यदि पेट छाती में जलन हो तो करें ये उपाय, तुरन्त राहत मिलेगी

0

पेट छाती में जलन

हम जो खाना खाते हैं, उसका सही तरह से पचना बहुत ज़रूरी होता है। पाचन की प्रक्रिया में हमारा पेट एक ऐसे एसिड को स्रावित करता है जो पाचन के लिए बहुत ही ज़रूरी होता है। सरल रूप में जलन पर कई बार यह एसिड आवश्यकता से अधिक मात्रा में निर्मित होता है, जिसके परिणामस्वरूप सीने में तेज़ जलन और फैरिंक्स और पेट के बीच के पथ में पीड़ा और परेशानी का एहसास होता है। इस हालत को एसिडिटी या एसिड पेप्टिक रोग के नाम से जाना जाता है।

एसिडिटी होने के कारण

एसिडिटी के आम कारण होते हैं, खान पान में अनियमितता, खाने को ठीक तरह से नहीं चबाना, और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना इत्यादि। मसालेदार और जंक फ़ूड आहार का सेवनकरना भी एसिडिटी के अन्य कारण होते हैं। इसके अलावा हड़बड़ी में खाना और तनावग्रस्त होकर खाना और धूम्रपान और मदिरापान भी एसिडिटी के कारण होते हैं। आमाषय सामान्यत: भोजन पचाने हेतु जठर रस का निर्माण करता है। लेकिन जब आमाषयिक ग्रंथि से अधिक मात्रा में जठर रस बनने लगता है तब हायडोक्लोरिक एसिड की अधिकता से एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है। बदहजमी .सीने में जलन और आमाषय में छाले इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। भारी खाने के सेवन करने से भी एसिडिटी की परेशानी बढ़ जाती है। और सुबह सुबह अल्पाहार न करना और लंबे समय तक भूखे रहने से भी एसिडिटी आपको परेशान कर सकती है।

  • अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन-वस्तुएं उपयोग करना।
  • रात को लेटने पर भी एसिडिटी के लक्षण उग्र हो जाते हैं।
  • मांसाहार।
  • अधिक शराब का सेवन करना।
  • कुछ अंग्रेजी दर्द निवारक गोलियां भी एसिडिटी रोग उत्पन्न करती हैं।
  • भोजन के बाद अम्लता के लक्षण बढ जाते हैं।

एसिडिटी के लक्षण

  1. पेट में जलन का एहसास
  2. सीने में जलन
  3. मतली का एहसास
  4. डकार आना
  5. खाने पीने में कम दिलचस्पी

एसिडिटी के आयुर्वेदिक उपचार

हरड़

यह पेट की एसिडिटी और सीने की जलन को ठीक करता है ।

अदरक का रस

नींबू और शहद में अदरक का रस मिलाकर पीने से, पेट की जलन शांत होती है।

बबूना

यह तनाव से संबधित पेट की जलन को कम करता है।

अश्वगंधा

भूख की समस्या और पेट की जलन संबधित रोगों के उपचार में अश्वगंधा सहायक सिद्ध होती है।

चन्दन

एसिडिटी के उपचार के लिए चन्दन द्वारा चिकित्सा युगों से चली आ रही चिकित्सा प्रणाली है। चन्दन गैस से संबधित परेशानियों को ठंडक प्रदान करता है।

चिरायता

चिरायता के प्रयोग से पेट की जलन और दस्त जैसी पेट की गड़बड़ियों को ठीक करने में सहायता मिलती है।

इलायची

सीने की जलन को ठीक करने के लिए इलायची का प्रयोग सहायक सिद्ध होता है।

सौंफ

सौंफ भी पेट की जलन को ठीक करने में सहायक सिद्ध होती है। यह एक तरह की सौम्य रेचक होती है और शिशुओं और बच्चों की पाचन और एसिडिटी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए भी मदद करती है।

