आँखो की रोशनी बढ़ाने और चश्मा हटाने के लिए काली मिर्च का गजब प्रयोग

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काली मिर्च को पीसकर, घी भूरा संग खाये ,
नेत्र रोग सब दूर हो , गिद्ध दृष्टि हो जाये ,
नेत्रो के लिए परम हितकारी काली मिर्च का यह प्रयोग कमजोर दृष्टि वालो के लिए यह बेहतरीन है। इससे नेत्रो के सभी रोग दूर होकर आँखो की रौशनी गिद्ध के बराबर अर्थात अति तेज यानि दूर से देखने वाली हो जाएगी। तो आइये जाने ये प्रयोग-

उपरोक्त कहावत अपने आप में सारी कहानी बंया करती है। काली मिर्च में निसंदेह नेत्र ज्योति को बढ़ाने वाले अद्भुत गुण होते है। जिसमे बताया गया है। की काली मिर्च को पीसकर देसी गाय के घी तथा बुरा व् शक़्कर के साथ मिलाकर नित्य खाने से नेत्र के सभी रोग दूर हो जाते है और व्यक्ति गिद्ध के समान तेज दृष्टि वाला हो जाता है। इन तीनो को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाए तीनो को 100 -१०० ग्राम की मात्रा में लेकर मिला लीजिए।
इस प्रयोग को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को ये मिश्रण तैयार करके चन्द्रमा की किरणों के नीचे पूरी रात रखे चन्द्रमा की शीतल किरणों से यह प्रभाव अधिक शक्तिशाली बन जाता है।

Kali-Mirch-for eye

औषधि को प्रयोग करने की विधि

यह मिश्रण नाश्ते से एक घंटा पहले गाय के दूध के साथ एक चम्मच सेवन करें सर्दियों में यह 2 चम्मच तक सेवन किया जा सकता है। यह प्रयोग 15 -90 दिन तक सेवन करना पड़ता है। यह अपना रिजल्ट 15 -20 दिन में अपना असर दिखाना शुरू कर देता है।
अगर चश्मा लगा हुआ है या आँखो में अधिक प्रोब्लेम्स है तो आप इस प्रयोग के साथ-साथ सुबह मल त्याग करने के बाद शीर्षाशन जरूर करें। ध्यान रहे की ये आसन करते समय दोनों आँखे बंद हो वरना नेत्र ज्योति बढ़ने की बजाय कम हो जाएगी।

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इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।

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