अगर आप पैरों के दर्द से परेशान है तो करें ये घरेलु उपाय, तुरन्त असर होगा

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pair dard ka ilaj in hindi: पैरों में दर्द एक आम बीमारी है, जो जीवन के एक बिंदु पर आकर किसी को भी प्रभावित कर सकती है। यह पैरों की उंगलियों, एड़ी, तलवे और टखने सहित पैरों में कहीं भी हो सकता है।

क्या आपके पैरों में दर्द रहता है और कमजोरी महसूस होती है? और दर्द होने पर आप अक्‍सर पेनकिलर दवाओं का सहारा लेते हैं। कुछ घरेलू उपचार आपके पैरों की देखभाल करने में बहुत फायदेमंद होते हैं। तो आप पेनकिलर दवाओं की जगह पैरों में दर्द को दूर करने के लिए यहां दिये घरेलू उपचार को अपना सकते हैं।

पैर दर्द के कारण – Pair dard ke karan in hindi

पैरों के दर्द की कई वजहें हो सकती हैं, मसलन मांसपेशियों में सिकुड़न, मसल्स की थकान, ज्यादा वॉक करना, एक्सरसाइज, स्ट्रेस, ब्लड क्लॉटिंग की वजह से बनी गांठ, घुटनों, हिप्स व पैरों में सही ब्लड सर्कुलेशन न होना। पानी की कमी, सही डाइट ना लेना, खाने में कैल्शियम व पोटेशियम जैसे मिनरल्स और विटामिंस की कमी वगैरह से भी पैरों में दर्द की शिकायत हो जाती है। बच्चों में यह सब हड्डियों की डेवलेपमेंट व ग्रोथ के लिए और वयस्कों में यह हड्डियों के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी होता है। टिश्यूज की असामान्य ग्रोथ, स्ट्रेस, नर्व्स का डैमेज होना, स्ट्रेंथ और फिजिकल एनर्जी में कमी के अलावा बहुत ज्यादा काम करने से भी पैरों में दर्द होता है। केमिकल बेस्ड दवाइयां ज्यादा मात्रा में लेना, चोट, कॉलेस्ट्रॉल लेवल कम होना, शरीर व मांसपेशियों का कमजोर पड़ जाना, आर्थराइटिस, डायबिटीज, कमजोरी, मोटापा, हॉमोर्नल प्रॉब्लम्स, नसों में दर्द, स्किन व हड्डियों से संबंधित इंफेक्शन और ट्यूमर से भी पैरों में दर्द की शिकायत रहती है।

पैर दर्द के लक्षण – Pair dard ke lakshan in hindi

इस दर्द में मसल्स में सिकुड़न होती है और घुटनों, जांघों व पैर में दर्द रहने लगता है। कभी-कभी दर्द की वजह से एक्सरसाइज में भी दिक्कत होती है।

पैर दर्द के घरेलू उपचार – Pair me dard ke gharelu upay in hindi

सेंधा नमक

सेंधा नमक एक और प्रभावी घरेलू उपाय है, जो पैरों के दर्द से तत्‍काल राहत प्रदान करने में मदद करता है। गर्म पानी के एक टब में 2-3 बड़े चम्‍मच सेंधा नमक के मिलाकर, इसमें अपने पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए डालें। फिर अपने पैरों को ड्राईनेस से बचाने के लिए उनपर मॉश्‍चराइजर लगाये।

गर्म और ठंडा पानी  थेरेपी

गर्म और ठंडा पानी थेरेपी पैर में दर्द के इलाज के लिए एक कारगर तरीका है। गर्म पानी ट्रीटमेंट ब्‍लड फ्लों को बढ़ावा देने और ठंडा ट्रीटमेंट सूजन को कम करने में मदद करता है। दो पानी की बाल्‍टी लें एक में ठंडा पानी और दूसरें में सहने करने योग्‍य गर्म पानी डालें। अपने पैरों को तीन मिनट गर्म पानी की बाल्‍टी में डालें और तीन मिनट के बाद अपने पैरों को 10 सेकंड के लिए ठंडे पानी की बाल्‍टी में डालें। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराये। लेकिन ध्‍यान रहें कि आप गर्म पानी से शुरूआत और ठंडे पानी पर समाप्‍त करें। आप पैरों में दर्द को कम करने के लिए 10 मिनट के लिए बारी-बारी गर्म और ठंडा पैक भी लगा सकते हैं।

सिरका

सिरका, सूजन, मोच या ऐंठन के कारण होने वाले पैरों में दर्द का कारगर इलाज है। गर्म पानी की एक बाल्‍टी में दोब बड़े चम्‍मच सिरके और एक छोटा चम्‍मच नमक या सेंधा नमक मिलाये। फिर इसमें अपने पैरों को लगभग 20 मिनट के लिए डूबों दें।

सरसों के बीज

सरसों के बीज का इस्‍तेमाल शरीर से विषाक्त पानी निकालने, रक्त परिसंचरण में सुधार करने और सूजन को कम करके पैर में दर्द के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ सरसों के बीज लेकर, पीस लें और फिर इन्‍हें गर्म पानी की एक बाल्टी में मिलाये। अपने पैरों को इस पानी में 10 से 15 मिनट के लिए डालें।

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बर्फ

आइस थेरेपी भी दर्द और पैरों की सूजन को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। एक छोटे से प्लास्टिक की थैली में कुचले बर्फ के कुछ टुकड़े डाले और दर्द को दूर करने के लिए सर्कुलर मोशन में प्रभावित हिस्‍से की मालिश के लिए उपयोग करें। इससे सूजन को कम करने में भी मदद मिलेगी। लेकिन ध्‍यान रखें कि आइस पैक का उपयोग एक समय में 10 मिनट से अधिक तक न करें क्‍योंकि यह त्वचा और नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।

