शरीर में बढ़ गया है यूरिक एसिड तो, न खाएं ये 5 चीज़ें

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यूरिक एसिड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक गंभीर रोग है, इसके शुरुआती लक्षण जोड़ों में दर्द और शरीर में जकड़न महसूस होती है। अगर इसका उपचार न किया जाए तो गठिया, किडनी स्टोन, डायबिटीज और रक्त विकार जैसी कई परेशानिया बढ़ने लगती हैं। इसे कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है।

क्या है यूरिक एसिड

यह कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे तत्वों से मिलकर बना कम्पाउंड होता है जो शरीर को प्रोटीन से एमिनो अम्लों के रूप में प्राप्त होता है। इसकी मात्रा यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकल जाती है लेकिन जब शरीर में इस तत्व की मात्रा बढ़ जाती है तो यूरिक एसिड शरीर में जमा होने लगता है। जो हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। जिससे गठिया रोग होने का डर रहता है।

किन लोगों को होती है यूरिक एसिड की परेशानी

जब रोग प्रतिरोधक कमजोर होती है तो शरीर बीमारियों को चपेट में बहुत जल्दी आ जाता है। शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने का मुख्य कारण बैलेंस डाइट का अभाव है। जो लोग प्रोटीन युक्त आहार का जरूरत से ज्यादा सेवन करते हैं तो धीरे-धीरे शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने लगता है। इसके अलावा 35 साल की उम्र के लोग इस परेशानी से जल्दी घिर जाते हैं।

लक्षण

पैरों-जोड़ों में दर्द
एड़ियों में दर्द
गांठों में सूजन
सोते समय पैर में जकड़न
लगातार बैठने और उठने में एड़ियो में असहनीय दर्द
शूगर लेवल का बढ़ना

क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज

यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने के लिए परहेज सबसे ज्यादा जरूरी है। हाई प्रोटीन आहार को ज्यादा मात्रा में सेवन करने से यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ने लगती है। खान-पान में परहेज करने से इस परेशानी से राहत पाई जा सकती है।

न खाएं ये आहार

1. दही
दही, चावल, ड्राई फ्रूट्स, दाल और पालक बंद कर दें। इनमें प्रोटीन बहुत ज्यादा होता है।

2. दाल चावल
रात को सोते समय दूध या दाल का सेवन करना हानिकारक है। इससे शरीर में ज्यादा मात्रा में यूरिक एसिड जमा होने लगता है। छिलके वाली दालों से पूरी तरह परहेज करें।

3. बेकरी फूड्स
बेकरी फूड जैसे कि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, क्रीम बिस्कुट इत्यादि ना खाएं। ट्रांस फैट से भरपूर खाना यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ाता है।

4. नॉन वेज
नॉन वेज खाने के शौकीन है तो मीट, अंडा, मछली का सेवन तुरंत बंद करें। इसे खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है।

5. सोया मिल्क
यूरिक एसिड की परेशानी से बचने के लिए सोया मिल्क, जंक फूड,चटपटे खाद्य पदार्थ, ठंडा पेय, तली-भूनी चीजें न खाएं।

6. खाने के बाद पानी
पानी पीने के नियम भी जरूर फॉलो करना चाहिए। खाना खाते समय पानी ना पीएं, पानी खाने से डेढ़ घंटे पहले या बाद में ही पीना चाहिए।

7. शराब और अल्कोहल
शराब, कैफीन, अल्कोहल, धूम्रपान जैसे पदार्थों का सेवन ना करें। इन चीजों से यूरिक एसिड बढ़ जाता है। इनमें यीस्‍ट होता है जो सेहत के लिए नुकसानदायक है।

यूरिक एसिड में खाएं ये चीजें

1. सेब का सिरका
सेब का सिरका शरीर में ब्लड के पीएच वॉल्यूम को बढ़ाकर यूरिक ऐसिड को कम करने में मदद करता है।

2. पानी का सेवन
शरीर से यूरिक एसिड की मात्रा को निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। थोड़ी-थोड़ी देर पानी पीते रहें। दिन में 10-12 गिलास पानी का सेवन करें।

3. विटमिन-सी 
डाइट में संतरा,आंवला आदि विटामिन सी युक्त आहार शामिल करें।

4. छोटी इलायची
रात को सोने से पहले 2 हरी छोटी इलायची 1 गिलास गुनगुने पानी के साथ खाएं।

5. प्याज 
प्याज शरीर में मेटाबॉलिज्म और प्रोटीन की मात्रा को बढ़ाता है। जब इन दोनों की मात्रा शरीर में बढ़ जाती है तो यूरिक एसिड लेवल कंट्रोल हो जाएगा।

6. अजवाइन 
अजवाइन का सेवन करने से यूरिक एसिड की मात्रा कंट्रोल रहती है।

7. कच्चा पपीता 
एक कच्चा पपीता लें इसे काट कर बीजों को अलग कर लें। अब पपीते को 2 लीटर पानी में 5 मिनट के लिए उबाल लें। इस पानी को ठंडा करके छान लें फिर दिन 2 से 3 बार पिएं।

Source: www.nari.punjabkesari.in

चेहरे के लक्षण देख कर, जानिए इन स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में

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मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो अभिव्यक्ति करने में सक्षम है। मानव इस अभिव्यक्ति में सहयोग देने में सबसे सर्वप्रथम कहा जाता है कि चेहरे को पढ़कर आपके स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं की जानकारी ली जा सकती है। यह सब हम प्राचीन आयुर्वेदिक प्रथम एवं चीनी दवाओं के आधार पर बोल सकते हैं। आइए जानते हैं कि हमारे चेहरा हमारे स्वास्थ्य के बारे में क्या जानकारी दे सकता है?

