किडनी को साफ़ करने के 10 आसान घरेलु उपाय

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जिस प्रकार हम अपने घर में पानी के फिल्टर की सफाई करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें हमारी किडनी की भी रोजाना सफाई करनी चाहिए। ऐसा करने से हमारे शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर का एक मुख्य हिस्सा है। यह हमारे ब्लड से नमक और शरीर से हानिकारक बैक्टीरिया को फिल्टर करके गंदगी को साफ करती है।

1. लाल अंगूर

लाल अंगूर में विटामिन-सी, ए और बी6 काफी मात्रा में होता है। साथ ही इसमें फोलेट, पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम भी पाया जाता है। इसे खाने से आपको कब्ज, थकान और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। यह किडनी से सारे विषैले तत्व बाहर निकाल देता है और किडनी को स्वस्थ्य रखता है।

2. धनिया

धनिया में मैगनीज, आयरन, मैग्निशियम, विटामिन सी, विटामिन के और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। इसमें बहुत कम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, थायमिन और कैरोटीन होता है। इसलिए किडनियों की सफाई के लिए धनिया बहुत फायदेमंद है।

3. नींबू 

विटामिन सी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायक होता है। रोज एक गिलास पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर पीने से किडनी संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।

4. अजवाइन

भारतीय रसोई की एक खास चीज है अजवायन। खाने का स्वाद बढ़ाने से लेकर कई बीमारियों में इलाज के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। अजवाइन पाचक और पित्तवर्धक होती है। यह पेट से जुड़ी सभी बीमारियों में लाभकारी है। इसके रोज सेवन से किडनी स्वस्थ्य़ रहती हैं।

5. अदरक

अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लो‍रीन व विटामिन सहित कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देते हैं।

6. दही 

दही पाचन क्रिया को तो अच्छा करता ही है साथ ही इसमें प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होता है जो किडनियों की सफाई भी करता है। इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाते हैं।

7. करौंदा

करौंदे में विटामिन C प्रचुर मात्रा में होने के साथ-साथ अत्यधिक एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है| करौंदा विटामिन E तथा K का भी अच्छा स्त्रोत है| इससे हमें इन विटामिनों के अतिरिक्त आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, जिंक इत्यादि मिनरल्स भी प्राप्त होते हैं। यह किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। करौंदे के नियमित सेवन से किडनी स्वस्थ्य रहती हैं।

8. अजमोद (पार्सले)

इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और पोटेशियम होता है जो किडनी के लिए फायदेमंद है। इसमें पाया जाने वाला लूटेओलिन एंटीआक्सीडेंट यूरिक एसिड को किडनी से बाहर निकालता है और रक्त शुद्ध करता है।

9. लाल शिमला मिर्च 

लाल शिमला मिर्च में विटामिन ए, सी , बी6, फोलिक एसिड और रेशे पाये जाते हैं। इसके अलावा इसमें पोटैशियम की मात्रा भी कम होती है। जो किडनी को साफ रखने में मदद करते हैं।

10. गुडूची

गुडूची एक अच्छा मूत्रवर्धक है। इसके सेवन से पेशाब के साथ किडनी से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा ये शराब और धूम्रपान करने वालों के लिए भी बहुत लाभदायक है। आप गुडूची के पत्तों का रस पी सकते हैं। बाजार में गुडूची कैप्सूल भी उपलब्ध हैं।

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आज हम आपको राजीव दीक्षित जी के लिखे हुए तुलसी के फायदे बताने जा रहे है. जेसा कि हम सब जानते ही हैं की तुलसी दो प्रकार की होती है. जिनमे से एक होती है “राम तुलसी” और दूसरी है “श्याम तुलसी”. तकरीबन तुलसी हम सबके घर में होती है, एसा कोई ही घर होगा झा तुलसी मोजूद न हो. तो चलिए जानते है इन तुलसी की किस्मो के बारे में विस्तार से

तुलसी सभी स्थानों पर पाई जाती है। इसे लोग घरों, बागों व मंदिरों के आस-पास लगाते हैं लेकिन यह जंगलों में अपने आप ही उग आती है। तुलसी की अनेक किस्में होती हैं परन्तु गुण और धर्म की दृष्टि से काली तुलसी सबसे अधिक महत्वपूर्ण व उत्तम होती है। आमतौर पर तुलसी की पत्तियां हरी व काली होती है। तुलसी का पौधा सामान्यत: 1 से 4 फुट तक ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 2 इंच लंबे अंडाकार, आयताकार, ग्रंथियुक्त व तीव्र सुगंध वाली होती है। इसमें गोलाकार, बैंगनी या लाल आभा लिए मंजरी (फूल) लगते हैं।

राम तुलसी और श्याम तुलसी –

बात अगर तुलसी की किस्मो की जाये तो सबसे उपर राम तुलसी पाई जाती है. राम तुलसी का रंग हल्का हरा होता है. जबकि श्याम तुलसी दिखने में डार्क ग्रीन होती है. कभी कभी श्याम तुलसी दिखने में काले रंग की भी नजर आती है इसलिए, उसको श्याम तुलसी कहा जाता है. श्याम तुलसी में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. जबकि राम तुलसी में ज्यादा गुण नही है.

घर में लगाने के लिए जरूरी किस्म

अगर आपको घर में तूलसी लगनी है तो हमेशा श्याम तुलसी ही लगायें. जेसा की हम जानते ही है कि तुलसी की एक खास विशेषता है. और वो विशेषता ये है कि तुलसी साल में कभी भी लगाई जा सकती है भले मौसम कोई भी हो. इसकी एक और विशेषता है कि तुलसी किसी भी समय में मिल सकती है. तुलसी को घर के गार्डन में भी लगा सकते है और अगर गार्डन नही है तो इसको हम किसी गमले में भी लगा सकते है.

