थायराइड की समस्या के लिए रामबाण दूध

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थायराइड हमारी बॉडी में पाया जाने वाली एंडोक्राइन गाँठ होती है जो हमारे गले में पाए जाने वाले थाइरॉक्सिन हॉर्मोन को बनाने का काम करती है. और साथ ही हमारे शरीर की कार्यक्षमता पर बहुत असर डालती है. थाइरॉयड के मरीजों को नियमित रूप से दवाओं का सेवन करना पड़ता है और साथ ही अपने खान पान का भी बहुत ध्यान रखना पड़ता है. पर आज हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनके इस्तेमाल से आपका थाइराइड हमेशा कण्ट्रोल में रहेगा.

1-थाइरॉयड की समस्या में हल्दी दूध का सेवन बहुत फायदेमंद होता है. इसके सेवन से आपकी बॉडी में थाइराइड का लेवल हमेशा कण्ट्रोल में रहता है. इसके अलावा आप चाहे तो थाइराइड की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हल्दी को भुनकर भी खा सकते है.

2-लौकी का जूस हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है. थाइरॉयड की बीमारी में नियमित रूप से सुबह खाली पेट में लौकी का जूस पीने से थाइराइड कण्ट्रोल में रहता है.

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3-तुलसी के इस्तेमाल से भी थाइराइड की समस्या को कण्ट्रोल में किया जा सकता है. इसके लिए थोड़े से तुलसी के पत्तो का रस निकालकर इसमें थोड़ा सा एलोवेरा जूस मिलाएं. नियमित रूप से इसके सेवन से थाइरॉयड की बीमारी धीरे-धीरे गायब होती दिखाई देगी.

4-काली मिर्च हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है. इसके इस्तेमाल से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. थाइराइड की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए थोड़ी सी काली मिर्च को पीसकर हलके गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से थाइराइड कण्ट्रोल में रहता है.

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सुबह नहाने के पानी में मिलाएं इसकी 5-6 बूंदें, पूरा शरीर हो सकता है गोरा

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अगर आपको पूरी तरह से गोरा बनना है, चेहरे के साथ-साथ हाथ, पांव, गर्दन, पेट, सभी हिस्सों की त्वचा का रंग हल्का करना है तो आपको रोजाना सुबह नहाते समय नहाने के पानी में एक चीज मिलाकर नहाना चाहिए।

देखा जाये तो किसी भी इंसान का पूरा शरीर और उसके शरीर के भाग उसकी सुन्दरता के बारे में बहुत कुछ बताते हैं कि वो कितना खूबसूरत है| कोई देखने में बहुत खूबसूरत होता है तो कोई थोरा कम लेकिन हर इंसान सोचता है की वो देखने में सबसे अच्छा लगे और इसके लिए वे  काफी सरे प्रयत्न भी करता है|हमारे शरीर के सभी हिस्सों में से हमारा चेहरा एक ऐसा ऐरिया है जिसे हम गोरा और चमकदार बनाने का प्रयत्न करते रहते हैं। खासतौर से महिलाएं अपने चेहरे को गोरा और बेदाग बनाने के लिए कई कॉस्मेटिक और घरेलू प्रयोग करती रहती हैं और कई बार वे इसमें सफल भी होती हैं।

इंसान के शरीर के सभी हिस्सों में हमारा चेहरा एक ऐसा हिस्सा होता है जिसे हम हमेशा सबसे खूबसूरत और चमकदार बनाने की सोचते हैं खासतौर पर महिलाएं सबसे ज्यादा अपने चेहरे को गोरा और बेदाग बनाने के लिए परेशां रहती है कभी घरेलू उपाय करती हैं तो कभी महंगे कॉस्मेटिक का प्रयोग करती हैं ताकि वे सबसे ज्यादा खूबसूरत दिख सकें|

काफी सरे उपायों का प्रयोग कर के महिलाएं अपने मकसद में सफल भी हो जाती हैं तो कई बार साइड इफ़ेक्ट का शिकार हो जाती है आमतौर पर महिलाएं ये ही सोचती हैं कि उनके शरीर के अन्य भाग चाहे इतने गोरे न दिखें लेकिन उनका चेहरा ज़रूर गोरा दिखना चाहिए और अपने चेहरे को गोरा करने के लिए ऐसा किया क्या जाये ये किसी को मालूम नहीं होता लेकिन आप को परेशां होने की जरूरत नही है ऐसे में अगर हम आपको एक ऐसा उपाय बताने जा रहे है जिसके मात्र 5 से 6 बूंदों से आपका चेहरा कुछ ही दिनों में काफी ज्यादा चमक उठेगा बल्कि आपका पूरा शारीर गोरा हो जायेगा|

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आपको यह भी बता दें कि जो उपाय हम आपको बताने जा रहे हैं उसके प्रयोग से सिर्फ चेहरा नहीं बल्कि पूरे शरीर में किया जा सकता है जी हाँ दरअसल हमारे शरीर में जो भाग ढाका रहता है वो अन्य हिस्सों की तुलना में गोरा और बेदाग़ रहता है क्योंकि इन पर धूप और प्रदूषण का सीधा असर नहीं पड़ पाता लेकिन वहीँ हमारे हाथ, हाथ की बाजुएं, हमारा चेहरा, हमारी गर्दन पर धूप और प्रदूषण सीधा वार करते हैं इसकी वजह से हमारा शारीर काला सा पड़ जाता है|

