका भी रखें खयाल

व्यायाम और योगा करें, विशेष रूप से प्राणायाम। प्राणायाम त्वचा की सेहत के लिए बहुत अच्छा और उपयोगी होता है।
नमक कम खाएं। अधिक नमक से शरीर में पानी इकट्ठा होने लगता है, जिससे आंखें सूजी हुई लगती हैं और उनके नीचे थैले बन जाते हैं।
आधुनिक शोधों में यह बात सामने आई है कि ग्रीन टी आंखों के लिए फायदेमंद है। इसमें कैचिन्स नाम का एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आंखों की रक्षा करते हैं।

सिर के जूँ से छुटकारा पाने के घरेलु नुस्खे

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जूँ एक छोटा परजीवी है जो बालों की जड़ों और बालों के निचले हिस्से पर चिपके रहते हैं, जहां यह सिर की त्वचा से खून को पीकर जिंदा रहते हैं। बच्चों में जूँ होने की समस्या आम है। यदि आप जूँ वाले किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो यह आपको भी हो सकते हैं। साथ ही इंफेक्टेड व्यक्ति का सामान जैसे कंघी और कपड़े आदि इस्तेमाल करने से भी जूँ होने की संभावना रहती है।

सिर में जूँ होने का सबसे आम लक्षण है सिर में खुजली होना और सिर की त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना। यह बहुत तेजी से बढ़ते हैं इसलिए इन्हें जल्दी खत्म करना बहुत मुश्किल होता है। कुछ घरेलू उपचार के द्वारा जूँ से निजात पाई जा सकती है। आइए आपको बताएं ऐसे ही कुछ घरेलू उपचार के बारे में-

आलिव ऑयल

आलिव ऑयल में जूं मारने के गुण तो नहीं होते लेकिन जब इसे बालों में लगाकर पूरी रात के लिए रख दिया जाता है तो ऐसे में आलिव ऑयल से जूं खत्म हो जाती है। इसको इस्तेमाल करने के लिए आपको आलिव  ऑयल को अपने बालों में लगाकर अच्छे से मसाज करनी चाहिए और इसके बाद सिर को एक शॉवर बैग से ढग कर रख दें। अगले दिन बालों को शैम्पू करके आप पतली दांत वाली कंघी से अपने बालों पर कंघी करें, ऐसा करने से जूंए बाहर निकल आएंगी।

मेयोनीज

आलिव ऑयल की तरह आप मेयोनीज का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।  मेयोनीज के इस्तेमाल से आसानी से लीखें और जूं बाहर निकल आती हैं। इसके लिए आपको अपने स्केल्प पर अच्छे से मेयोनीज लगाना चाहिए, इसके बाद रातभर के लिए सिर को ढक कर सो जाएं और अगले दिन सुबह उठते ही बालों को अच्छे से धो लें। इसके बाद गीले बालों में ही पतली दांत वाली कंघी की मदद से बालों को कंघी करें। इससे जूं खत्म हो जाएगी।

 टी ट्री ऑयल

टी ट्री ऑयल को उसके माइक्रोबियल, एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है। यह जूं और लीखों से काफी आसानी से  छुटकारा दिलाता है। इस बात को भी माना गया है कि टी ट्री की कुछ बूंदों के इस्तेमाल से आप जूं और लीखों से निजात पा सकती हैं।

टी ट्री ऑयल का इस्तेमाल कर जूंओ से निजात पाने के लिए आपको  कैरियर ऑयल और टी ट्री ऑयल को एक तिहाई के मात्रा में मिक्स कर अपने बालों में मिक्स कर अपने बालों की मसाज कर सकती हैं। इसके बाद इसे 40 मिनट के लिए अपने बालों में ही लगा रहने दें और इसके बाद बालों को अच्छे से धो लें। इसके बाद आप एक मोटी दांत वाली कंघी का इस्तेमाल कर अपने बालों को जूं से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग कर सकती हैं।  टी ट्री को इस्तेमाल करने का एक और आसान तरीका यह है कि आप इसे अपने शैम्पू में भी मिक्स करके इस्तेमाल कर सकती हैं। आप या तो टी ट्री को अपने शैम्पू में मिक्स करके इस्तेमाल कर सकती हैं या तो आप शैम्पू के बाद अपने गीले बालों में टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें भी जोड़ सकती हैं। इस विधि का नियमित प्रयोग कर आप जूं और लीखों से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं।

- piojos home remedies - सिर के जूँ से छुटकारा पाने के घरेलु नुस्खे

नींबू

नींबू के टुकड़े को सिर पर रगड़ने से या नींबू का रस नारियल के तेल के साथ मिलाकर सिर पर लगाने से भी जुएँ पूर्ण रूप से नष्ट हो जाती हैं।