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श्याम तुलसी के उपयोग

श्याम तुलसी के बहुत सारे उपयोग है. सबसे पहले उपयोग की अगर बात की जाये तो, श्याम तुलसी किसी भी तरह के बुखार को ठीक कर सकती है. चाहे वो बैक्टीरियल फेवर हो या वायरल फेवर, श्याम तुलसी का सेवन करने से आपको इन सब बुखारो से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जायेगा. तो आप हमेशा घर में तुलसी को लगाये.

श्याम तुलसी को उपयोग करने के सरल तरीके

श्याम तुलसी को उपयोग केना बेहद सरल है. इसके लिए आपको 15-20 पत्तों की चटनी बना कर उसको गर्म करके उसका रस निकलना होगा. रस निकलने के बाद इसमें थोडा गुड मिला लीजिये. अगर आपको शहद पसंद है तो इस रस में 1-2 चम्मच आप शहद के मिला सकते है. अंग्रेजी की दवा “पेरासिटामोल” जो काम करती है वही काम यह तुलसी करती है. अगर आपको 104-105 डिग्री बुखार किस शिकायत रहती है तो इसका काढ़ा बना क्र सेवन करें. बहुत कम समय में ही आपका बुखार उतर जायेगा.

काढ़ा बनाने का तरीका

तुलसी के पत्तो का काढ़ा बनाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको तुलसी के कुछ पत्ते लेकर उन्हें किसी बर्तन में पानी मिलाकर उबालने होंगे. पत्तो को तब तक पानी में उबालते रहे, जब तक पानी आधा न हो जाये. इसके बाद पानी में थोडा गुड मिला दे. और पानी को पीने लायक गुनगुना करलें. इस काढ़े से कितना भी खराब बुखार क्यों न हो, तुरंत उतर जायेगा.

महिलाओं के लिए फायदेमंद

काफी माताओं को आजकल अंदर से पानी आने की शिकायत हो रही है. जिसको अंग्रेजी में लिकोरिया कहते हैं, उसकी सबसे अच्छी औषध है यह श्याम तुलसी. यह श्याम तुलसी का भरपूर उपयोग करिए आपको इस बीमारी से बिल्कुल आसानी से निजात मिल जाएगी.

गुण (Property)

आयुर्वेद के अनुसार :आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, हल्की, गर्म, तीखी कटु, रूखी, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली होती है तुलसी कीडे़ को नष्ट करने वाली, दुर्गंध को दूर करने वाली, कफ को निकालने वाली तथा वायु को नष्ट करने वाली होती है। यह पसली के दर्द को मिटाने वाली, हृदय के लिए लाभकारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट होना) को ठीक करने वाली, विष के दोषों को नष्ट करने वाली और त्वचा रोग को समाप्त करने वाली होती है। यह हिचकी, खांसी, दमा, सिर दर्द, मिर्गी, पेट के कीड़े, विष विकार, अरुचि (भोजन करने की इच्छा न करना), खून की खराबी, कमर दर्द, मुंह व सांस की बदबू एवं विषम ज्वर आदि को दूर करती है। इससे वीर्य बढ़ता है, उल्टी ठीक होती है, पुराना कब्ज दूर होता है, घाव ठीक होता है, सूजन पचती है, जोड़ों का दर्द, मूत्र की जलन, पेशाब करने में दर्द, कुष्ठ एवं कमजोरी आदि रोग ठीक होता है। यह जीवाणु नष्ट करती है और गर्भ को रोकती है।

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार : यूनानी चिकित्सकों के अनुसार तुलसी बल बढ़ाने वाली, हृदयोत्तेजक, सूजन को पचाने वाली एवं सिर दर्द को ठीक करने वाली होती है। तुलसी के पत्ते बेहोशी में सुंघाने से बेहोशी दूर होती है। इसके पत्ते चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। तुलसी के सेवन से सूखी खांसी दूर होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। इसके बीज दस्त में आंव व खून आना बंद करता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार : वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसके बीजों में हरे व पीले रंग का एक स्थिर तेल 17.8 प्रतिशत की मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त बीजों से निकलने वाले स्थिर तेल में कुछ सीटोस्टेराल, स्टीयरिक, लिनोलक, पामिटिक, लिनोलेनिक और ओलिक वसा अम्ल भी होते हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, टैनिन, सेवानिन और एल्केलाइड़स भी होते हैं।

तुलसी के पत्ते व मंजरी से लौंग के समान गंधवाले पीले व हरे रंग के उड़नशील तेल 0.1 से 0.3 प्रतिशत की मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें यूजीनाल 71 प्रतिशत, यूजीनाल मिथाइल ईथर 20 प्रतिशत तथा कार्वाकोल 3 प्रतिशत होता है। इसके पत्तों में थोड़ी मात्रा में `केरोटीन` और विटामिन `सी` भी होती है।

ज्यादा डिटेल्स में जानने के लिए निचे दी गयी विडियो देखें >>

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यधिक महत्व दिया गया है। तुलसी की पुजा सभी घरों में की जाती है और इसी लिए तुलसी घर-घर में लगाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे होते हैं वहां मच्छर, सांप, बिच्छू व हानिकारक कीड़े आदि नहीं उत्पन्न होते।

तुलसी की पत्तियां हाथ जोड़कर या मन में तुलसी के प्रति सम्मान और श्रद्धा रखते हुए जितनी आवश्यकता हो उतनी ही तोड़नी चाहिए। इसकी पत्तियां तोड़ते समय ध्यान रखें कि मंजरी के आसपास की पत्तियां तोड़ने से पौधा और जल्दी बढ़ता है। अत: मंजरी के पास की पत्तियां ही तोड़ना चाहिए। पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रान्तिकाल, कार्तिक, द्वादशी, रविवार, शाम के समय, रात एवं दिन के बारह बजे के आसपास तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। तेल की मालिश कराने के बाद बिना नहाए, स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अथवा किसी प्रकार की अन्य अशुद्धता के समय तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे पौधे जल्दी सूख जाते हैं। यदि पत्तों में छेद दिखाई देने लगे तो कंडे (छाणे) की राख ऊपर छिड़क देने से उत्तम फल मिलता है।

हानिकारक प्रभाव

चरक संहिता के अनुसार तुलसी के साथ दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कुष्ठ रोग होने की संभावना रहती है। कार्तिक के महीने में तुलसी के पत्ते पान के साथ सेवन करने से शारीरिक कष्ट हो सकता है। तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करना मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है।

Source: www.rajivdixitji.com

ये घरेलु उपाय किडनी को स्वस्थ रखते है !