नाक और फेफड़ों का संबंध

हमारी सांसे नाक से होती हुई हमारे फेफड़ों तक जाती है, इसी प्रकार से हमारी नाक फेफड़ों से जुडी होती है। यदि आपको आपने नॉस्ट्रिल लाल एवं सूजे हुए प्रतीत होते हैं तो यह फैफ़ड़ों में जमे बलगम का संकेत देता है जो अधिक अधिक मात्रा में डेरी उत्पादन का सेवन करने से, सर्दी या किसी अन्य बीमारी के कारणों की वजह से हो सकता है। इसके विपरीत यदि आपको अपने नॉस्ट्रिल सूखे प्रतीत होते हैं तो उसका एकमात्र कारण निमोनिया हो सकता है इसके आलवा लाल नाक पीठ दर्द या मूत्राशय की समस्या को भी बताती है।

आंखें बताती हैं गुर्दे और लीवर का स्वास्थ्य

कहा जाता है कि हमारे शरीर का हर एक अंग बाकी अंगों से जुड़ा होता है, इसी प्रकार हमारे गुर्दे, लीवर के स्वास्थ्य की जानकारी हमारी आंखों के नीचे का क्षेत्र भली-भांति बता सकता है। यदि आप कुछ निर्जलित महसूस करते है तो आंखों के नीचे का क्षेत्र नीले रंग का पड़ जाता है। ऐसे में आपके शरीर को पाने की आवश्यकता होती है। ऐसे ही यदि यह क्षेत्र भूरा रंग का प्रतीत हो उसका कारण अस्वस्थ भोजन एवं नींद की कमी हो सकता है। यह सब एक तनावग्रस्त लीवर एवं गुर्दे के लक्षण है।

गाल और दांतो का संबंध

यदि आप अपने चेहरे के मुहांसों से चिंतित हैं तो इसका सीधा संकेत हमारे शरीर में बने जहरीले पदार्थों की वजह भी हो सकता है। दरअसल हमारे गाल हमारे फेफड़े, साइनस और फोड़े-फुंसी के स्तर को दर्शाते हैं। यदि गाल का ऊपरी हिस्सा मुंहासे दर्शाता है तो शरीर में जहरीले पदार्थ बनने के कारण फेफड़े या साइनस की परेशानी हो सकती है और यदि गाल का निचली मुंहासे दर्शाता है तो दांतो या गुर्दो से संबंधित रोगों से ग्रसित होने की संभावना हो सकती है।

आंख और पीठ का संबंध

हमारी आंखें हमारे पेट से संबंधित समस्याओं के बारे में बहुत आसानी से बता सकती हैं। यदि आप की आंखें आपको लाल नजर आती है तो यह एक पीठ दर्द का संकेत हो सकता है। गुर्दे का सही से काम न करने का संकेत हमारी आंखें काली एवं भूरे प्रतीत होने वाले छोटे धब्बे के माध्यम से संकेत देती है जो मुख्य रूप से शरीर में विषाक्त पदार्थो के बनने से भी हो सकता है।

होंठो का संबंध पाचन तंत्र से

आपके होठों का रंग आपके पाचन तंत्र के स्वास्थ्य को बखूबी बता सकता है। खराब पाचन तंत्र होने की वजह से आपका होंठ पीले रंग का दिखेगा, यदि आपको अपने होठों पर सूजन या चिपचिपाहट महसूस होती है तो उसका भी एक मात्र कारण आपका पाचन हो सकता, इसका मतलब आपका कोलन सही तरीके से कार्यरत नही है, गहरे रंग के होंठ गुर्दे से संबंधित बीमारियों का संकेत देता है।

ठोडी पर मुहांसे

हमारे शरीर में होने वाली गतिविधियों का असर हमारे बाहरी शरीर पर नजर आता है, इसी प्रकार ठोडी का हिस्सा हॉर्मोन, रक्त, पाचन और महिलाओं में मासिक धर्म की समस्या को दर्शाता है। शरीर में हार्मोन असंतुलन होने के कारण त्वचा पर मुहासे निकलना बहुत मामूली बात है, रूखी और सूखी त्वचा भी पाचन समस्या का संकेत देती हैं। इसी कारण से महिलाओं में पीरियड्स की समस्या में भी मुहासे और शुष्क त्वचा आदि जैसी चीज़े बहुत परेशान करती है।

हृदय एवं त्वचा में संबंध

हमारे हृदय के स्वास्थ्य की जानकारी हमारी त्वचा बखूबी देती है। यदि आपको अपनी त्वचा के रंग में कुछ बदलाव नजर आता है तो वह शरीर से जुड़ी समस्याओं का एक संकेत हो सकता है। ऐसे में त्वचा का रंग हल्का हरा लगने पर यह लिवर की समस्या से संबंधित हो सकता है, त्वचा के लाल दिखने पर रैशेज या सनबर्न संबंधित परेशान हो सकती है और अत्यधिक सफेद होने पर हृदय से संबंधित रोग जैसे हृदयघात और ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।

Source: www.freehindiadvice.com

हल्दी के फायदे – haldi ke fayde

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हल्दी के फायदे – haldi ke fayde in hindi: हल्दी भारतीय भोजन में इस्तेमाल होने वाले मसालों की ही श्रेणी में आती है। यह अदरक की तरह ही जमीन में उगाया जाती है और सूखने के बाद इसकी जड़ों का ही उपयोग किया जाता है जोकि पीले रंग की होती है। प्राचीन काल से ही हल्दी का सेवन और हल्दी का उपयोग जड़ी-बूटी (herbs) के रूप में कई विकारों को दूर करने में किया जाता है। इसलिए हल्दी को तुरंत दर्दनिवारक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। कई सारे गुणकारी तत्वों से युक्त होने के कारण हल्दी बहुत लोकप्रिय है और लगभग हर घरों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। आइये जानते है हल्दी के फायदे गुण लाभ aaiye jane haldi ke fayde gun labh

1. बालों के झड़ने की समस्या

को दूर करने के लिए कच्ची हल्दी के रस में चुकंदर की पत्तियों का रस मिलाकर बालों में लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

2. खून की कमी

होने पर 2 चम्मच हल्दी पाउडर और 2 चम्मच शहद को 1/2 गिलास पानी में मिलाकर दिन में दो बार नियमित रूप से पीने से खून बढ़ता है।

3. मुँह में छाले

होने पर एक गिलास पानी में 1/4 चम्मच हल्दी डालकर दिन में 3 बार कुल्ले करने से छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं।

4. पायरिया

दांतों में पायरिया की शिकायत होने पर हल्दी पाउडर, नमक और सरसों के तेल को मिलाकर मंजन (दांतों की सफाई) करने से पायरिया रोग ठीक हो जाता है।

