लिवर की सारी गंदगी को बाहर निकाले, मात्र 24 घंटे में

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कभी-कभी हमारी कुछ गलतियों से हमारा लिवर सुस्त पड़ जाता है और शरीर में मौजूद गंदगी बाहर नहीं निकल पाती या कुछ मात्रा में ही निकल पाती है। ये गंदगी शरीर में जमा होती रहती है जिससे हमारे शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान तो लिवर को ही उठाना पड़ सकता है। लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि मेडिकल साइंस के मुताबिक हमारे शरीर के फंक्शन से जुड़े 400 से ज्यादा काम अकेला लिवर करता है। शरीर में सबसे ज्यादा काम की जिम्मेदारी लिवर पर ही होती है और ये 24 घंटे अपना काम करता रहता है। लिवर हमारे शरीर में फैट को पचाने में मदद करता है, हमारे आहार से शरीर के विकास के लिए पोषक तत्व अलग करता है। इसके अलावा लिवर हमारे शरीर में मौजूद गंदगी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
लिवर के सुस्त पड़ने के कारण शरीर में जब गंदगी जमा होना शुरू होती है, तो शरीर इसके कुछ संकेत हमें देता है। इन संकेतों को समझकर अगर हम जल्द ही इसका इलाज शुरू कर देते हैं तो लिवर की ये समस्या ठीक हो जाती है, नहीं तो परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए आइये आपको बताते हैं कि लिवर में गंदगी के ज्यादा जमा होने पर शरीर कौन-कौन से संकेत दे सकता है।

लिवर के आसपास दर्द

पेट के ऊपरी हिस्से में जहां लिवर होता है- अगर उस जगह पर आपको दर्द महसूस होता है तो, ये लिवर में जमा गंदगी का संकेत हो सकता है। आमतौर पर ये दर्द ज्यादा तेज नहीं होता है मगर कभी-कभी तेज दर्द हो सकता है। लिवर ही हमारे आहार को पचाने और उससे पोषक तत्वों को अलग करने में मदद करता है और लिवर ही हमारे शरीर से गंदगी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। ऐसे में अगर लिवर में कुछ समस्या हो जाती है, तो शरीर से जुड़े ये सभी महत्वपूर्ण काम रुक जाते हैं।

थकान और सुस्ती

थकान और सुस्ती भी लिवर में मौजूद गंदगी के कारण हो सकती है। दरअसल हमारे आहार को पचाने और इनसे पोषक तत्वों को अलग करने का काम लिवर ही करता है। ऐसे में अगर लिवर अपना काम ठीक से नहीं करेगा, तो आहार से न तो हमें पर्याप्त ऊर्जा मिलेगी और न ही पर्याप्त पोषण, ऐसे में शरीर का थकना और सुस्त होना तो लाजमी है।

पैर और एड़ियों में सूजन

लिवर में हुई किसी समस्या को अगर आप नजरअंदाज करते हैं तो ये लिवर के लिए घातक हो सकता है। इसलिए लिवर इस परेशानी को ठीक करने की स्वयं की कोशिश करता है और नए टिशूज का निर्माण करता है। ज्यादा टिशूज हो जाने से लिवर के काम में बाधा शुरू हो जाती है और इसकी वजह से आपका रक्तचाप बढ़ जाता है। इसके कारण पैरों में एक विशेष द्रव जमा होने लगता है जिससे पैरों में सूजन आ सकती है। आमतौर पर इस सूजन में दर्द नहीं होता है।

शरीर का वजन बढ़ना

शरीर का वजन बढ़ना भी लिवर में गंदगी जमा होने का संकेत हो सकता है। दरअसल हमारा लिवर हमारे शरीर के अंदर आने वाले सभी तरह कि गंदगियों को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता है। जैसे एल्कोहल, आर्टिफिशियल स्वीटनर, ज्यादा फैट वाले आहार, कुछ विशेष दवाइयां आदि। जब आप इन पदार्थों का सेवन करते हैं तो लिवर इन्हें न तो पचा पाता है और न ही शरीर के लिए अशुद्धियों को अलग कर पाता है। बल्कि लिवर ऐसी स्थिति में गंदगी या टॉक्सिन्स को बिना फिल्टर किए फैट सेल्स में स्टोर करता रहता है, जिसके कारण आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है।

शरीर में इंफेक्शन और एलर्जी

लिवर की सुस्ती के कारण जब शरीर में ज्यादा गंदगियां जमा हो जाती हैं तो शरीर में एलर्जी के लक्षण भी दिख सकते हैं। जब हमारी रक्त शिराओं में अलग-अलग तरह के ढेर सारे तत्व एक साथ आ जाते हैं, तो हमारा दिमाग शरीर के लिए पोषक तत्व और एलर्जेन्स के बीच अंतर नहीं कर पाता है और कुछ ऐसे केमिकल्स छोड़ना शुरू करता है जिनसे इन एलर्जेन्स को कम किया जा सके। इसी कारण कई बार हमारे शरीर में एलर्जी के लक्षण दिखने लगते हैं।

हल्दी से दूर होते हैं लीवर संबंधी रोग

हम आपको आपके लीवर की सफाई करने का सबसे बेहद और आसान घरेलु तरीका बताने वाले हैं. तो इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े.

आप सभी तो हल्दी के बारे में जानते ही होंगे. हल्दी भी एक प्रकार की औषधि है लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि हल्दी हमारे लीवर को स्वस्थ रखने के काम करता है. हल्दी में विटामिन सी, विटामिन इ, विटामिन के, पोटेशियम, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नेशियम, आयरन और जस्ता जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है. हल्दी के सेवन से हमारे शरीर को बहुत सारे लाभ प्राप्त होते हैं.

दोस्तों हल्दी में पाया जाने वाला कुरक्यूमिन आपकी लीवर की सफाई करने के लिए ग्लूथिओन का निर्माण करता है. दोस्तों इस मिश्रण को तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले एक गिलास पानी में 1/4 चम्मच हल्दी डालकर अच्छी तरह से मिलाना है और तैयार मिश्रण का सेवन करना है. दोस्तों अगर आप दिन में 2 बार इस मिश्रण का सेवन करते हैं तो आपका लीवर शुद्ध हो जायेगा.

कौन सी धातु के बर्तन खाने के लिए फायदेमंद है और नुकसानदेह है!

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आहार का चुनाव हम अपने  स्वस्थ को ध्यान में रख कर करते हैं, ताकि खाना शरीर में जाने के बाद हमे ऊर्जा प्रदान करे, शरीर स्वस्थ रहे और शरीर का संतुलन बना रहे.

जिस तरह खाने के अंदर पोषक तत्व रहते हैं, वैसे ही हम खाने के लिए जो पात्र उपयोग में लाते है, उसके भी हमे फायदे और नुक्सान को ध्यान में रखना चाहिए.

इसलिए सही भोजन के साथ सही धातु के बर्तन का चुनाव भी जरूरी होता है, ताकि खाने के गुणों में वृद्धि हो और हमारा शरीर रोगों से दूर रहे.

आप भोजन पकाने और परोसने के लिए कई तरह के पात्र का प्रयोग करते होंगे लेकिन आपको उन पात्रों में गुणों का पता है?

क्या आप जानते है कि किस धातु के बर्तन में खाना खाने से क्या फायदा और क्या नुक्सान होता है?