लौंग का तेल

लौंग का तेल सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, एथलीट फुट, नेल फंगस और पैरों के दर्द को दूर करने वाला एक अद्भुत तेल है। तुरंत राहत पाने के लिए लौंग के तेल का इस्‍तेमाल पैरों में धीरे-धीरे मालिश करने के लिए करें। मसाज रक्‍त के प्रवाह को उत्‍तेजित करता है और मांसपेशियों को आराम देता है। पैरों में दर्द की समस्या से जल्‍द राहत पाने के लिए एक दिन में कई बार मालिश करें।

तेजपात

अगर आपको दबाव, मोच या चोट के कारण पैरों में दर्द का अनुभव हो रहा हैं, तो आप परेशानी से राहत पाने के लिए तेजपात का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा यह पैरों की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है। एक कप सेब के सिरके में एक मुट्ठी तेजपात मिलाकर कुछ मिनट के लिए उबाल लें। अब सूती कपड़े की मदद से दर्द वाले हिस्‍से पर लगाये। पैर में दर्द ठीक होने तक इस उपाय को दनि में कई बार दोहराये।

यदि पेट छाती में जलन हो तो करें ये उपाय, तुरन्त राहत मिलेगी

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पेट छाती में जलन

हम जो खाना खाते हैं, उसका सही तरह से पचना बहुत ज़रूरी होता है। पाचन की प्रक्रिया में हमारा पेट एक ऐसे एसिड को स्रावित करता है जो पाचन के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है। सरल रूप में जलन पर कई बार यह एसिड आवश्यकता से अधिक मात्रा में निर्मित होता है, जिसके परिणामस्वरूप सीने में तेज़ जलन और फैरिंक्स और पेट के बीच के पथ में पीड़ा और परेशानी का एहसास होता है। इस हालत को एसिडिटी या एसिड पेप्टिक रोग के नाम से जाना जाता है।

एसिडिटी होने के कारण

एसिडिटी के आम कारण होते हैं, खान पान में अनियमितता, खाने को ठीक तरह से नहीं चबाना, और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना इत्यादि। मसालेदार और जंक फ़ूड आहार का सेवनकरना भी एसिडिटी के अन्य कारण होते हैं। इसके अलावा हड़बड़ी में खाना और तनावग्रस्त होकर खाना और धूम्रपान और मदिरापान भी एसिडिटी के कारण होते हैं। आमाषय सामान्यत: भोजन पचाने हेतु जठर रस का निर्माण करता है। लेकिन जब आमाषयिक ग्रंथि से अधिक मात्रा में जठर रस बनने लगता है तब हायडोक्लोरिक एसिड की अधिकता से एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है। बदहजमी .सीने में जलन और आमाषय में छाले इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। भारी खाने के सेवन करने से भी एसिडिटी की परेशानी बढ़ जाती है। और सुबह सुबह अल्पाहार न करना और लंबे समय तक भूखे रहने से भी एसिडिटी आपको परेशान कर सकती है।

  • अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन-वस्तुएं उपयोग करना।
  • रात को लेटने पर भी एसिडिटी के लक्षण उग्र हो जाते हैं।
  • मांसाहार।
  • अधिक शराब का सेवन करना।
  • कुछ अंग्रेजी दर्द निवारक गोलियां भी एसिडिटी रोग उत्पन्न करती हैं।
  • भोजन के बाद अम्लता के लक्षण बढ जाते हैं।

एसिडिटी के लक्षण

  1. पेट में जलन का एहसास
  2. सीने में जलन
  3. मतली का एहसास
  4. डकार आना
  5. खाने पीने में कम दिलचस्पी

एसिडिटी के आयुर्वेदिक उपचार

हरड़

यह पेट की एसिडिटी और सीने की जलन को ठीक करता है ।

अदरक का रस

नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है।

बबूना

यह तनाव से संबधित पेट की जलन को कम करता है।

अश्वगंधा

भूख की समस्या और पेट की जलन संबधित रोगों के उपचार में अश्वगंधा सहायक सिद्ध होती है।

चन्दन

एसिडिटी के उपचार के लिए चन्दन द्वारा चिकित्सा युगों से चली आ रही चिकित्सा प्रणाली है। चन्दन गैस से संबधित परेशानियों को ठंडक प्रदान करता है।

चिरायता

चिरायता के प्रयोग से पेट की जलन और दस्त जैसी पेट की गड़बड़ियों को ठीक करने में सहायता मिलती है।

इलायची

सीने की जलन को ठीक करने के लिए इलायची का प्रयोग सहायक सिद्ध होता है।

सौंफ

सौंफ भी पेट की जलन को ठीक करने में सहायक सिद्ध होती है। यह एक तरह की सौम्य रेचक होती है और शिशुओं और बच्चों की पाचन और एसिडिटी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए भी मदद करती है।