अगर आप सुबह नहाते समय एक छोटा सा प्रयोग कर लें, तो आपका पूरा का पूरा शरीर गोरा हो सकता है। आपको केवल इतना करना है की नहाने के पानी में एक चीज मिलानी है और कुछ ही दिनों में आपको इसका असर भी देखने को मिलेगा अगर आपको इस बात से परेशानी है कि आपके हाथ और आपका चेहरा गोरा क्यों नहीं दिखता है तो आप केवल एक नुस्खा हर सुबह नहाते समय अपनाना होगा जिससे आपका पूरा शरीर गोरा हो जायेगा|

सबसे पहले आपको एक निम्बू लेना है और इसको अपने नहाने के पानी में 5 से 6 बूँदें डालना है जिसका रिजल्ट आप कुछ ही दिनों में देखेंगे| आपी जानकारी के लिए बता दे की दरअसल नींबू में एंटी एलर्जिक और टैनिंग को काटने के गुण रखता है|

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नसों की कमज़ोरी के कारण और इससे निजात पाने के आसन घरेलू उपाय

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दोस्तों आज हम जानेंगे इन नसों की कमज़ोरी के कारण और इससे निजात पाने के आसन घरेलू उपायों की। दरसल शरीर का कोई भी हिस्सा जैसे पीठ, कमर, हाथ, गर्दन आदि की नस के दबने से होने वाला दर्द काफी तकलीफदेय होता है। इसकी वजह से हम कोई भी काम सही ढंग से नही कर पाते। नसें हमारे शरीर मे मौजूद भिन्न- भिन्न अंगों से होकर गुजरती है और जब कोई अंग कमज़ोर पड़ता है तो सबसे पहले वहां की नसों पर इफ़ेक्ट पड़ता है।

नसों के कमजोर होने के लक्षण

  • यदि आपके शरीर की नसें कमज़ोर हो गई हैं, तो इससे शरीर में होने वाले इफ़ेक्ट की पहचान करना जरूरी होता है जिससे सही इलाज करने में सहायता मिलती है।
  • यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं।
  • चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।
  • रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है।
  • अपच होना भी एक संकेत है।
  • अनिन्द्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी।
  • हदय-स्पंदन
  • शरीर में खून की कमी होना।

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नसों की कमज़ोरी का इलाज

इनमें से कोई भी लक्षण जब शरीर में घटित होता है तो नसों में बहुत तेजी के साथ दर्द होने लगता है, जो परेशानी का सबब बन जाता है। तो अब जानते हैं  नसों के दर्द को दूर करने के कुछ आसान घरेलू इलाज जिसे आप ठीक से फॉलो करेंगे तो यकीनन फायदा होगा।

1. गाय का दूध

नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप गाय के दूध के साथ मक्खन, मिश्री भी खा सकते है, जिससे काफी हद तक नसों की कमजोरी में आराम मिलता है।

2. किसमिस

किसमिस खाने की आदत डाल लें। यह शरीर में अन्य लाभ पहुंचाने के साथ ही नसों की कमजोरी का भी बेहतरीन इलाज  है। पर हाँ इसका इस्तेमाल आप सर्दियों के मौसम में ही करने की कोशिश करें।

3. सरसो का तेल

सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।

4. लेवेंडर का फूल

लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं ।

5. बेर की गुठलियां

नसों की कंजोरी को दूर करने के लिए आप बेर की गुठलियों को गुड़ के साथ खाएं जिससे की नसों में मज़बूती आएगी और शरीर बलवान बन जाता है।

6. पुदीने का तेल

यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें। इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी।

7. आयुर्वेद का साथ

अश्वगन्धा 100 ग्राम, सतावर 100 ग्राम, बाहीपत्र 100 ग्राम, इसबगोल की भूसी 100 ग्राम, तालमिश्री 400 ग्राम इस सबका एक मिश्रण बना ले और उस मिश्रण को सुबह व शाम को दूध के साथ लें। लगभग एक महीने के प्रयोग से ही शरीर की रक्त क्षमता बढ़ जाती है। और नशों में ताक़त आजाती है ।

8. मसाज का सहारा

नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।

9. व्यायाम

यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।

10. भ्रस्तिका प्राणायाम

भ्रस्तिका प्राणायाम करने से भी नसों के रोगी को बहुत लाभ होता है। लाभ होता है इसलिए रोजाना यह प्राणायाम करें

11. अनुलोम विलोम

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी नसों में होने वाली दिक्कत को एक दम से दूर किया जा सकता है और बहुत दिनों तक करेंगे तो ये बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाएगी।

नसों के ब्लॉकेज खोलने के सबसे आसान घरेलू उपाय

हमारे ब्लड सेर्कुलशन में कुछ प्रॉब्लम आ जाती है हमारी नसों में ब्लॉकेज आ जाते है जिससे हमारा शरीर बुरी तरह से प्रभावित होता है नसों में ब्लॉकेज होने पर हमे चलने में दिक्कत आना ,साँस फूलना चक्कर आना आदि समस्याए होने लग जातीहै।