काली मिर्च

आधा चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक कप दही दो चम्मच नींबू के रस के साथ मिलाकर, नहाने से 20 मिनट पहले सिर पर लगाने से सिर की जुओं का पूर्ण रूप से खत्म होता है। पर एक बात याद रखें कि नहाते वक़्त अपनी आँखें बंद रखें वर्ना काली मिर्च का पाउडर आपकी आँखों को जलन से परेशान कर सकता है।

निबौली, सरसों या माजूफल का तेल

निबौली, सरसों या माजूफल का तेल लगाने से या अरिठे का फेन लगाने से जूँ और लीखें मर जाती हैं।तुलसी के पत्ते पीसकर सिर पर लगा लें, उसके बाद सिर पर कपड़ा बांध लें। सारी जुएँ मरकर कपडे से चिपक जायेंगी, और ऐसा दो तीन बार करने से पूर्ण रूप से जुएँ साफ़ हो जायेंगी।

अमरुद के पत्ते

अमरुद के पत्तों को पीसकर हल्दी के साथ मिलाकर मिश्रण बना लें और नहाने  से दो घंटे पहले सिर पर मल दें। इससे आपको जुओं से छुटकारा मिल जायेगी।नीम के पत्तों को पीसकर नहाने से 2 घंटे पहले सिर पर लगाने से भी जुओं से छुटकारा मिलता है।

ताज़ी मेंहदी

जूँ के फैलाव की रोकथाम के लिए जो एक और प्राकृतिक उत्पाद कारगर पाया गया है, वह है, ताज़ी मेंहदी का प्रयोग | बहुत से उपयोगी शैम्पू और स्प्रे काम ही इसलिए कर पाते हैं, कि जूँएं मेंहदी की गंध से दूर भागती हैं | घर के प्रत्येक सदस्य के तकिये की खोल के अन्दर थोड़ी मात्रा में ताजी मेंहदी (2-3 छड़ियाँ) रखी जानी चाहिए | इन्हें तकिये के नीचे भी रखा जा सकता है, जिससे वे सोने का प्रयास करते आदमी को प्रभावित या उसके लिए कोई खलल पैदा न कर सकें और उस व्यक्ति को भी इसकी गंध न महसूस हो | अगर एक हफ़्ते तक यह उपचार आजमाया जाए, तो जूँएं बालों से निकलकर भाग जाती है, और उनमें फिर अंडे नहीं देतीं |

नीम और तुलसी के पत्ते

नीम के पत्ते और तुलसी के पत्ते तकिये के नीचे रखने से जुओं की समस्या काफी हद तक ख़तम हो जाती है।

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लहसून

लहसून का कसैला स्वाद भी जुओं को मारने में सहायक सिद्ध होता है। नहाने से पहले लहसून की लेई नींबू के रस के साथ मिलाकर सिर पर लगाने से भी जुओं को नष्ट करने में मदद मिलती है।सिर के से बालों को धोने से भी 2 दिन के अंदर जुएँ नष्ट हो जाती हैं।

प्याज का रस

प्याज में सलफर की मात्रा ज्यादा होती हैं जिससे जुएं मर जाते हैं। बालों की लंबाई के अनुसार आप 3 से 4 छिले हुए प्याज लें और पतला पेस्ट बनाने के लिए उसे ग्राइंड कर लें फिर छलनी की मदद से उसका सारा रस निकाल लें। इसके बाद इसमें बराबर मात्रा में सरसों और नारियल का तेल मिला लें फिर रुई की मदद से इसे स्केल्प पर लगा लें और अच्छी तरह से बालों की मसाज कर लें। रात भर बालों को ऐसे ही छोड़ दें और अगले दिन अपना सर धो लें फिर पतली कंगी से सर कॉम्ब करें ताकि आपको जुओं से छुटकारा मिल सकें।

नारियल का तेल

नारियल का तेल जुओं और लीखों को मारता नहीं हैं लेकिन इससे जुएं हिल नहीं पाती हैं। रात भर शावर कैप से ढके रहने पर ये घुट कर मर जाती हैं। इसके लिए नारियल का तेल गैस पर गर्म करें और इसमें कपूर का चूरा मिला लें। अगली सुबह आप कंघी से बालों को कॉम्ब करें इससे वो अपने आप निकल जाएंगी।

जूं कंघी

जूं कंघी का इस्तेमाल करने के लिए आप जूं और लीखों से छुटकारा पा सकती हैं। यह कंघी विशेष रूप से केवल जूंओं और लीखों को निकालने के लिए ही बनाई गई है और यह बाजार में भी आसानी से उपलब्ध होती है।

घर की साफ़ सफाई बनाये रखें। बालों की कंघियों और हेयर ब्रश की नियमित रूप से सफाई करें। सिर के जुओं का इलाज जल्द से जल्द करना चाहिये क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह बालों की जड़ों को कमज़ोर कर सकती हैं, जिससे खुजली और बालों के झड़ने की संभावना हो सकती है।