तो आइये जानते है कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.

तांबा

कांस के बर्तन के बाद तांबे के बने बर्तन का प्रयोग होता  है. तांबा के बने बर्तन का हर घर में पूजा पाठ में भी प्रयोग लाया जाता है. इस पात्र का पानी रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध करता है, स्मरण-शक्ति अच्छी रखता है, लीवर संबंधी समस्या दूर करता है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है.

लोहा

लगभग हर घर में लोहे के बर्तन का प्रयोग भी होता है. इसमें बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, इसमें लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है. लोहा कई रोग को खत्म करता है , पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है. इसके पात्र में दूध पीना अच्छा होता है.

स्टील

वर्तमान समय में स्टील के बर्तन का उपयोग कुछ ज्यादा होता है. यह बहुत सुरक्षित और किफायती होता है. स्टील के बर्तन नुक्शान्देह नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता.

सोना

सोना एक महँगी धातु है. सोना लाल, सफ़ेद, और पीले रंग में उपलब्ध होता है. लेकिन भारत में सबसे ज्यादा पीला सोना प्रयोग में लाया जाता है.  सोने के बर्तन में पहले के राजा महाराजा भोजन करते थे. सोना एक गर्म धातु है. सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है. और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है – आँखों को तेज करता है.

चाँदी

सोने के बाद चाँदी की धातु मूल्य में दुसरे नंबर पर होती है. चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है. शरीर को शांत रखती है. इसके पात्र में भोजन बनाने और करने के कई फायदे होते हैं,  जैसे दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष , कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है.

कांस

चाँदी के बाद काँसे के बर्तन का मूल्य आता है. यह चाँदी से थोड़ी सस्ती होती है और इसके बर्तन का प्रयोग माध्यम वर्गीय परिवार में अधिक होता है. खास कर गाँव में मेहमान नवाजी के लिए इन्हीं से बने पात्र में भोजन परोसा जाता है. इसके बने पात्र में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है. लेकिन कांस्य खट्टी चीजे नहीं परोसना चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है.

पीतल

अनेक घरों में पीतल के बर्तन का भी उपयोग होता है. यह सामान्य कीमत की धातु है. इसमें भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बिमारी नहीं होती.

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है. इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है. यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. इससे हड्डियां कमजोर होती है , मानसिक बीमारियाँ होती है, लिवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है. उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है. इन बीमारियों का जड़ से इलाज नहीं हो पाता. इसलिए अंग्रेज जेल के कैदी को इसमें खाना परोसा करते थे.

इन सब बर्तनों में खाना पकाने और खाने से कुछ फायदे और कुछ नुकशान होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है.

इसलिए इन सारी बातों को ध्यान में रखकर खाना पकाने और खाने के लिए सही बर्तनों को चुनिए.

शरीर में हर तरह की गांठ, रसोली और ट्यूमर का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

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दोस्तों जिंदगी में आपको कभी भी कैंसर ना आए इसके लिए सिर्फ एक ही चीज याद रखियेगा कि आप जब भी खाना खाये तो उस खाने में डालडा घी, रिफाइंड ऑयल आदि नही होना चाहिए. दूसरी बात की ज्यादा से ज्यादा छिलके वाली चीजों का उपयोग करें जैसे की छिलके वाले चावल, दालें, छिलके वाली सब्जिया आदि. इन चीजों को खाने से आपको कैंसर के होने का सवाल ही पैदा नही होता.

इन सब के इलावा कैंसर गुटका, तम्बाकू, सिगरेट, बीडी आदि के इस्तेमाल से भी होता है. तो इन चारों चीजों का सेवन कभी न करें. क्योंकि कैंसर के ज्यादातर केस इन्ही के कारण होते है. भारत की सरकार आजकल गुटके, बीडी, सिगरेट, तम्बाकू आदि पर पाबंदी लगा रही है. जल्द ही शराब के लिए भी ठोस कदम उठाये जायेंगे. ऐसा ही चलता रहा तो हमारे देश के नौजवान कैंसर जैसी घटिया बीमारी से बच जायेंगे.

सारी दुनिया का एक ही कहना है कि इसके बचाव में ही खुद का बचाव है. आप हमेशा यही कोशिश करियेगा की कैंसर वाले मरीज़ की कीमोथेरेपी, एलोपेथी आदि जैसे ट्रीटमेंट से दूर रखा जाए. क्योंकी अगर एक बार कीमोथेरेपी हो गयी तो समझिये आप अब कुछ नही कर पाएंगे. महिलाओं को आजकल बहुत ज्यादा कैंसर की बीमारी घेर रही है. उनके  गर्भाशय में और स्तनों में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. पहले उनको ट्यूमर होता है फिर बाद में कैंसर में बदल जाता है.  तो माताओं और बहनों को ध्यान रखना चाहिए की जब भी उनके शरीर में उनको अनवांटेड ग्रोथ का पता चले तो उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए. क्योंकि किसी अंग में जैसे ही आपको अनवांटेड ग्रोथ हुई तो स्म्जिये की आपको रसोली या गांठ हो गई है. हालांकि हर गांठ या रसोली से कैंसर नहीं होता. केवल दो या तीन प्रतिशत गांठ ऐसी है, जो कैंसर में बदलती है. लेकिन आपको सतर्क तो होना पड़ेगा.

इसके लिए सबसे अच्छी दुनिया में दवा है चूना. शरीर में कहीं भी गांठ हो जाए, रसोली हो जाए जो तो उसके कैंसर में तब्दील होने के काफी चांसेस हो सकते हैं. तो इस तरह के गांठ को खत्म करने के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना. चूना यानि कि जो पान में खाया जाता है, रंगाई-पुताई में इस्तेमाल किया जाता है, पान वाले की दुकान से आसानी से मिल जाता है. उस चुने को कनक के दाने के बराबर खाइए. अब सवाल ये उठता है कि उसको खाएंगे कैसे? क्योंकि सीधे जीभ पर लगाएंगे तो जीभ फट जाएगी. तो उसको खाने का एक ही तरीका है कि आप उसको पानी में घोल कर पी लीजिए या फिर दही में घोलकर दही पी लीजिए. इसके इलावा आप उसको लस्सी में घोलकर, दाल में डालकर, सब्जी में डाल कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

महिलाओं में इस गांठ का पता कैसे चलेगा? जिन माताओं को पेट में रसौली हो जाएगी उनकी मासिक तिथि बिल्कुल बदल जाएगी. उसे पता चलेगा खून बहुत ज्यादा आएगा पर 28-30 दिन में जो आना चाहिए वह 10-15 दिन में भी आ सकता है, और हो सकता है कि वह 1 हफ्ते चले या 10 दिन चले या फिर 15 दिन चले. ब्लीडिंग बहुत होगा और थकान भी बहुत आएगी. शरीर में कमजोरी बहुत हो जाएगी. तो उससे आप तुरंत भाप लीजिए कि रसौली हो रही है या हो चुकी है. बाद में कंफर्म करना है तो सोनोग्राफी करा लीजिए. अब समझ लीजिये कि आपको चुने की जरूरत आ गई है. चुना सबसे अच्छी और सबसे सस्ती दवा है. और तो और इसके साइड इफेक्ट्स भी बहुत कम है. और दुनिया की सभी दवाएं इसी चुने से बनती है जो रसौली एवं गांठ को गलाती है.