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जिस तरह हम अपने घर में पानी के फिल्टर की सफाई बराबर करते हैं, उसी तरह हमारे शरीर के फिल्टर, यानी कि किडनी की सफाई भी बराबर करती रहनी चाहिए.

जिससे कि हमारे शरीर की गंदगी आसानी से बाहर जाती रहे.

किडनी हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है, हमारे ब्लड को फ़िल्टर कर गंदगी साफ कर देता है. इसलिए हमारे किडनी को साफ रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहे.

हल्दी

अगर आपको अपनी किडनी साफ करनी है तो हल्दी खाइए। इसे अपने भोजन में डालकर अथवा छोटे टुकड़ों में खाया जाए, क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं।

धनिया

किडनी में स्टोन के इलाज के लिए धनिया को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे किडनी रोग की दवाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसे भोजन में इस्तेमाल किया जाता है।

अदरक

यह शरीर में खून की सफाई के साथ-साथ किडनी से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है एवं किडनी को स्वस्थ रखता है।

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दही

इसमें अच्छे प्रकार का बैक्टीरिया पाया जाता है, जो किडनी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। यह बैक्टीरिया उसमें से गंदगी को बाहर निकलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

जामुन

इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। इसमें यूरिक एसिड और यूरिया को निकालने की क्षमता होती हैं

कद्दू के बीज

इस बीज में एंटी ऑक्सीडेंट मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं। यह किडनी को किसी भी प्रकार के फ्री रेडिकल से बचा लेते हैं।

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सोडियम, कैल्शियम और आयरन भरपूर कलौंजी का इस्तेमाल कई तरह की दवाईयां बनाने के लिए किया जाता है। कलौंजी खाने से भी कई बीमारियां दूर हो जाती है लेकिन आज हम आपको इसके तेल के फायदों के बारे में बताने जा रहें है। कार्बोहाइडे्ट, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन्स के गुणों से भरपूर कलौंजी का तेल कई बीमारियों को दूर करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण कैंसर जैसी बीमारी से आपको बचाता है। मंहगी दवाइयों पर पैसे खर्च करने की बजाए आप भोजन में कलौंजी का तेल इस्तेमाल करके कई प्रॉब्लम को दूर भी कर सकते है और यह आपको कई बीमारियों से बचाता भी है। तो आइए जानते है कलौंजी के तेल से दूर होने वाली समस्याओं के बारे में।

रामबाण औषधि है कलौंजी का तेल

कलौंजी का तेल कैंसर, डायबीटिज़, सर्दी-जुकाम, पीलिया, बवासीर, मोतियाबिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द, सफेद दाग, लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, गंजापन जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है.

1- कैंसर

कलौंजी का तेल शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को विकसित होने से रोकता है और उन्हें नष्ट करता है. यह कैंसर रोगियों में स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है.

कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लेना चाहिए.

2 – खांसी और दमा

खांसी और दमा की शिकायत होने पर छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन चम्मच कलौंजी का तेल रोज़ पीएं और पानी में तेल डालकर उसका भाप लें.

3 – डायबीटिज़

डायबीटिज़ के मरीज़ों को एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके को पीस कर चूर्ण बना लेना चाहिए. आधे चम्मच कलौंजी के तेल के साथ इस चूर्ण को रोज़ नाश्ते के पहले एक महीने तक लेने से आराम मिलता है.

4 – किडनी स्टोन

पाव भर पिसी हुई कलौंजी को शहद में अच्छी तरह से मिला लें. इसमें से दो चम्मच मिश्रण और एक चम्मच कलौंजी के तेल को एक कप गर्म पानी के साथ मिलाकर रोज़ नाश्ते से पहले लें. गुर्दे की पथरी से परेशान लोगों को कलौंजी का तेल फायदा करता है.

5 – ह्दय रोग और ब्लड प्रेशर

जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक चम्मच कलौंजी का तेल मिला लें. तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. लगातार एक महीने तक ऐसा करने से पीड़ित को आराम मिलता है.

6 – कमर दर्द और गठिया

कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें. और एक चम्मच कलौंजी का तेल दिन में तीन बार सेवन करें. 15 दिन मे बहुत आराम मिलेगा.

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7 – सिरदर्द

लगातार सिरदर्द होने पर माथे और सिर के दोनों तरफ कान के आस-पास कलौंजी का तेल लगाएं और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल का सेवन करें.  कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

8 – आंखों की समस्या के लिए

रोज़ सोने के पहले पलकों और आंखों के आस-पास कलौंजी का तेल लगाने और एक चम्मच तेल को एक कप गाजर के रस के साथ एक महीने तक लेने से नेत्र रोग से पीड़ित व्यक्ति को फायदा होता है.

9 – बालों की समस्या करे दूर

बालों में नींबू का रस अच्छी तरह से लगाए. 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें. सूखे बालो में कलौंजी का तेल लगाएं. एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बंद हो जाएगा.

बालों में रुसी होने पर दस ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल हल्का गर्म करें उसमें 30 ग्राम पिसी हुई मेहंदी को मिलाकर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.

10 – सुंदर और आकर्षक चेहरे के लिए

एक चम्मच कलौंजी का तेल, एक चम्मच जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर मसाज करें और एक घंटे बाद चेहरा धो लें. कुछ दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा.

