करेले के जूस के स्वास्थ्यवर्धक फायदे, सिर्फ एक कप पिए रोजाना

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करेले का नाम सुनते ही जीभ में कड़वाहट-सी घुल जाती है, परंतु इसके कड़वेपन पर न जाएँ, औषधीय गुणों की दृष्टि से यह किसी भी अन्य सब्जी या फल से कम नहीं।

करेले में विटामिन्स और एंटी ओक्सिडेन्ट्स मौजूद होते है| रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से बहुत सी स्वास्थ्य की समस्याएं दूर होती हैं| कच्चे करेले का जूस बहुत फायदेमंद है क्यों कि इसमें सभी जरूरी विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जिसकी जरुरत हमारे शरीर को होती है। इसमें विटामिन A,B और C पाया जाता हैं ।

इसके अलावा करेले में कैरोटीन, पोटैशियम, बीटाकैरोटीन, आइरन, मैग्नीशियम, जिंक और मैगनीज जैसे गुणकारी तत्व भी होते हैं । हमारे शरीर को इन सभी चीजो की बराबर मात्रा में जरुरत होती हैं|करेला रक्त शोधन में भी बहुत आवश्यक हैं। इसके लिए करेले के रस का सेवन किया जाता हैं चाहे तो इसमें काली मिर्च पाउडर और नींबू का रस मिलाकर भी पी सकते है|

हम आपको बता रहे हैं 8 कारण जिनसे आपको रोज सुबह करेले को जूस लेना चाहिए|

करेला ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है

अपने शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप तीन दिन तक खली पेट सुबह करेले का जूस ले सकते हैं| मोमर्सिडीन और चैराटिन जैसे एंटी-हाइपर ग्लेसेमिक तत्वों के कारण करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को मांसपेशियों में संचारित करने में मदद करता है| इसके बीजों में भी पॉलीपेप्टाइड-पी होता है जो कि इन्सुलिन को काम में लेकर डायबेटिक्स में शुगर लेवल को कम करता है|

सोराइसिस के लक्षणों को दूर करता है

एक कप करेले के जूस में एक चम्मच नींबू का जूस मिला लें इस मिश्रण का खली पेट सेवन करें| 3 से 6 महीनें तक इसका सेवन करने से त्वचा पर सोराइसिस के लक्षण दूर होते हैं| यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है और सोराइसिस को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में मदद करता है|

ब्लड को साफ़ करता है

करेले का जूस शरीर में एक प्राकृतिक रक्त शोधक के रूप में कार्य करता है | यह जहरीले तत्वों को बाहर निकालता है और फ्री रेडिकल्स से हुए नुकसान से बचाता है| इसलिए ब्लड को साफ़ करने और मुहासों जैसी समस्याओं को दूर करने केलिए रोज एक गिलास करेले का जूस जरूर पियें|

यह लिवर से विषैले पदार्थों को निकालता है

रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से लिवर मजबूत होता है क्यों कि यह पीलिया जैसी बिमारियों को दूर रखता है| साथ ही यह लिवर से जहरीले पदार्थों को निकालता है और पोषण प्रदान करता है जिसे लिवर सही काम करता है और लिवर की बीमारियां दूर रहती हैं|

पाचन शक्ति बढ़ाता है

करेले का जूस कमजोर पाचन तंत्र को सुधारता है और अपच को दूर करता है| ऐसा इसलिए होता है क्यों कि यह एसिड के स्त्राव को बढ़ाता है जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है| इसलिए अच्छी पाचन क्षमता के लिए सप्ताह में एक बार सुबह करेले का जूस जरूर लें|

भूख बढ़ाता है

भूख नहीं लगने से शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है जिससे कि स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां होती हैं| इसलिए करेले के जूस को रोजाना पीने से पाचन क्रिया सही रहती है जिससे भूख बढ़ती है|

अग्नाशय के कैंसर के उपचार में उपयोगी

रोजाना एक गिलास करेले का जूस पीने से अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाएं नष्ट होती हैं| ऐसा इसलिए होता हैं क्यों कि करेले में मौजूद एंटी- कैंसर कॉम्पोनेंट्स अग्नाशय का कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं में ग्लूकोस का पाचन रोक देते हैं जिससे इन कोशिकाओं की शक्ति ख़त्म हो जाती हैं और ये ख़त्म हो जाती हैं|

यह आँखों की नजर बढ़ाता है

लगातार करेले के जूस का सेवन कर आप विभिन्न दृष्टि दोषों को दूर कर सकते हैं| करेले में बीटा- कैरोटीन और विटामिन ए की अधिकता होती है जिससे दृष्टि ठीक होती है| इसके अलावा इसमें उपस्थित विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाली नजरों की कमजोरी से बचाता है|

नुकसान जरूर पढ़े- 

गर्भावस्था में नुकसानदायक

करेले के रस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है जो पीर‌ियड्स का फ्लो बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान इसका अधिक सेवन गर्भपात का कारण हो सकता है। कई बार यह गर्भावस्था के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा कर सकता है।

करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी हैं जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।

फर्टिलिटी पर प्रभाव

न केवल गर्भावस्था बल्कि गर्भधारण की चाह रखने वाली महिलाओं और पुरुषों के लिए इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है। फर्टिलिटी से संबंधित दवाओं का असर करेले में मौजूद तत्व खत्म कर देते हैं।

इसमें मौजूद एमएपी 30 नामक तत्व का कुत्तों पर किए गए परीक्षण में यह माना गया है लेकिन इसपर अभी काफी अध्ययन की आवश्यकता है।

हाइपोग्लाइकेमिया कोमा

करेले का सेवन शुगर कम करता है लेकिन आवश्यकता से अधिक रक्त में शुगर का स्तर इतना कम कर देता है कि यह हाइपोग्लाइकोम‌िया कोमा नामक मानसिक समस्या का कारण हो सकता है।

हेमोलाइटिक अनीमिया

करेले के अत्याधिक सेवन से हेमोलाइट‌िक अनीमिया हो सकता है। इस स्थिति में पेट में दर्द, सिर दर्द, बुखार या कोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

लिवर व क‌िडनी संबंधी रोग में नुकसानदायक

लिवर व किडनी के मरीजों के लिए के लिए इसका अत्याधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। यह लिवर में एन्जाइम्स का निर्माण बढ़ा देता है जिससे लिवर प्रभावित होता है।

करेले का बीज में लेक्टिन नामक तत्व है जो आंतों तक प्रोटीन के संचार को रोक सकता है।

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।

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