गूलर पुरुष और स्त्री के सभी गुप्त रोगों के लिए चमत्कारिक औषधि है

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गूलर को आयुर्वेद में हजारों साल से चिकित्सीय रूप से प्रयोग किया जाता रहा है। गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल, पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं। इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है। फल स्वाद में मीठा होता हैं। फलों के अन्दर कीट होते है जिनके पंख होते हैं। इसलिए इसे जन्तुफल भी कहा जाता है। इसकी छाल भूरी सी होती है। यह फाईकस जाति का पेड़ है और इसके पत्ते तोड़ने पर लेटेक्स या दूध निकलता है।

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गूलर के फल खाने योग्य होते है परन्तु उनमें कीढे होते हैं इसलिए इसको अच्छे से साफ़ करके ही प्रयोग किया जाना चहिये। गूलर शीतल, रुखा, भारी, मधुर, कसैला, घाव को ठीक करने वाला, रंग सुधारने वाला, पित्त-कफ और रक्त विकार को दूर करने वाला है।यह पाचक और वायुनाशक है। यह रक्तप्रदर, रक्तपित्त तथा खून की उल्टी को दूर करने वाला है। इसका दूध टॉनिक है जो की शरीर को बल देता है। आइए जानते है गुलर से होने वाले फायदे….

1.पेचिश

गूलर की कोमल पत्तियों का 10 से 15 मिलीलीटर रस सेवन करें।

2. कमजोरी, बल, वीर्य की कमी

गूलर की छाल का पाउडर + मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें।
इसे रोज़ दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करें।
इससे कमजोरी दूर होती है और शरीर में बल और वीर्य की बढ़ोतरी होती है।

3. वीर्य का पतलापन

गूलर की छाल का पाउडर 1 भाग + बरगद की कोपलें 1 भाग + मिश्री/शक्कर 2 भाग, मिलाकर नियमित 10 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ दिन में दो बार सेवन करने से वीर्य गाढ़ा होता है।
ऐसा 2 महीने तक नियमित किया जाना चाहिए।

4. शुक्राणुओं की कमी (Low sperm count)

गूलर के दूध की 20 बूंदे + छुहारे के साथ खाने से शुक्राणु की संख्या बढ़ती है।

5. प्रदर, प्रमेह (Urinary disorders)

गूलर के ताज़े फल का रस + शहद/शक्कर, के साथ सुबह और शाम लेने से प्रदर में लाभ होता है।

6. सफ़ेद पानी/ श्वेत प्रदर (Leucorrhoea)

गूलर के सूखे फल + मिश्री, को शहद के स्थ चाटने से लाभ होता है।

7. गर्भ से असामान्य स्राव (Abnormal discharge from uterus)

गूलर की छाल का काढा बनाकर मिश्री मिलाकर, रोज़ कुछ सप्ताह तक नियमित सेवन करें।

8. बच्चों का सूखा रोग

गूलर का दूध, बताशे में रख कर खाने से लाभ होता है।

9. ह्रदयविकार

गूलर के पत्ते क रस नियमित पियें।

10. कफ, कफ की अधिकता (Excessive cough)

गूलर के दूध latex को मिश्री + शहद के साथ, दिन में तीन बार खाएं।

11. लीवर के रोग, वात-विकार

गूलर के पत्ते का रस नियमित पियें।

12. प्रदर रोग (Leucorrhoea) कमजोरी, वीर्यपात (Spermatorrhea )

गूलर के पत्ते का रस एक कप की मात्रा मे नियमित पियें।

बाहरी प्रयोग (External Uses)

जलने पर:-

1. गूलर की पत्ती का लेप : प्रभावित हिस्से पर लगायें।
2. रक्त स्राव, चोट Bleeding : खून निकलने पर पत्ते का रस प्रभावित हिस्से पर लगाने से खून का निकलना बंद होता है।

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इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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