ये बीज डायबिटीज से लेकर दिल तक की बीमारी में फायदेमंद है

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आमतौर पर तरबूज खाते समय अधिकांश लोग उसके बीज निकाल लेते हैं। कोशिश यही रहती है कि ज्यादा से ज्यादा बीज निकाल दे ताकि मुंह में न आए। वैसे भी अभी तक बच्चों को यही कहा जाता है कि अगर आप तरबूज के बीज निगल गए तो आपके पेट में तरबूज का पेड़ उग जाएगा। अगर आपने कभी तरबूज के बीज खा भी लिए तो आपको पता है कि ये बात सच नहीं है। लेकिन यह सवाल जरूर मन में उठता है कि क्या तरबूज के बीज खाना सुरक्षित है, क्या यह पचाने में हेल्दी है?

जी हां, तरबूज के बीज निगलने के लिए सौ प्रतिशत सेफ है। तरबूज के बीज कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हें अच्छे से चबाकर खाना चाहिए, जिससे हमारा शरीर इन पोषक तत्वों को पा सके।

तरबूज के काले और सफेद दोनों तरह के ही बीज खाने के लिए सेफ होते हैं। ये दोनों केवल परिपक्वता के कारण अलग दिखते हैं। इनमें मैग्नीशियम,पोटाशियम,फास्फोरस और तांबे जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

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पकाने की विधि

20-30 तरबूज के बीज लेकर पीस लें। अब इसे 2 लीटर पानी में 15 मिनट के लिए उबालें जिससे यह एक सिरप बन जाएगा। इसे दो दिन मे पीकर खत्म करें। हफ्ते में दो बार यह प्रक्रिया दोहराने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं दूर होंगी। इसके अलावा बीजों को सूखा कर खाने से भी लाभ होता है।

दिल के लिए अच्‍छा

तरबूज के बीज मैग्‍नीशियम का समृद्ध स्रोत होने के कारण हृदय की कार्यप्रणाली को नॉर्मल रखने, रक्‍तचाप को बनाये रखने और मेटाबॉलिक सिस्टम को सपोर्ट करता है।  यदि आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो तरबूज के बीज का सेवन करें। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि तरबूज आपके शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता और वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह कार्डियोवस्कुलर रोगों और हाइपरटेंशन में भी फायदेमंद है।

डायबिटीज पर नियंत्रण

डायबिटीज के इलाज में भी तरबूज के बीज फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है। यदि आपको डायबिटीज की समस्‍या है और आपकी शुगर हमेशा घटती बढ़ती रहती है तो तरबूज के बीज को थोड़े से पानी में उबालें। इस पानी को रोजाना चाय की तरह पिएं।

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बालों को टूटने से रोके

तरबूज के बीज का नियमित रूप से सेवन करने से इसमें पाया जाने वाला आवश्‍यक फैटी एसिड बालों के टूटने को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा बीज बालों के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाये रखने में मदद कर बालों के विकास को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तरबूज के बीजों को चबाकर खाने से बालों की जड़ें मजबूती होती हैं।

स्‍कैल्‍प की खुजली दूर करे

तरबूज के बीज से बने तेल की बनावट बहुत हल्‍की होती है इसलिए यह सिर के पोर्स को बंद किये बिना आसानी से अवशोषित हो जाता है। इसके अलावा, यह ड्राई और  परतदार स्‍कैल्‍प के लिए मॉइस्चराइजिंग लाभ प्रदान करता है।

मुंहासे दूर करे

मुंहासे की समस्या होने पर तरबूज के बीज का तेल चेहरे पर लगाएं। तरबूज के बीज का तेल त्‍वचा पर लगाकर कॉटन की मदद से इसे साफ करें। यह चेहरे से गंदगी और सिबम को हटाकर पोर्स को खोल देता है तथा त्वचा को सुंदर बनाता है।

त्‍वचा को जवां बनाये

तरबूज के बीज में एंटीऑक्‍सीडेंट गुण पाये जाते हैं जो त्‍वचा को युवा और स्‍वस्‍थ बनाये रखने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें पाया जाने वाला लाइकोपिन त्‍वचा को लंबे समय तक जवां बनाये रखता है। इसके अलावा इसके बीजों को खाने से कुछ प्रकार के त्‍वचा कैंसर और संक्रमण से त्‍वचा की रक्षा होती है।

ये हैं तरबूज के बीज खाने के अन्य फायदे 

– किसी भी गंभीर बीमारी के बाद शरीर में बहुत सी कमजोरी आ जाती है। ऐसे में इसको लेने से फायदा होता है। ।

– इसमें मौजूद डायट्री फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को खत्म करने में सहायक होते हैं। कब्जियत की समस्या में भी यह बेहद लाभकारी है।

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खाना बनाने का सबसे अच्छा तरीका

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बाग़भट्ट जी कहते हैं कि मनुष्य अपने जीवन की 85% चिकित्सा स्वंय कर सकता है 15% रोगों में विशेषज्ञ की जरुरत पड़ती है. उसके लिए उन्होंने स्वस्थ रहने के 15 सूत्र बताये है जिनमे से हम एक महत्वपूर्ण सूत्र आज आपको बताने जा रहे है जिसे अपने जीवन में उतारने से हम काफी हद तक बिमारियों से अपने आपको बचा सकते है.