5. मसूड़ों में सूजन एवं पस

की शिकायत होने पर कच्ची हल्दी के रस से मसूड़ों की मालिश करने से आराम मिलता है।

6. दमकती, बेदाग़ त्वचा के लिए

1/2 कटोरी बेसन, 4 चम्मच शुद्ध हल्दी पाउडर, आधे नींबू का रस एवं 2 चम्मच कच्चे दूध को मिलाकर उबटन लगाने से त्वचा चमकदार एवं बेदाग़ हो जाती है।

7. चेहरे की झाइयों को दूर करने के लिए

चेहरे की झाइयों को दूर करने के लिए काले तिल के पाउडर एवं हल्दी पाउडर की बराबर मात्रा को कच्चे दूध में मिलाकर नियमित रूप से चेहरे पर लगाएं।

8. मुहांसे

मुंहासों पर हल्दी के पाउडर को गुलाब जल में मिलाकर लगाने से मुहांसे जल्दी ठीक हो जाते हैं।

9. घावों को ठीक करे

घाव से या कट जाने पर खून बह रहा हो तो हल्दी पाउडर को प्रभावित स्थान पर भर देने से खून बहना बंद हो जाता है।

10. मधुमेह के रोगियों को दे अत्यधिक पेशाब की समस्या से मुक्ति

एक चम्मच हल्दी के पाउडर को एक गिलास पानी के साथ दिन में दो बार पीने से डायबिटीज रोग में बार -बार पेशाब की समस्या से छुटकारा मिलता है।

11. सुखी खांसी

होने पर दिन में दो बार 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर में 1/2 चम्मच शहद मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ठीक हो जाती है।

12. सर्दी जुखाम एवं खांसी

एक गिलास दूध में 1/2 चम्मच सुखी हल्दी के पाउडर को मिलाकर पीने से सर्दी जुखाम एवं खांसी ठीक हो जाती है।

13. जोड़ों का दर्द

कच्ची हल्दी के1 इंच टुकड़े को एक गिलास दूध में उबाल कर रात को सोने से पहले नियमित रूप से पीने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

14. पेट में कीड़े

होने पर 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर को भुन कर पानी के साथ रात को सोने पहले लेने पर कीड़े मर जाते हैं।

15. पेट में गैस

की वजह से दर्द होने पर हल्दी और सेंधा नमक को साथ लेने से आराम मिलता है।

16. रक्त की अशुद्धियाँ

एक चम्मच आंवला पाउडर और 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर को एक कप पानी के साथ पीने से रक्त की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।

17. खून में चीनी की मात्र करे कम

हल्दी पाउडर एवं मेथी के बीज के पाउडर को साथ मिलाकर रोज़ खाने से खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है।

18. एड़ी में बिवाई

होने पर हल्दी पाउडर को सरसों के तेल में मिलाकर लगाने से आराम मिलता है।

19. हिस्टीरिया का दौरा

पड़ने पर रोगी को हल्दी के धुएं को सुंघाने से आराम मिलता है।

20. पाइल्स

एलोवेरा जेल में हल्दी के पाउडर को मिलाकर पाइल्स के मस्से पर लगाने से मस्सा सूख जाता है।

21. पाचन तंत्र को करे मजबूत

हल्दी को दूध में मिलाकर पीने से लीवर ठीक तरह से काम करता है तथा पाचन तंत्र मजबूत होता है।

22. स्तनों में सूजन

होने पर एलोवेरा जेल में हल्दी पाउडर मिलाकर लगाने से आराम मिलता है।

23. त्वचा के जल जाने पर

हल्दी पाउडर को पानी में मिलाकर लगाने से फफोले नहीं पड़ते हैं।

24. पेट का अल्सर

हल्दी में कुरकमिन नामक तत्व पाए जाते हैं जो पेट के अल्सर और जलन को दूर करने में सहायक होते हैं।

25. कैंसर

रोज़ नियमित रूप से नीम और हल्दी से बनी गोली खाने से खून की शुद्धि होती है जिससे शरीर में कैंसर रोग की कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।

सर्दी, खांसी, जुकाम के लिए दादी माँ के 15 घरेलू नुस्खे

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सर्दी, खांसी, जुकाम के लिए दादी माँ के 15 घरेलू नुस्खे: मौसम में बदलाव के साथ ही कई प्रकार की बीमारियां व्‍यक्ति को अपना शिकार बनाती है। इनमें जुकाम और खांसी सबसे सामान्‍य हैं। साधारण सी बीमारी लगने वाली ये बीमारी आपको बहुत परेशान कर सकती है। इसके उपचार के लिए आप घरेलू उपाय आजमा सकते हैं, ये आसानी से उपलब्‍ध होते हैं और इनका कोई भी साइड इफेक्‍ट भी नही पड़ता है।

खांसी के लिए शहद, नीम्बू और दालचीनी

सामग्री:

  • 1 चम्मच शहद
  • कुछ बूंदे नींबू का रस
  • एक चुटकी दालचीनी पाउडर
  • पानी

कैसे इस्तेमाल करें?

  • एक सॉस पैन लें और इसमें नींबू, शहद और दालचीनी पाउडर जोड़ें। अच्छी तरह मिलाएं।
  • आधे मिनट के लिए मिश्रण गरम करें और फिर इसमें पानी जोड़ें। इसे उबाल लें और गैस बंद कर दें।
  • मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर इसे आगे के उपयोग के लिए एक साफ और सूखे ग्लास जार में स्थानांतरित करें।
  • खांसी मुक्त रात के लिए सोने जाने से पहले इस खांसी सिरप के दो-तीन चम्मच लें।

शहद, नींबू और इलायची का मिश्रण

आधा चम्मच शहद में एक चुटकी इलायची और कुछ नीबू के रस की बूंदे डालिए। इस सिरप का दिन में 2 बार सेवन करें। आपको खांसी-जुकाम से काफी राहत मिलेगी।

गर्म पानी

जितना हो सके गर्म पानी पिएं। आपके गले में जमा कफ खुलेगा और आप सुधार महसूस करेंगे।

हल्दी वाला दूध

बचपन में सर्दियों में नानी-दादी घर के बच्चों को सर्दी के मौसम में रोज हल्दी वाला दूध पीने के लिए देती थी। हल्दी वाला दूध जुकाम में काफी फायदेमंद होता है क्योंकि हल्दी में एंटीआॅक्सीडेंट्स होते हैं जो कीटाणुओं से हमारी रक्षा करते हैं। रात को सोने से पहले इसे पीने से तेजी से आराम पहुचता है. हल्दी में एंटी बैक्टीरियल और एंटी वायरल प्रॉपर्टीज मौजूद रहती है जो की इन्फेक्शन से लडती है. इसकी एंटी इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज सर्दी, खांसी और जुकाम के लक्षणों में आराम पहुंचाती है.