लेकिन आज हम आपको नसों के ब्लॉकेज को खोने के कुछ घरेलू उपाय बताते है जिनसे आप इस बीमारी से जल्द ही राहत पा सकते है।

अगर नसों में ब्लॉकेज की समस्या है तो आप लहसुन का उपयोग खाने में कीजिये लहसुन खाने से नसों की चौड़ाई फ़ैल जाती है और ये नसों के ब्लॉकेज खोलने में भी सक्षम है इसका उपयोग इस तरह से करे लहसुन की कलियों को भुनले और पीसकर दूध में डाकर पीले आपको फायदा मिलेगा।

हल्दी का उपयोग करके भी आप नसों के ब्लॉकेज खोल सकते है क्योंकि हल्दी में करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी गन होते है जो ब्लड को थक्के के रूप में जमने से रोकता है इसको आप दूध  में डालकर और सहद मिलकर पिए आपकी ब्लॉक नसे खुल जाएगी।

अलसी भी नसों के ब्लॉकेज खोलने में सक्षम है इसमें अल्फा लिनोलेनिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता हैजो बंद नसों को खोलने में मदद करता है और ये नसों में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को भी आसानी से बाहर निकाल देता है जिससे हमारा ब्लड सर्कुलशन ढंग से काम करने लग जाता है इसके इस्तेमाल के लिए इसे रात भर भिगो दे और सुबह पीस कर काढ़ा बनाकर पीले ऐसा लगातार 3 महीने तक करने पर फायदा मिलता है।

ब्लॉकेज नसों को खोलने में अनार का सेवन भी बढ़िया रहता है रोज सुबह 3 से 4 अनार का सेवन करे।

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सिर्फ 1 बूंद – उम्र को 10 साल पीछे ले जाएगी, चरक संहिता में है लिखा

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आज हम आपके लिए एक और औषधि के बारे में बताने जा रहे है, जिसका नाम है गेंदे का फूल. गेंदे को अंग्रेजी में “मैरी गोल्ड” फ्लावर के नाम से जाना जाता है. यह दुनिया की सर्वोत्तम औषधियों में गिना जाता है. गेंदे (कैलेंडुला) का फूल देखने में बहुत खूबसूरत लगता है तथा इसकी खुशबू भी बहुत अच्छी होती है। गेंदे के फूल को पूजा करते समय भगवान पर भी अर्पित किया जाता है।

इसके अलावा यह फूल औषधिक गुणों से भी भरपूर है। इसलिए इसे त्वचा के उपचार में उपयोग किया जाता है। गेंदे में कई प्रकार के तत्व जैसे कैरोटिनॉइड, ग्लाइकोसाइड, गंध तेल, फ्लावोनोइड्स (flavonoids) तथा स्टेरोल्स (sterols) होते हैं जो त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

गेंदे को झेंडू भी खा जाता है. ये बहुत ही फायदेमंद औषधि है जिसे हम अपने घर में आसानी से लगा सकते है. अभी कुछ समय पहले आपको याद होगा हमारे देश के 680 जवान कारगिल के युद्ध में शहीद हुए थे. जिनमे से  1200-1300 सैनिको की गोली या बम लगने से काफी खतरनाक घाव बन गये थे. गोली और बम जैसे घावों को ठीक करने के लिए डॉक्टर लोग झेंडू (गेंदेका फुल) के तेल का रस इस्तेमाल करते है. अगर झेंडू के फूल के रस की चटनी बना कर घाव पर लगा दी जाये तो इससे भी आपके हर तरह के जख्म ठीक हो जायेंगे. ऐसे में कारगिल के वीर जवानों को झेंडू के फूल ने ही ठीक किया था. राजीव दीक्षित जी का मानना है कि हम सबको अपने घर में गेंदे के फूल लगाने चाहिए. जिससे हम किसी भी चोट का आसानी से इलाज घर में ही कर पाएं.
गेंदे को दुनिया का सबसे बड़ा एंटी सेप्टिक मन जाता है. अगर गेंदे के रस में एलोवेरा के रस को मिलाया जाये तो ये औषधि सोने पर सोहागे का काम करती है. इन दोनों के रस को अगर मिला कर हर तरह के गले सड़े अंगो को ठीक किया जा सकता है. इसलिए गेंदे के फूल को हमेशा घर में किसी गमले में लगा कर रखें. जो आपको हर प्रकार की चोट का आसान से आसान इलाज मिल पाये.