बागभट्ट जी कहते है कि जिस भोजन को पकाते समय पवन का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश न मिले वो भोजन कभी मत करना क्यूंकि यह भोजन नही विष है. दुनिया में दो तरह के विष हैं एक जो तत्काल असर करे और दूसरा जो धीरे धीरे( 2 साल से 20 साल) असर करे और आपको धीरे धीरे मरने की स्तिथि में पहुंचा दे और यह भोजन जिसमें सूर्य का प्रकाश न हो या पवन का स्पर्श न हो बह भोजन दूसरी तरह का ही जहर है जो धीरे धीरे असर करता है

अब तक हम बागभट्ट जी के शब्दों में बात कर रहे थे अगर हम राजीव जी द्वारा कहे गए या आज की भाषा में बात करें तो प्रेशर कुकर का इस्तेमाल न करें क्योंकि उसमे भोजन बनाते समय न तो सूर्य का प्रकाश उसको मिलेगा और न ही पवन का स्पर्श, प्रेशर कुकर में अंदर की हवा तो बाहर आ सकती है. लेकिन बाहर की हवा अंदर जाने की कोई व्यवस्था उसमें नही है. यह सूत्र बाग़भट्ट जी ने 3500 साल पहले लिखा था शायद उनको पता था कि मनुष्य कभी न कभी यह डीवाईस बना ही लेगा इस सूत्र का सिद्धांत प्रेशर कुकर के साथ लागू होता है.

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राजीव जी ने यह परीक्षण वैज्ञानिको द्वारा करवाया कि बाग़भट्ट जी का सूत्र सही है या नही तो वैज्ञानिको ने यह पाया कि उनकी बात 100% सही है. उनका कहना है कि प्रेशर कुकर एल्युमीनियम के बने होते हैं और भोजन रखने के लिए और बनाने के लिए सबसे खराब मेटल यही है.

उन दोनों वैज्ञानिको ने कहा कि यदि 17 या 18 साल तक प्रेशर कुकर में बना खाना लगातार खा लिया जाए तो डाईबीटीस, आर्थराइटिस तो हो ही जायेगा और सबसे ज्यादा टी बी और अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाएगी. उन वैज्ञानिको ने कहा कि हम अब तक 48 बीमारियों को डिटेक्ट कर चुके हैं, जो प्रेशर कुकर से होती है और अधिक होने की संभावना है और इन रिसर्चरो ने सबसे ज्यादा रिसर्च जेलों में किया क्योंकि वहां सभी कैदियों को एल्युमीनियम के बर्तन में ही खाना मिलता है, उन्होंने बताया कि इस खाने से प्रतिकारक शक्ति बहुत कम होती है और रोग बहुत जल्दी आते है

किस बर्तन में पकाए भोजन

बाग़भट्ट जी कहते हैं कि मिटटी की हांड़ी में बनी हुए सब्जी खाए क्योंकि उसमें सारे न्यूट्रीयंट्स होते है. एक बार राजीव जी मिटटी की हांड़ी में बनी दाल को पूरी से लेकर भुवनेश्वर गए भुवनेश्वर में CSIR का लेबोरेटरी रिसर्च सेंटर है. तो वैज्ञानिको से उन्होंने उस दाल का विसलेषण करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि उनके पास उपकरण नही हैं. आप इसे दिल्ली ले जाइये. राजीव भाई ने कहा कि दिल्ली तक जाने में तो ये ख़राब हो जाएगी. तब वह के वैज्ञानिकों ने कहा कि ये दाल ख़राब नही होगी क्यूंकि ये हांड़ी में बनी है. उसे ले जाने में 2 दिन लगे क्यूंकि भुवनेश्वर से दिल्ली का रास्ता 2 दिन का है. राजीव भाई फिर उसे दिल्ली लेकर आये और उस पर वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च किया गया.

कितने न्यूट्रीयंट्स रह जाते है कुकर से बने भोजन में

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस दाल में मौजूद एक भी माइक्रो न्यूट्रीयंट्स पकाने के बाद भी कम नही हुए. फिर राजीव जी ने उन वैज्ञानिको को कुकर की बनी हुई दाल पर परिक्षण के लिए कहा तो उन्होंने रिसर्च के बाद कहा कि इसमें बहुत ही कम न्यूट्रीयंट्स हैं तो राजीव जी ने पूछा की कितने पर्सेंट न्यूट्रीयंट्स हैं तो वैज्ञानिको ने बताया की यदि अरहर की दाल को मिटटी की हांडी में पकाओ और उसमे 100% न्यूट्रीयंट्स हैं तो वही दाल अगर प्रेशर कुकर में बनी हो तो उसमें 13% ही न्यूट्रीयंट्स रह जायेंगे 87% खत्म हो जायेंगे.

क्या कारण है कि कुकर में सब्जी नही पकती

इसका कारण यह है कि ये जो प्रेशर पड़ा है ऊपर से इसने दाल के कणों को तोड दिया है. कण टूट गये हैं, और दाल बिखर गई हैं ,पकी नही है, सॉफ्ट हो गयी है. खाने में हमें यह लग रहा है कि यह पक्का हुआ खा रहे है लेकिन वास्तव में वो पका हुआ नही है. आयुर्वेद में पका हुआ खाने का मतलब है जो हम कच्चा नही खा सकते, उसे पका हुआ बना लें इसलिए उन्होंने कहा की यह मिटटी की हांड़ी में बननी हुई दाल बहुत उपयोगी है.

मिटटी के बर्तनों में बने खाने के फायदे

यही कारण है कि हमारे बजुर्ग जो मिटटी के बर्तनों में भोजन बनाया करते थे उन्हे कभी डाईबीटीस नही होता था, कभी अर्थराइटिस नही होता था, 100 साल से ज्यादा जीते थे और मरते समय तक 32 के 32 दांत सुरक्षित होते थे. आँखों पे चश्मा नही होता था

विडियो देखें >>

Source: www.rajivdixitji.com

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शरीर, दिमाग को एक्टिव रखने का रहस्य

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राजीव दीक्षित जी ने दो ऐसी चीजें बताई जिसका अमल करना आवश्यक हैं.