इस विडियो में देखिए इसकी पहचान और कैसे दूर करे >>

Source: www.rajivdixitji.com

शुगर में क्या खाये और क्या नहीं

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हम आपको बताएंगे कि शुगर की बीमारी में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ अपने भोजन में शामिल करने चाहिए और कौन-कौन से आहार नहीं खाने चाहिए।
  1. डायबिटीज में क्या खाएं और क्या नहीं
  2. डायबिटीज आहार में भरपूर मात्रा में खा सकते हैं इन खाद्य पदार्थों को
  3. शुगर की समस्या में इन खाद्य पदार्थों को कम मात्रा में खाएं
  4. मधुमेह में नहीं खाना चाहिए इन खाद्य पदार्थों को
  5. शुगर की बीमारी के लिए भोजन संबंधी टिप्स

डायबिटीज में क्या खाएं और क्या नहीं

  1. शुगर में खाना चाहिए स्वस्थ वसा युक्त आहार
  2. शुगर के लिए आहार है अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स फूड
  3. मधुमेह में खाएं प्रोटीन
  4. मधुमेह रोगियों के लिए फल है लाभदायक
  5. शुगर से बचने के उपाय खाएं सब्जियां
  6. डायबिटीज में खा सकते हैं डेरी प्रोडक्ट्स

शुगर में खाना चाहिए स्वस्थ वसा युक्त आहार

मधुमेह रोगियों के लिए सभी प्रकार की वसा खराब नहीं होती हैं। कुछ अच्छी वसा भी होती हैं, जो कोशिकाओं के लिए बहुत लाभदायक होती हैं। इसके अलावा अच्छी वसा हृदय रोग की समस्या से में भी मदद करती हैं। मधुमेह में हृदय रोग की समस्या सामान्य है। इसलिए अच्छा फैट खाना मधुमेह रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है।
डायबिटीज में खाने चाहिए निम्न खाद्य पदार्थ
इनसे आपको अच्छी वसा प्राप्त होती है –
  • सूरजमुखी के बीज, कद्दू के बीज,
  • अलसी का बीज, तिल के बीज, टोफू, पालक, अखरोट, सोया और कस्तूरी आदि।
  • संतृप्त वसा के लिए इन खाद्य पदार्थों को सीमित मात्रा में खाएं जैसे घी, बटर, क्रीम, नारियल तेल आदि। इसके साथ ही साथ आप त्वचा रहित चिकन और कम वसा वाले दूध भी सीमित मात्रा में ले सकते हैं। इसके अलावा खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए बेक करना, भूनना, ब्रॉइलिंग करना आदि तरीके का इस्तेमाल करें।
डायबिटीज में कम मात्रा में खाने चाहिए निम्न खाद्य पदार्थ
इनमें बहुत अधिक मात्रा में वसा होती है –
  • मिठाईयां जैसे लड्डू, जलेबी, गुलाब जामुन आदि।
  • नारियल
  • पकौड़ा
  • समोसा
  • केला, आलू, कटहल से बना चिप्स आदि।

शुगर के लिए आहार है अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स फूड

एक खाद्य पदार्थ है, जिसमें शुगर और फाइबर मौजूद होते हैं। आप किस प्रकार के कार्बोहाइड्रेट खा रहे हैं और किस समय खा रह हैं, ये बात आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भोजन में अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स खाने से खून में शुगर की मात्रा बढ़ती है। इसलिए अपने आहार में सीमित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट खाएं। अगर आप डायबिटीज के शिकार हैं, तो बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट खाएं एवं फाइबर युक्त आहार अधिक मात्रा में खाएं। इससे आपके रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित रहेगा।
निम्न खाद्य पदार्थ फाइबर से भरपूर होते हैं –
  • सब्जियां – फूलगोभी, पालक, मक्का, शकरकंद, हरी बीन्स, ब्रोकोली, सरसों का साग, गाजर, सूखे सेम, मटर आदि।
  • फल – सेब, केला, बेरी, आम, पपीता, अनानास, अमरूद, तरबूज, अनार आदि।
  • अनाज – होल व्हीट, बेसन, ब्राउन राइस, बाजरे की रोटी, डोसा, मसूर की दाल आदि।
  • सूखे मेवे और बीज – बादाम, काजू, पिस्ता आदि।
इन खाद्य पदार्थों को बहुत कम मात्रा में खाएं या न खाएं –
  • जैम, चीनी, गुड़, शहद, आइसक्रीम, चॉकलेट, हलवा, लड्डू, जैली आदि। इन खाद्य पदार्थों में बहुत अधिक मात्रा में फैट और चीनी होते हैं। इनको अधिक खाने से खून में शर्करा का स्तर बहुत अधिक हो जाता है। इसलिए इस प्रकार का कोई भी खाद्य पदार्थ खाने से पहले अपने डाक्टर से संपर्क करें।

मधुमेह में खाएं प्रोटीन

आपके शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन, प्रोटीन को अपने डाइट में शामिल करते समय अधिक कार्बोहाइड्रेट और फैट वाले खाद्य पदार्थों से पहेज करना चाहिए क्योंकि अधिक फैट और कार्बोहाइड्रेट मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।
प्रोटीन के लिए इन खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें –
  • मूंग की दाल
  • सोया
  • राजमा
  • कद्दू के बीज

मधुमेह रोगियों के लिए फल है लाभदायक

मधुमेह रोगियों के लिए फल बहुत लाभदायक होते हैं। लेकिन शुगर से ग्रसित लोगों को फल खाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे- कम शुगर वाले फल खाएं। इसके साथ ही एक दिन में 1 से 2 फल ही खाएं। अगर आवश्यक न हो, तो फल को न छीलें। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि भोजन करने से पहले या भोजन करने के बाद और फल खाने के बीच 2 घंटे का समयांतराल हो। फ्रूट जूस,फ्रूट मिल्क या नारियल पानी न पिएं।
शुगर रोगियों के लिए फ्रूट चार्ट –
फल कितनी मात्रा में खाएं फल कितनी मात्रा में खाएं
आंवला
4 से 5
संतरा पूरे दिन में एक
सेब पूरे दिन में 1 या 100 ग्राम पपीता 2 पीस
चेरी
पूरे दिन में 10 आडू पूरे दिन में एक
खजूर पूरे दिन में 4 नाशपाती पूरे दिन में 1
अंजीर पूरे दिन में 1 या 2 अनानस 2 स्लाइस
अंगूर
10 से 12
आलूबुखारा पूरे दिन में 2
अमरूद 1 छोटा स्ट्रॉबेरी 5 से 6
कटहल
2 से 3 छोटा टुकड़ा
मीठा चूना आधा या 100 ग्राम
जामुन 10 पूरे दिन में तरबूज 2 बड़ा टुकड़ा
खरबूज
1 बड़ा टुकड़ा
अनार आधा या 100 ग्राम
लीची पूरे दिन में 10 नग

शुगर से बचने के उपाय खाएं सब्जियां

सब्जियां बिटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर के बहुत अच्छे स्त्रोत हैं। मधुमेह के रोगियों के लिए फाइबर से भरपूर सब्जियां बहुत लाभदायक हैं। इसके अलावा रोजाना कम से कम से दो बड़े चम्मच सब्जियां खाने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वजन कम करने में भी मदद मिलती है।
फाइबर की भरपूर मात्रा के लिए निम्न प्रकार की सब्जियों को खाएं –
पालक, फूलगोभी, मटर, शिमला मिर्च, लौकी, प्याज, लहसुन, अजवाइन, सेम, बैगन, सलाद, तोरी, टमाटर, ब्रोकोली आदि।