गर्म पानी और नमक से गरारे

गर्म पानी में चुटकी भर नमक मिला कर गरारे करने से खांसी-जुकाम के दौरान काफी राहत मिलती है। इससे गले को राहत मिलती है और खांसी से भी आराम मिलता है। यह भी काफी पुराना नुस्खा है।

अदरक-तुलसी

अदरक के रस में तुलसी मिलाएं और इसका सेवन करें। इसमें शहद भी मिलाया जा सकता है।

अदरक और नमक

अदरक को छोटे टुकड़ों में काटें और उसमें नमक मिलाएं। इसे खा लें। इसके रस से आपका गला खुल जाएगा और नमक से कीटाणु मर जाएंगे।

लहसुन

लहसुन को घी में भून लें और गर्म-गर्म ही खा लें। यह स्वाद में खराब हो सकता है लेकिन स्वास्थ्य के लिए एकदम शानदार है।

शहद और ब्रैंडी

ब्रैंडी तो पहले ही शरीर गर्म करने के लिए जानी जाती है। इसके साथ शहद मिक्स करने से जुकाम पर काफी असर होगा।

मसाले वाली चाय

अपनी चाय में अदरक, तुलसी, काली मिर्च मिला कर चाय का सेवन कीजिए। इन तीनों तत्वों के सेवन से खांसी-जुकाम में काफी राहत मिलती है।

आंवला

आंवला में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है जो खून के संचार को बेहतर करता है और इसमें एंटी-आॅक्सीडेंट्स भी होते हैं जो आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है।

अनार का रस

अनार के जूस में थोडा अदरक और पिपली का पाउडर डालने से खांसी को आराम मिलता है।

काली मिर्च

अगर खांसी के साथ बलगम भी है तो आधा चम्मच काली मिर्च को देसी घी के साथ मिलाकर खाएं। आराम मिलेगा।

गर्म पदार्थों का सेवन

सूप, चाय, गर्म पानी का सेवन करें। ठंडा पानी, मसालेदार खाना आदि से परहेज करें।

आंवला खाने के फायदे, amla khane ke fayde in hindi

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आंवला खाने के फायदे, amla khane ke fayde in hindi- आंवला एक ऐसा फल है, जिसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट, पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट ,फाइबर ,प्रोटीन ,विटामिन्स ,मैग्नीशियम, आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। अगर आप इसको गर्म करके भी खाएं तो भी इसमें मौजूद विटामिन खत्म नहीं होते। आंवला का सेवन करने से कई तरह की बीमारियां दूर होती है और यह अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी होता है।

आंवले के लाभ, amla khane ke labh in hindi

यह कई बीमारियों के लिए उपचार प्रदान करता है और इसलिए इसका व्यापक रूप से आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग किया जाता है। आंवला विटामिन सी में बहुत समृद्ध है, और कई खनिज और कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटीन और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे विटामिन शामिल हैं।

आमला के स्वास्थ्य लाभ में निम्न शामिल हैं:

1. आँखों के लिए

शहद के साथ आंवले का रस पीने से दृष्टि में सुधार होता है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि यह अंतर-ओक्यूलर तनाव को कम कर, निकटता और मोतियाबिंद में सुधार करता है। विटामिन ए और कैरोटीन मेक्यूलर डिएनेजरेशन, रात अंधापन को कम करता है और आपकी दृष्टि को मजबूत कर सकता है।

2. दिल के लिए

यह हृदय की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल बिल्डअप को कम करने से, आंवले में मौजूद क्रोमियम आथरोसक्लेरोसिस की संभावना को कम कर सकता है, तथा जहाजों और धमनियों में पट्टिका के निर्माण को कम कर सकता है। लोहे की सामग्री नए लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देती है, रक्त वाहिकाओं और धमनियों को साफ करते हुए नए रक्त कोशिकाओं के विकास और पुनर्जन्म को अधिकतम करने के लिए परिसंचरण और अंगों और कोशिकाओं के ऑक्सीजन को बढ़ाता है।

3. मधुमेह के लिए

आंवला, कोशिकाओं के पृथक समूह को उत्तेजित करता है जो हार्मोन इंसुलिन को छिपाने के साथ-साथ मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा को कम करते हैं और शरीर को संतुलित और स्वस्थ रखते हैं। इसमें मौजूद क्रोमियम शरीर के एलडीएल कोलेस्ट्रॉल सामग्री को कम करके, हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोग किया जाता है, जो बीटा-अवरोधक के प्रभाव को बढ़ाता है।

4. बालों के लिए

आंवला कई बाल के टॉनिकों में प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह बाल विकास और बाल रंजकता को बढ़ाता है। ताजा आंवला खाने या बालों की जड़ों पर इसका पेस्ट लगाने से बाल विकास और रंग में सुधार होता है।

5. पाचन के लिए

आंवला में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर है जो आंतों के माध्यम से भोजन को ले जाने में मदद करता है और आपके मल त्याग को नियमित रखता है। फाइबर ढीली मल को भी बढ़ा सकता है और दस्त को कम कर सकता है।

6. मूत्रवर्धक गतिविधि

आंवला थोड़ा मूत्रवर्धक भी है, जो आवृत्ति और पेशाब की मात्रा बढ़ाता है। मूत्रवर्धक पदार्थ हमारे गुर्दे को स्वस्थ रखने, मूत्र संक्रमण और गर्भाशय में संक्रमण को रोकने के लिए आवश्यक होता है।

7. मेटाबोलिक गतिविधि

आंवले में प्रोटीन भी होते हैं। सेलुलर विकास, मांसपेशियों के विकास, अंग स्वास्थ्य, और अन्य चयापचय गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए प्रोटीन आवश्यक है।

8. मासिक धर्म में ऐंठन के लिए

आंवले में मौजूद कुछ खनिज और विटामिन सामूहिक रूप से मासिक धर्म के ऐंठन के उपचार में बहुत उपयोगी होते हैं।

9. संक्रमण के लिए

इसके जीवाणुरोधी और कसैले गुणों के कारण, आंवले शरीर के संक्रमण के खिलाफ रक्षा करते हैं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में सुधार करते हैं। आंवले में मौजूद विटामिन सी शरीर में सफेद रक्त कोशिका की गिनती में वृद्धि करते हैं।