 

गेंदे के फुल के कुछ अन्य प्रभावशाली इलाज >>

गेंदे के फूल का उपयोग झुर्रियों के लिए – उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की त्वचा की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं तथा नई कोशिकाएं बहुत कम मात्रा में बनती हैं। इससे त्वचा लटकने लगती है। इसका सबसे पहले असर चेहरे की त्वचा पर दिखाई देता है। इसके तेल या क्रीम को झुर्रियों वाली त्वचा पर लगाने से झुर्रियां हट जाती हैं। गेंदे के फूलों में फायटोकॉन्सटीटूएंट्स (phytoconstituents) होता है जो एंटी एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करता है। गेंदा उत्तक के पुनः निर्माण में अच्छी भूमिका निभाता है, जिससे झुर्रियों से निजात मिल जाती है।

गेंदे के लाभ मुंहासों के लिए – आपकी त्वचा पर मृत कोशिकाओं के कारण त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं और इसमें से निकलने वाला तेल धूल मिट्टी के साथ मिलकर चेहरे पर मुँहासे निकलने का कारण होता है। कई बार इन मुंहासों के कारण जलन और दर्द दोनों महसूस होते हैं। कैलेंडुला का तेल दाग धब्बे के उपचार में मदद करता है। इसमें एंटी फंगल के गुण होते हैं जो दाग धब्बे को हटाने में मदद करती है। चेहरे के मुँहासे पर कैलेंडुला का तेल युक्त क्रीम लगाने से मुँहासे दूर हो जाते हैं। यह त्वचा में कोलेजन (collagen) के स्तर को बढ़ाता है तथा दाग धब्बे दूर करता है।

गेंदे के फूल का उपयोग त्वचा के लिए – गेंदे के फूल से बने तेल से चेहरे पर मालिश करना त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है। यदि आप इसके तेल से नियमित रूप से अपने चेहरे पर मालिश करते हैं तो त्वचा में रक्त का संचार बढ़ता है और आपकी त्वचा का रंग निखरने लगेगी।

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कैलेंडुला फूल का उपयोग आँखों के लिए – गेंदे की चाय में एंटीऑक्सीडेंट्स (antioxidants), लुटेइन ( lutein), जेक्सनथिन (zeaxanthin), ल्य्कोपेन (lycopene) आदि होते हैं जो नेत्र रोग और अंधापन को रोकने में मदद करती है। गेंदा आँखों के लिए एंटीसेप्टिक का काम करता है। इस के रस से लाल पीड़ादायक आँखों को धोने से आँखों में बहुत फायदा होता है।

गेंदा फूल के फायदे घाव भरने में – कैलेंडुला के तेल में एंटी सेप्टिक और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं। जब हम घाव या जलें पर गेंदे के तेल का उपयोग करते हैं तो यह घाव को आसानी से भर देता है। कैलेंडुला के फूलों से बनी क्रीम को घाव या जले को ठीक करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। कैलेंडुला से बनी हुई क्रीम घाव को जल्दी भरने में मदद करती है। यदि आपको किसी कीड़े ने काट लिया है तो आप कैलेंडुला का तेल या क्रीम लगाएं यह आप को फायदा करेगा।

गेंदे के फूल के फायदे पाचन समस्या में – इसका सेवन करने से पाचन से जुड़ी कई बीमारियों से निजात मिलता है और यह पेट को काफ़ी फायदा पहुचाता है। कई बार खाने की अनियमितता और फास्ट फूड खाने से पेट में कई तरह की समस्याएं हो जाती हैं। जिस के कारण व्यक्ति को परेशान होना पड़ता है। गेंदे के उपयोग से कब्ज की समस्या दूर होती है। जिगर और पित्ताशय डेटोक्सीफाय (detoxify) करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यदि आपके पेट में दर्द है तो इसका सेवन करने से पेट के दर्द से राहत मिलती है। आपके पेट में एसिडिटी या अपच की समस्याएं होने पर इसका सेवन करें। इन समस्या में यह बहुत ही फायदेमंद होता है। यह चयापचय क्रिया के द्वारा शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकल देता है।

गेंदे के अन्य गुण – इसके रस को कानों में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। गेंदे के फूल को मिश्री के साथ खाने से दमा,खाँसी की समस्या दूर होती है। यदि शरीर के किसी हिस्से में सूजन आ गई हो तो इसकी पंखुड़ियों को पीस कर सूजन पर लगाने से सूजन खत्म हो जाती है।

कैंसर का आयुर्वेदिक उपचार जानने के लिए पूरी वीडियो देखे और अगर आपको हमारी जानकारी फायदेमंद लगे तो हमारा Youtube Channel Subscribe कीजिये..और घंटी बजाना ना भूलियेगा ताकि आपको मिल सके हमारे नए वीडियो सबसे पहले…

Source: www.rajivdixitji.com

नस दबने का इलाज

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हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हमारी नसें होती हैं, जो हमारे शरीर में रक्त संचारित करती रहती है, जो हमें जिन्दा रहने के लिए बहुत अहम होता है। पर कई बार कुछ कारणों से ये कमजोर पड़ जाती हैं जिसकी वजह से हमें कई शरीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तो आइए दोस्तों आज हम जानेंगे इन नसों की कमज़ोरी के कारण और इससे निजात पाने के आसन घरेलू उपायों की।