11 – मानसिक तनाव करता है दूर

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है. एक चम्मच तेल, 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ खाने से याददाश्त अच्छी होती है.

12 – स्त्री गुप्त रोग

स्त्रियों के रोग जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, डिलेवरी के बाद दुर्बलता व रक्त स्त्राव में कलौंजी का तेल काफी फायदेमंद होता है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पिएं. बैंगन अचार, अंडा और मछली से परहेज करें.

13 – सफेद दाग और कुष्ठ रोग

शरीर पर सफेद दाग और कुष्ठ रोग हो जाने पर 15 दिन तक रोज़ाना पहले सेब का सिरका शरीर पर मलें फिर कलौंजी का तेल मलें.

14 – एचआईवी

कलौंजी के औषधिय गुणों की जांच के लिए अमेरिका में एक शोध के दौरान एचआईवी पीड़ित व्यक्ति को रोज़  कलौंजी, लहसुन और शहद का कैप्सुल दिया गया. कुछ दिनों बाद यह पाया गया कि पीड़ित व्यक्ति में शरीर की रक्षा करनेवाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रुप से बढ़ोत्तरी हुई थी.

15- पुरुष गुप्त रोग

स्वप्न दोष, स्तंभन दोष, नपुंसकता जैसे रोगों में एक कप सेब के रस में आधा चम्मच तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पिएं. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज़ मलने से फायदा होता है.

कमजोरी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय

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गर्मी के मौसम में थकान, कमजोरी जैसी प्रॉब्लम बढ़ जाती है। आयुर्वेद में इस मौसम के हिसाब से कमजोरी दूर करने के कई घरेलू नुस्खे बताए गए हैं। रेग्युलर इन नुस्खों के इस्तेमाल से न केवल बॉडी में ठंडक बनी रहेगी बल्कि कमजोरी और थकान दूर होगी और एनर्जी भी मिलेगी।

जानिए कौन से आयुर्वेदिक नुस्खों से दूर होगी कमजोरी …

1- केला, दूध और शहद : रोज सुबह शाम एक गिलास दूध में 1 केला और एक चम्मच शहद मिलाकर खाएं.

2- अनार का जूस : अनार का जूस हर तरह की कमजोरी दूर करता है. सुबह शाम एक गिलास ताजा जूस पिएं.

3- बादाम और अंजीर : रात में दो : दो बादाम और अंजीर पानी में भिगो दें. सुबह ये पानी पिएं और बादाम व अंजीर चबाकर खा लें.

4- काले चने : रात में साफ पानी में मुट्ठी भर काले चने भिगो दें. सुबह उठकर ये पानी पिएं और चने चबाकर खा लें.

5- अंगूर का जूस : इसमे मौजूद एंटीओक्सिडेंटस कमजोरी दूर करके एनर्जी देते है. सुबह : शाम पीने से फायदा होता है.

6- मुनक्के का पानी : रात में साफ पानी में 5 मुनक्के भिगोकर सुबह यह पानी पिए और मुनक्के चबाकर खा लें.

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7- दही और शहद : दिन में दो एक कटोरी दही में एक चम्मच मिलाकर खाएं. कमजोरी दूर होगी और एनर्जी मिलेगी.

8- आंवले का जूस : आधा कप पानी में दो चम्मच आंवले का जूस मिलाकर सुबह खाली पेट पिएं. कमजोरी दूर होगी.

9- मुलैठी : सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में एक चम्मच मुलैठी और दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं.

10- गुलकंद : रोज सुबह शाम ठंडे दूध में 2 चम्मच गुलकंद मिलाकर पिएं. कमजोरी दूर होगी.

सौंफ का पानी पीने के फायदे

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खाने के बाद लोग अक्सर सौंफ खाना पसंद है, जिसके सेवन खाना अच्छे से पचता है और मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होती हैं। इसके सेवन से स्वास्थ्य संबंधी अन्य कई प्रॉबल्म भी दूर रहती है, वहीं अगर सौंफ का पानी पीया जाए तो यह सेहत के लिए और भी गुणकारी साबित होता हैं। सौंफ का पानी पीने से दोगुणा फायदा मिलता है। अगर आप भी रोज किसी न किसी हैल्थ प्रॉबल्म से परेशान रहते है तो सौंफ का पानी पीकर देंखे। यह एक औषधि के रूप में शरीर की बीमारियों और परेशानियों को दूर करने में मदद करता है। आइए जानते है किन लोगों के लिए सौंफ का पानी फायदेमंद है और इसे कैसे बनाया जाता है।

सौंफ पानी तैयार करने का तरीका

सौंफ का पानी तैयार करने के लिए पहले एक गिलास पानी लेकर उसमें सौंफ डालकर रातभर के लिए ऐसे ही रखा रहने दें। फिर सुबह उठकर इस पानी से सौंफ को छानकर अलग कर लें और फिर इस पानी का सेवन करें।

सौंफ का पानी पीने के फायदे

1. वजन कम

आज के समय मोटापा किसी एक की नहीं बल्कि अधिकतर लोगों की समस्या बना हुआ है, जिससे छुटकारा पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते है लेकिन कोई सफल परिणाम सामने नहीं आता। अगर आप भी मोटापे से निजात पाना चाहते है तो एक गिलास सौंफ के पानी में शहद मिलाकर रोज सुबह खाली पेट पीएं। इससे वजन तेजी से कम होता नजर आएगा।

2. खून की कमी

सौंफ के पानी में आयरन की मात्रा भी भरपूर होती है, जिसे रोज पीने से शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल बढ़ जाता है और शरीर में एनीमिया की कमी पूरी हो जाती है।

3. ब्लड प्रैशर

तनावपूर्ण और बिजी लाइफस्टाइल में ब्लड प्रैशर से जुड़ी समस्या आम देखने को मिलती है। ऐसे में सौंफ का पानी काफी फायदेमंद है। सौंफ के पानी में पोटैशियम की मात्रा भी भरपूर होती है, जिसे पीने से ब्लड प्रैशर कंट्रोल में रहता है।