10. एंटी-एजिंग

आंवला अपने एंटीऑक्सिडेंट गुणों के माध्यम से शरीर में मुक्त कणों की मात्रा को कम करके स्वास्थ्य से संबंधित हाइपरलिपिडाइमिया को रोकता है। मुक्त कण, उम्र बढ़ने के लक्षणों जैसे झुर्रियाँ और उम्र के धब्बे के साथ जुड़े हुए हैं।

आंवले खाने के नुकसान, amla khane ke nuksan in hindi

सभी पहलुओं में एक सुपर भोजन, आंवला साइड इफेक्ट्स से मुक्त नहीं है। हालांकि अध्ययनों में किसी प्रकार के जहरीले या कठोर, नकारात्मक प्रभावों की रिपोर्ट नहीं होती है, लेकिन आंवले के उपयोग से संबंधित कुछ हल्के, प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं हैं।

1. हाइपरएसिडि टी ट्रिगर कर सकता है: यदि आपका हाइपरएसिडि टी या विटामिन सी खाद्य पदार्थों की संवेदनशीलता का कोई भी इतिहास है, तो आपको इस फल को खाने से बचना चाहिए।

2. जिन लोगों को आंवले से एलर्जी हो, उन्हे कुछ स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों जैसे दस्त, पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी, लाली और अपने मुँह के आसपास सूजन, चेहरे पर लालच, त्वचा और चेहरे पर पित्ती, श्वास बाधित, सिरदर्द, चक्कर आना, और हल्केपन का अनुभव हो सकता है।

3. अगर आप उच्च मात्रा में आंवले का उपभोग करते हैं, तो यह मल को कठोर कर सकता है।

4. हाइपोग्लिसेमिक लोगों को आंवले के उपयोग से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति खराब हो सकती है।

सरसों के तेल के फायदे, sarso ke tel ke fayde

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हम सभी के घरों में सब्जी बनाने या फिर नॉन-वेज बनाने में सरसों के तेल का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है. कुछ जगहों पर इसे कड़वा तेल के नाम से भी जाना जाता है.

सरसों का तेल सेहत और सुंदरता दोनों के ही लिए बहुत फायदेमंद है. सरसों के तेल में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो दर्दनाशक का काम करते हैं. जोड़ों का दर्द हो या फिर कान का दर्द, सरसों का तेल एक औषधि की तरह काम करता है.

आमतौर पर लोग इसे सिर्फ तेल समझकर ही इस्तेमाल करते हैं पर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आयुर्वेद में इसे औषधि की श्रेणी में रखा गया है. सरसों के तेल के ये फायदे आपको हैरान कर देंगे.

1. दर्दनाशक के रूप में

जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल की मालिश करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा सरसों के तेल के सेवन से अंदरुनी दर्द में भी आराम मिलता है.

2. रुखी त्वचा के लिए फायदेमंद

सरसों का तेल का सेवन सेहत के लिए तो फायदेमंद रहता ही है. साथ ही यह त्वचा के लिए बहुत गुणकारी है. इसमें विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. सर्दियों में अक्सर रुखी त्वचा की परेशानी हो जाती है. ऐसे में आप सरसों के तेल की मालिश करें और सेवन करें. इसका सेवन और मालिश करने से त्वचा को अंदरुनी पोषण मिलता है. साथ ही आप इसे चेहरे पर लगाएंगे तो त्वचा की नमी भी बनी रहती है.

3. सर्दी-जुकाम से दिलाए राहत

यदि आपको दिसंबर-जनवरी के मौसम में सर्दी-जुकाम की समस्या है तो सरसों का तेल इसमें आपको आराम दिलाएगा. आप रात को सोते समय सरसों का तेल हल्का गुनगुना कर नाक में दो-दो बूंद डाल लें. अगली सुबह जब आप उठेंगे तो आपको सर्दी-जुकाम की समस्या राहत मिलेगी. ऐसा लगातार दो से तीन दिन करने पर पुराने से पुराना जुकाम दूर हो जाएगा.

4. भूख बढ़ाने में मददगार

अगर आपको भूख नहीं लगती है और इसके चलते आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है तो सरसों का तेल आपके लिए खासतौर पर फायदेमंद रहेगा. ये तेल हमारे पेट में ऐपिटाइजर के रूप में काम करता है जिससे भूख बढ़ती है.

5. वजन घटाने में मददगार

सरसों के तेल में मौजूद विटामिन जैसे थियामाइन, फोलेट व नियासिन शरीर के मेटाबाल्जिम को बढ़ाते हैं जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है.

6. अस्थमा का उपचार

सर्दियों में अक्सर अस्थमा रोगियों की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे रोगियों के लिए सरसों का तेल अच्छा रहता है. सरसों के तेल में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है. इसका सेवन करने से अस्थमा के मरीजों को आराम मिलता है. सर्दी हो जाने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

7. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

सरसों का तेल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है. शरीर की अंदरुनी कमजोरी को दूर करने के लिए सरसों के तेल का नियमित सेवन करें. इससे मालिश करना भी फायदेमंद रहेगा.

8. दांत दर्द में फायदेमंद

अगर आपके दांतों में दर्द है तो सरसों के तेल में नमक मिलाकर मसूड़ों पर हल्की मालिश करें. ऐसा करने से दांतों का दर्द दूर हो जाएगा और दांत भी मजबूत बनेंगे.