आयुर्वेद से करें दाद, खाज, खुजली(एक्‍जिमा) का उपचार

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बॉडी में खुजली, एक्‍जिमा (खाज) होने के अलग – अलग कारण होते हैं। किसी रिसर्च के अनुसार, शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम में गड़बड़ी के चलते खुजली हो जाती है तो कोई कहता है कि सरकाप्‍टस नामक परजीवी के कारण खुजली होने लगती है। वजह चाहें जो भी हो लेकिन शरीर में तकलीफ होने से आपकी दिनचर्या पर गंदा असर पड़ता है और आपकी पब्लिक इमेज की धज्जियां उड़ जाती हैं। एक्‍जिमा से बचने के लिये कुछ उपचार जैसे, लक्षणों को बिगाड़ने वाले उत्तेजकों से बचें, घावों को कुरेदें नहीं, अधिक समय तक स्नान न करें और देरी तक स्नानघर में न रहें, साबुन का प्रयोग कम से कम करें (बबल स्नान न करें), रोग को ठीक करने के लिये एंटी बायोटिक का प्रयोग किया जाता है। मगर इसके अलावा भी आप के लिये ये बेहतर रहेगा कि आप कुछ घरेलू उपाय को अपनाकर अपनी एक्‍जिमा (खाज) प्रॉब्‍लम दूर कर लें।

तो पढि़ए इन घरेलू उपायों को-

नींबू

नींबू हर घर में आराम से मिल जाता है। इसलिए बॉडी में जहां पर भी खुजली हो रही हो उस जगह पर नींबू और गरी का तेल मिलाकर लगा लें। लगाने के तुरंत बाद खुजलाएं नहीं। थोड़ी देर में आराम मिल जाएगा।

जैतून का तेल

खुजली होने पर गुनगुने पानी से नहाएं और तुरन्‍त बाद किसी माश्‍चराइजर या क्रीम का यूज न करते हुए ऑलिव ऑयल यानि जैतून के तेल का इस्‍तेमाल करें। अच्‍छे से हल्‍के – हल्‍के मालिश करने पर खुजली वाली जगह में आराम मिलेगा।

एलोविरा जेल का इस्‍तेमाल

घर में लगे एलोविरा के पौधे की पत्‍ती को काट लें और उसमें से निकलने वाले जेल को खुजली वाली जगह पर लगा लें। दिन में कम से कम चार से पांच बार ऐसा करने पर आपको आराम मिलेगा। साथ ही ठीक होने तक लगाने पर बाद में कभी खुजली नहीं होगी।

प्‍योर गरी का तेल

खुजली होने पर गरी का प्‍योर तेल भी फायदेमंद होता है। इससे ड्राईनेस भी नहीं होती और खुजली भी बंद हो जाती है।

देशी घी की मालिश

शरीर में अचानक से ज्‍यादा खुजली होने पर तुरंत राहत के लिए आप घरों में इस्‍तेमाल किया जाने वाला देशी घी लगा लें। इससे फटाफट राहत मिलेगी।

नीम

नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिला लें। इसे प्रतिदिन सुबह पीने से खून की खराबी दूर होकर एक्जिमा ठीक होने लगता है।

ओमेगा 3 ऑयल की मसाज

आजकल मार्केट में ओमेगा 3 ऑयल आसानी से उपलब्‍ध है। इसलिए खुजली की शिकायत होने पर फटाफट ओमेगा 3 ऑयल से मसाज कर लें। इससे आपको राहत होगी।

खीरे का पानी

खीरे को बारीक स्‍लाइस में काटकर दो घंटे के लिए रख दें। पूरा रस निकल जाने के बाद उसे छान लें और खुजली वाली जगह पर लगा लें। जरूर आराम होगा।

आटे का लेप

गेहूं के आटे का लेप करने से शरीर के सारे चर्म रोग दूर हो जाते हैं और खुजली में आराम मिलता है।

समुद्र के पानी में स्‍नान

यह टिप्‍स केवल उन्‍ही लोगों के लाभदायक है जो समुद्र के किनारे के वासी हैं। कहा जाता है कि शरीर में खुजली होने पर समुद्र में नहाने से खुजली दूर भाग जाती है। इसके पीछे कारण यह माना जाता है कि समुद्र के पानी में नैचुरल मिनरल्‍स होते हैं और प्‍योर सॉल्‍ट भी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप घर में पानी में नमक मिलाकर नहाने लगे, इससे आपकी त्‍वचा को और ज्‍यादा नुकसान होगा।

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चन्दन

एक चम्मच कपूर के साथ एक चम्मच चन्दन की लई मिलाकर एक्जिमा से ग्रसित जगह पर लगाने से भी बहुत फायदा होता है।

शुद्ध गुग्गूल

आयुर्वेद की बहुत ही प्रचलित जड़ी बूटी, गुग्गूल में शुद्धि और तरोताजा करने के लिए अत्यधिक ओजस्वी शक्तियों का समावेश होता है।

हरड़

हरड़ को बारीक पीस लें। दो चम्‍मच हरड़ को दो गिलास पानी में उबाल कर रख लें। जहां भी खुजली हो, उस पानी को लगा लें कुछ देर में आराम मिल जाएगा।