  • दोपहर को अगर आपने खाना खाया है, तो भोजन करने के बाद २० मिनट का विश्राम लेना आवश्यक है
  • रात्रि का भोजन लेने के बाद कम से कम २ पास तक विश्राम नहीं लेना आवश्यक है।

ये दोनों एक दूसरे के विपरीत बाते है। दोपहर भोजन करते ही तुरंत आपको कोई और काम नहीं करना है और विश्राम लेना है और रात का भोजन किया है तो 2 घंटे तक कभी भी विश्राम नही लेना.

उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि दोपहर को शरीर में पित का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और पित एक ऐसी अवस्था है जिसमे विश्राम न हो तो वो भड़कती है। अगर आपको पित है तो शांति से बैठ जाइये तो पित भी शांत हो जायेगा। लेकिन अगर आपने काम करना शुरू कर दिया तो पित इतना भडकेगा की पुरे शरीर में आग लगेगी. इसीलिए, सभी माताओं को,  बहनों को, भाइयों को भाई राजीव दीक्षित जी की विनंती है कि दोपहर का भोजन करने के बाद कम से कम 20 मिनट का विश्राम जरूर लीजिये।g

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उन्होंने दोपहर के भोजन के बाद विश्राम कैसे लेना है उसका तरीका भी बताया। उन्होंने बताया कि दोपहर का विश्राम लेफ्ट साइड जिसको मराठी में दबा बजी कहते है यानी की दाबा बाजु की तरफ सो के लेना है, किसको बहुत सुंदर शब्द में वाम कुर्शी का नाम दिया गया हैं. वाम कुर्शी माने लेफ्ट साइड में लेटना। 20 मिनट लेटने में अगर झपकी आ गयी तो ले लेना।

झपकी लेने का फायदा बताते हुए उन्होंने कहा कि रात्रि को 6 घंटे की झोक और दोपहर को 40 मिनट से एक घंटे की झोक दोनों बराबर है। दोपहर को खाने के बाद 1 घंटे की नींद आयी उसका उतना ही लाभ होता है जितना शरीर को रात्रि की 6 घंटे की नींद का होता है। इसलिए आप सभी को मेरी विनती है सब भोजन के तुरंत बाद विश्राम ले लीजिये। कोई भी कम इतना जरूरी नहीं है, आपकी जिंदगी में जितना जरूरी आपका शरीर हैं।

ऐसे भी बहुत लोग होंगे जिनकी पुरे दिन की नौकरी होती हैं। उनको राजीव जी ने एक मजेदार बात बताते हुए कहा कि आप में से कुछ लोग ऐसे होंगे के जो सर्विस मे है, बैंक में काम करते है, बीमा कंपनी में काम करते है, रेलवे में काम करते है या फिर स्कूल में अध्यापक है; ऐसे लोग कैसे विश्राम लेंगे? ये तो आपकी तो समस्या है ही लेकिन राजीव भाई ने एक अच्छी और मजेदार जानकारी सबको दी थी. वो ये कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, मक्सिको आदि दुनिया के 23 देशो की सरकारों ने दोपहर के भोजन के बाद 20 मिनट के विश्राम का कानून बना दिया है। उनके देश में, अगर कोई भी कंपनी में दोपहर के भोजन के बाद 20 मिनट का विश्राम नहीं होगा तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन सरकार कैंसिल कर देगी। ऐसा भारत में कब होगा उसका मुझे मालूम नहीं लेकिन आप अपने घर में ये कानून बना लीजिये कि दोपहर के खाने के बाद थोड़ी फुर्सत निकालनी ही है।

आखिर में सारी चीज़े दोहराते हुए बताया कि 20 मिनट वीश्रामती लेफ्ट साइड आपको लेनी है, क्यूंकि दोपहर को पित बहुत तीव्र होता है और पित की तीव्रता में भोजन सही से नही पचता। इसलिए वीश्रामती बहुत आवश्यक है. लेकिन रात को भोजन के बाद 2 घंटे तक सोना नही है, क्यूंकि रात को कफ की अधिकता बहुत होती है और कफ की अधिकता में सोना तकलीफ दायक हैं, इसी लिए रात को भोजन के बाद 2 घंटे तक काम करिये, टहलिए, घूमिये, भजन – कीर्तन करिये, अभ्यास करिये लेकिन 2 घंटे के बाद ही सोइए। दो घंटे के पहले कभी नही सोना है और दिन में भोजन के तुरंत बाद विश्राम करना है।

उन्होंने आगे कहा कि अब इसमें छोटी सी बात में जोड देता हूँ, अगर आपकी कोई ऐसी मजबूरी है, जैसे आप ऑफिस में काम करते है, २० मिनट वीश्रामती का समय नही है तो आयुर्वेद ने एक छोटी सी व्यवस्था बनाई है। ये चरक ऋषि के समय नही थी, बाणभट के समय भी नही थी, ये आज के आधुनिक आयुर्वेद के चिकित्सो ने खोज करके बताया है। वो यह है कि आप वज्रासन में थोड़ी देर बैठ सके तो वो भी काफी है। दोपहर के खाने के बाद थोड़ी देर वज्रासन में बैठ जाइए। अब वो थोड़ी देर, 3 मिनट से ले के 20 मिनट तक कुछ भी हो सकता है।

आखिर में उन्होंने वज्रासन के बारे में ज्यादा बताते हुए कहा कि वज्रासन आप सभी जानते है. दोपहर को भोजन के बाद अगर वीश्रामती लेने की स्पेस नही है, सुविधा नहीं है, या फिर आप किसी ऐसी जगह फसे हुए है जहा आप विश्राम नहीं कर सकते तो वज्रासन में बैठ जाइए। ट्रेन में चलते चलते भी आप वज्रासन में बैठ सकते है, सीट 3 फीट चोडा और 6 फ़ीट लम्बा होता है तो वज्रासन जरुर कर लीजिये 3 मिनट से लेकर 20 मिनट तक । तीन मिनट कम से कम 20 मिनट अधिक से अधिक.

