एक चुटकी हींग से होता है कई रोगों का नाश

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हींग को मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है अक्सर हर घर में सब्ज़ियों व दालों में हींग डाली जाती है। हींग खाने में खुशबू के साथ-साथ उसका स्वाद भी डबल कर देती है। लेकिन इसके अलावा भी हींग के बहुत सारे अन्य फायदे होते हैं जिसकी वजह से इसका इस्तेमाल लगभग हर किचन में किया जाता है। आज हम आप को जानकारी देंगे की आप मसाले के रूप में प्रयोग होने वाले हींग से क्या क्या फायदे उठा सकते है आइये जानते है –

पेट और अपच संबंधी बीमारियों का नाश

अपच और पेट की समस्याओं के लिए हींग का इस्तेमाल प्राचीन काल से किया जा रहा है। इसके एंटी ऑक्सीडेंट्स तत्व खराब-पेट, एसिडिटी, पेट के कीड़े, इरीटेबल बोवेल सिंड्रोम (irritable bowel syndrome) आदि समस्याओं में राहत पहुंचाते हैं। पेट के दर्द को दूर करने के लिए हींग को किसी कॉटन के कपड़े में रख कर गांठ बांध ले और उसे नाभि पर रख ले इससे आराम मिलेगा |

कैंसर का जोखिम कम करती है

हींग में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। जब आप इसे लगातार खाते हैं तो ये फ्री रेडिकल्स से शरीर की कोशिकाओं को बचाव प्रदान करती है। हींग की कैंसर-विरोधी गतिविधि कैंसर कोशिकाओं का विकास अवरूद्ध करती है।

त्वचा की समस्याओं को दूर करती है

हींग में उच्च मात्रा में एंटी-इनफ्लैमोटरी तत्व होते हैं जिसकी वजह से इसे स्किन केयर उत्पादों में मिलाया जाता है। ये त्वचा की जलन और कॉर्न्स जैसी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखती है। त्वचा पर लगाने पर हींग अपना ठंडा प्रभाव दिखाती है और साथ ही त्वचा की समस्याओं के लिए उत्तरदायी बैक्टीरिया का भी सफाया करती है।

सांस संबंधी समस्याओं से लड़ती है

हींग प्राकृतिक रूप से बलगम को दूर करके छाती के कंजेस्शन को ठीक करता है। यह एक शक्तिशाली श्वसन उत्तेजक  है। इसे शहद, अदरक के साथ मिलाकर खाने से खांसी व ब्रोंकाइटिस की समस्या में आराम मिलता है।

पुरूषों की यौन समस्याओं में फायदा

क्या आपको मालूम है कि हींग का इस्तेमाल पुरुषों में नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्पर्म की कमी का उपचार करने के लिए भी किया जाता है? अपने खाने में थोड़ी सी हींग ज़रूर मिलाएं ताकि बहुत सारी सेक्स से जुड़ी समस्याओं से आप अपना बचाव कर सकें। इसके अलावा एक गिलास गर्म पानी में हींग मिलाकर पीने से खून का दौरा तेज़ हो जाता है जिससे कि लिबिडो (libido) बढ़ता है।

दर्द में राहत

हींग के सेवन से पीरियड्स, दांत, माइग्रेन आदि का दर्द भी ठीक किया जा सकता है दरअसल, हींग में एंटीऑक्सीडेंट्स और दर्द निवारक तत्व मौजूद होते हैं, जो आपको दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं। दर्द होने पर एक गिलास गर्म पानी में एक चुटकी हींग मिलाकर पी लें। दांत के दर्द में हींग और नींबू के रस का पेस्ट बनाकर लगाएं।

ब्लड शुगर लेवल कम करता है

क्या आप अपना ब्लड शुगर लेवल कम करना चाहते हैं? फिर तो आपको अपने खाने में हींग डाल ही लेनी चाहिए। तभी ये अपना एंटी-डायबिटिक प्रभाव दिखा पाएगा। हींग इंसुलिन को छिपाने के लिए अग्नाशय की कोशिकाओं को उत्तेजित करता है जिससे कि ब्लड शुगर लेवल कम होता है।

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें

हींग में कोमरिन्स (coumarins)नाम का एक तत्व होता है जो खून को पतला करके ब्लड फ्लो बढ़ाता है। इसकी वजह से खून के थक्के भी नहीं जमते। इससे ब्लड कोलेस्ट्रॉल लेवल और शरीर में ट्राइग्लिसराइड (triglycerides) घटता है, जिनकी वजह से हाइपरटेंशन से बचाव होता है।

काली खांसी या सूखी खांसी में उपयोगी

अदरक और हींग को शहद में मिलकर खाने से काली खांसी और सूखी खांसी में आराम मिलता है

इस्तेमाल का तरीका

हींग के इस्तेमाल का सबसे बढ़िया तरीका है कि आप इसे हर रोज़ अपने खाने में मिलाकर खाएं। हींग को इस्तेमाल करने का सबसे बढ़िया तरीका-

  • एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच हींग मिलाएं और इसे खाली पेट पी लें।
  • आप बटरमिल्क में थोड़ी सी हींग डालकर भी पी सकते हैं।
  • एक कप गर्म पानी में एक चम्मच हींग मिलाएं। इसमें सूती कपड़ा भिगोकर उससे सिकाई करें, दर्द में आराम होगा।

हींग का इस तरह प्रयोग करके आप अनेक बीमारियो में राहत पा सकते है |

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इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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