दरसल शरीर का कोई भी हिस्सा जैसे पीठ, कमर, हाथ, गर्दन आदि की नस के दबने से होने वाला दर्द काफी तकलीफदेय होता है। इसकी वजह से हम कोई भी काम सही ढंग से नही कर पाते। नसें हमारे शरीर मे मौजूद भिन्न- भिन्न अंगों से होकर गुजरती है और जब कोई अंग कमज़ोर पड़ता है तो सबसे पहले वहां की नसों पर इफ़ेक्ट पड़ता है। कई बार हमारे शरीर की नसें गलत व्यायाम करने से या वज़न बढ़ने की वजह से या किसी अन्य वजहों के कारण दब जाती है और शरीर के उस हिस्से में दर्द होने लगता है। जिसकी वजह से हमारा रक्त उस अंग में नही पहुंच पाता, जिससे वह कमज़ोर पड़ने लगती हैं। ऐसे में हम इस समस्या का समाधान किसी अच्छे डॉक्टर की मदद से या खुद घर बैठे भी कर सकते है ।

पर ध्यान रहे नसों में होने वाले दर्द का इलाज़ करने की जानकारी आपको पूरी तरह से होना बेहद जरूरी है, क्योंकि नसें बहुत ही डेलिकेट होती है और गलत इलाज करने से इसे काफी नुकसान पहुंच सकता है।
यदि आपके शरीर के किसी भी अंग की नसें कमज़ोर हो गई हों तो उसका घर बैठ इलाज करने से पहले इन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।
दबी हुई नस को जितना हो सके दबाना या मोड़ना टालें।
यदि सूजन हो तो सूजन कम करने के लिए बर्फ और गर्म चीज़ों से बारी-बारी से मसाज करें।
ज्यादा से ज्यादा आराम करें।
आराम पाने के लिए ज्यादा दबाव न डालें हल्की मालिश ही करें।
जितना हो सके सफेद या ब्राउन पट्टी की मदद से नस को एक जगह पर स्थिर रखें।
हद से ज्यादा दर्द हो तो ही कोई दर्द निवारक दवा लें अथवा किसी भी तरह की दवा लेने से बचें।

नसों के कमजोर होने के लक्षण

यदि आपके शरीर की नसें कमज़ोर हो गई हैं, तो इससे शरीर में होने वाले इफ़ेक्ट की पहचान करना जरूरी होता है जिससे सही इलाज करने में सहायता मिलती है।
यदि आपकी याददास्त घटने लगे तो समझ लीजिये की आपकी नसें कमजोर पड़ने लगी हैं।
चक्कर आना भी एक संकेत है कि आपकी नसें कमज़ोर है क्योंकि रक्त संचारित नही हो पा रहा।
रक्त जब शरीर में सही ढंग से नही सर्क्युलेट होता तो आंखों के आगे उठने-बैठने के समय अंधेरा छाने लगता है।
अपच होना भी एक संकेत है।
अनिन्द्रा भी दर्शाता है आपके नसों की कमज़ोरी।
हदय-स्पंदन
शरीर में खून की कमी होना।
नसों की कमज़ोरी का इलाज
इनमें से कोई भी लक्षण जब शरीर में घटित होता है तो नसों में बहुत तेजी के साथ दर्द होने लगता है, जो परेशानी का सबब बन जाता है। तो अब जानते हैं नसों के दर्द को दूर करने के कुछ आसान घरेलू इलाज जिसे आप ठीक से फॉलो करेंगे तो यकीनन फायदा होगा।

*1. पुदीने का तेल*

यदि आपके नसों में बहुत दर्द होता है, तो दर्द से प्रभावित क्षेत्र में पुदीने के तेल से मालिश करें । इससे आपको नसों के दर्द से राहत मिलेगी।

*2. सरसो का तेल*

सरसों के तेल से नसों के दर्द से छुटकरा पाया जा सकता है। सरसों के तेल को गरम करके इससे मालिश करे। ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा।

*3. लेवेंडर का फूल*

लेवेंडर का फूल तथा सुइया को नहाने के पानी में मिला कर नहाएं ।

*4. बेर की गुठलियां*

नसों की कंजोरी को दूर करने के लिए आप बेर की गुठलियों को गुड़ के साथ खाएं जिससे की नसों में मज़बूती आएगी और शरीर बलवान बन जाता है।

*5. गाय का दूध*

नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए आप गाय के दूध के साथ मक्खन, मिश्री भी खा सकते है, जिससे काफी हद तक नसों की कमजोरी में आराम मिलता है।

*6. किसमिस*

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किसमिस खाने की आदत डाल लें। यह शरीर में अन्य लाभ पहुंचाने के साथ ही नसों की कमजोरी का भी बेहतरीन इलाज है। पर हाँ इसका इस्तेमाल आप सर्दियों के मौसम में ही करने की कोशिश करें।

*7. आयुर्वेद का साथ*

अश्वगन्धा 100 ग्राम, सतावर 100 ग्राम, बाहीपत्र 100 ग्राम, इसबगोल की भूसी 100 ग्राम, तालमिश्री 400 ग्राम इस सबका एक मिश्रण बना ले और उस मिश्रण को सुबह व शाम को दूध के साथ लें। लगभग एक महीने के प्रयोग से ही शरीर की रक्त क्षमता बढ़ जाती है। और नशों में ताक़त आजाती है ।

*8. व्यायाम*

यदि आपकी नसों में बहुत दर्द होता है तो आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए जिससे नसों को बहुत लाभ होता है और इसमें पड़ी हुई गांठ भी धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।