साफी

रक्त शुद्धी की एक बहुत ही प्रचलित औषधि, जिसके एक दो चम्मच खाली पेट पर लेने से एक्ज़िमा काफी हद तक ठीक हो जाता है।

आहार और खान पान

  • दही और अचार जैसे खट्टी चीज़ों का सेवन बिलकुल ना करें।
  • करेले और नीम के फूलों का सेवन भी लाभकारी होता है।
  • शुद्ध हल्दी भी एक्जिमा की चिकित्सा में लाभ प्रदान करती है। इसे एक्जिमा के चकतों पर लगाया जा सकता है और दूध में मिलाकर भी पीया जा सकता है।

क्या करें क्या ना करें

  • डिटरजेंट (कपडे धोने का पाउडर) को बिलकुल भी ना छुएं, पर अगर मजबूरी से छूना भी पड़े तो सूती दस्तानों का प्रयोग करें।
  • एक्जिमा से ग्रसित जगह पर तंग कपडे ना पहनें।
  • सिंथेटिक कपड़ों का भी बिलकुल प्रयोग ना करे, क्योंकि इससे पसीने के निष्काशन में कठिनाई होती है।
  • तरबूज जैसे फलों का नियमित रूप से सेवन करें।
  • गाजर और पालक के रस का मिश्रण पीने से भी एक्जिमा के ठीक होने में लाभ मिलता है।
  • पानी का भरपूर मात्रा में सेवन करें और चाहें तो संतरे का रस भी पी सकते हैं।
  • अध्ययनों से पता चला है कि टमाटर का रस भी एक्जिमा को चंद दिनों में ठीक करने में सहायक सिद्ध होता है।

कफ,वातनाशक,शक्तिवर्धक अश्वगंधा जड़ीबूटी के बारे में, जानिए

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अश्वगंधा के फायदे और नुकसान इन हिंदी : अश्वगंधा एक चमत्‍कारी गुणों वाली औषधि है, जो शरीर को कई लाभ प्रदान करती है। यह दिमाग और मन को स्‍वस्‍थ रखती है। आर्युवेद में अश्वगंधा का विशेष स्‍थान है, इसे भारत में कई स्‍थानों पर भारतीय गिनसेंग भी कहा जाता है। इसकी जड़ों का इस्‍तेमाल कई प्रकार की दवाओं को बनाने में किया जाता है। कई बार शक्तिवर्धक दवाओं को बनाने में भी इसका इस्‍तेमाल होता है।

- ashwagandha - कफ,वातनाशक,शक्तिवर्धक अश्वगंधा जड़ीबूटी के बारे में, जानिए

यह कफ वातनाशक, बलकारक, रसायन, बाजीकारक, नाड़ी-शक्तिवर्द्धक तथा पाचनशक्ति को बढ़ाने वाला होता है।

अश्‍वगंधा के निम्‍न लाभ होते हैं-

अश्वगंधा के फायदे और सेवन कैसे करे इन हिंदी – Ashwagandha ke fayde aur sevan kaise kare in hindi

गठिया, पाचन क्रिया आैर अनिद्रा

अश्वगंधा खाने से गठिया का दर्द दूर हो जाता है। इसमें पेट को साफ करने का गुण होता है जिससे पाचन क्रिया अपने आप दुरूस्‍त हो जाती है। अगर किसी को नींद नहीं आती है तो अश्वगंधा का सेवन करने से यह समस्‍या भी दूर हो जाती है।

जवां बनाये रखें

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों के अनुसार, अश्वगंधा के सेवन से न केवल मनुष्य लंबी उम्र तक जवान रह सकता है बल्कि इसको शरीर की त्वचा पर लगाने से त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों से भी बचा जा सकता है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
यह हर्ब शरीर में रक्‍तचाप को बिल्‍कुल सही रखती है। इसे खाने से तनाव भी कम होता है। इस औषधि में डायबटीज को कम करने और कोलेस्‍ट्रॉल को घटाने की क्षमता होती है।

निरोग करें शरीर

अश्वगंधा पौधे की पत्तियां त्वचा रोग, शरीर की सूजन एवं शरीर पर पड़े घाव और जख्म भरने जैसी समस्या से लेकर बहुत सी बीमारियों में भी बहुत उपयोगी है। अश्व‍गंधा के पौधे को पीसकर लेप बनाकर लगाने से शरीर की सूजन, शरीर की किसी विकृत ग्रंथि और किसी भी तरह के फुंसी-फोड़े को हटाने में काम आती है। अश्व‍गंधा पौधे की पत्तियों को घी, शहद पीपल इत्यादि के साथ मिलाकर सेवन करने से शरीर निरोग रहता है।

कैंसर कोशिकाओं को नष्‍ट करें

आमतौर पर कैंसर की दवाएं बीमार कोशिकाओं के साथ-साथ सामान्य कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाती है, जिससे अन्य रोगों के बढ़ने की संभावना हो जाती है। लेकिन कैंसर की दवाओं के साथ अश्वगंधा का सेवन करने से अद्भुत फायदा देखा गया है। अश्वगंधा के प्रयोग से केवल कैंसर ग्रस्त कोशिकाएं व न्यूरान्स ही नष्ट हुए, जबकि अन्य कोशिकाओं व न्यूरान्स को कोई नुकसान नही पहुंचा।

क्षयरोग (टी.बी.)