लहसुन

पेट की सभी बीमारियों के उपचार के लिए लहसुन रामबाण का काम करता है।

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मेथी

मेथी के पत्ते पेट की जलन में सहायक सिद्ध होते हैं।

एसिडिटी के घरेलू उपचार

  1. एक गिलास पानी में एक नींबू निचोडें। भोजन के बीच-बीच में नींबू पानी पीते रहें। एसिडिटी का समाधान होगा।
  2. एक गिलास जल में २ चम्मच सौंफ़ डालकर उबालें।रात भर रखे। सुबह छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें। एसिडीटी नियंत्रण का उत्तम उपचार है।
  3. आधा गिलास मट्ठा( छाछ) में १५ मिलि हरा धनिये का रस मिलाकर पीने से बदहजमी ,अम्लता, सीने मे जलन का निवारन होता है।
  4. विटामिन बी और ई युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करें।
  5. व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें।
  6. खाना खाने के बाद किसी भी तरह के पेय का सेवन ना करें।
  7. बादाम का सेवन आपके सीने की जलन कम करने में मदद करता है।
  8. खीरा, ककड़ी और तरबूज का अधिक सेवन करें।
  9. पानी में नींबू मिलाकर पियें, इससे भी सीने की जलन कम होती है।
  10. नियमित रूप से पुदीने के रस का सेवन करें ।
  11. तुलसी के पत्ते एसिडिटी और मतली से काफी हद तक राहत दिलाते हैं।
  12. नारियल पानी का सेवन अधिक करें
  13. शाह जीरा अम्लता निवारक होता है। डेढ लिटर पानी में २ चम्मच शाह जीरा डालें । १०-१५ मिनिट उबालें। यह काढा मामूली गरम हालत में दिन में ३ बार पीयें। एक हफ़्ते के प्रयोग से एसिडीटी नियंत्रित हो जाती है।
  14.  भोजन पश्चात थोडे से गुड की डली मुहं में रखकर चूसें। हितकारी उपाय है।
  15. सुबह उठकर २-३ गिलास पानी पीयें। आप देखेंगे कि इस उपाय से अम्लता
    निवारण में बडी मदद मिलती है।
  16. तुलसी के दो चार पत्ते दिन में कई बार चबाकर खाने से अम्लता में लाभ होता है।
  17. सुबह-शाम २-३ किलोमिटर घूमने से तन्दुरस्ती ठीक रहती है और इससे अम्लता की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती है।
  18. आंवला एक ऐसा फ़ल जिससे शरीर के अनेकों रोग नष्ट होते हैं। एसिडीटी निवारण हेतु आंवला क उपयोग करना उत्तम फ़लदायी है।
  19. पुदिने का रस और पुदिने का तेल पेट की गेस और अम्लता निवारक कुदरती पदार्थ है। इसके केप्सूल भी मिलते हैं।
  20. फ़लों का उपयोग अम्लता निवारंण में महती गुणकारी है। खासकर केला,तरबूज,ककडी और पपीता बहुत फ़ायदेमंद हैं।
  21. ५ ग्राम लौंग और ३ ग्राम ईलायची का पावडर बनालें। भोजन पश्चात चुटकी भर पावडर मुंह में रखकर चूसें। मुंह की बदबू दूर होगी और अम्लता में भी लाभ होगा।
  22.  दूध और दूध से बने पदार्थ अम्लता नाशक माने गये हैं।
  23. अचार,सिरका,तला हुआ भोजन,मिर्च-मसालेदार चीजों का परहेज करें। इनसे अम्लता बढती है। चाय,काफ़ी और अधिक बीडी,सिगरेट उपयोग करने से एसिडिटी की समस्या पैदा होती है। छोडने का प्रयास करें।

यदि पेशाब में जलन हो तो करें ये घरेलु उपाय, तुरंत राहत मिलेगी

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पेशाब में जलन इन हिंदी: पेशाब में जलन महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है। पेशाब में जलन होना आम समस्‍या है लेकिन बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर जाते हैं। कभी-कभी यह कुछ समय के लिये ही होती है और कभी यह महीनो तक चलती है। इस समस्‍या के कई कारण हो सकते हैं जैसे- मूत्र पथ संक्रमण, किडनी में स्‍टोन या डीहाइड्रेशन आदि। आइये जानते हैं कि पेशाब में जलन को किस तरह से घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता है।

पेशाब में जलन होने के कारण – Peshab me jalan hone ke karan in hindi

पेशाब में जलन होने के कई कारण होते हैं जो कि बहुत से लोगो को पता ही नही होता है और वे उसके लिये कुछ भी नहीं करते। तो आइये जानते हैं कि इसके कारण क्‍या हैं।

  • किडनी में स्‍टोन
  • मूत्र पथ संक्रमण
  • लीवर समस्‍या
  • डीहाइड्रेशन
  • अल्‍सर
  • संकीर्ण मूत्र मार्ग
  • प्रेगनेंसी के समय नसों या रीढ़ की हड्डी का क्षतिग्रस्‍त होना
  • यौन संचारित रोग
  • बढ़ी हुई प्रॉस्टेट ग्रंथि
  • मधुमेह
  • कुपोषण

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पेशाब में जलन घरेलू उपचार – Peshab me jalan ka gharelu ilaj/upchar/upay in hindi | Urine me jalan ka ilaj in hindi