*9. भ्रस्तिका प्राणायाम*

भ्रस्तिका प्राणायाम करने से भी नसों के रोगी को बहुत लाभ होता है। लाभ होता है इसलिए रोजाना यह प्राणायाम करें

*10. अनुलोम विलोम*

अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से भी नसों में होने वाली दिक्कत को एक दम से दूर किया जा सकता है और बहुत दिनों तक करेंगे तो ये बीमारी जड़ से ख़त्म हो जाएगी।

*11. मसाज का सहारा*

नस में होने वाले दर्द पर दबाव डालने से तनाव को मुक्त करने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है। पूरे शरीर की मालिश करने से सभी मांसपेशियों की शिथिलता को बढाने में और साथ ही प्रभावित हिस्से को आराम देने में हेल्प मिलती हैं।

नहाने से पहले शरीर में कौन से तेल की मालिश करें

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नहाने से पहले जो व्यक्ति अपने शरीर में नियमित रूप से तेल की मालिश करता है, उसके शरीर को पुष्टि मिलती है। जी हाँ, शरीर में तेल लगाकर भरपूर मालिश करने के बाद नहाने से जो लाभ होता है उसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। आपको बता दें कि नहाने से ठीक पहले शरीर में मालिश के लिए आप सरसों के तेल, जैतून के तेल और नारियल के तेल में से किसी को भी चुन सकते हैं। बहरहाल आज हम आपको इसी के लाभ बताने जा रहे हैं। इसके अलावा हम आज आपको यह भी जानकारी देंगे कि आख़िर वो कौन सा दुर्लभ क्षण है जब हमें शरीर में तेल की मालिश नहीं करनी चाहिए।

आपको बता दें कि ऐसे लोग जो अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं अथवा शरीर में बल का विकास करना चाहते हैं और उसे स्वस्थ रखना चाहते हैं, वो लोग इस नियम का ज़रूर पालन करें कि नहाने से पहले अपने शरीर में नारियल के तेल से या जैतून के तेल से या फिर सरसों के तेल में जमकर मालिस करें और फिर 10-15 मिनट तक रुकने के बाद नहा लें। इससे उनको आश्चर्यजनक फ़ायदे होंगे।

दिलचस्प है कि नहाने से पहले शरीर में रोज़ाना तेल लगाने से शरीर की विशेष रूप से वृद्धि होती है, शरीर पुष्ट होता है, शरीर बलवान बनता है और आपकी धातुयें भी पुष्ट होती हैं। चूँकि हमारा शरीर पूरी तरह से त्वचा से ढका हुआ है। यही वायु का मुख्य स्थान भी है। इसलिए त्वचा में तेल की मालिश करने से आपके शरीर को भोजन की अपेक्षा अधिक तर्पण मिलता है और बढ़ी हुयी वायु से भी लाभ मिलता है।

शरीर में तेल लगाकर नहाने के मामले में आयुर्वेद विशेष जोर देता है, क्योंकि इससे हमारे शरीर की शिराएँ और स्नायु को भरपूर तर्पण मिलता है। हालाँकि आपको बता दें कि जिन्हें बुखार है, दस्त है या अधिक पसीना आता है अथवा महिलाओं को मासिक धर्म के समय तेल नहीं लगाना चाहिए।

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वैसे तो स्वस्थ त्वचा के लिए तेल मालिश करना नियमित दिनचर्या है लेकिन सप्ताह में कुछ दिन जैसे- रविवार, मंगलवार और शुक्रवार को तेल मालिश नहीं करनी चाहिए। क्यों?…

शास्त्रों के अनुसार रविवार का दिन सूर्य से संबंधित है। सूर्य से गर्मी उत्पन्न होती है। इसलिए इस दिन शरीर में पित्त अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक होना स्वाभाविक है। तेल से मालिश करने से भी गर्मी उत्पन्न होती है। इसलिए रविवार को तेल से मालिश करने से रोग होने का भय रहता है।

मंगल ग्रह का रंग लाल है। इस ग्रह का प्रभाव हमारे रक्त पर पड़ता है। इस दिन शरीर में रक्त का दबाव अधिक होने से खुजली, फोड़े-फुंसी आदि त्वचा रोगों का डर रहता है।

इसी तरह शुक्र ग्रह का संबंध वीर्य तत्व से रहता है। इस दिन मालिश करने से वीर्य संबंधी रोग हो सकते हैं।

अगर रोजाना मालिश करनी हो तो तेल में रविवार को फूल, मंगलवार को मिट्टी और शुक्रवार को गाय का मूत्र डाल लेने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।

तेल मालिश करने से बुढ़ापा, थकान और वायुरोग नहीं होते। आंखों की ज्योति तेज होती है और नींद भी अच्छी आती है। त्वचा भी सुन्दर होने से शरीर का सौन्दर्य भी निखरता है।

किडनी को साफ़ करने के 10 आसान घरेलु उपाय

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जिस प्रकार हम अपने घर में पानी के फिल्टर की सफाई करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें हमारी किडनी की भी रोजाना सफाई करनी चाहिए। ऐसा करने से हमारे शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि किडनी हमारे शरीर का एक मुख्य हिस्सा है। यह हमारे ब्लड से नमक और शरीर से हानिकारक बैक्टीरिया को फिल्टर करके गंदगी को साफ करती है।