  1. 2 ग्राम अश्वगंधा के चूर्ण को असगंध के ही 20 ग्राम काढ़े के साथ सेवन करने से क्षय रोग में लाभ होता है।
  2. 2 ग्राम अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण में 1 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 ग्राम घी और 10 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से क्षय रोग (टी.बी.) मिटता है।

- ashwagandha benefits - कफ,वातनाशक,शक्तिवर्धक अश्वगंधा जड़ीबूटी के बारे में, जानिए

वात रोग

  1. अश्वगंधा के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) को खाने से लाभ प्राप्त होता है।
  2. अश्वगंधा और विधारा 500-500 ग्राम कूट पीसकर रख लें। 10 ग्राम दवा सुबह गाय के दूध के साथ खाने से वात रोग खत्म हो जाते हैं।
  3. अश्वगंधा और मेथी की 100-100 ग्राम मात्रा का बारीक चूर्ण बनाकर, आपस में गुड़ में मिलाकर 10 ग्राम के लड्डू बना लें। 1-1 लड्डू सुबह-शाम खाकर ऊपर से दूध पी लें। यह प्रयोग वात रोगों में अच्छा आराम दिलाता है। जिन्हें डायबिटीज हो, उन्हें गुड़ नहीं मिलाना चाहिए, उन्हें सिर्फ अश्वगंध और मेथी का चूर्ण पानी के साथ लेना चाहिए।

अंगुलियों का कांपना

3 से 6 ग्राम अश्वगंधा नागौरी को गाय के घी और उसके चार गुना दूध में उबालकर मिश्री मिलाकर प्रतिदिन पीने से अंगुलियों का कांपना दूर हो जाता है। इससे रोगी को काफी लाभ मिलता है।

ल्यूकोरिया

जिन महिलाओं को सफेद चिपचिपा पदार्थ निकलने की समस्या रहती हो यदि वह अश्वगंधा का सेवन करें, तो उन्हें बहुत आराम मिलेगा.

अश्वगंधा का सेवन कैसे करे (ashwagandha kaise khaye)

अश्वगंधा प्रकृति का दिया हुआ अमूल्य वरदान है जिसे कई तरह के रोगो के लिए आयुर्वेदिक दवाइयो मे इसतमाल करते है पर इसका सेवन करने का तरीका हुमे मालूम होना चाहिए। बाज़ार में अश्वगंधा के जड़ पाउडर में या तो सूखे रूप में या ताज़ा जड़ के रूप में उपलब्ध होते है आजकल तो पतंजलि के भी अश्वगंधा कैप्सुल या पाउडर बाज़ार में उपलब्ध होते है।

आप 10 मिनट के लिए पानी में अश्वगंधा पाउडर को उबालकर अश्वगंधा की चाय बना सकते है पर एक कप पानी में एक चमच से अधिक न दे ।आप सोने से पहले अश्वगंधा जड़ के पाउडर को गरम दूध के एक गिलास के साथ भी ले सकते है। अश्वगंधा शरीर मे आयरन को बढ़ा देता है,हर दिन तीन बार 1-1 gm सेवन करने से शरीर मे खून की मात्रा बढ़ सकती है। इससे हमारे शरीर का पाचनशक्ति अच्छा होता है।

अश्वगंधा के नुकसान इन हिंदी – ashwagandha ke nuksan in hindi

अधिक उपयोग से शरीर पर हो सकते हैं इसके गलत परिणाम

कई बीमारियों का सफल इलाज अश्वगंधा से होता है और आयुर्वेद में अश्वगंधा से कई तरह की औषधी भी बनाई जाती है जो त्वचा संबंधी बीमारियों, थायराइड, शरीर का पतला पन जैसी बीमारियों को जड़ से ठीक करता है। लेकिन इसका अधिक उपयोग करने से शरीर में इसके गलत परिणाम भी हो सकते हैं आखिर अश्वगंधा से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।

पेट की बीमारी के साथ-साथ नींद अधिक आती है

अश्वगंधा के अधिक सेवन से पेट संबंधी दिक्कतें होने लगती है जैसे पेट में अधिक गैस बनना, दस्त लगना, उल्टी आना आदि।यही नहीं अश्वगंधा आतों को भी हानी पहुंचाता है इसलिए इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

अश्वगंधा का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान है इंसान को नींद ज्यादा आने लगती है और अधिक समय तक लेते रहने से इंसान को फिर नींद आना भी बंद हो जाता है जो सेहत के लिए अधिक खतरनाक है। जब भी अश्वगंधा का इस्तेमाल करें किसी चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