सोने से पहले सरसों का तेल शरीरमें लगाने के फायदे

सरसों के तेल  में कई विटामिन, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। अगर सोने से इसे शरीर के कुछ हिस्सों पर लगाया जाए तो गजब के फायदे मिलते हैं। आज हम आपको उन्हीं हिस्सों के बारे में बताएंगे, जहां सरसों का तेल लगाने से कई प्रॉब्लम दूर होती हैं।

1. सिर की मालिश

अगर आप दिनभर काम से लौटकर थक जाते है, जिससे आपको तनाव भी रहता है तो रात को सोने से पहले सिर पर सरसों का तेल लगाकर अच्छे से बालों और सिर का मसाज करें। इससे रिलैक्स मिलेगा और तनाव दूर रहेगा।

2. पैर के तलवे

रोज रात में सोने से पहले अगर पैरों के तलवों पर सरसों का तेल लगाकर मालिश की जाए तो आंखों की रोशनी तेज होती हैं। अगर आपको नींद अच्छी नहीं आती तो यह नुस्खा आपके लिए बैस्ट है। साथ ही इससे शरीर स्वस्थ और मजबूत बना रहता है।

3. नाभि

सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाए, इससे होंठ फटने की समस्या तो दूर रहती ही है साथ ही होंठ खूबसूरत भी दिखने लगते है। इसके अलावा नाभि पर सरसों का तेल लगाने से पेट दर्दज और पाचन संबंधी प्रॉबल्म भी दूर रहती है। इसके अलावा इससे आंखों की जलन, खुजली और सूखापन भी ठीक हो जाता है।

4. चोट

अगर लंबे समय से लगी चोट ठीक होने का नाम नहीं ले रही तो वहां सरसों का तेल लगाए। अपनी चोट पर सरसों का तेल तब तक लगाते रहे, जब तक चोट सूख कर ठीक न हो जाए।

कोलेस्ट्रॉल होगा जड़ से ख़त्म, अगर खाएंगे ये 7 सब्जियां

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बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे धीरे धमनियों और शिराओं में जमना शुरू होता हैं और खून के दौरे को प्रभावित कर हृदय रोगो में बढ़ोतरी करता हैं। अगर आपके खून में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया हैं तो आपको कुछ सब्जियों का अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। ये सब्जिया ना ही सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करेंगी बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल के निर्माण में भी पूरा सहयोग देंगी। आइये जाने इन सब्जियों के बारे में।

लौकी।

लौकी के मौसम में सुबह खाली पेट लौकी का एक गिलास जूस पिए, इसमें पुदीना और तुलसी के ५-५ पत्ते भी मिला लीजिये, ये सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को ही सही नहीं करेगा, बल्कि इस से आपके हृदय की धमनियों में जमा हुआ क्लॉट भी साफ़ होगा, और हृदय को भी बल मिलेगा। बाबा रामदेव ने अनेक गंभीर हृदय रोगियों को सिर्फ लौकी के इस जूस से और प्राणायाम से ही सक कर दिया था, जिनमे अनेक डॉक्टर्स भी शामिल थे।

पत्तागोभी।

पत्तागोभी एक ऐसी सब्जी हैं जो अपने गुणों के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशो में भी बहुत चर्चा की विषय रही हैं। पत्तागोभी की जितनी भी प्रजातिया पायी जाती हैं सभी के ही सेवन से गंभीर से गंभीर रोगो से छुटकारा मिल सकता हैं। पत्तागोभी का रस कैंसर, हृदय रोगो, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि गंभीर रोगो में रामबाण हैं।

लहसुन।

सुबह उठते ही 3-४ कच्ची लहसुन की कलियाँ चबा चबा कर खा लीजिये। लहसुन कोलेस्ट्रॉल के रोगियों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं। इसको नित्य घर में सब्जी में बना कर या इसकी चटनी बना कर भी खायी जा सकती हैं।

अदरक।

अदरक कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में बहुत सहयोगी हैं। अनेक शोधो में पाया गया के सिर्फ 3 ग्राम अदरक का नित्य सेवन रक्त में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करता हैं।

पुदीना।

पुदीने का सेवन बुरे कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में बहुत सहायक हैं, हर रोज़ 5 से 10 मि ली पुदीने का रस कोलेस्ट्रॉल के लिए रामबाण हैं।

प्याज।

हर रोज़ अगर आप आधा प्याज अपनी खुराक में शामिल करते हैं तो ये आपके बढे हुए बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर अच्छे कोलेस्ट्रोल का बढ़ाने में बहुत मददगार हैं।

मशरूम।

मशरूम चमत्कारिक सब्जी हैं, इसके भोजन में नियमित सेवन करने से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता हैं।

ऊपर बताई गयी सभी सब्जिया विज्ञान की कसौटी पर खरी हैं। इन सब पर अनेको अनुसन्धान हो चुके हैं। आप निश्चिन्त हो कर इनका उपयोग कर सकते हैं।

लिवर की सारी गंदगी को बाहर निकाले, मात्र 24 घंटे में

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कभी-कभी हमारी कुछ गलतियों से हमारा लिवर सुस्त पड़ जाता है और शरीर में मौजूद गंदगी बाहर नहीं निकल पाती या कुछ मात्रा में ही निकल पाती है। ये गंदगी शरीर में जमा होती रहती है जिससे हमारे शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान तो लिवर को ही उठाना पड़ सकता है। लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि मेडिकल साइंस के मुताबिक हमारे शरीर के फंक्शन से जुड़े 400 से ज्यादा काम अकेला लिवर करता है। शरीर में सबसे ज्यादा काम की जिम्मेदारी लिवर पर ही होती है और ये 24 घंटे अपना काम करता रहता है। लिवर हमारे शरीर में फैट को पचाने में मदद करता है, हमारे आहार से शरीर के विकास के लिए पोषक तत्व अलग करता है। इसके अलावा लिवर हमारे शरीर में मौजूद गंदगी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
लिवर के सुस्त पड़ने के कारण शरीर में जब गंदगी जमा होना शुरू होती है, तो शरीर इसके कुछ संकेत हमें देता है। इन संकेतों को समझकर अगर हम जल्द ही इसका इलाज शुरू कर देते हैं तो लिवर की ये समस्या ठीक हो जाती है, नहीं तो परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए आइये आपको बताते हैं कि लिवर में गंदगी के ज्यादा जमा होने पर शरीर कौन-कौन से संकेत दे सकता है।

लिवर के आसपास दर्द

पेट के ऊपरी हिस्से में जहां लिवर होता है- अगर उस जगह पर आपको दर्द महसूस होता है तो, ये लिवर में जमा गंदगी का संकेत हो सकता है। आमतौर पर ये दर्द ज्यादा तेज नहीं होता है मगर कभी-कभी तेज दर्द हो सकता है। लिवर ही हमारे आहार को पचाने और उससे पोषक तत्वों को अलग करने में मदद करता है और लिवर ही हमारे शरीर से गंदगी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। ऐसे में अगर लिवर में कुछ समस्या हो जाती है, तो शरीर से जुड़े ये सभी महत्वपूर्ण काम रुक जाते हैं।