  1. भिन्डी की सब्जी खाने से पेशाब की जलन दूर होती है तथा पेशाब साफ और खुलकर आता है .
  2. नारियल का पानी डीहाइड्रेशन तथा पेशाब की जलन को ठीक करता है। आप चाहें तो नारिल पानी में गुड और धनिया पाउडर भी मिला कर पी सकते हैं।
  3. सबसे पहले तो खूब सारा पानी पिये नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो जाएगी और पेशाब पीले रंग की दिखाई पड़ने लगेगी। दिन में कुछ घंटो के भीतर 2-3 गिलास पानी पिये। अगर पेशाब करने के बाद अधिक देर तक जलन हो तो आपको मूत्र पथ संक्रमण है।
  4. संभोग करते वक्‍त प्रोटेक्‍शन बरते क्‍योंकि योनि में सूखापन आ जाने की वजह से पेशाब में जलन होने लगती है। यदि आप लुब्रिकेंट का प्रयोग कर रहे हैं तो वाटर बेस वाले लुब्रिकेंट का प्रयोग करें ना कि रसायन युक्‍त का।
  5. खट्टे फल यानी की सिट्रस फ्रूट खाइये क्‍योकि इसमें सिट्रस एसिड होता है जो कि मूत्र संक्रमण पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया को मारता है।
  6. आमला का रस भी पेशाब की जलन को ठीक करने में सहायक है।
  7. एक पानी के गिलास में 1 चम्‍मच धनिया पाउडर मिला कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह उसे छान लें और उसमें चीनी या फिर गुड मिला कर पी लें।
  8. जननांग की स्वच्छता बनाए रखें। यदि आपको यह समस्‍या हो चुकी है तो अब से कुछ सावधानियां बरते जैसे, दिन में 2-3 बार जननांग को धोएं।
  9. कपड़े को गिला करके नाभि पर रखे तो पेशाब में और पेशाब की जगह होनेवाली जलन शीघ्र ही कम हो जायेगी |

एड़ी में दर्द हो तो करें ये 8 उपाय, तुरंत फायदा होगा

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पुरूष हो या महिलाएं एडियों का दर्द किसी को भी हो सकता है। एड़ी मे दर्द होना आजकल एक आम समस्या बन गई है। यह एक तरह का रोग है जिसमें बेहद दर्द और परेशानी होती है। इस दर्द की वजह से शरीर में और भी कई तरह की बीमारिया जैसे कमर दर्द और स्लिप डिस्क जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एड़ी में दर्द की प्रमुख वजह हैं अधिक उंचे जूते व सैंडल को पहनना आदि। हड्डी के बढ़ने से भी एड़ीयों में दर्द हो सकता है। इस लेख के जरिये हम आपको बताएंगे कि कैसे इस दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।

एड़ी दर्द के मुख्य कारण

  • हड्डी का बढ़ना
  • अधिक समय तक खड़े रहकर काम करना।
  • पोषक तत्वों को न खाना।
  • ज्यादा टाइट या कसक वाले कपड़े पहनना।
  • गिर जाने की वजह से।
  • पैर का अचानक से मुड़ना।
  • मधुमेह व मोटापा
  • अधिक नींद की गोलियां खाना।
  • उंचे जूते व सेण्डल पहनना।
  • अधिक सोना व खाना ।
  • कंकर व पत्थर का लगना।
  • उम्र के साथ मांस का कम होना।
  • कमर व पैरों के साथ पेट को किसी भी तरह का तनाव न देना आदि।
  • हार्मोन से संबंधित दवाइयां अधिक लेना।

एड़ी के दर्द से निजात पाने के आयुर्वेदिक उपाय

जितना हो सके आप आरामदायक जूते व चप्पल पहनें। स्पोर्टस जूते भी आप पहन सकते हो।

लेप का प्रयोग

यदि दर्द की वजह से चलना फिरना बंद हो गया हो तो सरसों के तेल में हल्दी को पकाकर उसमें नींबू, प्याज और नमक डालकर पेस्ट बनाएं और रात को सोने से पहले इसे एड़ियों पर लगाएं।

अश्वगंधा का प्रयोग

एड़ी के दर्द से छुटकारा पाने के लिए 1 चम्मच दूध के साथ 1 चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

कलौंजी, अजवायन, मेथी और ईसबगोल

एक चम्मच कलौंजी, एक चम्मच मेथी, एक चम्मच ईसबगोल और एक चम्मच अजवायन को पीस कर चूर्ण बना लें और सुबह एक चम्मच खाली पेट इसका सेवन करें। कुछ दिनों तक इस उपाय को करने से फायदा मिलता है।

ठंडा व गर्म पानी

एड़ी के दर्द में आप अपने सिर को गीला करें और किसी स्टूल पर बैठकर ठंडे व गर्म पानी में पैरों को बदल-बदल कर रखें। ठंडे पानी में तीन मिनट और गर्म पानी में 5 मिनट तक पैरों को रखें।

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एलोवेरा

ऐलोवरा को छीलकर इसका 50 ग्राम भाग खाली पेट खाएं।

अदरक और पोदीना का प्रयोग

एड़ियों के दर्द से मुक्ति पाने के लिए अपने भोजन में अदरक का इस्तेमाल अधिक से अधिक करें। पिण्ड खजूर को पोदीना के साथ मिलाकर चटनी बनाकर सेवन करें।

भोजन में इन चीजों को शामिल करें

अपने भोजन में आंवला, सेब, टमाटर, पत्तागोभी, कच्चा पपीता, आलू, ककड़ी और तोरई को शामिल करें। इसके साथ आप गुग्गुल का भी इस्तेमाल कर सकते हो।

एलोवेरा, अदरक और काला तिल

एलोवेरा, अदरक और काला तिल को मिलाकर गर्म करे और इसको एड़ी पर लगाए।

तलवों की जलन चुटकियों में दूर करने के घरेलु उपचार

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वैसे तो तलवों में जलन कभी कभार ही होता पर अगर यह हर वक्‍त रहे तो आपको एक्‍सपर्ट की सलाह जरुर लेनी चाहिये। तलवों में जलन तब होती है जब पैरों में खून का प्रवाह धीमा हो जाता है और यह तब होता है जब उम्र के साथ साथ पैरों की नसें क्षतिग्रस्‍त या फिर कमज़ोर हो जाती हैं।