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शरीर पर किसी दवा का न लगना

तीसरा सबसे बड़ा नुकसान है कोई दवा शरीर पर नहीं लग पाती है यदि आप अश्वगंधा का प्रयोग लंबे समय से कर रहे हो तो यह अन्य दवाइयों को शरीर पर लगने नहीं देती है जिस वजह से रोगी और बीमार होने लगता है यदि आप अश्वगंधा का इस्तेमाल कर रहे हो तो अपने डॉक्टर से ही पूछकर कोई दूसरी दवाई लें।

बढ़ाए शरीर की गर्मी

जो लोग अश्वगंधा का इस्तेमाल अधिक करते हैं उनके शरीर में परिवर्तन आने लगता है जैसे शरीर का तापमान अधिक बढ़ना जिसकी वजह से बुखार तक आने लगता है यदि आपका तापमान बढ़ने लगे तो आप इसका सेवन करना तुरंत बंद कर दें नहीं तो परेशानी अधिक बढ़ सकती है साथ ही अपने डॉक्टर को इस बारे में जरूर बता दें।

अश्वगंधा का सेवन कौन न करे – ashwagandha side effects in hindi

किन लोगों को अश्वगंधा के सेवन से बचना चाहिए ये भी जानना जरूरी है ।

जो लोग शुगर, गठिया, अर्थराइटिस आदि बीमारियों से बचने के लिए अश्वगंधा का इस्तेमाल करते हैं उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए अल्सर के रोगी, गैस की समस्या वाले रोगी और गर्भवती महिलाओं को भी अश्वगंधा का सेवन करने से बचना चाहिए। अश्वगंधा जितना शरीर के लिए लाभदायक है उतना ही इसके विपरीत गुण भी हैं जो आपको पता होने चाहिए ताकि आप इससे होने वाली गंभीर दिक्कतों से बच सके इसलिए अपने डॉक्टर की सलाह पर ही अश्वगंधा का इस्तेमाल करें।

हकलाने की समस्या आयुर्वेद से कैसे सही करे, जानिए

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हकलाने या तुतलाने का रोग अधिकतर नाड़ियों में किसी प्रकार से दोष उत्पन्न होने के कारण होता है। यह रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो एक हकलाने वाले व्यक्ति की नकल करते रहते हैं।

हकलाकर बोलना और अटक-अटक कर बोलना, दोनों का मतलब एक ही है – वाक् शक्ति में गड़बड़ी, जिसमे बोलनेवाला, बोले हुए शब्दों को दोहराता है या उन्हें लंबा करके बोलता है। हकलाने वाला या अटक कर बोलने वाला, बोलते-बोलते रुक सकता है या कुछेक शब्दांशों की कुछ आवाज़ ही नहीं निकाल पाता।

हकलाने और अटककर बोलने की बीमारी अधिकतर बच्चों में पाई जाती है और हकलाने वाले बच्चों के माता पिता को बच्चों की यह बीमारी असीमित परेशानी में डाल देती है, और बच्चों को निराशा से भर देती है और फिर, आजकल के मशीनी युग में बच्चों में यह बीमारी इतनी गहन भावनाएं पैदा करती है, कि विचारों और अनुभवों को शब्दों में परवर्तित करना मुश्किल हो जाता है।

हकलाने की समस्या से राहत पाने के लिए आप निचे दिए हुए असरदार आयुर्वेदिक घरेलु उपाय कर सकते हैं-