थकान और सुस्ती

थकान और सुस्ती भी लिवर में मौजूद गंदगी के कारण हो सकती है। दरअसल हमारे आहार को पचाने और इनसे पोषक तत्वों को अलग करने का काम लिवर ही करता है। ऐसे में अगर लिवर अपना काम ठीक से नहीं करेगा, तो आहार से न तो हमें पर्याप्त ऊर्जा मिलेगी और न ही पर्याप्त पोषण, ऐसे में शरीर का थकना और सुस्त होना तो लाजमी है।

पैर और एड़ियों में सूजन

लिवर में हुई किसी समस्या को अगर आप नजरअंदाज करते हैं तो ये लिवर के लिए घातक हो सकता है। इसलिए लिवर इस परेशानी को ठीक करने की स्वयं की कोशिश करता है और नए टिशूज का निर्माण करता है। ज्यादा टिशूज हो जाने से लिवर के काम में बाधा शुरू हो जाती है और इसकी वजह से आपका रक्तचाप बढ़ जाता है। इसके कारण पैरों में एक विशेष द्रव जमा होने लगता है जिससे पैरों में सूजन आ सकती है। आमतौर पर इस सूजन में दर्द नहीं होता है।

शरीर का वजन बढ़ना

शरीर का वजन बढ़ना भी लिवर में गंदगी जमा होने का संकेत हो सकता है। दरअसल हमारा लिवर हमारे शरीर के अंदर आने वाले सभी तरह कि गंदगियों को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता है। जैसे एल्कोहल, आर्टिफिशियल स्वीटनर, ज्यादा फैट वाले आहार, कुछ विशेष दवाइयां आदि। जब आप इन पदार्थों का सेवन करते हैं तो लिवर इन्हें न तो पचा पाता है और न ही शरीर के लिए अशुद्धियों को अलग कर पाता है। बल्कि लिवर ऐसी स्थिति में गंदगी या टॉक्सिन्स को बिना फिल्टर किए फैट सेल्स में स्टोर करता रहता है, जिसके कारण आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है।

शरीर में इंफेक्शन और एलर्जी

लिवर की सुस्ती के कारण जब शरीर में ज्यादा गंदगियां जमा हो जाती हैं तो शरीर में एलर्जी के लक्षण भी दिख सकते हैं। जब हमारी रक्त शिराओं में अलग-अलग तरह के ढेर सारे तत्व एक साथ आ जाते हैं, तो हमारा दिमाग शरीर के लिए पोषक तत्व और एलर्जेन्स के बीच अंतर नहीं कर पाता है और कुछ ऐसे केमिकल्स छोड़ना शुरू करता है जिनसे इन एलर्जेन्स को कम किया जा सके। इसी कारण कई बार हमारे शरीर में एलर्जी के लक्षण दिखने लगते हैं।

हल्दी से दूर होते हैं लीवर संबंधी रोग

हम आपको आपके लीवर की सफाई करने का सबसे बेहद और आसान घरेलु तरीका बताने वाले हैं. तो इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े.

आप सभी तो हल्दी के बारे में जानते ही होंगे. हल्दी भी एक प्रकार की औषधि है लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि हल्दी हमारे लीवर को स्वस्थ रखने के काम करता है. हल्दी में विटामिन सी, विटामिन इ, विटामिन के, पोटेशियम, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नेशियम, आयरन और जस्ता जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है. हल्दी के सेवन से हमारे शरीर को बहुत सारे लाभ प्राप्त होते हैं.

दोस्तों हल्दी में पाया जाने वाला कुरक्यूमिन आपकी लीवर की सफाई करने के लिए ग्लूथिओन का निर्माण करता है. दोस्तों इस मिश्रण को तैयार करने के लिए आपको सबसे पहले एक गिलास पानी में 1/4 चम्मच हल्दी डालकर अच्छी तरह से मिलाना है और तैयार मिश्रण का सेवन करना है. दोस्तों अगर आप दिन में 2 बार इस मिश्रण का सेवन करते हैं तो आपका लीवर शुद्ध हो जायेगा.

कौन सी धातु के बर्तन खाने के लिए फायदेमंद है और नुकसानदेह है!

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आहार का चुनाव हम अपने  स्वस्थ को ध्यान में रख कर करते हैं, ताकि खाना शरीर में जाने के बाद हमे ऊर्जा प्रदान करे, शरीर स्वस्थ रहे और शरीर का संतुलन बना रहे.

जिस तरह खाने के अंदर पोषक तत्व रहते हैं, वैसे ही हम खाने के लिए जो पात्र उपयोग में लाते है, उसके भी हमे फायदे और नुक्सान को ध्यान में रखना चाहिए.

इसलिए सही भोजन के साथ सही धातु के बर्तन का चुनाव भी जरूरी होता है, ताकि खाने के गुणों में वृद्धि हो और हमारा शरीर रोगों से दूर रहे.

आप भोजन पकाने और परोसने के लिए कई तरह के पात्र का प्रयोग करते होंगे लेकिन आपको उन पात्रों में गुणों का पता है?

क्या आप जानते है कि किस धातु के बर्तन में खाना खाने से क्या फायदा और क्या नुक्सान होता है?

तो आइये जानते है कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.

तांबा

कांस के बर्तन के बाद तांबे के बने बर्तन का प्रयोग होता  है. तांबा के बने बर्तन का हर घर में पूजा पाठ में भी प्रयोग लाया जाता है. इस पात्र का पानी रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध करता है, स्मरण-शक्ति अच्छी रखता है, लीवर संबंधी समस्या दूर करता है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है.

लोहा

लगभग हर घर में लोहे के बर्तन का प्रयोग भी होता है. इसमें बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, इसमें लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है. लोहा कई रोग को खत्म करता है , पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है. इसके पात्र में दूध पीना अच्छा होता है.

स्टील

वर्तमान समय में स्टील के बर्तन का उपयोग कुछ ज्यादा होता है. यह बहुत सुरक्षित और किफायती होता है. स्टील के बर्तन नुक्शान्देह नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता.

सोना

सोना एक महँगी धातु है. सोना लाल, सफ़ेद, और पीले रंग में उपलब्ध होता है. लेकिन भारत में सबसे ज्यादा पीला सोना प्रयोग में लाया जाता है.  सोने के बर्तन में पहले के राजा महाराजा भोजन करते थे. सोना एक गर्म धातु है. सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है. और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है – आँखों को तेज करता है.