डायबिटीज में खा सकते हैं डेरी प्रोडक्ट्स

में बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन मौजूद होते हैं। इसके अलावा कम फैट या वसा रहित डेरी खाद्य पदार्थ मधुमेह रोगियों के लिए नुकसानदायक नहीं हैं क्योंकि वसा रहित खाद्य पदार्थ खाने से रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित बना रहता है।
डेरी प्रोडक्ट के रूप में इन खाद्य पदार्थों को खाएं –
  • कम वसा वाला दूध
  • वसा रहित दही और बिना फ्लेवर वाला सोया मिल्क आदि।

डायबिटीज आहार में भरपूर मात्रा में खा सकते हैं इन खाद्य पदार्थों को

निम्नलिखित शाकाहारी भोजन को अपनाकर, मधुमेह रोगी खून में शर्करा के स्तर को कम कर सकते हैं और फिट और स्वस्थ हो सकते हैं। इसके अलावा इस डाइट प्लान को भूरपूर मात्रा में खा सकते हैं।
निम्न खाद्य पदार्थों को भरपूर मात्रा में खाएं –
  • टमाटर, प्याज, खीरा, गोभी, गाजर और शिमला मिर्च का सलाद।
  • क्लियर सूप (कोर्न फ्लेवर, बटर या किसी भी प्रकार का मसाला न मिलाएं)।
  • छाछ (3 भाग पानी + एक भाग दही)।
  • दाल का पानी
  • लाइम जूस चीनी रहित
  • चीनी रहित जिलेटिन
  • प्राकृतिक मसाला जैसे अदरक, लहसुन, पुदीना, धनिया आदि।
  • रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीएं।

शुगर की समस्या में इन खाद्य पदार्थों को कम मात्रा में खाएं

  • अनाज जैसे- रोटी, चावल, ज्वार, बाजरा, रागी आदि।
  • दाल और अनाज का मिश्रण- दाल और अनाज का मिश्रण जैसे इडली, ढोकला, खिचड़ी, दाल ढोकली आदि।
  • मखनिया दूध (स्किम्ड मिल्क) और पनीर।
  • ऊपर बताए गए फलों में से 1 या 2 फल।
  • सब्जियां कम पकी हुई और इसे पकाने में रिफाइंड तेल का उपयोग करें।

मधुमेह में नहीं खाना चाहिए इन खाद्य पदार्थों को

  • चीनी, ग्लूकोज, गुड़, शहद और मिठाई। इसके अलावा क्रीम बिस्किट, आइस क्रीम, केक, चॉकलेट, पेस्ट्री, जैम, जेली आदि खाद्य पदार्थों को भी न खाएं।
  • तेल वाले अचार, तला हुआ पापड़, साबूदाना आदि।
  • तले हुए खाद्य पदार्थ – नमकीन, वड़ा, कचौरी आदि। इसके अलावा बटर, दूध की क्रीम, पनीर, मेयोनेज़, नारियल, मूंगफली, सूखे मेवे आदि खाद्य पदार्थों को बिल्कुल ना खाएं। इसके साथ ही साथ इस बात का भी ध्यान रखें की मांसहारी भोजन डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है।
  • कोल्ड ड्रिंक, हार्ड ड्रिंक, शरबत आदि भी न पिएं।
  • फल जैसे केला, आम, चीकू, शरीफा, फ्रूट जूस, फ्रूट मिल्क शेक और नारियल का पानी आदि।
  • कुछ सब्जी जैसे – आलू, शकरकंद, रतालू और कच्चे केले आदि।

शुगर की बीमारी के लिए भोजन संबंधी टिप्स

मधुमेह रोगी निम्न बातों का रखें ध्यान –

  • खाना बनाते समय कम से कम तेल का इस्तेमाल करें। इसके अलावा खाना पकाने के लिए बेकिंग, रोस्टिंग या उबालने की विधि का प्रयोग करें। सब्जी को पहले प्रेशर कूकर में पका लें और पकाने के बाद उसमें मसाला डालें। इसके साथ ही साथ बच्चों को भी सब्जी खाने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि बहुत सारे बच्चों को अनुवांशिक रूप से शुगर की समस्या होती है।
  • दूध को गर्म करें और फ्रिज में रख कर ठंड़ा कर लें। ठंडा करने के बाद दूध में जमें क्रीम को अलग कर दें। इसके अवाला चाय, कॉफी, दही, पनीर और छांछ बनाने के लिए पहली वाली विधि को दोहराएं।
  • 2 चम्मच मेथी दाने को एक कप पानी में रात भर भिगो दें और नाश्ते से पहले खाएं। इसी प्रकार सुबह 2 चम्मच मेथी दाने को पानी में भिगोकर रात को सोने से पहले खाएं।

शुगर की बीमारी में इन आदतों को अपनाएं –

  • शुगर यक्त खाद्य पदार्थ न खाएं। कृत्रिम स्वीटनर का बहुत मात्रा में इस्तेमाल करें।
  • रोजाना सुबह डीटॉक्स ड्रिंक पिएं।
  • अपने आहार में सब्जियां और फल अवश्य शामिल करें।
  • घर पर बना हुआ केक खाएं, याद रहें इसे बनाते समय बहुत कम चीनी या कृतिम स्वीटनर का इस्तेमाल करें।
  • भूख लगने पर इसे पानी, फलों के जूस या छाछ से मिटाने की कोशिश करें।
  • सूखे मेवे खाएं मगर बहुत कम मात्रा में।
  • व्यायाम रोजाना करें
  • अपना संतुलित वजन कितना होना चाहिए, इस बारे में अपने डॉक्टर से पूछें। अगर आपका वजन अधिक है, तो उसे संतुलित करने के लिए व्यायाम करें।

शुगर की बीमारी में ये सावधानियां बरतें –

  • ज्यादा नमक युक्त खाद्य पदार्थ न खाएं।
  • किसी भी हाल में नाश्ता करना न भूलें। (और पढ़ें – नाश्ता न करने के नुकसान)
  • खाना बनाते समय अधिक तेल का इस्तेमाल न करें।
  • मिठाई या केक न खाएं। अधिक चीनी वाले पेस्ट्री भी न खाएं।
  • रात को जल्दी सो जाएं और सुबह जल्दी उठें।
  • खराब कोलेस्ट्रॉल और खराब वसा वाले खाद्य पदार्थ न खाएं।
  • अधिक चिंता या तनाव से दूर रहें।
ऊपर दिए गए डाइट प्लान का पूरी तरह से पालन करें और शुगर के स्तर को नियंत्रित रख कर स्वस्थ जीवन जीयें।
चेतावनी: बिना डॉक्टर की सलाह के किसी डाइट प्लान को न अपनाएं।