गर्मियों के दिनों में तलवों में जलन बढ़ जाती है। इसे चिकित्साशास्त्र के अनुसार हम न्यूरोपैथी या पैरेस्‍थीसिया भी कहते हैं। आप इसे आराम से कुछ घरेलू उपचार की सहायता से ठीक कर सकते हैं।

वे लोग जो बूढे हो चुके हैं या फिर जिन्‍हें मधुमेह या फिर लंबे समय तक खड़े रह कर काम करने वालों को यह अधिकतर हो जाया करता है। अगर आपके भी तलवों में जलन रहती है तो आप नीचे दिये गए इन घरेलू उपचारों को आजमा सकते हैं।

मक्खन

मक्खन और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से हाथ और पैरों की जलन दूर हो जाती है।

सरसों का तेल

हाथ-पैरों या पैरों के तलुवों में जलन होने पर सरसों का तेल लगाने से लाभ होता है। 2 गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच सरसों का तेल मिलाकर रोजाना दोनों पैर इस पानी के अंदररखें। 5 मिनट के बाद पैरो को किसी खुरदरी चीज से रगड़कर ठण्डे पानी से धोने से पैर साफ रहते हैं और पैरों की गर्मी दूर होती है।

मेहंदी

मेहंदी और सिरके या नींबू के रस को मिला कर एक पेस्ट तैयार करें। पेस्ट को लगाने से जलन से छुटकारा मिलता है।

अदरक

अदरक के रस में थोड़ा सा जैतून तेल या नारियल तेल मिक्‍स कर के गरम कर लें और इससे अपने एडियों तथा तलवों पर 10 मिनट के लिये मालिश करें। आप चाहें तो शरीर में खून के दौरे को बढाने के लिये रोज एक छोटा अदरक का टुकड़ा चबाएं।

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विटामिन B3

विटामिन B3 खाने से तलवों के जलन से राहत मिलती है। इसके लिये आप दूध, मटर और बींस का सेवन कर सकती हैं।

धनिया

सूखे धनिये और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इसको 2 चम्मच की मात्रा में रोजाना 4 बार ठंडे पानी से लेने से हाथ और पैरों की जलन दूर हो जाती है।

नंगे पांव चलें

हरी घांस पर नंगे पांव चलने पर पैरों का ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है।

पैरों की मसाज

पैरों की मसाज करने से पैरों में खून का प्रवाह तेज बनता है, जिससे पैर ना ही जलते हैं और ना ही उनमें दर्द होता है।

सही प्रकार के जूते पहने

आपको कभी भी बहुत टाइट जूते नहीं पहनने चाहिये, नहीं तो वह पैरों के खून के प्रवाह को धीमा कर देता है।

लौकी

लौकी को घिस लें और या फिर उसके गूदे को निकाल कर पैरों के तलवों में लगाने से पैरों की गर्मी और जलन दूर होती है।

सिर्फ 5 मिनट में सिर दर्द से छुटकारा पाने के घरेलु उपाय

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सिर दर्द असल में नर्वस सिस्टम और गर्दन से जुड़ी हुई समस्या है| सुबह-सुबह सिर दर्द के साथ उठना मतलब पूरा दिन बर्बाद हो जाना| सिर दर्द एक बहुत सामान्य समस्या है पर कई बार ये इतना तेज होता है कि बर्दाश्त कर पाना मुश्‍क‍िल हो जाता है|

यूं तो बाजार में कई तरह की दवाइयां मौजूद हैं जो सिर दर्द में राहत के लिए ली जाती हैं लेकिन हर बार दवाई लेना भी सही नहीं है| शरीर में बहुत अधिक बाहरी लवण का जाना दूसरी बीमारियों का कारण बन सकता है| पर आप चाहें तो ऐसे कई घरेलू उपाय हैं जिनसे आप अपना सिर दर्द चुटकी में दूर कर सकते हैं|

ये उपाय इतने आसान हैं कि आप इन्हें अपने ऑफिस में काम करते-करते भी आजमा सकते हैं| पर एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है वो ये कि आप अपने मस्तिष्क से हर बुरे विचार को निकाल दीजिए और शांत रहने की कोशिश कीजिए| इन घरेलू उपायों की अच्छी बात ये है कि ये सभी पूरी तरह सुरक्षित और कारगर हैं|

पानी के द्वारा

कुछ-कुछ देर पर पानी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा पीने से भी सिर दर्द में आराम मिलता है| एकबार आपका शरीर हाइड्रेटेड हो जाएगा तो सिर का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगेगा|

एक्यूप्रेशर के द्वारा

सालों से लोग सिर दर्द में राहत के लिए एक्यूप्रेशर का प्रयोग करते आ रहे हैं| सिर दर्द होने की स्थिति में आप अपनी दोनों हथेलियों को सामने ले आइए| इसके बाद एक हाथ से दूसरे हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच की जगह पर हल्के हाथ से मसाज कीजिए| ये प्रक्रिया दोनों हाथों में दो से चार मिनट तक दोहराइए| ऐसा करने से आपको सिर दर्द में आराम मिलेगा|

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काली मिर्च और पुदीने की चाय

सिर दर्द में काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद होता है| आप चाहें तो ब्लैक टी में पुदीने की कुछ पत्तियां मिलाकर भी ले सकते हैं|

सेब पर नमक डालकर खाने से

अगर बहुत कोशिश के बाद भी आपको सिर दर्द जाने का नाम नहीं ले रहा है तो एक सेब काट लें और उस पर नमक डालकर खाएं| सिर दर्द में राहत पाने के लिए ये एक बहुत कारगर उपाय है|