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इन चीजों को खाने से आता है हार्ट अटैक, जिन्‍हें आप रोज़ खा रहे हैं

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हमारा दिल पूरी जिंदगी बिना रुके काम करता रहता है। ऐसे में सेहतमंद शरीर के लिए दिल का खयाल रखना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद भारत में दिल की बीमारियों के चलते हर साल कई मौतें होती हैं।

लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आपकी खाने-पीने की आदतें आपके दिल को बहुत बीमार कर रही हैं। अगर हम अपने खान-पान पर ध्‍यान दें तो काफी हद तक दिल को सेहतमंद रख सकते हैं डाइट में सुधार करने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल और ब्‍लड प्रेशर कम होता है ।

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  • चाइनीज़ फूड कैलोरी, फैट, सोडियम और कार्बोहाडड्रेट से भरपूर होता है। यह हमारे शरीर के ब्‍लड शुगर लेवल को लंबे समय के लिए बढ़ा देता है। यानी कि आप एक बार चाइनीज़ फूड खाएंगे और लंबे समय तक आपका ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ा रहेगा।
  • आलू और मकई के चिप्‍स में भरपूर मात्रा में ट्रांस फैट, सोडियम, कार्ब्‍स और ऐसी बहुत सी चीजें पाई जाती हैं।जो आपकी सेहत और दिल के लिए बिलकुल भी अच्‍छी नहीं हैं आलू और मकई के चिप्‍स में सैचुरेटेड फैट होता है।जो पेट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है यही नहीं इन चिप्‍स में जरूरत से ज्‍यादा नमक होता है जो दिल की कई बीमारियों के लिए जिम्‍मेदार है।
  • ब्‍लेंडेड कॉफी में काफी मात्रा में कैलोरीज़ और फैट पाया जाता है। इसमें चीनी भी भरपूर मात्रा में होती है, जो ब्‍लड शुगर लेवल को बढ़ाने के लिए काफी है।यही नहीं इस तरह की कॉफी में मौजूद कैफीन भी ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ा देती है और इसका सेवन खासतौर पर डायबिटीज और हार्ट पेशंट के लिए बहुत ज्‍यादा हानिकारक है।
  • एनर्जी ड्रिंक्‍स में ग्‍वाराना और टॉराइन जैसे नैचुरल एनर्जी बूस्‍टर्स होते हैं ये जब कैफीन के संपर्क में आते हैं। तो आपके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ जाती है। एनर्जी ड्रिंक्‍स में बहुत ज्‍यादा मात्रा में कैफीन होती है इसका सबसे प्रमुख लक्षण है दिल की अनियमित धड़कन।
  • दो मिनट में बनने वाले इंस्‍टेंट नूडल्‍स बच्‍चों और बचलर्स का पसंदीदा खाना है लेकिन यह उन लोगों के शरीर को खासा नुकसान पहुंचाता है। जो इसे आएदिन खाते हैं अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे कि इंस्‍टेंट नूडल्‍स की पैकिंग करने से पहले उन्‍हें डीप फ्राइड किया जाता है।, जो आपके दिल के लिए तो किसी भी लिहाज से अच्‍छा नहीं है यही नहीं इसमें नमक भी बहुत ज्‍यादा होता है। ज्‍यादा नमक खाने से ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है जिससे दिल पर दबाव बढ़ने लगता है।
  • पिज्‍जा फैट और सोडियम का घर है इसके क्रस्‍ट में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और सोडियम पाया जाता है। पिज्‍जा में मौजूद चीज़ इस सोडियम और फैट को और ज्‍यादा बढ़ाने का काम करती है। यही नहीं पिज्‍जा सॉस में भी जरूरत से ज्‍यादा सोडियम होता है इन चीजों के सेवन से आर्टरी ब्‍लॉक हो सकती है। अगर आप पिज्‍जा के शौकीन हैं तो मैदे के बजाए गेहूं के आटे और ऑलिव ऑयल से बने क्रस्‍ट का इस्‍तेमाल करें।
  • सोडा पीने से जलन होने के साथ ही ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है यही नहीं सोडा तनाव पैदा कर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा देता है रोजाना के खान-पान में सोडा का इस्‍तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है।

यह भी पढ़े : हार्ट ब्लॉकेज (Heart Blockage) खोलने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक उपचार

वागभट्ट जी के 5 सूत्र जो आपको कभी बीमार नही होने देंगे 

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वागभट्ट जी के 5 सूत्र जो आपको कभी बीमार नही होने देंगे : प्राचीन भारतीय चिकित्सा-विज्ञान अथवा आयुर्वेद चिकित्सा-जगत मे महान आचार्य आत्रेय, सुत्रुत और वाग्भट ‘व्रध्द्त्रय’ के नाम से विख्यात है। इनके ग्रंथ आज भी आयुर्वेद के छात्रो को पडाया जाता है। वाग्भट जी का प्राचीन भारत के चिकित्सा जगत मे सम्मान और महत्व था।

वाग्भट का जन्म सिंधु नदी के तटवर्ती किसी जनपद मे हुआ था. वाग्भट जी ने आयुर्वेद के दो महत्वपूर्ण ग्रंथो अष्टांग संग्रह और अष्टांग ह्रदया सहीनता की रचना की, उनके ये ग्रंथ आज भी बड़े उपयोगी है और वैद लोग आज भी उनका सम्मान करते है। ये दोनो ग्रंथ प्राचीन काल के दो प्रमुख चिकित्सा-पद्धतियो के आधार थे।