Source: www.timesofcrimemp.blogspot.com

दिल का दौरा जिंदगी में कभी नहीं पड़ेगा ऐसा चमत्कारी नुस्खा है ये

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अगर आपको जरा सी भी हार्ट में दर्द पसीने आना ,सर पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना ,हमेशा कमजोरी महूसस होना ,गर्मी लगना ,रात में जोर जोर से खराटे लेना ,अचानक सांस लेने में तकलीफ होना ,दिल की धड़कन का तेज होना ,इंडिगेशन और बार बार उलटी का होना या फिर ऐसा लगना की सीने पर कुछ भार महूसस हो रहा तो ये हार्टअटैक के लक्षण है इन्हे इग्नोर न करे |आपको पता महिलायो में हार्ट अटैक के अलग लक्षण होते जैसे त्वचा का चिपचिप होना ,सीने में जलन ,असमान्य रूप से थकान होना |

हम डॉक्टर के पास जाते तो डॉक्टर सीधा एंजियोप्लास्टी  करने के लिए बोलता जिसका खर्च बहुत होता |इस आपरेशन में डॉक्टर एक स्प्रिंग जो एक पेन के स्प्रिंग जैसा होता जिसे स्टेंट  |

अगर ये स्टेंट डाल भी दे कुछ टाइम के बाद इसके दोनों साइड वसा जमने लगती फिर से हार्ट अटैक हो सकता |तो आइये दोस्तों हम बताते आपको हार्ट अटैक से कैसे बचा जाता जिससे हमे हार्ट अटैक जैसी प्रॉब्लम का सामना ही न करना पड़े |आईये सीखे हार्ट अटैक से बचने का रस बनने की विधि :

लहुसन का रस

हमारे पास लहुसन का रस होना चाहिए इसमे ब्लड प्रेस्सर व कैलेस्ट्रोल को कम करने की ताक़त होती |इसमे एल्लीसिन नामक तत्व पाया जाता जोकि हार्ट अटैक की ब्लॉकेज को खोल देता इसके सेवन से शरीर का  ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता |

नीबू

जो अपने आप में गुणो का खजाना  है |इसमे भी एल्लीसिन होता जो कॉलस्ट्रॉल को कम करता |नीबू में विटामिन C प्रचूर मात्रा में होता जोकि हमारा इम्मयून सिस्टम को भी ठीक रखता |इससे हमारे शरीर में रक्त संचार भी ठीक प्रकार से होता  |

अदरक का रस

अदरक के लिए कहा जाता इसमे पानी की मात्रा 80 % होती |इसमे खून को साफ़ करने की ताक़त होती |जिससे हमारे शरीर में रक्त संचार अच्छी तरह से होता और यह भी शरीर की कॉलस्ट्रॉल को कम करता और खून को पतला करता |

एप्पल का सिरका

सेब का सिरका सेहत के लिए बहुत अच्छा होता |इसमे शरीर की सफाई करने का गुण पाया जाता |सेब के सिरके में एसिटिक अमल होता जो भोजन पचाने वाली नाली को हांनिकारक जीवाणु व फफूंद से बचाता |सिरके में पेकिटन भी होता जो भोजन के पचने व पोषक तत्वों का अवशोषण करने में सहायता करता |हमारे शरीर में कॉलस्ट्रॉल ,वसा व विषैले तत्वों को अवशोषित करके शरीर से भर निकालता|इसमे धयान रखने वाली बात है है की जिन्हें पेक्टिन से ELLERGY  है वो इसे यूज़ न करे |

शहद

शहद तो एक अपने आप में ही दवाई है |इसमे आयरन और विटामिन C से भरा |शहद के सेवन से हमारा दिल तंदुरस्त रहता और पाचन किरिया भी सही रहती |शहद मोटापे को कम करने की भी ताकत होती |इससे हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक रहता |

अब बताते कैसे इन रसो के द्वारा हार्ट अटैक से बचा जाता और इन रसो की दवाई से हम मोटापे को भी कम कर सकते|

इसे बनाने की विधि :

सबसे पहले आप एक कप अदरक का रस ,एक कप लहुसन  का रस ,एक कप नीबू का रस औए एक ही कप सेब का सिरका इन सभी रसो को अच्छे से मिक्स कर लो और एक भिगोने में गैस पर चढ़ा दो जब तक चार कप का तीन कप न रह जाए | फिर गैस से उतार लो और ठंडा होने दो |ठंडा होने के बाद इसमे एक कप शहद मिला दो |अब ये दवाई तैयार हो गए आपकी इसे आप एक कांच के जार में भरकर रख लो |आप इसे सुबह ख़ाली पेट हर रोज दो चम्मच खाइये |इससे आपकी हार्ट की ब्लॉकेज ख़त्म हो जाएगी |हार्ट अटैक जैसी प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ेगा |
इस दवाई के साथ साथ आपको सुबह की सैर ,साइकिलिंग,वजन कम करना ,जायदा पानी पीना हो सके तो सुबह दो गिलास व रात को गर्म पानी पीना चाहिए |कम फैट वाली चीजे खाना  समय समय पर बीपी चेक करवाना चाहिए चाय व कॉफ़ी का सेवन कम शराब व सिगरेट का सेवन बंद तनावमुक्त रहिये \हंसो और हंसाते रहो वाली किरया अपनाये  तो देखिये हार्ट अटैक जैसी प्रॉब्लम आपके पास भी नहीं आ सकती |

इलायची खाने के फायदे, elaichi khane ke fayde in hindi

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इलायची खाने के फायदे हिंदी में, elaichi khane ke fayde in hindi: इलायची के सेवन से मुंह से आने वाली दुर्गंध की समस्‍या खत्‍म होती है। सांस लेने में तकलीफ होने पर मुंह में एक इलायची डालने से आराम मिलता है। इलायची का पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से सिरदर्द में तुरंत आराम मिलता है और पेशाब में जलन होने पर, इलायची को आंवला, दही और शहद के साथ सेवन करने से समस्‍या दूर होती है। इलायची के ये फायदे बहुत ही आम हैं, इसके कुछ स्‍वास्‍थ्‍य लाभ ऐसे हैं जो आपको किसी भी जड़ी-बूटी में नहीं मिलेगी। इसका प्रयोग करके कई बीमारियों से निजात मिल सकती है। हालांकि इसके कुछ नुकसान भी हैं। आइए जानते हैं इनके फायदे और नुकसान के बारे में।

इलायची में हैं ये पोषक तत्व

इलायची में कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और फॉस्फोरस मुख्य रुप से पाए जाते हैं। इनके अलावा भी इलायची में कई अन्य पोषक तत्व होते हैं जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।

इलायची खाने के फायदे

गले की खराश को करे दूर

यदि गले में तकलीफ है और गला दर्द हो रहा है, तो सुबह उठते और रात को सोते समय छोटी इलायची चबा-चबाकर खाकर गुनगुना पानी पी लें। इससे गले में खराश की समस्या में काफी आराम मिलेगा। जल्दी आराम पाने के लिए इस प्रक्रिया को नियमित रूप से करें। इसके अलावा इलायची आवाज को भी सुरीला बनाती है, नियमित इलायची खाने से आवाज सुरीली होती है।

शरीर के विषाक्‍त को बाहर निकाले

शरीर की बाहरी सफाई के साथ शरीर को अंदर से डिटॉक्सीफाई करना भी बेहतद जरूरी होता है। और इलायची में वो सारे गुण होते हैं जो शरीर को डिटॉक्सीफाई कर सके। इसके सेवन से शरीर में मौजूद सभी विषैले व व्यर्थ पदार्थ किडनी से बाहर निकल जाते हैं।