चाँदी

सोने के बाद चाँदी की धातु मूल्य में दुसरे नंबर पर होती है. चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है. शरीर को शांत रखती है. इसके पात्र में भोजन बनाने और करने के कई फायदे होते हैं,  जैसे दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष , कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है.

कांस

चाँदी के बाद काँसे के बर्तन का मूल्य आता है. यह चाँदी से थोड़ी सस्ती होती है और इसके बर्तन का प्रयोग माध्यम वर्गीय परिवार में अधिक होता है. खास कर गाँव में मेहमान नवाजी के लिए इन्हीं से बने पात्र में भोजन परोसा जाता है. इसके बने पात्र में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है. लेकिन कांस्य खट्टी चीजे नहीं परोसना चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है.

पीतल

अनेक घरों में पीतल के बर्तन का भी उपयोग होता है. यह सामान्य कीमत की धातु है. इसमें भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बिमारी नहीं होती.

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है. इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है. यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. इससे हड्डियां कमजोर होती है , मानसिक बीमारियाँ होती है, लिवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है. उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है. इन बीमारियों का जड़ से इलाज नहीं हो पाता. इसलिए अंग्रेज जेल के कैदी को इसमें खाना परोसा करते थे.

इन सब बर्तनों में खाना पकाने और खाने से कुछ फायदे और कुछ नुकशान होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है.

इसलिए इन सारी बातों को ध्यान में रखकर खाना पकाने और खाने के लिए सही बर्तनों को चुनिए.

शरीर में हर तरह की गांठ, रसोली और ट्यूमर का घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

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दोस्तों जिंदगी में आपको कभी भी कैंसर ना आए इसके लिए सिर्फ एक ही चीज याद रखियेगा कि आप जब भी खाना खाये तो उस खाने में डालडा घी, रिफाइंड ऑयल आदि नही होना चाहिए. दूसरी बात की ज्यादा से ज्यादा छिलके वाली चीजों का उपयोग करें जैसे की छिलके वाले चावल, दालें, छिलके वाली सब्जिया आदि. इन चीजों को खाने से आपको कैंसर के होने का सवाल ही पैदा नही होता.

इन सब के इलावा कैंसर गुटका, तम्बाकू, सिगरेट, बीडी आदि के इस्तेमाल से भी होता है. तो इन चारों चीजों का सेवन कभी न करें. क्योंकि कैंसर के ज्यादातर केस इन्ही के कारण होते है. भारत की सरकार आजकल गुटके, बीडी, सिगरेट, तम्बाकू आदि पर पाबंदी लगा रही है. जल्द ही शराब के लिए भी ठोस कदम उठाये जायेंगे. ऐसा ही चलता रहा तो हमारे देश के नौजवान कैंसर जैसी घटिया बीमारी से बच जायेंगे.

सारी दुनिया का एक ही कहना है कि इसके बचाव में ही खुद का बचाव है. आप हमेशा यही कोशिश करियेगा की कैंसर वाले मरीज़ की कीमोथेरेपी, एलोपेथी आदि जैसे ट्रीटमेंट से दूर रखा जाए. क्योंकी अगर एक बार कीमोथेरेपी हो गयी तो समझिये आप अब कुछ नही कर पाएंगे. महिलाओं को आजकल बहुत ज्यादा कैंसर की बीमारी घेर रही है. उनके  गर्भाशय में और स्तनों में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है. पहले उनको ट्यूमर होता है फिर बाद में कैंसर में बदल जाता है.  तो माताओं और बहनों को ध्यान रखना चाहिए की जब भी उनके शरीर में उनको अनवांटेड ग्रोथ का पता चले तो उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए. क्योंकि किसी अंग में जैसे ही आपको अनवांटेड ग्रोथ हुई तो स्म्जिये की आपको रसोली या गांठ हो गई है. हालांकि हर गांठ या रसोली से कैंसर नहीं होता. केवल दो या तीन प्रतिशत गांठ ऐसी है, जो कैंसर में बदलती है. लेकिन आपको सतर्क तो होना पड़ेगा.

इसके लिए सबसे अच्छी दुनिया में दवा है चूना. शरीर में कहीं भी गांठ हो जाए, रसोली हो जाए जो तो उसके कैंसर में तब्दील होने के काफी चांसेस हो सकते हैं. तो इस तरह के गांठ को खत्म करने के लिए सबसे अच्छी दवा है चूना. चूना यानि कि जो पान में खाया जाता है, रंगाई-पुताई में इस्तेमाल किया जाता है, पान वाले की दुकान से आसानी से मिल जाता है. उस चुने को कनक के दाने के बराबर खाइए. अब सवाल ये उठता है कि उसको खाएंगे कैसे? क्योंकि सीधे जीभ पर लगाएंगे तो जीभ फट जाएगी. तो उसको खाने का एक ही तरीका है कि आप उसको पानी में घोल कर पी लीजिए या फिर दही में घोलकर दही पी लीजिए. इसके इलावा आप उसको लस्सी में घोलकर, दाल में डालकर, सब्जी में डाल कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

महिलाओं में इस गांठ का पता कैसे चलेगा? जिन माताओं को पेट में रसौली हो जाएगी उनकी मासिक तिथि बिल्कुल बदल जाएगी. उसे पता चलेगा खून बहुत ज्यादा आएगा पर 28-30 दिन में जो आना चाहिए वह 10-15 दिन में भी आ सकता है, और हो सकता है कि वह 1 हफ्ते चले या 10 दिन चले या फिर 15 दिन चले. ब्लीडिंग बहुत होगा और थकान भी बहुत आएगी. शरीर में कमजोरी बहुत हो जाएगी. तो उससे आप तुरंत भाप लीजिए कि रसौली हो रही है या हो चुकी है. बाद में कंफर्म करना है तो सोनोग्राफी करा लीजिए. अब समझ लीजिये कि आपको चुने की जरूरत आ गई है. चुना सबसे अच्छी और सबसे सस्ती दवा है. और तो और इसके साइड इफेक्ट्स भी बहुत कम है. और दुनिया की सभी दवाएं इसी चुने से बनती है जो रसौली एवं गांठ को गलाती है.

इस विडियो में देखिए इसकी पहचान और कैसे दूर करे >>

Source: www.rajivdixitji.com

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