लौंग के द्वारा

तवे पर लौंग की कुछ कलियों को गर्म कर लीजिए| इन गर्म हो चुकी लौंग की कलियों को एक रूमाल में बांध लीजिए| कुछ-कुछ देर पर इस पोटली को सूंघते रहिए| आप पाएंगे कि सिर का दर्द कम हो गया है|

तुलसी की पत्त‍ियों द्वारा

आपने अक्सर लोगों को सिर दर्द होने पर चाय या कॉफी पीते देखा होगा| एकबार तुलसी की पत्त‍ियों को पानी में पकाकर उसका सेवन कीजिए| ये किसी भी चाय और काॅफी से कहीं अधिक कारगर और फायदेमंद है|

अगर खाना सही से पचता न हो तो ये उपाय करें

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पेट की पाचन शक्ति बढ़ाने के घरेलु उपाय | pachan shakti badhane ke gharelu upay : अपच पाचन तंत्र की अनियमितता के कारण होती है। यदि लिवर में मौजूद सभी एंजाइम्स अपना काम ठीक से नहीं करते, तो अपच की समस्या हो जाती है, जो बहुत ही तकलीफदेह होती है। गैस बनना, पेट में जलन, एसिडिटी ये सभी अपच के लक्षण होते हैं। अपच एक बहुत ही आम समस्या है लेकिन ये छोटी सी समस्या हमारे पूरे दिन को अस्त-व्यस्त कर देती है। हालांकि इस परेशानी से निजात पाने के लिए कई दवाएं व चूर्ण मौजूद हैं लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी इससे छुटकारा दिलाने में कारगर साबित हुए हैं।

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सौंफ

सौंफ हमेशा पाचन क्रिया को सुधारने में फायदेमंद रही है। अपने पेट को शांत रखने के लिए खाने के बाद थोडी सी सौंफ अपने मुंह में डालें व इसे अच्छे से चबाकर खाएं। अपच संबंधी विकारों में सौंफ बेहद उपयोगी है। बिना तेल के तवे पर तली हुई सौंफ और बिना तली सौंफ के मिक्चर से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है। आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग कराएं इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।

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अदरक

अगर आपको भी अपच परेशान कर रही है तो अदरक इसका रामबाण उपाय है। अदरक को आप इन तरीकों से लेकर अपच से छुटकारा पा सकते हैं। आपको अपच की समस्या है तो थोडे से अदरक को छील कर धो लें। अब इसे कूटें और एक कप में इसका रस निकाल कर हर रोज पीएं। आपको निश्चित रूप से तुरंत राहत मिलेगी। अदरक को पतला-पतला काटें। इस पतले से टुकड़ों पर काला नमक लगाएं। अब इन टुकड़ों को अपने मुंह में रखें और चबाएं। इसे एकदम से न निगलें, बल्कि चबाते हुए इसके रस को अपने पेट में जाने दें। यह अपच से राहत पाने में मदद करता है।

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एलोवेरा

एलोवेरा जैसी जडी-बूटी का नियमित सेवन करने से अपच से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। साथ ही एलोवेरा जूस पीने से पेट के कई रोग दूर होते हैं। यह पाचन तंत्रिका को मजबूत बनाता है। और शरीर के एक्स्ट्रा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। अपच के दौरान दिन में दो बार 10 से 20 मिलीलीटर ताजे एलोवेरा जेल को पिएं। या अपच की समस्या हो जाने पर थोड़े से एलोवेरा पल्प में आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से इस समस्‍या से छुटकारा मिल जाता है। सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पेट संबंधी बहुत सी समस्याये दूर हो जाती है।

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दालचीनी

कुछ लोग चाय में दालचीनी का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ इसे मसाले के रूप में अपनाना पसंद करते हैं। दालचीनी हर घर में मौजूद होती है। दालचीनी सुगंधित, पाचक, उत्तेजक, और बैक्टीरियारोधी होती है। यह पाचन क्रिया को सुधारती है व पेट में बन रही गैस से निजात दिलाती है। इसे चाय के रूप में बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर डालें तथा इसे कुछ मिनटों के लिए उबलने दें। फिर इसे पी लें।

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हरा धनिया के फायदे जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे

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भारतीय रसोई में धनिये का इस्तेमाल काफी उपयोगी होता जा रहा है। मसालों और व्यंजनों में स्वाद की मात्रा बढ़ाने और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। खास तौर पर इसकी हरी पत्तियों का इस्तेमाल तो हर घर में किया जाता है साथ ही इसके सूखे हुए बीज भी बहुत ही उपयोगी होते है।धनिये के इतने गुणों के कारण इसका महत्व इतना बढ़ गया है कि विज्ञान भी इसके अनेक औषधीय गुणों की प्रसंशा करता है। यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होता है। इसमें प्रोटीन, वसा, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल  आदि पाया जाता है। इसके अलावा हरे धनिया के पत्‍ती में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामीन, पोटोशियम और विटामिन सी भी पाया जाता हैं। गुणों से भरपूर धनिया के फायदों के बारे में हम आपको जानकारी दे रहे हैं।

कमजोरी दूर करें

अगर आपको थका-थका या शरीर में कमजोरी महसूस होती है या फिर चक्कर आते हो तो दो चम्मच धनिए के रस में दस ग्राम मिश्री व आधी कटोरी पानी मिलाकर सुबह-शाम लेने से फायदा होता है।