  • गुनगुने ब्राह्मी तेल से सिर पर 30 से 40 मिनट तक मालिश करें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहा लें। इससे स्मरण शक्ति में सुधार होता है और अटककर और हकला कर बोलने का दोष मिट जाता है ।
  • सूर्य  की तरफ पीठ करके एक आइना पकड़कर और मुँह खोलकर ऐसी स्थिति  में बैठें ताकि सूर्य की रोशनी आईने से प्रतिम्बिबित होकर आपके खुले मुँह में प्रवेश करे। गहरी साँस लें और धीरे धीरे अपना मुँह खोलें, और आईने को अपनी जीभ पर प्रतिम्बिबित करें। जीभ आपके मुँह के निचले भाग की तरफ होनी चाहिए अगर आपने सही तरह से निर्देशों का पालन किया है। अपनी जीभ को ढीला छोड़ दें, उसे कभी भी कड़ा न करें, क्योंकि ऐसा करने से हकलाहट बनी रहेगी। स्पष्ट रूप से ‘क्या हो’ शब्द का बार बार उच्चारण करें। आपकी जीभ को सुचारू रूप से कार्यशील करने के लिए यह एक उत्तम उपाय माना जाता है।
  • रोगी व्यक्ति यदि प्रतिदिन 10 कालीमिर्च के दाने और बादाम की गिरी को पीसकर मिश्री में मिलाकर चाटे तो उसका तुतलाने तथा हकलाने का रोग ठीक हो जाता है।
  • सोयाबीन को दूध में डालकर उसमें शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से स्नायु की सूजन ठीक हो जाती है। इससे हकलाने तथा तुतलाने का रोग बिल्कुल ठीक हो जाता है।
  • पानी में नमक डालकर प्रतिदिन स्नान करने से रोगी का तुतलाने तथा हकलाने का रोग दूर हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को गहरी नींद लेनी चाहिए तथा कम से कम 7-8 घंटे तक सोना चाहिए।
  • प्रतिदिन शुष्कघर्षण आसन करने तथा इसके बाद साधारण स्नान करने से हकलाने तथा तुतलाने का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराते समय अपनी सभी मानसिक परेशानियों, भय, चिंता आदि को दूर कर देना चाहिए।
  • यदि रोगी व्यक्ति किसी कार्य को करते समय जल्दी थक जाता हो तो उसे वह कार्य नही करना चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को झगड़ा-झंझट, वैवाहिक जीवन की असंगति, पारिवारिक क्लेश, आर्थिक कठिनाइयां, प्रेम सम्बन्धी निराशा, यौन सम्बन्धी कुसंयोजन तथा क्रोध, भय आदि मानसिक कारणों से दूर रहना चाहिए क्योंकि इन सभी कारणों से रोग की अवस्था और भी गम्भीर हो सकती है।
  • शहद में कालीमिर्च मिलाकर प्रतिदिन चाटने से हकलाना तथा तुतलाना ठीक हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को खाना खाने के बाद अपने मुंह में छोटी इलायची तथा लौंग रखनी चाहिए तथा जीभ को प्रतिदिन साफ करना चाहिए और यदि कब्ज की शिकायत हो तो उसे दूर करना चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में शंख में पानी भरकर फिर सुबह के समय में उठकर उस पानी को प्रतिदिन पीने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  • हकलाने तथा तुतलाने के रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को एक कुर्सी पर लिटाकर शरीर को सीधा तथा ढीला छोड़ देना चाहिए। उसके बाद चेहरे की पेशियों को ढीली करके जबड़े को नीचे गिरने देना चाहिए। इस अवस्था में रोगी व्यक्ति को अपनी जीभ मुंह की तली से सटाकर रखनी चाहिए। इस व्यायाम को प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।इस रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन हैं। इन आसनों के करने से हकलाना तथा तुतलाना ठीक हो जाता है। ये आसन इस प्रकार हैं- उष्ट्रासन, हलासन, मण्डूकासन, मत्स्यासन, सुप्तवज्रासन, जानुशीर्षासन, सिंहासन, धुनरासन तथा खेचरी मुद्रा आदि।
  • किसी भी ठीक व्यक्ति को हकलाने वाले व्यक्ति की नकल नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उसे भी हकलाने की आदत पड़ सकती है।
  •  एक चम्मच सारस्वत चूर्ण और 1/2  चम्मच ब्राह्मी किरुथम शहद में मिला दें। इस मिश्रण को चावल के गोलों में मिलाकर मुँह में रखकर अच्छी तरह से चबाने से हकलाहट में लाभ मिलता है। बेहतर होगा अगर आप इसका सेवन नाश्ते के रूप में चटनी  जैसा  करें।नाश्ते के बाद 30 मिलीलीटर सारस्वतारिष्ट लेने से हकलाहट में लाभ मिलेगा।
  • गाय का घी हकलाहट को दूर करने का एक उम्दा उपचार माना जाता है।
  • कुछ कोथमीर के बीज  और पाम कैंडी वल्लाराई के पत्तों में रखकर चबाने से हकलाहट दूर हो जाती है। वल्लाराई के पत्तों को धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और इस पाउडर का नियमित रूप से सेवन करने से भी हकलाहट दूर हो जाती है।
  • नियमित रूप से एक आँवले का सेवन करने से हकलाहट कम होती है । सुबह सवेरे एक चम्मच सूखे आँवले का पाउडर और एक चम्मच देसी घी का सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।
  • 12 बादाम पूरी रात पानी में सोख कर रखें, और सुबह उनके छिलके उतार कर पीस लें, और उन्हें 30 ग्राम मक्खन के साथ सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।
  • हकलाहट दूर करने के लिए 10 बादाम और 10 काली मिर्च मिश्री के साथ पीस कर दस दिन तक सेवन करें।
  • सोने से पहले छुआरों का सेवन करें पर कम से कम 2 घंटों तक पानी न पीयें। इससे आवाज़ भी साफ़ हो जायेगी और हकलाहट भी दूर हो जायेगी।

अगर आपके बच्चे की हकलाने की आदत 6 महीने से ज़्यादा और 5  वर्ष की उम्र से ज़्यादा तक जारी रहती है तो तुरंत किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।

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दातुन के फायदे जानेंगे तो आप टूथपेस्ट को हाथ भी नहीं लगाएंगे