1. लाल अंगूर

लाल अंगूर में विटामिन-सी, ए और बी6 काफी मात्रा में होता है। साथ ही इसमें फोलेट, पोटैशियम, आयरन, कैल्शियम भी पाया जाता है। इसे खाने से आपको कब्ज, थकान और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। यह किडनी से सारे विषैले तत्व बाहर निकाल देता है और किडनी को स्वस्थ्य रखता है।

2. धनिया

धनिया में मैगनीज, आयरन, मैग्निशियम, विटामिन सी, विटामिन के और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। इसमें बहुत कम मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, थायमिन और कैरोटीन होता है। इसलिए किडनियों की सफाई के लिए धनिया बहुत फायदेमंद है।

3. नींबू 

विटामिन सी शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायक होता है। रोज एक गिलास पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर पीने से किडनी संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।

4. अजवाइन

भारतीय रसोई की एक खास चीज है अजवायन। खाने का स्वाद बढ़ाने से लेकर कई बीमारियों में इलाज के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। अजवाइन पाचक और पित्तवर्धक होती है। यह पेट से जुड़ी सभी बीमारियों में लाभकारी है। इसके रोज सेवन से किडनी स्वस्थ्य़ रहती हैं।

5. अदरक

अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लो‍रीन व विटामिन सहित कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल देते हैं।

6. दही 

दही पाचन क्रिया को तो अच्छा करता ही है साथ ही इसमें प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होता है जो किडनियों की सफाई भी करता है। इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाते हैं।

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7. करौंदा

करौंदे में विटामिन C प्रचुर मात्रा में होने के साथ-साथ अत्यधिक एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है| करौंदा विटामिन E तथा K का भी अच्छा स्त्रोत है| इससे हमें इन विटामिनों के अतिरिक्त आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, जिंक इत्यादि मिनरल्स भी प्राप्त होते हैं। यह किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। करौंदे के नियमित सेवन से किडनी स्वस्थ्य रहती हैं।

8. अजमोद (पार्सले)

इसमें विटामिन ए, विटामिन सी और पोटेशियम होता है जो किडनी के लिए फायदेमंद है। इसमें पाया जाने वाला लूटेओलिन एंटीआक्सीडेंट यूरिक एसिड को किडनी से बाहर निकालता है और रक्त शुद्ध करता है।

9. लाल शिमला मिर्च 

लाल शिमला मिर्च में विटामिन ए, सी , बी6, फोलिक एसिड और रेशे पाये जाते हैं। इसके अलावा इसमें पोटैशियम की मात्रा भी कम होती है। जो किडनी को साफ रखने में मदद करते हैं।

10. गुडूची

गुडूची एक अच्छा मूत्रवर्धक है। इसके सेवन से पेशाब के साथ किडनी से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा ये शराब और धूम्रपान करने वालों के लिए भी बहुत लाभदायक है। आप गुडूची के पत्तों का रस पी सकते हैं। बाजार में गुडूची कैप्सूल भी उपलब्ध हैं।

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आज हम आपको राजीव दीक्षित जी के लिखे हुए तुलसी के फायदे बताने जा रहे है. जेसा कि हम सब जानते ही हैं की तुलसी दो प्रकार की होती है. जिनमे से एक होती है “राम तुलसी” और दूसरी है “श्याम तुलसी”. तकरीबन तुलसी हम सबके घर में होती है, एसा कोई ही घर होगा झा तुलसी मोजूद न हो. तो चलिए जानते है इन तुलसी की किस्मो के बारे में विस्तार से

तुलसी सभी स्थानों पर पाई जाती है। इसे लोग घरों, बागों व मंदिरों के आस-पास लगाते हैं लेकिन यह जंगलों में अपने आप ही उग आती है। तुलसी की अनेक किस्में होती हैं परन्तु गुण और धर्म की दृष्टि से काली तुलसी सबसे अधिक महत्वपूर्ण व उत्तम होती है। आमतौर पर तुलसी की पत्तियां हरी व काली होती है। तुलसी का पौधा सामान्यत: 1 से 4 फुट तक ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां 1 से 2 इंच लंबे अंडाकार, आयताकार, ग्रंथियुक्त व तीव्र सुगंध वाली होती है। इसमें गोलाकार, बैंगनी या लाल आभा लिए मंजरी (फूल) लगते हैं।

राम तुलसी और श्याम तुलसी –

बात अगर तुलसी की किस्मो की जाये तो सबसे उपर राम तुलसी पाई जाती है. राम तुलसी का रंग हल्का हरा होता है. जबकि श्याम तुलसी दिखने में डार्क ग्रीन होती है. कभी कभी श्याम तुलसी दिखने में काले रंग की भी नजर आती है इसलिए, उसको श्याम तुलसी कहा जाता है. श्याम तुलसी में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. जबकि राम तुलसी में ज्यादा गुण नही है.