पाचनशक्ति बढ़ाये

हरा धनिया पेट की समस्‍याओं का निवारण करता है, यह पाचनशक्ति बढ़ाता है। धनिया की ताजी पत्‍तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है। हरा धनिया, हरी मिर्च, कसा हुआ नारियल और अदरक की चटनी बनाकर खाने से अपच के कारण पेट में होने वाले दर्द से आराम मिलता है। पेट में दर्द होने आधा गिलास पानी में दो चम्‍मच धनिया डालकर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है।

मस्‍सों से मुक्ति दिलाये

मस्‍सों से मुक्ति के लिए हरा धनिया एक कारगर उपाय है। इस उपाय को करने के लिए हरे धनिया को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे रोजाना मस्सों पर लगाएं।

त्‍वचा के लिए लाभकारी

एक चम्मच धनिया के जूस को चुटकी भर हल्दी के साथ मिलाकर मुंहासे पर लगाना लाभप्रद होता है। चेहरे पर तिल होने पर रोजाना हरे धनिए की पत्तियों को रगडऩे से लाभ होता है।

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आंखों की रोशनी बढ़ाये

नियमित रूप से हरे धनिये का प्रयोग अपने खाने में करने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है। क्‍योंकि हरे धनिये में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है जो आंखों के लिए बहुत आवश्‍यक होता है।

श्‍वास रोगों को दूर करें

हरा धनिया श्‍वास संबंधी रोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। खांसी, दमा या सांस फूलता हो तो धनिया तथा मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर रख लें। एक चम्मच चावल के पानी के साथ रोगी को पिलाएं। कुछ दिन नियमित रूप से इस उपाय को करने से आराम आने लगेगा।

अन्‍य फायदे

  • अधिक मासिक धर्म आने पर छह ग्राम धनिया के बीज को आधा लीटर पानी में उबालें। पानी आधा होने पर थोड़ी सी शक्कर मिलाकर गर्म पीएं।
  • सिर के बाल झडऩे पर हरे धनिए का रस लगाएं।
  • लू लगने पर हरी धनिया को पीसकर उसका रस निकाल लीजिए, इस रस को चीनी के साथ मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
  • नींद न आती हो तो हरे धनिए में मिश्री मिलाकर चाशनी बनाएं। दो चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लें।
  • टाइफाइड में भी यह उपयोगी है, टाइफाइड होने पर हरी धनिया के पत्‍तों का सेवन करना चाहिए।

आंत के कैंसर से बचना है तो चावल खाये

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चावल हमारे खानपान का अहम हिस्‍सा है। दुनिया की बड़ी आबादी की भूख आज भी चावल के जरिए ही मिटती है। लेकिन चावल सिर्फ हमारी भूख ही नहीं मिटाता, बल्कि यह आंतों के कैंसर से मुकाबला करने में भी सक्षम बनाता है। दुनिया के अलग-अलग देशों में खाने की आदतों और वहां आंतों के कैंसर के मामलों की तुलना करके न्‍यूजीलैंड के शोधकर्ताओं ने यह निष्‍कर्ष निकाले हैं।

यूनि‍वर्सिटी ऑफ केंटनबरी की प्रमुख शोधकर्ता प्रो. एन रिचर्डसन का कहना है कि न्‍यूजीलैंड में हर साल 2500 लोग आंत के कैंसर का शिकार होते हैं। पूरी दुनिया में ही आंतों के कैंसर के मामलों में इजाफा हो रहा है। इसके पीछे खान-पान की आदतों में आए बदलाव को जिम्‍मेदार माना जा रहा है। जापान और हांगकांग जैसे देशों में भी बीते पचास सालों के दौरान खान-पान की आदतों में बदलाव आए हैं।

इसके साथ ही यहां पर आंतों के कैंसर के मामले भी बढ़े हैं। जापान में प्रतिव्‍यक्ति चावलों की खपनत बीते बीस-तीस सालों में आधी रह गयी है। प्रो. रिचर्डसन बताती हैं कि चीन और भारत जैसे देशों में चावल की खपत में कोई फर्क नहीं आया है। इसलिए यहां आंतों के कैंसर संबंधी मामले कम देखने को मिलते हैं।

हमारे देश में चावल की पैदावार भी बहुत होती है और देश की बड़ी आबादी आज भी चावल का भरपूर इस्‍तेमाल करती है। देश के दक्षिणी राज्‍यों में तो चावल मुख्‍य भोजन के तौर पर ही पेश किया जाता है। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्‍यों में भी चावल की खपत बड़ी मात्रा में होती है। हालांकि, उत्तर भारतीय राज्‍यों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश आदि में चावल के मुकाबले गेहूं का उपभोग अधिक होता है।

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दही के अनोखे फायदे

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दही ना केवल आपको स्वास्थ लाभ बल्कि कई तरह के सौंदर्य फायदे भी देता है|दही आपके शरीर से कई रोगो को दूर करने में मदद करता है| इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ उपस्थित होते है, जिसके चलते यह दूध की तुलना में जल्दी पच जाता है। जिन भी लोगों को पेट संबंधित परेशानियां जैसे की कब्ज, गैस आदि होती है| उन्हें दही का प्रयोग जरूर करना चाहिए|

आप दही के प्रयोग को कई तरह से कर सकते है| जैसे की आप उसे प्रत्यक्ष रूप से भी खा सकते है| या फिर इससे बनी लस्सी और छांछ भी ले सकते है| इसके तीनो रूप आपके शरीर के लिए फायदेमंद है| गर्मी के दिनों में तो दही का सेवन जरूर करना चाहिए| यह ना केवल आपके शरीर को ठंडक पहुचता है, बल्कि यह आपके शरीर में बढ़ने वाली चर्बी को भी घटाता है|