लहसुन

पेट की सभी बीमारियों के उपचार के लिए लहसुन रामबाण का काम करता है।

मेथी

मेथी के पत्ते पेट की जलन में सहायक सिद्ध होते हैं।

एसिडिटी के घरेलू उपचार

  1. एक गिलास पानी में एक नींबू निचोडें। भोजन के बीच-बीच में नींबू पानी पीते रहें। एसिडिटी का समाधान होगा।
  2. एक गिलास जल में २ चम्मच सौंफ़ डालकर उबालें।रात भर रखे। सुबह छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें। एसिडीटी नियंत्रण का उत्तम उपचार है।
  3. आधा गिलास मट्ठा( छाछ) में १५ मिलि हरा धनिये का रस मिलाकर पीने से बदहजमी ,अम्लता, सीने मे जलन का निवारन होता है।
  4. विटामिन बी और ई युक्त सब्जियों का अधिक सेवन करें।
  5. व्यायाम और शारीरिक गतिविधियाँ करते रहें।
  6. खाना खाने के बाद किसी भी तरह के पेय का सेवन ना करें।
  7. बादाम का सेवन आपके सीने की जलन कम करने में मदद करता है।
  8. खीरा, ककड़ी और तरबूज का अधिक सेवन करें।
  9. पानी में नींबू मिलाकर पियें, इससे भी सीने की जलन कम होती है।
  10. नियमित रूप से पुदीने के रस का सेवन करें ।
  11. तुलसी के पत्ते एसिडिटी और मतली से काफी हद तक राहत दिलाते हैं।
  12. नारियल पानी का सेवन अधिक करें
  13. शाह जीरा अम्लता निवारक होता है। डेढ लिटर पानी में २ चम्मच शाह जीरा डालें । १०-१५ मिनिट उबालें। यह काढा मामूली गरम हालत में दिन में ३ बार पीयें। एक हफ़्ते के प्रयोग से एसिडीटी नियंत्रित हो जाती है।
  14.  भोजन पश्चात थोडे से गुड की डली मुहं में रखकर चूसें। हितकारी उपाय है।
  15. सुबह उठकर २-३ गिलास पानी पीयें। आप देखेंगे कि इस उपाय से अम्लता
    निवारण में बडी मदद मिलती है।
  16. तुलसी के दो चार पत्ते दिन में कई बार चबाकर खाने से अम्लता में लाभ होता है।
  17. सुबह-शाम २-३ किलोमिटर घूमने से तन्दुरस्ती ठीक रहती है और इससे अम्लता की समस्या से निपटने में भी मदद मिलती है।
  18. आंवला एक ऐसा फ़ल जिससे शरीर के अनेकों रोग नष्ट होते हैं। एसिडीटी निवारण हेतु आंवला क उपयोग करना उत्तम फ़लदायी है।
  19. पुदिने का रस और पुदिने का तेल पेट की गेस और अम्लता निवारक कुदरती पदार्थ है। इसके केप्सूल भी मिलते हैं।
  20. फ़लों का उपयोग अम्लता निवारंण में महती गुणकारी है। खासकर केला,तरबूज,ककडी और पपीता बहुत फ़ायदेमंद हैं।
  21. ५ ग्राम लौंग और ३ ग्राम ईलायची का पावडर बनालें। भोजन पश्चात चुटकी भर पावडर मुंह में रखकर चूसें। मुंह की बदबू दूर होगी और अम्लता में भी लाभ होगा।
  22.  दूध और दूध से बने पदार्थ अम्लता नाशक माने गये हैं।
  23. अचार,सिरका,तला हुआ भोजन,मिर्च-मसालेदार चीजों का परहेज करें। इनसे अम्लता बढती है। चाय,काफ़ी और अधिक बीडी,सिगरेट उपयोग करने से एसिडिटी की समस्या पैदा होती है। छोडने का प्रयास करें।
इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेल नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
Loading...

Leave a Reply