पाचन शक्ति बढ़ाये

इलायची के प्रयोग से पाचन शक्ति बढ़ती है। इलायची के नियमित सेवन से पाचन संबंधी समस्याओं से आसानी से निजात मिल सकता है। इसके अलावा पेट संबंधी समस्या जैसे भूख, एसिडिटी, गैसे, सीने में जलन, सूजन, कब्ज आदि में भी इलायची का सेवन फायदेमंद है।

ब्‍लड प्रेशर को करे कंट्रोल

इलायची में मूत्रवर्धक फाइबर के साथ-साथ पौटेशियम युक्त मसाले होते हैं जो कि रक्त चाप के स्तर को सामान्य रखते हैं। अगर आप रक्तचाप की समस्या से ग्रस्त हैं तो भोजन में इलायची का सेवन जरूर करें। इससे शरीर में रक्तचाप का स्तर ठीक रहेगा।

हिचकी करे शांत

हिचकी की समस्या कभी भी शुरु हो जाती है। कभी-कभी यह बिना रुके देर तक आती रहती है। ऐसे में इलायची का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। इलायची में वे गुण होते हैं जो हिचकी की समस्या से निजात दिलाते हैं।

इलायची खाने के नुकसान, elaichi khane ke Nuksan in hindi

गर्भपात की संभावना

प्रेग्‍नेंसी और फीडिंग के दौरान इलायची को औषधि के तौर पर इस्तेमाल करना गलत है। उपयोग से पहले चिकित्सक की सलाह लें। ऐसा माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक मात्रा में इलायची का सेवन करने से गर्भपात होने का खतरा रहता है।

पथरी

अगर आप पित्ताशय की पथरी से पीड़ित हैं तो बहुत अधिक मात्रा में इलायची का सेवन ना करें। अधिक मात्रा में इलायची के सेवन से पथरी का दर्द और बढ़ सकता है। अगर सेवन करना ज़रुरी है तो एक बार अपने डॉक्टर से पूछ लें।

एलर्जी

अगर आपका शरीर इलायची के प्रति संवेदनशील है तो आपको इलायची खाने से या इसकी तेज़ महक से एलर्जी हो सकती है। ऐसे लोगों को किसी भी रुप में इलायची का उपयोग नहीं करना चाहिए। एलर्जी की वजह से त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे कोई लक्षण दिखें तो उसका सेवन बंद कर दें और नजदीकी डॉक्टर से सलाह लें।

25 साल पुरानी बवासीर की बीमारी ठीक हो गयी 5 दिन इसका प्रयोग करने से

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हल्दी से बवासीर का इलाज इन हिंदी, haldi se bawaseer ka ilaj in hindi –बवासीर या पाइल्स मलद्वार के चारों ओर नसों के फूलने या सूजन को कहते हैं। इसमें गुदा पर मस्से जैसे उभार हो जाते हैं। मस्से या तो गुदा के अंदरूनी हिस्से पर होते हैं, या गुदा के चारों ओर। नसों में अंदरूनी सूजन ज्यादातर कम कष्टकारी होती है, परंतु वहीं नसें सूजकर बाहर तक उभर आती हैं, तो ये समस्या बेहद कष्टकारी हो जाती है। इसमें मलद्वार से रक्तस्त्राव होने से मरीज बेहद कमजोर हो जाता है। समस्या गंभीर रूप ले लेने पर मरीज की मौत तक हो सकती है। बवासीर के मरीज को बैठने में बेहद तकलीफ होती है, यहां तक कि दर्द से रात में नींद तक नहीं आती। यहां हम पढ़ेंगे कि, कैसे हल्दी का प्रयोग करके बवासीर जैसी समस्या छुटकारा पाया जा सकता है।

बवासीर के लक्षण

बवासीर में कब्ज की वजह से मल शुष्क हो जाता है। मस्से पहले कठोर होना शुरू होते हैं, जिससे गुदा में चुभन-सी होने लगती है। ध्यान न देने पर मस्से फूल जाते हैं और मल त्याग बेहद तकलीफदेह हो जाता है। स्थिति बिगड़ने पर मल के साथ खून भी आने लगता है।

बवसीर का कारण

बवासीर के कई कारण होते हैं, जिनमें से कब्ज, खराब खान-पान, खाने में फाइबर की कमी, ज्यादा देर तक बैठे रहना, मानसिक तनाव, भारी सामान उठाना प्रमुख हैं। गर्भावस्था में भी ये समस्या देखने को मिलती हैं।

हल्दी से बवासीर का इलाज

हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेट्री यानी सूजन घटाने वाले गुण होते हैं। इसके साथ ही हल्दी एंटी-सेप्टिक होती है, जो कीटाणुओं को नष्ट करती है। वहीं हल्दी घाव भरने में भी सहायक होती है। पुराने समय से हल्दी को बवासीर का अचूक इलाज माना जाता है। यहां कुछ तरीके दिए हैं जिन्हें आजमाकर हल्दी से दर्दनाक बवासीर का इलाज किया जा सकता है।

1. एलोविरा और हल्दी

आधे चम्मच एलोविरा जेल में एक चम्मच पिसी हल्दी मिलाएं। इसको अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें। पेस्ट को सोने से पहले मलद्वार के अंदरूनी और बाहरी हिस्से पर लगाएं। एक हफ्ते तक ये तरकीब आजमाने से बवासीर से राहत मिलेगी।

2. देसी घी और हल्दी

एक चम्मच देसी घी में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं। इसको अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को रात को सोने से पहले अपनी गुदा के अन्दर और बाहर लगा लें। यह प्रक्रिया दो-तीन दिन आजमाने से आपको बवासीर से राहत मिल जाएगी।

3. दूध और हल्दी

बवासीर होने पर उसके उपचार के साथ इसका बचाव भी जरूरी है। रोजाना गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पिएं इससे के संक्रमण से बचाव होगा साथ ही अच्छी नींद भी आएगी।
ये भी आजमाएं

4. काले नमक के साथ हल्दी

काले नमक में हल्दी का चूर्ण मिलाकर गुनगुने पानी के साथ पिएं। बकरी के दूध में हल्दी और काला नमक मिलाकर पीने से भी बवासीर में लाभ होगा।

5. मूली और हल्दी

मूली को धोकर छील लें। अब इस पर हल्दी छिड़कर इसे दिन में दो-तीन बार खाएं।

6. टब मे गुनगुना पानी भरकर उसमें हल्दी डालें। इस पानी में निर्वस्त्र होकर आधे घंटे तक बैठें।

7. हल्दी, आक का दूध और शिरीष के बीजों को कूटकर बवासीर के मस्सों पर लगाएं। जलन और दर्द से आराम मिलेगा।

8. किसी साफ रुमाल में बर्फ का टुकड़ा लपेट कर अपनी गुदा पर कुछ देर के लिए लगाएं। इससे दर्द और सूजन में बेहद राहत मिलेगी।

9. हल्दी से इलाज के साथ अपने खान-पान का भी ध्यान रखें। खाने में पानी की मात्रा बढ़ाएं और फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करें। दूध में ईसबगोल मिलाकर पिदएं। ज्यादा देर तक एक जगह पर न बैठें। व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। खाने में जैतून का तेल और घी भी शामिल करें। इसके आलावा नारियल पानी और दाने सहित अनार भी खाएं। तले-भुने गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।