अपने इस ग्रंथ मे ‘अष्टांग हृद्या संहिता’ के प्रथम भाग मे वाग्भट ने प्राचीन आयुर्वेदिक औषधिया, विधार्थियो के लिए आवश्यक निर्देश, दैनिक और मौसमी निरीक्षण, रोगो की उत्पति और उपचार, व्यक्तिगत सफाई, औषधि और उनके विभाग तथा उनके लाभ आदि का वर्णन किया है।

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इस ग्रंथ के दूसरे भाग मे उन्होने मानव शरीर की रचना, शरीर के प्रमुख अंगो, मनुष्य स्वभाव, मनुष्य के विभिन्न रूप और उनके आचार्नो की व्याख्या की है।

इसके तीसरे भाग मे उन्होने ज्वर, मिर्गी, उल्टी, दमा, चर्म रोग आदि बीमारियो के कारण और उपचार, चौथे भाग मे वमन और स्वच्छता के विषय मे, पाँचवे और अंतिम भाग मे बच्चो और उनसे संबंधित रोगो, साथ ही पागलपन, आँख, कान, नाक, मुख आदि के रोग और घाव आदि के उपचार, विभिन्न जानवरो और किडो के काटने के उपचार का वर्णन किया है।

साथ ही वाग्भट जी ने इस पुस्तक मे आपने पूर्ववर्ती चिकित्सको के विषय मे भी प्रकाश डाला है। इस प्रकार यह ग्रंथ आयुर्वेद का महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह ग्रंथ इस बात को सिद्ध करता है कि मध्य युग मे भारत का आयुर्विज्ञान उन्नत था और वाग्भट भारत के महान चिकित्सक थे।

वागभट्ट जी के 5 सूत्र जो आपको कभी बीमार नही होने देंगे

पहला सूत्र – जिस भोजन को पकाते समय सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श न मिले ऐसा भोजन कभी न खाएं अगर आज की भाषा में कहें तो प्रेशर कुकर का भोजन न खाना, माइक्रोवेव ओवन का भोजन न खाना और रेफरीजरेटर में रखा हुवा भोजन न खाएं

दूसरा सूत्र – भोजन बनने या पकने के 48 मिनट तक भोजन खा लेना चाहिए क्यूंकि 48 मिनट के बाद लगातार उसके न्यूट्रीयंट्स कम होने लगते हैं 2 गनते बाद आधे न्यूट्रीयंट्स रह जायेंगे और 24 गनते बाद भोजन में कोई न्यूट्रीयंट्स नही बचता

तीसरा सूत्र – तीसरा सूत्र यह है कि गेंहू का आटा जो खाए वो 15 दिन से अधिक समय का पिस्सा हुवा नही होना चाहिए और जई, मक्का, बाजरा का आटा 7 दिन से अधिक समय का पिस्सा हुवा नही होना चाहिए क्यूंकि उसके बाद इनके न्यूट्रीयंट्स ख़त्म होने शुरू हो जाते हैं हर 15 दिन के बाद नया आटा ले आयें या पिस लें या फिर इतन ही आता पिसवाएं जितना की 15 दिन में ख़त्म हो जाए

चौथा सूत्र – चोथे सूत्र के अनुसार आप अपने शारीरिक श्रम को कम मत कीजिये जब तक आप 60 साल के न हो जाएँ, उन्होंने व्यक्ति के जीवन की 3 केटेगरी बनाई हैं पहली 18 साल तक और उससे कम उम्र के बच्चे दूसरी 18 से 60 साल तक और तीसरी 60 की उम्र से उपर के व्यक्ति, और 60 साल की उम्र के बाद शारीरिक श्रम कम होता जाना चाहिए और 18 से ज्यदा की उम्र के लोग अपने श्रम को बढाता जायें जैसे 19 की उम्र में 18 की उम्र से अधिक श्रम करें और 20 की उम्र में 19 की उम्र से अधिक श्रम करें और 18 साल से कम के लोगों के लिए उन्होंने खा की उनके शरीर को अधिक श्रम करने की जरुरत खेलने के रूप में है आप उनको ज्यादा खेलने दीजिये और 18 से 60 की उम्र में ऐसा श्रम जिसमे उत्पादन हो माने कुछ फायदा हो जैसे चक्की चलाई तो आता मिला और 60 के बाद इस श्रम को कम करते जाएँ

पांचवा सूत्र – आप अपने जीवन में तासीर का ध्यान रखिये आबो हवा का ध्यान रखिये वातावरण का ध्यान रखिये जहां आप रह रहे हैं भारत एक गरम देश है और कनाडा और अमेरिका ठन्डे देश हैं भारत एक गर्म देश है इसलिए यहाँ वात की प्रॉब्लम सबसे अधिक रहती है पित्त और कफ हमेशा आपका कम रहेगा इसलिए भारत के लोगों को वाट के रोग सबसे अधिक हैं भारत के लोगों को 70% रोग वात के ही हैं 12 से 13 रोग पित्त के हैं और 10% रोग कफ के हैं तो ध्यान रहे कि ऐसे काम मत कीजिये जिससे वात बढे. जैसे आप दौड़ लगाते हैं तो हमारे यहाँ दौड़ना नही है क्योंकि दौड़ने से शरीर की गर्मी बढेगी और वात बढेगा तो घुटने बहुत जल्दी आपके थकेंगे और जितने भी भारत के रनर है उनके 35 साल की उम्र के बाद घुटने बिलकुल ख़त्म हो जाते हैं जैसे मिल्खा सिंह का कहना है कि उस समय तो वो दौड़ लिए लेकिन आज पता चलता है की दौड़ना नही था उनके दोनों नी जॉइंट्स परमानेंट डैमेज हो गये हैं तो भारत दौड़ने वाला देश नही है सिर्फ चलना है इसलिए वागभट्ट जी कहते हैं कि भारत एक गर्म देश है ऐसा कोई काम न करें जिससे वात बढेगा और युरोपे जैसे देश ठन्डे हैं वहां कफ ज्यादा जल्दी बढता हैं इसलिए वहां के लोग ऐसा कोई काम न करें जिससे कफ बढे इसलिए वागभट्ट जी कहते हैं कि तासीर का ध्यान रखें पित्त जो है सम ही रहता है. अगर इन सूत्रों का जीवन में पालन करेंगे तो आपको कोई रोग आ ही नहीं सकता