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4. प्रैग्नेंसी

सौंफ प्रैग्नेंट महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद हैं। अगर प्रैग्नेंस महिला रोज सुबह-शाम 1 चम्मच सौंफ में 1 चम्मच मिश्री खाए तो इससे पेट में पल रहे शिशु को खून साफ होता है और उसका रंग भी साफ होता हैं।

5. कैंसर

सौंफ के पानी में ऐसे एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने की क्षमता देते हैं। सौंफ का पानी ब्रैस्ट कैंसर, लंग कैंसर या अन्य किसी तरह के कैंसर में भी काफी फायदेमंद है लेकिन इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से एक बार सलाह जरूर लें।

6. कब्ज

पेट संबंधी कोई न कोई प्रॉबल्म होना आम है। ऐसे में दवाइयों का सेवन करने के बजाए सौंफ का पानी पीकर देंखे, इससे पेट दर्द, कब्ज, पाचन संबंधी अन्य कई प्रॉबल्म दूर हो जाती हैं।

7. पीरियड्स

पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द और हॉर्मोन्स इनबैलेंस होने की दिक्कत रहती है। ऐसे में सौंफ का पानी पीने से पेट दर्द और हर्मोन्स बैलेंस में रहते है। पीरियड्स अनियमित रहने की दिक्कत से भी छुटकारा मिल जाता है।

8. हिचकी

हिचकी आने पर वह जल्दी से जाने का नाम नहीं लेते। ऐसे में अगर सौंफ में बराबर में मात्रा मे मिश्री मिलाकर खाई जाए तो हिचकी की समस्या मिनटों में गायब हो जाती हैं।

ये बीज डायबिटीज से लेकर दिल तक की बीमारी में फायदेमंद है

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आमतौर पर तरबूज खाते समय अधिकांश लोग उसके बीज निकाल लेते हैं। कोशिश यही रहती है कि ज्यादा से ज्यादा बीज निकाल दे ताकि मुंह में न आए। वैसे भी अभी तक बच्चों को यही कहा जाता है कि अगर आप तरबूज के बीज निगल गए तो आपके पेट में तरबूज का पेड़ उग जाएगा। अगर आपने कभी तरबूज के बीज खा भी लिए तो आपको पता है कि ये बात सच नहीं है। लेकिन यह सवाल जरूर मन में उठता है कि क्या तरबूज के बीज खाना सुरक्षित है, क्या यह पचाने में हेल्दी है?

जी हां, तरबूज के बीज निगलने के लिए सौ प्रतिशत सेफ है। तरबूज के बीज कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन्हें अच्छे से चबाकर खाना चाहिए, जिससे हमारा शरीर इन पोषक तत्वों को पा सके।

तरबूज के काले और सफेद दोनों तरह के ही बीज खाने के लिए सेफ होते हैं। ये दोनों केवल परिपक्वता के कारण अलग दिखते हैं। इनमें मैग्नीशियम,पोटाशियम,फास्फोरस और तांबे जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

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पकाने की विधि

20-30 तरबूज के बीज लेकर पीस लें। अब इसे 2 लीटर पानी में 15 मिनट के लिए उबालें जिससे यह एक सिरप बन जाएगा। इसे दो दिन मे पीकर खत्म करें। हफ्ते में दो बार यह प्रक्रिया दोहराने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं दूर होंगी। इसके अलावा बीजों को सूखा कर खाने से भी लाभ होता है।

दिल के लिए अच्‍छा

तरबूज के बीज मैग्‍नीशियम का समृद्ध स्रोत होने के कारण हृदय की कार्यप्रणाली को नॉर्मल रखने, रक्‍तचाप को बनाये रखने और मेटाबॉलिक सिस्टम को सपोर्ट करता है।  यदि आप अपने दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो तरबूज के बीज का सेवन करें। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि तरबूज आपके शरीर में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता और वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह कार्डियोवस्कुलर रोगों और हाइपरटेंशन में भी फायदेमंद है।

डायबिटीज पर नियंत्रण

डायबिटीज के इलाज में भी तरबूज के बीज फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है। यदि आपको डायबिटीज की समस्‍या है और आपकी शुगर हमेशा घटती बढ़ती रहती है तो तरबूज के बीज को थोड़े से पानी में उबालें। इस पानी को रोजाना चाय की तरह पिएं।

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बालों को टूटने से रोके

तरबूज के बीज का नियमित रूप से सेवन करने से इसमें पाया जाने वाला आवश्‍यक फैटी एसिड बालों के टूटने को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा बीज बालों के स्‍वास्‍थ्‍य को बनाये रखने में मदद कर बालों के विकास को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तरबूज के बीजों को चबाकर खाने से बालों की जड़ें मजबूती होती हैं।

स्‍कैल्‍प की खुजली दूर करे

तरबूज के बीज से बने तेल की बनावट बहुत हल्‍की होती है इसलिए यह सिर के पोर्स को बंद किये बिना आसानी से अवशोषित हो जाता है। इसके अलावा, यह ड्राई और  परतदार स्‍कैल्‍प के लिए मॉइस्चराइजिंग लाभ प्रदान करता है।

मुंहासे दूर करे

मुंहासे की समस्या होने पर तरबूज के बीज का तेल चेहरे पर लगाएं। तरबूज के बीज का तेल त्‍वचा पर लगाकर कॉटन की मदद से इसे साफ करें। यह चेहरे से गंदगी और सिबम को हटाकर पोर्स को खोल देता है तथा त्वचा को सुंदर बनाता है।

त्‍वचा को जवां बनाये

तरबूज के बीज में एंटीऑक्‍सीडेंट गुण पाये जाते हैं जो त्‍वचा को युवा और स्‍वस्‍थ बनाये रखने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें पाया जाने वाला लाइकोपिन त्‍वचा को लंबे समय तक जवां बनाये रखता है। इसके अलावा इसके बीजों को खाने से कुछ प्रकार के त्‍वचा कैंसर और संक्रमण से त्‍वचा की रक्षा होती है।