दही में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन पाया जाता है। दूध के मुकाबले दही सेहत के लिए ज्यादा फायदा करता है। क्‍योंकि दूध में मिलने वाला फैट और चिकनाई शरीर को एक उम्र के बाद नुकसान पहुंचाता है। इस के मुकाबले दही से मिलने वाला फास्फोरस और विटामिन डी शरीर के लिए लाभकारी होता है। दही में दूध की अपेक्षा ज्यादा मात्रा में कैल्शियम होता है। इसके अलावा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, आयरन, फास्फोरस पाया जाता है।

आइए हम आपको बताते हैं कि दही आपके शरीर के लिए कितना फायदेमंद है।

टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम करें

डायबिटोलॉजिया जर्नल में प्रकाशित शोध की मानें तो दही के नियमित सेवन से डायबिटीज टाइप 2 का खतरा 28 प्रतिशत तक कम हो जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के मेडिकल रिसर्च काउंसिल युनिट की वैज्ञानिक डॉ. नीता फोरौही के अनुसार, दही में प्रोटीन, विटामिन, कैल्शियम और सैचुरेटेड फैट्स अच्छी मात्रा में होते हैं जो डायबिटीज टाइप 2 से दूर रखने में आपकी मदद करते हैं। इसलिए अगर आप डायबिटीज से परेशान है तो अपने आहार में दही को शामिल करें।

पेट के लिए रामबाण है दही

दही पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पेट की बीमारी से परेशान लोगों को अपने आहार में दही को प्रचूर मात्रा में शामिल करना चाहिए। पेट में जब अच्छे किस्म के बैक्टीरिया की कमी हो जाती है, जिसके चलते भूख न लगने जैसी तमाम बीमारियां पैदा हो जाती हैं। इस स्थिति में दही सबसे अच्छा भोजन बन जाता है। इसमें अच्छे बैक्टीरिया पाये जाते हैं जो पेट की बीमारी को ठीक करते हैं। यह इन तत्वों को हजम करने में मदद करता है। दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत समाप्त होती है।

हड्डियों के लिए फायदेमंद

दही कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही खाने से दांत भी मजबूत होते हैं। दही ऑस्टियोपोरोसिस (जोडों की बीमारी) जैसी बीमारी से लड़ने में भी मददगार होती है।

त्‍वचा के लिए गुणकारी

चेहरे पर दही लगाने से त्वचा मुलायम होती है और त्वचा में निखार आता है। दही से चेहरे की मसाज की जाये तो यह ब्लीच के जैसा काम करता है। गर्मियों में त्वचा पर सनबर्न की समस्‍या को दूर करने के लिए दही मलना चाहिए, इससे सनबर्न और टैन में फायदा मिलता है। इसके अलावा त्वचा का रूखापन दूर करने के लिए दही का प्रयोग करना चाहिए। जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ दही का चेहरे पर लगाने से चेहरे का रूखापन समाप्त होता है।

मुँह के छाले ठीक करे

क्या आप जानते है दही का सेवन मुँह के छाले दूर करने में भी फायदेमंद है| जब भी हमें छाले जो जाते है उसे दूर करने के लिए हम कई तरह के नुश्खे आजमाने की कौशिश करते हैं| छालो की परेशानी को दूर करने के लिए दही की मलाई को दो से तीन दिन छाले पर लगाये, इससे आपको ठंडक मिलेगी और छाले भी जल्दी ठीक हो जाएंगे।

भूख बढ़ाये

गर्मी के दिनों में आपको दही का सेवन रोज करना चाहिए| क्योकि इसके नियमित सेवन से आपकी पाचन क्रिया सही रहती हैं, और आप पूरा दिन खुद को तारो ताज़ा महसूस करते हैं। जिन लोगो को भूख ना लगने की शिकायत होती है, उनके लिए तो यह बहुत फायदेमंद है|

इसके अलावा यदि किसी को अपच की समस्या हो तो पीसी हुइ काली मिर्च, पिसा हुआ जीरा और सेंधा नमक को दही में डालकर खाने से अपच दूर होती है और खाना जल्दी पच जाता है।

मोटापा कम करे

दही मोटापे को कम करने मैं भी सहायक हैं| एक कटोरी दही रोजाना खाने से आप अपने बढ़ते वजन को नियंत्रित कर सकते है| लेकिन हां यदि आप वजन कम करने के लिए दही का सेवन कर रहे है तो बिना मलाई वाला दही खाए, मलाई वाले दही में कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है|

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अन्‍य लाभ

  • दही के सेवन से हार्ट में होने वाले कोरोनरी आर्टरी रोग से बचाव किया जा सकता है। दही के नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है।
  • दही पीने से पाचन क्षमता बढती है और भूख भी अच्छे से लगती है।
  • सर्दी और खांसी के कारण सांस की नली में इन्फेक्शन हो जाता है। इस इंफेक्शन से बचने के लिए दही का प्रयोग करना चाहिए।
  • मुंह के छालों के लिए यह बहुत ही अच्छा घरेलू नुस्खा है। मुंह में छाले होने पर दही से कुल्ला करने पर छाले समाप्त हो जाते हैं।
  • लू से बचने के लिए दही का प्रयोग किया जाता है। लू लगने पर दही पीना चाहिए।

गर्मी के मौसम में दही और उससे बनी छाछ का ज्यादा मात्रा में प्रयोग किया जाता है। क्योंकि छाछ और लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है। दही का रोजाना सेवन करने से शरीर की बीमारियों से लडने की क्षमता बढती है।

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