Source:www.rajivdixitji.com

खसखस खाने के फायदे

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खस खस (पोस्तदाना): खस खस और दूध दोनों में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। इन दोनों को अगर एक साथ मिलाकर पिएं तो इससे मिलने वाले फायदे अधिक होते हैं। खसखस में ओमेगा-3 और ओमेगा-6, फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, थायमिन, कैल्शियम और मैंगनीज आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को हैल्दी रखने में मदद करते हैं।इस ड्रिंक को रात में पीने से डाइजेशन खराब हो सकता है। इसलिए इसे नाश्ते से पहले पीना ज्यादा इफेक्टिव है। हम बता रहे हैं खसखस वाला दूध पीने के 10 फायदे।

खसखस  का तरह करें इस्तेमाल

खसखस को डाइट में शामिल करने के लिए 1 गिलास दूध में इसका 1 चम्मच उबाल कर सुबह या रात को पीएं।

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खसखस से होने वाले फायदे

1. इसे दूध के साथ लेने से शरीर में खून की कमी दूर होती है और एनीमिया से बचा जा सकता है।

2. खसखस में पाया जाने वाला ओपियम एल्कलॉइड्स शरीर के सभी तरह के दर्द दूर करने में मदद करता है। खास करके इसे खाने से मसल्स पेन दूर होती है।

3. गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए खसखस के बीज बढ़िया ऑप्शन है। यह शरीर के टेम्प्रेचर को कम करते हैं और शरीर को गर्मी से बचाते हैं।

4. वजन घटाने के लिए खसखस के बीज बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो वेट कम करने में मदद करता है। इसके लिए रोजाना कुछ दाने खाएं।

5. इसे लंबे समय तक लेने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा यह सर्दी-जुकाम को कम कर ने में भी मदद करता है।

6. रात को सोने से पहले खसखस को गर्म दूध में मिला कर पीने से अनिंद्रा की समस्या से राहत मिलती है और खूब नींद आती है।

7. खसखस में फाइबर काफी मात्रा में होता है जो कब्ज की समस्या नहीं होने देता।

8. ब्लड प्रेशर के मरीज के लिए खसखस का सेवन काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद पोटैशियम बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है।

9. इसके सेवन से डिप्रेशन से राहत मिलती है।

10. खसखस मे मौजूद एल्कलॉइड शरीर में मौजूद एक्सट्रा कैल्शियम को सोख कर किडनी में स्टोन बनने को रोकता है।

किन लोगों को तरबूज नहीं खाना चाहिए, हो सकती हैं कई परेशानियां!

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गर्मियों में तरबूज खाने से न सिर्फ मन तरोताजा होता है बल्कि इसमें विटामिन,मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो हमें सेहतमंद बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक व्यस्क को दिन भर में 300 ग्राम तक तरबूज का सेवन करना चाहिए। हालांकि, यह फल सबके लिए फायदेमंद नहीं है। आज हम आपको बताएंगे कि किन लोगों को तरबूज नहीं खाना चाहिए।

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1. डायबिटीज 

तरबूज काफी मीठा होता हैं। इसमें अधिक शुगर होने के कारण डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे परेशानी हो सकती है।

2. अस्थमा

अस्थमा के मरीजों को तरबूज खाने से अटैक भी हो सकता है। दरअसल, इसमें अमीनो एसिड पाया जाता है जोकि अस्थमा के मरीजों के लिए हानिकारक होता है।

3. हार्ट प्रॉब्लम

तरबूज में पोटाशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है लेकिन हार्ट के मरीजों को अधिक पोटाशियम नहीं लेना चाहिए।

4. पेट संबंधित समस्या

किसी भी चीज का अधिक सेवन करने से शरीर को नुकसान पहुंचता है। एेसे ही अगर तरबूज का अधिक सेवन किया जाए तो पेट संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

5. किडनी प्रॉब्लम

जिन लोगों को किडनी की समस्या हैं उन्हें तरबूज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसमें मिनरिल्स की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण यह समस्या बढ़ सकती है।

 

आइये जाने तरबूज के फायदे

गंजापन दूर करेंगे ये फल

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गंजापन दूर करेंगे ये फल: जब किसी से आप किसी के अपियरेंस की बात करते हैं तो लुक, कपड़े और उसके बोलने-चलने के साथ उसके बालों की भी बात बताते हैं। लेकिन इससे दुखदायी किसी के लिए और क्या होगा कि अगर कोई तीसरा आदमी गंजा  कहकर आपको संबोधित करे?