ये हैं तरबूज के बीज खाने के अन्य फायदे 

– किसी भी गंभीर बीमारी के बाद शरीर में बहुत सी कमजोरी आ जाती है। ऐसे में इसको लेने से फायदा होता है। ।

– इसमें मौजूद डायट्री फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को खत्म करने में सहायक होते हैं। कब्जियत की समस्या में भी यह बेहद लाभकारी है।

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खाना बनाने का सबसे अच्छा तरीका

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बाग़भट्ट जी कहते हैं कि मनुष्य अपने जीवन की 85% चिकित्सा स्वंय कर सकता है 15% रोगों में विशेषज्ञ की जरुरत पड़ती है. उसके लिए उन्होंने स्वस्थ रहने के 15 सूत्र बताये है जिनमे से हम एक महत्वपूर्ण सूत्र आज आपको बताने जा रहे है जिसे अपने जीवन में उतारने से हम काफी हद तक बिमारियों से अपने आपको बचा सकते है.

बागभट्ट जी कहते है कि जिस भोजन को पकाते समय पवन का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश न मिले वो भोजन कभी मत करना क्यूंकि यह भोजन नही विष है. दुनिया में दो तरह के विष हैं एक जो तत्काल असर करे और दूसरा जो धीरे धीरे( 2 साल से 20 साल) असर करे और आपको धीरे धीरे मरने की स्तिथि में पहुंचा दे और यह भोजन जिसमें सूर्य का प्रकाश न हो या पवन का स्पर्श न हो बह भोजन दूसरी तरह का ही जहर है जो धीरे धीरे असर करता है

अब तक हम बागभट्ट जी के शब्दों में बात कर रहे थे अगर हम राजीव जी द्वारा कहे गए या आज की भाषा में बात करें तो प्रेशर कुकर का इस्तेमाल न करें क्योंकि उसमे भोजन बनाते समय न तो सूर्य का प्रकाश उसको मिलेगा और न ही पवन का स्पर्श, प्रेशर कुकर में अंदर की हवा तो बाहर आ सकती है. लेकिन बाहर की हवा अंदर जाने की कोई व्यवस्था उसमें नही है. यह सूत्र बाग़भट्ट जी ने 3500 साल पहले लिखा था शायद उनको पता था कि मनुष्य कभी न कभी यह डीवाईस बना ही लेगा इस सूत्र का सिद्धांत प्रेशर कुकर के साथ लागू होता है.

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राजीव जी ने यह परीक्षण वैज्ञानिको द्वारा करवाया कि बाग़भट्ट जी का सूत्र सही है या नही तो वैज्ञानिको ने यह पाया कि उनकी बात 100% सही है. उनका कहना है कि प्रेशर कुकर एल्युमीनियम के बने होते हैं और भोजन रखने के लिए और बनाने के लिए सबसे खराब मेटल यही है.

उन दोनों वैज्ञानिको ने कहा कि यदि 17 या 18 साल तक प्रेशर कुकर में बना खाना लगातार खा लिया जाए तो डाईबीटीस, आर्थराइटिस तो हो ही जायेगा और सबसे ज्यादा टी बी और अस्थमा होने की संभावना बढ़ जाएगी. उन वैज्ञानिको ने कहा कि हम अब तक 48 बीमारियों को डिटेक्ट कर चुके हैं, जो प्रेशर कुकर से होती है और अधिक होने की संभावना है और इन रिसर्चरो ने सबसे ज्यादा रिसर्च जेलों में किया क्योंकि वहां सभी कैदियों को एल्युमीनियम के बर्तन में ही खाना मिलता है, उन्होंने बताया कि इस खाने से प्रतिकारक शक्ति बहुत कम होती है और रोग बहुत जल्दी आते है

किस बर्तन में पकाए भोजन

बाग़भट्ट जी कहते हैं कि मिटटी की हांड़ी में बनी हुए सब्जी खाए क्योंकि उसमें सारे न्यूट्रीयंट्स होते है. एक बार राजीव जी मिटटी की हांड़ी में बनी दाल को पूरी से लेकर भुवनेश्वर गए भुवनेश्वर में CSIR का लेबोरेटरी रिसर्च सेंटर है. तो वैज्ञानिको से उन्होंने उस दाल का विसलेषण करने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि उनके पास उपकरण नही हैं. आप इसे दिल्ली ले जाइये. राजीव भाई ने कहा कि दिल्ली तक जाने में तो ये ख़राब हो जाएगी. तब वह के वैज्ञानिकों ने कहा कि ये दाल ख़राब नही होगी क्यूंकि ये हांड़ी में बनी है. उसे ले जाने में 2 दिन लगे क्यूंकि भुवनेश्वर से दिल्ली का रास्ता 2 दिन का है. राजीव भाई फिर उसे दिल्ली लेकर आये और उस पर वैज्ञानिकों द्वारा रिसर्च किया गया.

कितने न्यूट्रीयंट्स रह जाते है कुकर से बने भोजन में

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस दाल में मौजूद एक भी माइक्रो न्यूट्रीयंट्स पकाने के बाद भी कम नही हुए. फिर राजीव जी ने उन वैज्ञानिको को कुकर की बनी हुई दाल पर परिक्षण के लिए कहा तो उन्होंने रिसर्च के बाद कहा कि इसमें बहुत ही कम न्यूट्रीयंट्स हैं तो राजीव जी ने पूछा की कितने पर्सेंट न्यूट्रीयंट्स हैं तो वैज्ञानिको ने बताया की यदि अरहर की दाल को मिटटी की हांडी में पकाओ और उसमे 100% न्यूट्रीयंट्स हैं तो वही दाल अगर प्रेशर कुकर में बनी हो तो उसमें 13% ही न्यूट्रीयंट्स रह जायेंगे 87% खत्म हो जायेंगे.