लकवा (Paralysis) का अटैक आते ही इन उपायों को अपनाने से बच जाएगी रोगी की जान

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किसी अंग की मांसपेशियों का पूर्ण रूप से कार्य ना कर पाना पैरालिसिस या लकवा मारना या पक्षाघात कहते है इस रोग को ठीक किया जा सकता है बशर्ते मरीज अगर हिम्मत न हारे तो। पैरालिसिस या लकवा का अटैक कभी भी आ सकता है जब उस अंग की सवेदना कमजोर होगी तो लकवा का सही समय पर इलाज न होने से रोगी एक अपाहिज की जिन्दगी जीने को मजबूर हो जाता है ,इसीलिए समय रहते ही पैरालिसिस या लकवा मारना या पक्षाघात का उपचार करना जरुरी है।

लकवा (Paralysis) एक प्रकार से गंभीर बीमारी है जिससे मरीज के किसी अंग शून्य हो जाता है। लकवा को अंग्रेजी में पैरालिसिस भी कहते हैं, जो अधिकतर 50 वर्ष से अधिक उम्र के इंसान को होता है। ऐसा नहीं है कि यह केवल 50 वर्ष की उम्र में ही हो बल्कि अगर कुछ सावधानी न बरती जाये तो लकवा किसी भी उम्र के मनुष्य को हो सकती है।

जीवन मे चाहे धन, एश्वर्य, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि सभी कुछ हो, परंतु शरीर मे बीमारी है तो सब कुछ बेकार है ओर जीवन भी नीरस है। ऐसी ही एक बीमारी है लकवा (पेरालाइसिस), जिससे पीड़ित व्यक्ति जीवनभर सारे परिवार पर बोझ बन जाता है।

लकवा (पेरालाइसिस)  होने का 3 प्रमुख कारण

किसी अंग का दबना

शरीर के किसी अंग का लगातार अधिक समय तक दबे रहने से भी लकवा हो सकता है। दरअसल किसी अंग के लगातार दबने से उस हिस्से पर रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से हमारा दिमाग उस हिस्से पर रक्तसंचालन को रोक देता है। रक्तसंचालन रुकने के बाद उस हिस्से पर तंत्रिका तंत्र भी शून्य हो जाता है और हमें लकवाग्रस्त जगह शून्य होने की वजह से एकदम भारीपन लगता है।

अम्लीय पदार्थ का सेवन

अम्लीय पदार्थ के सेवन से रक्त पर अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी अशुद्धियाँ धमनियों रुक     जाती है और उनमें रक्त प्रवाह बाधित होता है और लकवा हो जाता है।

ज्यादा तनाव में रहने से

कभी-कभी ज्यादा तनाव में रहने से मस्तिष्क में खून जम जाता है, जिसके कारण पैरालिसिस होने की  संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ज्यादा चिंता या तनाव में नहीं रहना चाहिए।

लकवा (पेरालाइसिस) होने पर तुरंत करें ये उपाय

लकवा होने पर मरीज को तुरंत एक चम्मच शहद में 2 लहसुन मिलकर खिलाये. इससे लकवा से छुटकारा मिल सकता है।

कलौंजी के तेल से लकवे वाली जगह पर मालिश करें।

लकवा (पेरालाइसिस)  की पहचान

जैसे किसी का मुह टेढ़ा हो जाना, आँख का टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर का टेढ़ा हो जाना, या शरीर किसी एक साइड से बिलकुल काम  करना बंद कर दे, ये सामान्यतया पक्षाघात की पहचान है।

लकवा (पेरालाइसिस) का एकदम प्रमाणिक और राम-बाण इलाज़

अगर मेरा कोई भाई बहिन लकवा (पेरालाइसिस) से पीड़ित है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। अगर शरीर का कोई अंग या शरीर दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी) की ले ले। उसमे छोटी-छोटी गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को शुद्ध शहद से लेवें।

अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी) की सुबह साँय एक एक गोली शहद के साथ लेनी है।

अब गोली को शहद से कैसे ले..? उसके लिए गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न हो जाए।

पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी (चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।

लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार, दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द की दाल पूर्णतया वर्जित है। फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।

शुरुआती दिनों मे किसी भी मालिस से परहेज रखें। तब तक कोई मालिस न करें जब तक पीड़ित कम से कम 60% तक स्वस्थ न हो जाए।

ये दवा लाखों पीड़ित व्यक्तियों के लिए जीवनदायिनी रही है। जो आज स्वस्थ जीवन जी रहे है।

स्वास्थ्य वह मूल तत्व है जो जीवन की सारी खुशियों को जीवंत बनाता है और स्वास्थ्य के बिना वे सभी नष्ट और नीरस होती हैं। सुखी होना है तो प्रसन्न रहिए, निश्चिन्त रहिए, मस्त रहिए।

गले और छाती की बीमारी की सबसे अच्छी दवा आपके घर में ही है, ऐसे करे इलाज

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गले और छाती की बीमारी का घरेलु इलाज, gale aur chhati ki beemari ka gharelu ilaj in hindi – हमारे घर के छोटे छोटे बच्चों को गले में दर्द होता है और गले में दर्द होने वाली एक बीमारी है टोंसिलाइटीस और इस टोंसिलाइटीस बीमारी में ऑपरेशन कभी मत करवाइए। क्योंकि ऑपरेशन से इसका समाधान नही होगा। अगर आज आपने इसका ऑपरेशन करवा दिया तो कल इसके और दुष्परिणाम आ जाएंगे। तो गले का ऑपरेशन कभी मत करवाइए। आइये जानते कैसे घरेलु दवा से गले और छाती के रोगों को दूर किया जा सकता है।

अच्छी और प्रभावशाली दवा है हल्दी

जब टोंसिलाइटीस की तकलीफ होती है बच्चों को तो उसकी सबसे अच्छी दवा हमारे घर में है जिसका नाम है हल्दी। इस बीमारी में हल्दी का इस्तेमाल करें। आधा चम्मच हल्दी लीजिए और जिसको टोंसिलाइटीस की प्रॉब्लम है उसका गला खोलकर हल्दी गले में डालिए। चम्मच के साथ अंदर डालिए फिर चम्मच बहार निकल लीजिए। पूरी हल्दी लार के साथ अंदर जाएगी। और ये हल्दी जैसे ही अंदर जाएगी टोंसिल की बीमारी ठीक कर देगी। एक खुराक में ही टोंसिल हमेशा के लिए ठीक हो जाएगा। दूसरी खुराक किसी को देने की जरुरत ही नही पढ़ती। इतनी अच्छी और प्रभावशाली दवा है हल्दी।

धनिये की चटनी

ऐसे ही आपके शरीर में गले से जुडी हुई अगर कोई और प्रॉब्लम है जैसे थाइरोइडिज्म, अगर आपका थाइरोइड बढ़ा हुआ है तो इसकी सबसे अच्छी दवा धनिये की चटनी बनाइए। और एक चम्मच चटनी आधे गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर रोज सबेरे पी जाइए। और ऐसे ढाई तीन महीने तक लेते रहे तो हमेशा के लिए आपकी थाइरोइड ठीक हो जाएगी।