आप चाहें तो गंजेपन को कुछ आसान से तरीके अपनाकर हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं। ये ‌पांच सुपर फ्रूट को अपना दोस्त बनाकर आप गंजेपन को खत्म करने की कोशिश कर सकते हैं।

आखिर क्या हैं ये सुपर  फ्रूट्स आप भी जान लीजिए। अगर किसी ऐसे को जानते हैं जिसके बाल तेजी से झड़ रहें हैं, तो उन्हें भी इन फलों के बारे में बता सकते हैं।

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सेब और स्ट्रॉबेरी आपके साथी

स्ट्रॉबेरी तो वैसे भी सबका पसंदीदा फल होता है। एक खबर के मुताबिक स्टॉबेरी में जमकर सिलिका पाया जाता है। इससे गंजेपन को रोका जा सकता है। इसे खाने के बालों की बढ़त भी होती है।

साथ ही अगर आप सेब भी खाते हैं तो खुदका दो तरह से बचाव करते हैं। इसमें पाया जाने वाला प्रचूर मात्रा में फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन बालों को टूटने से बचाते हैं।

ये भी कहा जाता है कि सेब खरीदते वक्त इस बात का ख्याल रखें कि सेब ज्यादा चमकीले ना हों।  अत्यधिक चमकते हुए सेब कलरिंग और वैक्स किए हुए होने के खतरे में होते हैं। इसलिए बचकर, जांचकर ही इनको खरीदें।

जूस से भरें फलों का करें सेवन

झड़ते बालों को रोकने के फलों का सेवन सही मात्रा में करना ही चाहिए। खासकर ऐसे फल जिनमें जूस काफी हो। अब अंगूर को ही ले लीजिए।

इसके अलावा आपके लिए संतरे का सेवन भी काफी बढ़िया रहेगा। इसमें विटामिन सी काफी होता है। इसका मतलब है ये कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट्स, बीटा कैलोरीन, मैगनीजिसयम, फाइबर और कई तरह के विटामिन से रिच होता है।

आप चाहें तो केला भी खा सकते हैं।इसमें पोटेशियम होता है। फाइबर, पेक्टिन और कई और चीजें भी जो आपको हर मामले में फायदा ही पहुंचाएंगी।

खाना खाने के राजीव भाई के नियम

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मित्रो आप इन नियमो का पालण पूरी ईमानदारी से अपनी ज़िंदगी मे करे !!
ये नियमो का पालण न करने से ही बीमारियाँ ज़िंदगी मे आती हैं !!
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सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये !! 2 से 3 गिलास जरूर पिये !
पानी हमेशा बैठ कर पिये !
पानी हमेशा घूट घूट करके पिये !!

घूट घूट कर इसलिए पीना है ! ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है ! ये लार पेट मे जानी चाहिए ! वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे !

इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है ! रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये !पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है !

खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है !
हमेशा डेड घंटे बाद ही पानी पीएं !

खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं !!

1) जूस
2) छाज (लस्सी) या दहीं !
3) दूध

 

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सुबह खाने के बाद अगर कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये !
दोपहर को दहीं खाये ! या लस्सी पिये !
और दूध हमेशा रात को पिये !!

इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) ! दहीं दोपहर को दूध रात को !
इसके इलावा खाने के तेल मे भूल कर भी refine oil का प्रयोग मत करे !(वो चाहे किसी भी कंपनी का क्यू न हो dalda ,ruchi,gagan)को भी हो सकता है !
अभी के अभी घर से निकाल दें ! बहुत ही घातक है !
सरसों के तेल का प्रयोग करे ! या देशी गाय के दूध का शुद्ध घी खाएं ! ! (पतंजलि का सरसों का तेल एक दम शुद्ध है !(शुद्ध सरसों के तेल की पहचान है मुंह पर लगाते ही एक दम जलेगा ! और खाना बनाते समय आंखो मे हल्की जलन होगी !
चीनी का प्रयोग तुरंत बंद कर दीजिये ! गुड खाना का प्रयोग करे ! या शक्कर खाये ! चीनी बहुत बीमारियो की जड़ ! slow poison है !)

खाने बनाने मे हमेशा सेंधा नमक या काला नमक का ही प्रयोग करे !! आयोडिन युक्त नमक कभी न खाएं !!
(ये नमक वाली बात आपको अजीब लग सकती हैं ! लेकिन बहुत रहस्यमय कहानी है इस आओडीन युकत नमक के पीछे ) बाद मे विस्तार से बताई जाएगी !!

सुबह का भोजन सूर्य उद्य ! होने के 2 से 3 घंटे तक कर लीजिये ! (अगर 7 बजे आपके शहर मे सूर्य निकलता है ! तो 9 या 10 बजे तक सुबह का भोजन कर लीजिये ! इस दौरान जठर अग्नि सबसे तेज होती है ! सुबह का खाना हमेशा भर पेट खाएं ! सुबह के खाने मे पेट से ज्यादा मन संतुष्टि होना जरूरी है ! इसलिए अपनी मनपसंद वस्तु सुबह खाएं !!

खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !

इसी प्रकार दोपहर को खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे ! लेकिन इससे ज्यादा नहीं !

रात को खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना ! रात को खाना खाने के बाद बाहर सैर करने जाएँ ! कम से कम 500 कदम सैर करे ! और रात को खाना खाने के कम स कम 2 घंटे बाद ही सोएँ !