क्या कारण है कि कुकर में सब्जी नही पकती

इसका कारण यह है कि ये जो प्रेशर पड़ा है ऊपर से इसने दाल के कणों को तोड दिया है. कण टूट गये हैं, और दाल बिखर गई हैं ,पकी नही है, सॉफ्ट हो गयी है. खाने में हमें यह लग रहा है कि यह पक्का हुआ खा रहे है लेकिन वास्तव में वो पका हुआ नही है. आयुर्वेद में पका हुआ खाने का मतलब है जो हम कच्चा नही खा सकते, उसे पका हुआ बना लें इसलिए उन्होंने कहा की यह मिटटी की हांड़ी में बननी हुई दाल बहुत उपयोगी है.

मिटटी के बर्तनों में बने खाने के फायदे

यही कारण है कि हमारे बजुर्ग जो मिटटी के बर्तनों में भोजन बनाया करते थे उन्हे कभी डाईबीटीस नही होता था, कभी अर्थराइटिस नही होता था, 100 साल से ज्यादा जीते थे और मरते समय तक 32 के 32 दांत सुरक्षित होते थे. आँखों पे चश्मा नही होता था

विडियो देखें >>

Source: www.rajivdixitji.com

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शरीर, दिमाग को एक्टिव रखने का रहस्य

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राजीव दीक्षित जी ने दो ऐसी चीजें बताई जिसका अमल करना आवश्यक हैं.

  • दोपहर को अगर आपने खाना खाया है, तो भोजन करने के बाद २० मिनट का विश्राम लेना आवश्यक है
  • रात्रि का भोजन लेने के बाद कम से कम २ पास तक विश्राम नहीं लेना आवश्यक है।

ये दोनों एक दूसरे के विपरीत बाते है। दोपहर भोजन करते ही तुरंत आपको कोई और काम नहीं करना है और विश्राम लेना है और रात का भोजन किया है तो 2 घंटे तक कभी भी विश्राम नही लेना.

उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि दोपहर को शरीर में पित का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और पित एक ऐसी अवस्था है जिसमे विश्राम न हो तो वो भड़कती है। अगर आपको पित है तो शांति से बैठ जाइये तो पित भी शांत हो जायेगा। लेकिन अगर आपने काम करना शुरू कर दिया तो पित इतना भडकेगा की पुरे शरीर में आग लगेगी. इसीलिए, सभी माताओं को,  बहनों को, भाइयों को भाई राजीव दीक्षित जी की विनंती है कि दोपहर का भोजन करने के बाद कम से कम 20 मिनट का विश्राम जरूर लीजिये।g

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उन्होंने दोपहर के भोजन के बाद विश्राम कैसे लेना है उसका तरीका भी बताया। उन्होंने बताया कि दोपहर का विश्राम लेफ्ट साइड जिसको मराठी में दबा बजी कहते है यानी की दाबा बाजु की तरफ सो के लेना है, किसको बहुत सुंदर शब्द में वाम कुर्शी का नाम दिया गया हैं. वाम कुर्शी माने लेफ्ट साइड में लेटना। 20 मिनट लेटने में अगर झपकी आ गयी तो ले लेना।

झपकी लेने का फायदा बताते हुए उन्होंने कहा कि रात्रि को 6 घंटे की झोक और दोपहर को 40 मिनट से एक घंटे की झोक दोनों बराबर है। दोपहर को खाने के बाद 1 घंटे की नींद आयी उसका उतना ही लाभ होता है जितना शरीर को रात्रि की 6 घंटे की नींद का होता है। इसलिए आप सभी को मेरी विनती है सब भोजन के तुरंत बाद विश्राम ले लीजिये। कोई भी कम इतना जरूरी नहीं है, आपकी जिंदगी में जितना जरूरी आपका शरीर हैं।

ऐसे भी बहुत लोग होंगे जिनकी पुरे दिन की नौकरी होती हैं। उनको राजीव जी ने एक मजेदार बात बताते हुए कहा कि आप में से कुछ लोग ऐसे होंगे के जो सर्विस मे है, बैंक में काम करते है, बीमा कंपनी में काम करते है, रेलवे में काम करते है या फिर स्कूल में अध्यापक है; ऐसे लोग कैसे विश्राम लेंगे? ये तो आपकी तो समस्या है ही लेकिन राजीव भाई ने एक अच्छी और मजेदार जानकारी सबको दी थी. वो ये कि ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, मक्सिको आदि दुनिया के 23 देशो की सरकारों ने दोपहर के भोजन के बाद 20 मिनट के विश्राम का कानून बना दिया है। उनके देश में, अगर कोई भी कंपनी में दोपहर के भोजन के बाद 20 मिनट का विश्राम नहीं होगा तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन सरकार कैंसिल कर देगी। ऐसा भारत में कब होगा उसका मुझे मालूम नहीं लेकिन आप अपने घर में ये कानून बना लीजिये कि दोपहर के खाने के बाद थोड़ी फुर्सत निकालनी ही है।

आखिर में सारी चीज़े दोहराते हुए बताया कि 20 मिनट वीश्रामती लेफ्ट साइड आपको लेनी है, क्यूंकि दोपहर को पित बहुत तीव्र होता है और पित की तीव्रता में भोजन सही से नही पचता। इसलिए वीश्रामती बहुत आवश्यक है. लेकिन रात को भोजन के बाद 2 घंटे तक सोना नही है, क्यूंकि रात को कफ की अधिकता बहुत होती है और कफ की अधिकता में सोना तकलीफ दायक हैं, इसी लिए रात को भोजन के बाद 2 घंटे तक काम करिये, टहलिए, घूमिये, भजन – कीर्तन करिये, अभ्यास करिये लेकिन 2 घंटे के बाद ही सोइए। दो घंटे के पहले कभी नही सोना है और दिन में भोजन के तुरंत बाद विश्राम करना है।