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दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए बाजारों में तरह-तरह के हर्बल, केमिकल टूथपेस्ट और पाउडर मौजूद हैं, ऐसे में लोग अब औषधीय गुणों से भरपूर नीम के दातुन या अन्य दातुन को नजरअंदाज करने लगे हैं। जो दांतों की सेहत के लिहाज से गलत है।

वैसे गांवों में लोग आज भी दांतों को साफ करने के लिए दातुन का इस्तेमाल करते हैं, पर शहरी आबादी में इसका नाम भी सुनने को नहीं मिल रहा।

आयुर्वेद में वर्णित दंतधावन विधि में अर्क, न्यग्रोध, खदिर, करज्ज, नीम, बबूल आदि पेड़ों की डंडी की दातुन करने के लिए कहा गया है। यह सभी दातुन कटु/तिक्त रस की होती हैं।

अब प्रश्न उठता है कि कटु या तिक्त रसों से प्रधान दातुन ही क्‍यों? दरअसल, मधुर, अम्ल, लवण रस कफ दोष की वृद्धि करते हैं, जबकि कटु, तिक्त, कसैला रस कफ दोष का नाश करते हैं।

धार्मिक दृष्टि से दातुन का महत्व

दातुन न केवल सेहत व बौद्घिक क्षमता के लिए बेहतर है बल्कि धर्म और अध्यात्म की दृष्टि से भी बेहतर माना जाता है। यही वजह है कि व्रत, त्यौहार वाले दिन बहुत से लोग ब्रश की बजाय दातुन से दांत साफ करते हैं। धार्मिक दृष्टि से दातुन का महत्व इसलिए भी माना जाता है, क्योंकि दातुन जूठा नहीं होता जबकि टुथब्रश हर दिन नया प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

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आयुर्वेद और दातुन

आयुर्वेद में वर्णित दंतधावन विधि में अर्क, न्यग्रोध, खदिर, करज्ज, नीम, बबूल आदि पेड़ों की डंडी की दातुन करने की सलाह दी जाती है। दरअसल आयुर्वेद में मुख प्रदेश को कफ का आधिक्य स्थान कहा जाता है। ऐसे में सुबह का काल भी कफ प्रधान होता है व पूरी रात सोने के कारण मुह के अंदर कफ जमा हो जाता है। इसलिए शास्‍त्रों में कफ दोष का नाश करने वाले कटु, तिक्त एवं कसैला प्रधान रस वाली दातुन का प्रयोग करने को कहा जाता है।

टूथपेस्टों से बेहतर

आज-कल इस्तेमाल किये जाने वाल टूथपेस्टों में से काफी में नमक एवं अम्ल रस भी मिलाया जाता है। अम्ल या लवण रस दांतों को तो साफ कर देते हैं, लेकिन यह रस हमारे मसूड़ों को क्षति पहुंचा सकते हैं। जबकि दातुन में ऐसी कोई समस्या नहीं होती है।

दांत ही नहीं पेट के लिये भी लाभदायक

जब आप दातुन बनाने के लिए दांतों से टहनी को चबाते हैं तो उस समय बनने वाले रस को थूकने के बजाए निगल लें। इससे आंतों की सफाई होती है और रक्त भी साफ होता है, साथ ही त्वचा संबंधी रोग भी नहीं होते हैं।

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नीम

आयुर्वेद में बताया गया है कि नीम का दातुन केवल दांतों को ही स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि इसे करने से पाचन क्रिया ठीक होती है और चेहरे पर भी निखार आता है। यही वजह है कि आज भी बहुत से पुराने लोग नियमित नीम की दातुन का ही इस्तेमाल करते हैं।

बबूल

आयुर्वेद में उल्लेख है कि दातुन न सिर्फ आपके दांतों को चमकाता है बल्कि आपकी बौद्घिक क्षमता और स्मरण शक्ति को भी बढ़ता है। मसूड़ों और दांतों की मजबूती के लिए बबूल के दातुन से दांत साफ करने चाहिये। ये दांतो और मसूड़ों दोनों को अच्छा रखता है।

बेर

आयुर्वेद के अनुसार बेर के दातुन से नियमित दांत साफ करने पर आवज साफ और मधुर होती है। इसलिए जो लोग वाणी से संबंधित क्षेत्रों में रुची रखते हैं या इस क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें बेर के दातुन का नियमित इस्तेमाल करना चाहिए।

कैसे करें दातुन

दातुन को ऊपर के दांतों में ऊपर से नीचे की ओर और नीचे के दांतों में नीचे से ऊपर की ओर करा चाहिये। इससे मसूड़े मजबूत होंगे और पायरिया की समस्या भी नहीं होगी। नीम की दातुन नेचुरल माउथफ्रेशनर का भी काम करती है और इसे करने से मुंह से दुर्गंध नहीं आती। दातुन को आप सुबह पांच मिनट से लेकर 15 मिनट तक किया जा सकता है।

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