अमृत से कम नहीं है ये पत्ता, आपको कभी बीमार नहीं होने देगा

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गिलोय इतनी गुणकारी औषधि है कि इसका नाम अमृता रखा गया है। गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। पान के पत्ते की तरह गिलाय के पत्तों का उपयोग बहुत फायदेंमंद है। यह शरीर में वात, कफ और पित्तनाशक का कार्य करता है। गिलोय में मौजूद एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्वों का वर्णन आयुर्वेद में मिलता है। गिलोय (Giloy) शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर शरीर में खून की कमी को दूर करनेे में भी लाभकारी है। रोजाना सुबह-शाम गिलोय (heart-leaved moonseed) का रस घी और शहद के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी नहीं होती।

गिलोय के फायदे

1. आधुनिक विज्ञान की अनेक शोधों में भी यह साबित हो गया है की गिलोय बीमारियों से बचाने तथा चिकित्सा दोनों ही रूप में बहुत उपयोगी है। Researchers के अनुसार गिलोय में anti inflammatory, analgesic, antipyretic तथा immune booster जैसे अनेक गुण पाए जाते हैं।

2. चिकनगुनिया जैसे वायरल बुखार जो ठीक होने के बाद भी रोगी को महीनों तक जोड़ों के दर्द से परेशान करते रहते हैं, ऐसे मामलों में गिलोय प्रकृति द्वारा हमें दिया गया एक बेहतरीन उपहार है आयुर्वेद में तो गिलोय को अनेक बीमारियों में उपयोगी माना ही गया है।

3. गिलोय सभी प्रकार के बुखार में फायदेमंद होती है। विशेष रूप से डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू से बचाव, चिकित्सा तथा रोग होने के बाद side effects को दूर करने में अति उपयोगी है तथा सर्दी, खांसी,जुकाम में भी फायदेमंद है। ज्वर निवारण के अतिरिक्त किसी भी लंबी व्याधि के बाद हुई दुर्बलता को मिटाने के लिए भी रसायन के तौर पर गिलोय प्रयुक्त होती है। सभी प्रकार के जीर्ण ज्वरों को दूर करने में गिलोय बहुत फायदेमंद है।

4. गिलोय एक रसायन के रूप में काम करती है। यह शरीर में जाकर खून को साफ़ करती है।

5. गिलोय हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाती है।

6. गिलोय कोलेस्ट्रोल को कम करती है तथा खून में शूगर के नियंत्रण में सहायता करती है।

7. गिलोय के नित्य प्रयोग से चेहरे पर तेज आता है और असमय ही झुर्रियां नहीं पड़ती।

8. गिलोय त्रिदोशघ्न है अर्थात किसी भी प्रकृति के लोग इसे ले सकते हैं।

9. गिलोय पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में सहायक है और इसके सेवन से अंत सम्बन्धी समस्याएं दूर होती हैं\

10. गिलोय अपनी anti-inflammatory और anti-arthritic properties के कारण गठिया में भी फायदेमंद है\

गिलोय का घरेलू प्रयोग कैसे करें?

1. ज्वर या बुखार होने पर: 4-5 इंच गिलोय के टुकड़े के साथ एक चम्मच धनिया तथा एक टुकड़ा नीम की छाल का आंतरिक भाग मिला कर काढ़ा बना कर लेना बुखार में फायदेमंद है या गिलोय का 4-5 इंच टुकड़ा लेकर उसके साथ 2-3 तुलसी के पत्ते तथा इतनी ही कालीमिर्च लेकर काढ़ा बना कर पीना भी बुखार में फायदेमंद है अथवा केवल गिलोय का काढ़ा बनाकर पीना भी बुखार में आराम देता है स्वाद के लिए इसमें शहद,गुड अथवा चीनी डाल सकते हैं।

2. डेंगू बुखार में: Platelets कम होने पर गिलोय के रस के साथ, aloevera juice,अनार का juice तथा पपीते की पत्तियों का रस मिलाकर लेना फायदेमंद माना जाता है।

3. मधुमेह या diabetes में:  गिलोय का रस कुछ समय तक लगातार दिन में 2 बार लेना मधुमेह में फायदेमंद है।

4. जोड़ों के दर्द में: गिलोय का काढ़ा बनाकर उसमें 10-20 ml अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

5. रक्त विकार होने पर: खाज, खुजली जैसे चर्म रोगों में शुद्ध गुगुल के साथ देने से लाभ होता है।

6. कब्ज होने पर: गिलोय का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करना कब्ज को दूर करता है।

7. मूत्र विकारों में: गिलोय का काढ़ा पेशाब संबंधी परेशानियों को दूर करने में भी फायदेमंद माना गया है।

8. स्किन के लिए: गिलोय का सेवन त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद है गिलोय के नित्य प्रयोग से शरीर में कान्ति आती है।

9. पाचन के लिए: आप आधा ग्राम गिलोय पाउडर को आमला या गुड़ में मिला कर खा सकते हैं. इससे आँतों की समस्या नहीं होती\

10. गठिया में: गिलोय के ताने से बनाये गए पाउडर को दूध में मिला कर पीना गठिया में सहायक है\ Rheumatoid arthritis के मामलों में आप इसका सेवन अदरक के साथ भी कर सकते हैं\

Patanjali (पतंजलि) व अन्य कंपनियों के गिलोय से बने हुए अमृतादि गुगुल, गिलोय वटी,अमृतारिष्ट, गिलोय सत्व जैसे अनेक उत्पाद मार्किट में उपलब्ध हैं जो अनेक औषधियों के साथ अथवा अकेले भी प्रयोग किये जाते हैं\ इनका चिकित्सक की राय लेकर सेवन किया जा सकता है।

मित्रो, हम आशा करते हैं कि गिलोय से सम्बंधित यह जानकारी आपके लिए फायदेमंद साबित होगी और आप इसके उपयोग से खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख पायेंगे।

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इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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