उन्होंने आगे कहा कि अब इसमें छोटी सी बात में जोड देता हूँ, अगर आपकी कोई ऐसी मजबूरी है, जैसे आप ऑफिस में काम करते है, २० मिनट वीश्रामती का समय नही है तो आयुर्वेद ने एक छोटी सी व्यवस्था बनाई है। ये चरक ऋषि के समय नही थी, बाणभट के समय भी नही थी, ये आज के आधुनिक आयुर्वेद के चिकित्सो ने खोज करके बताया है। वो यह है कि आप वज्रासन में थोड़ी देर बैठ सके तो वो भी काफी है। दोपहर के खाने के बाद थोड़ी देर वज्रासन में बैठ जाइए। अब वो थोड़ी देर, 3 मिनट से ले के 20 मिनट तक कुछ भी हो सकता है।

आखिर में उन्होंने वज्रासन के बारे में ज्यादा बताते हुए कहा कि वज्रासन आप सभी जानते है. दोपहर को भोजन के बाद अगर वीश्रामती लेने की स्पेस नही है, सुविधा नहीं है, या फिर आप किसी ऐसी जगह फसे हुए है जहा आप विश्राम नहीं कर सकते तो वज्रासन में बैठ जाइए। ट्रेन में चलते चलते भी आप वज्रासन में बैठ सकते है, सीट 3 फीट चोडा और 6 फ़ीट लम्बा होता है तो वज्रासन जरुर कर लीजिये 3 मिनट से लेकर 20 मिनट तक । तीन मिनट कम से कम 20 मिनट अधिक से अधिक.

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इन चीजों को खाने से आता है हार्ट अटैक, जिन्‍हें आप रोज़ खा रहे हैं

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हमारा दिल पूरी जिंदगी बिना रुके काम करता रहता है। ऐसे में सेहतमंद शरीर के लिए दिल का खयाल रखना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद भारत में दिल की बीमारियों के चलते हर साल कई मौतें होती हैं।

लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आपकी खाने-पीने की आदतें आपके दिल को बहुत बीमार कर रही हैं। अगर हम अपने खान-पान पर ध्‍यान दें तो काफी हद तक दिल को सेहतमंद रख सकते हैं डाइट में सुधार करने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल और ब्‍लड प्रेशर कम होता है ।

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  • चाइनीज़ फूड कैलोरी, फैट, सोडियम और कार्बोहाडड्रेट से भरपूर होता है। यह हमारे शरीर के ब्‍लड शुगर लेवल को लंबे समय के लिए बढ़ा देता है। यानी कि आप एक बार चाइनीज़ फूड खाएंगे और लंबे समय तक आपका ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ा रहेगा।
  • आलू और मकई के चिप्‍स में भरपूर मात्रा में ट्रांस फैट, सोडियम, कार्ब्‍स और ऐसी बहुत सी चीजें पाई जाती हैं।जो आपकी सेहत और दिल के लिए बिलकुल भी अच्‍छी नहीं हैं आलू और मकई के चिप्‍स में सैचुरेटेड फैट होता है।जो पेट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है यही नहीं इन चिप्‍स में जरूरत से ज्‍यादा नमक होता है जो दिल की कई बीमारियों के लिए जिम्‍मेदार है।
  • ब्‍लेंडेड कॉफी में काफी मात्रा में कैलोरीज़ और फैट पाया जाता है। इसमें चीनी भी भरपूर मात्रा में होती है, जो ब्‍लड शुगर लेवल को बढ़ाने के लिए काफी है।यही नहीं इस तरह की कॉफी में मौजूद कैफीन भी ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ा देती है और इसका सेवन खासतौर पर डायबिटीज और हार्ट पेशंट के लिए बहुत ज्‍यादा हानिकारक है।
  • एनर्जी ड्रिंक्‍स में ग्‍वाराना और टॉराइन जैसे नैचुरल एनर्जी बूस्‍टर्स होते हैं ये जब कैफीन के संपर्क में आते हैं। तो आपके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ जाती है। एनर्जी ड्रिंक्‍स में बहुत ज्‍यादा मात्रा में कैफीन होती है इसका सबसे प्रमुख लक्षण है दिल की अनियमित धड़कन।
  • दो मिनट में बनने वाले इंस्‍टेंट नूडल्‍स बच्‍चों और बचलर्स का पसंदीदा खाना है लेकिन यह उन लोगों के शरीर को खासा नुकसान पहुंचाता है। जो इसे आएदिन खाते हैं अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे कि इंस्‍टेंट नूडल्‍स की पैकिंग करने से पहले उन्‍हें डीप फ्राइड किया जाता है।, जो आपके दिल के लिए तो किसी भी लिहाज से अच्‍छा नहीं है यही नहीं इसमें नमक भी बहुत ज्‍यादा होता है। ज्‍यादा नमक खाने से ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है जिससे दिल पर दबाव बढ़ने लगता है।
  • पिज्‍जा फैट और सोडियम का घर है इसके क्रस्‍ट में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और सोडियम पाया जाता है। पिज्‍जा में मौजूद चीज़ इस सोडियम और फैट को और ज्‍यादा बढ़ाने का काम करती है। यही नहीं पिज्‍जा सॉस में भी जरूरत से ज्‍यादा सोडियम होता है इन चीजों के सेवन से आर्टरी ब्‍लॉक हो सकती है। अगर आप पिज्‍जा के शौकीन हैं तो मैदे के बजाए गेहूं के आटे और ऑलिव ऑयल से बने क्रस्‍ट का इस्‍तेमाल करें।
  • सोडा पीने से जलन होने के साथ ही ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है यही नहीं सोडा तनाव पैदा कर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा देता है रोजाना के खान-पान में सोडा का इस्‍तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है।

यह भी पढ़े : हार्ट ब्लॉकेज (Heart Blockage) खोलने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक उपचार

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