दालचीनी

इसी तरह छाती के कई रोग है जैसे दमा, अस्थमा, ट्यूबर कुलोसिस इसकी सबसे अच्छी दवा है दालचीनी। दालचीनी का पाउडर बनाइए और इसे शहद के साथ मिलाकर चटिये और उपर से गर्म पानी पीजिए। तो तीन-चार महीने में दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब ठीक हो जाएगा।

देसी गाय का मूत्र

एक सबसे अच्छी दवा है हमारे घर में देसी गाय का मूत्र। अगर कोई भी व्यक्ति रोज सुबह आधा कप गाय का तजा मूत्र पीए तो दमा और अस्थमा दोनों ठीक हो जाएगा। और ट्यूबरक्लोसिस भी ठीक हो जाएगा। अंग्रेजी दवा से ट्यूबरक्लोसिस ठीक होने में 9 महीने लगते हैं। और यही गाय का मूत्र पीकर ट्यूबरक्लोसिस 2 महीने में ही ठीक हो जाएगा। इतनी प्रभावशाली दवा है ये देसीगाय का मूत्र।

अन्य घरेलु उपचार

अदरक और शहद

अदरक में ऐसे बहुत से तत्व होते हैं जो बहुत सारी बीमारियों का सामना कर सकते हैं। इसके सेवन से सर्दी खांसी में फायदा होता है और श्वसन प्रक्रिया ठीक हो जाती है। 100 ग्राम ग्राम अदरक को कूट लें। दो-तीन चम्मच शहद को उसमें मिला लें। इस पेस्ट को दो-दो चम्मच दिन में दो बार लें। समस्या दूर हो जाएगी।

सफेद-मिर्च

आधी चम्मच सफेद कालीमिर्च को पीस लें। इसमें 1 चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्सचर को 10-15 सेकेंड माइक्रोवेव करें। फिर पी लें। इसे पीते ही आपको फौरन आराम मिलेगा। बलगम से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार जरूर लें।

अंगूर का जूस

अंगूर की प्रकृति एक्सपेक्टोरेंट होता हैं और इसलिए ये आपके फेफड़ों के लिए और बलगम दूर करने में फायदा पहुंचाता है। दो चम्मच अंगूर के जूस में दो चम्मच शहद मिला लें। इस मिक्चर को एक हफ्ते तक दिन में तीन बार लें।

नींबू

नींबू में मौजूद सिट्रिक एसिड और शहद के एंटीसेप्टिक तत्व बलगम कम करने और गले का दर्द दूर करने में मदद करते हैं। ब्लैक टी बनाइये, और उसमें एक चम्मच ताजे नींबू का रस और एक चम्मच शहद का मिला दीजिए।

गरारे

एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं। अपनी गर्दन थोड़ी सी पीछे की तरफ गिराएं और फिर इस नमक के पानी से गरारे करें। इस पानी को निगलें न। कुछ देर तक गले में रखकर गरारे करने के बाद आप निश्चित रूप से अच्छा महसूस करेंगे।

लहसुन और नींबू

लहसुन में सूजन दूर करने वाले तत्व मौजूद होते हैं और नींबू में सिट्रिक एसिड। जब दोनों का इस्तेमाल किया जाता है तो ये बलगम दूर करने में हमारी मदद करते हैं। एक कम पानी उबालें। उसमें तीन नींबू निचोड़ें। थोड़ा सा कुटा हुआ अदरक मिलाएं। साथ में आधी चम्मच काली मिर्च का पाउडर और एक चुटकी नमक। इन सब को अच्छे से मिला लें और पी लें। इससे आपको बलगम की समस्या से फौरन निजात मिल जाएगी।

मेथी खाने के 9 फायदे, Methi khane ke fayde in hindi

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मेथी खाने के फायदे, methi khane ke fayde in hindi – मेथी के दानों  का प्रयोग अक्सर दाल सब्जी आदि में तडका लगाने या फिर स्वाद बढाने के काम आता है परंतु बहुत ही कम लोग इसके स्वास्थ्यवर्धक फायदे जानते हैं। मेथी के दानों में पोटेशियम, आयरन, कैल्शियम, फाईबर, विटामिन ए व बी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर के लिए बहुत गुणकारी है। चलिए आपको बताते हैं मेथी हमारे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार लाभदायक है।

मेथी दाना के औषधीय फायदे- (methi ke fayde benefits in hindi)

1. मोटापा कम करती है

प्रतिदिन मेथी के चार पांच दाने चबाने से मोटापा कम होता है व शरीर की चर्बी भी घटती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मेथी का स्वभाविक गुण गरम होता है जो शरीर के मेटाबालिज्म को बढाता है जिससे मोटापा कम होने व चर्बी घटाने में सहायता मिलती है।

2. बालों को घना काला व मजबूत रखता है

मेथी के दानों को पीसकर नारियल के पानी में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। फिर इसे बालों की जडों में हल्के हल्के लगाएं। ऐसा तीन चार हफ्तों तक लगातार करें। इससे बालों में रूसी, बालों का झडना कम होगा। साथ ही में बाल घने, काले व मजबूत बने रहेंगे।

3. शारीरिक कमजोरी दूर करने में लाभदायक

मेथी में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। प्रतिदिन दो चार पत्ते चबाने से शरीर में थकावट नहीं होती व सदैव स्फूर्ति बनी रहती है।

4. ह्रदय रोगों से बचाता है

मेथी में कोलेस्ट्रॉल कम करने के प्राकृतिक गुण होते हैं। मेथी दाने का नियमित व नियंत्रित उपयोग खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। धमनियों में वसा कम करता है जिससे खून में क्लाट बनने की संभावना कम हो जाती है व ह्रदय घात से बचा जा सकता है।

5. मधुमेह यानि डायबिटीज़ पर नियंत्रण

मधुमेह की समस्या होने पर प्रतिदिन दो चार चम्मच मेथी दानें के सेवन से लाभ मिलता है। मेथी दाना शरीर में इंसुलिन की मात्रा को नियंत्रण में रखने में सहायता करता है। व रक्त में बहुत कम या ज्यादा शुगर नहीं होने देता।

6. पाचन तंत्र मजबूत रखता है

मेथी में मौजूद फायबर पाचन तंत्र को मजबूत रखता है। मेथी दानों का उपयोग पेट में गैस्ट्रिक की समस्या में आराम देता है और कब्ज नहीं बनने देता।

7. फोडे फुंसी में लाभदायक

मेथी दाने को पीसकर इसका लेप फोडों फुंसियों पर लगाने से राहत मिलती है व घाव जल्दी भरते हैं।

8. जोडों के दर्द में राहत

मेथी के दस बारह पत्ते लेकर उन्हें साफ पानी में अच्छे से उबाल लें। इसके बाद उबले हुए पत्तों को अच्छी तरह से चबांए। इससे जोडों व घुटने के दर्द में आराम मिलेगा।

9. यकृत विकारों में लाभ

प्रतिदिन अंकुरित मेथी सुबह खाने से लीवर संबंधित समस्याओं में लाभ मिलता है।

सावधानियां

मेथी के उपयोग में कुछ सावधानियां भी बरतने की जरूरत है। मेथी की प्रकृति गरम होती है इसलिए बवासीर, नकसीर, या जिन लोगों का किसी भी प्रकार का रक्त स्राव होता है वे इसके उपयोग से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

Source: www.ayurvedicsehat.com

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