ब्रह्मचारी है (विवाह के बंधन मे नहीं बंधे ) तो हमेशा सिर पूर्व दिशा की और करके सोएँ ! ब्रह्मचारी नहीं है तो हमेशा सिर दक्षिण की तरफ करके सोएँ ! उत्तर और पश्चिम की तरफ कभी सिर मत करके सोएँ !
मैदे से बनी चीजे पीज़ा ,बर्गर ,hotdog,पूलड़ोग , आदि न खाएं ! ये सब मेदे को सड़ा कर बनती है !! कब्ज का बहुत बड़ा कारण है ! और ऊपर आपने पढ़ा कब्ज से 108 रोग आते हैं )
इन सब नियमो का अगर पूरी ईमानदारी से प्रयोग करेंगे ! 1 से 2 महीने मे ऐसा लगेगा पूरी जिंदगी बदल गई है ! मोटापा है तो कम हो जाएगा ! hihgh BP,cholesterol,triglycerides,सब level पर आना शुरू हो जाएगा ! HDL बढ्ने लगेगा ! LDL ,VLDL कम होने लगेगा !! और भी बहुत से बदलाव आप देखेंगे !!

Source: www.rajivdixitmp3.com

वात, पित्त और कफ के सभी रोग दूर करे सिर्फ 5 रुपये में

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आयुर्वेद के मुताबिक शरीर में वात यानी हवा, पित्त यानी भोजन को पचाने का रस और कफ यानी बलगम का दोष होता है। आयुर्वेद के अनुसार सिर से लेकर छाती के बीच तक के रोग कफ बिगड़ने से होते हैं। छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक में होने वाले रोग पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं। और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक होने वाले रोग वात बिगड़ने के कारण होते हैं।हर किसी में ये तीनों या फिर इनमें से कोई एक दोष पाया जाता है। भले ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति इन दोषों को न मानती हो, लेकिन आयुर्वेद में इन दोषों को दूर कर शरीर को निरोगी बनाने के तमाम तरीके दिए गए हैं।सन्तुलित पित्त जहां शरीर को बल व बुद्धि देता है, वहीं यदि इसका सन्तुलन बिगड़ जाए तो कई रोग हो सकते है। पित्त के बढ़ जाने से त्‍वचा पर चकत्‍ते, हार्टबर्न, डायरिया, एसिडिटी, बालों का असमय सफेद या बाल पतले होना, नींद न आना, क्रोध, चिडचिडापन, बहुत अधिक पसीना आना, अर्थराइटिस, मुंहासों या हेपेटाइटिस आदि जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

आयुर्वेद हीलिंग एप्प के माध्यम से पाइए आयुर्वेद से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी, विभिन्न आयुर्वेदिक व घरेलू नुस्ख़े, योगासनों की जानकारी। आज ही एप्प इंस्टॉल करें और पाएं स्वस्थ और सुखी जीवन। सबसे अच्छी बात ये है कि ऑफलाइन मोड का भी फीचर है मतलब एक बार अपने ये एप्प इनस्टॉल कर ली तो अगर आपका नेट पैक खत्म 🤣 भी हो जाता है तो भी आप हमारे घरेलू नुस्खे देख सकते है तो फिर देर किस बात की आज ही इनस्टॉल करे । नीचे दिए गए लाल रंग के लिंक में क्लिक करे और हमारी एप्प डाउनलोड करे
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पित्त प्रकृति होने पर यह सलाह दी जाती है कि आप हर 2-3 घंटे बाद कुछ न कुछ खाएं ताकि आपके शरीर में अम्ल का स्तर न बढ़े। आयुर्वेद कहता है कि अगर पित्त का दोष है, तो आपको बादाम, हरी सब्जियां, बिना नमक वाला मक्खन,  नारियल खाना चाहिए। ऐल्कलाइन खाद्य पदार्थ (क्षारीय खाद्य पदार्थ) जैसे फल, सब्जियां और अनाज खाएं। बहुत अधिक मटन आदि न खाएं और भरपूर पानी पीएं।जब शरीर में वायु तत्व सामान्य से ज्यादा हो जाता है, तो इसे वात दोष कहते हैं। अगर कोई रोग आपके शरीर को शाम के समय या देर रात परेशान कर रहा है, तो इसका अर्थ है कि उस रोग का कारण वात दोष है। मोटापा भी वात दोष के कारण होता है।वात दोष में त्रिफला को सबसे विश्‍वसनीय और प्रभावी उपचार माना जाता है। ये फल कब्‍ज में बहुत लाभकारी होते हैं। आप त्रिफला चाय या फिर आप त्रिफला को एक चौथाई चम्‍मच, आधा चम्‍मच धनिया के बीच, एक चौथाई चम्‍मच इलायची के दाने को पीस लें और इसे दिन में दो बार लें।

इसके अलावा वात दोष हो तो, दूध, दही पनीर, छाछ, मूंगफली और घी खाना चाहिए। अगर शरीर में कफ संतुलित होता है तो व्यक्ति का मन और दिमाग शांत रहता है। कफ दोष तीनों दोषों में सबसे धीमा और संतुलित माना जाता है। कफ आपके शरीर में त्वचा को नमी देने, जोड़ों को चिकना करने, लिबिडो बढ़ाने और इम्‍यूनिटी बढ़ाने में सहायक होता है। शरीर में कफ के असंतुलन के कई कारण होते हैं। आमतौर पर उन लोगों को कफ दोष का ज्यादा खतरा होता है जो दूध और दूध से बनी चीजों का अधिक सेवन करते हैं या मीठे का बहुत अधिक सेवन करते हैं। शरीर में कफ के असंतुलन को ठीक करने के लिए तीखे, कड़वे और गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करें। इसके अलावा उल्टी करने से पेट और छाती के कफ को निकालने में मदद मिलती है। उल्टी के लिए आप कड़वी आयुर्वेदिक दवाओं या नीम की पत्ती आदि खा सकते हैं। इसके अलावा कफ होने पर धूप में रहना अच्छा रहता है। ठंडी जगह पर आपको सामान्य से ज्यादा ठंड लग सकती है। इसके अलावा आप सुस्ती और आलस से बचें और थोड़ा टहलें, दौड़ें या स्विमिंग कर लें।

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