घर में लगाने के लिए जरूरी किस्म

अगर आपको घर में तूलसी लगनी है तो हमेशा श्याम तुलसी ही लगायें. जेसा की हम जानते ही है कि तुलसी की एक खास विशेषता है. और वो विशेषता ये है कि तुलसी साल में कभी भी लगाई जा सकती है भले मौसम कोई भी हो. इसकी एक और विशेषता है कि तुलसी किसी भी समय में मिल सकती है. तुलसी को घर के गार्डन में भी लगा सकते है और अगर गार्डन नही है तो इसको हम किसी गमले में भी लगा सकते है.

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श्याम तुलसी के उपयोग

श्याम तुलसी के बहुत सारे उपयोग है. सबसे पहले उपयोग की अगर बात की जाये तो, श्याम तुलसी किसी भी तरह के बुखार को ठीक कर सकती है. चाहे वो बैक्टीरियल फेवर हो या वायरल फेवर, श्याम तुलसी का सेवन करने से आपको इन सब बुखारो से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जायेगा. तो आप हमेशा घर में तुलसी को लगाये.

श्याम तुलसी को उपयोग करने के सरल तरीके

श्याम तुलसी को उपयोग केना बेहद सरल है. इसके लिए आपको 15-20 पत्तों की चटनी बना कर उसको गर्म करके उसका रस निकलना होगा. रस निकलने के बाद इसमें थोडा गुड मिला लीजिये. अगर आपको शहद पसंद है तो इस रस में 1-2 चम्मच आप शहद के मिला सकते है. अंग्रेजी की दवा “पेरासिटामोल” जो काम करती है वही काम यह तुलसी करती है. अगर आपको 104-105 डिग्री बुखार किस शिकायत रहती है तो इसका काढ़ा बना क्र सेवन करें. बहुत कम समय में ही आपका बुखार उतर जायेगा.

काढ़ा बनाने का तरीका

तुलसी के पत्तो का काढ़ा बनाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको तुलसी के कुछ पत्ते लेकर उन्हें किसी बर्तन में पानी मिलाकर उबालने होंगे. पत्तो को तब तक पानी में उबालते रहे, जब तक पानी आधा न हो जाये. इसके बाद पानी में थोडा गुड मिला दे. और पानी को पीने लायक गुनगुना करलें. इस काढ़े से कितना भी खराब बुखार क्यों न हो, तुरंत उतर जायेगा.

महिलाओं के लिए फायदेमंद

काफी माताओं को आजकल अंदर से पानी आने की शिकायत हो रही है. जिसको अंग्रेजी में लिकोरिया कहते हैं, उसकी सबसे अच्छी औषध है यह श्याम तुलसी. यह श्याम तुलसी का भरपूर उपयोग करिए आपको इस बीमारी से बिल्कुल आसानी से निजात मिल जाएगी.

गुण (Property)

आयुर्वेद के अनुसार :आयुर्वेद के अनुसार तुलसी, हल्की, गर्म, तीखी कटु, रूखी, पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली होती है तुलसी कीडे़ को नष्ट करने वाली, दुर्गंध को दूर करने वाली, कफ को निकालने वाली तथा वायु को नष्ट करने वाली होती है। यह पसली के दर्द को मिटाने वाली, हृदय के लिए लाभकारी, मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट होना) को ठीक करने वाली, विष के दोषों को नष्ट करने वाली और त्वचा रोग को समाप्त करने वाली होती है। यह हिचकी, खांसी, दमा, सिर दर्द, मिर्गी, पेट के कीड़े, विष विकार, अरुचि (भोजन करने की इच्छा न करना), खून की खराबी, कमर दर्द, मुंह व सांस की बदबू एवं विषम ज्वर आदि को दूर करती है। इससे वीर्य बढ़ता है, उल्टी ठीक होती है, पुराना कब्ज दूर होता है, घाव ठीक होता है, सूजन पचती है, जोड़ों का दर्द, मूत्र की जलन, पेशाब करने में दर्द, कुष्ठ एवं कमजोरी आदि रोग ठीक होता है। यह जीवाणु नष्ट करती है और गर्भ को रोकती है।

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार : यूनानी चिकित्सकों के अनुसार तुलसी बल बढ़ाने वाली, हृदयोत्तेजक, सूजन को पचाने वाली एवं सिर दर्द को ठीक करने वाली होती है। तुलसी के पत्ते बेहोशी में सुंघाने से बेहोशी दूर होती है। इसके पत्ते चबाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। तुलसी के सेवन से सूखी खांसी दूर होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। इसके बीज दस्त में आंव व खून आना बंद करता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार : वैज्ञानिकों द्वारा तुलसी का रासायनिक विश्लेषण करने पर पता चलता है कि इसके बीजों में हरे व पीले रंग का एक स्थिर तेल 17.8 प्रतिशत की मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त बीजों से निकलने वाले स्थिर तेल में कुछ सीटोस्टेराल, स्टीयरिक, लिनोलक, पामिटिक, लिनोलेनिक और ओलिक वसा अम्ल भी होते हैं। इसमें ग्लाइकोसाइड, टैनिन, सेवानिन और एल्केलाइड़स भी होते हैं।

तुलसी के पत्ते व मंजरी से लौंग के समान गंधवाले पीले व हरे रंग के उड़नशील तेल 0.1 से 0.3 प्रतिशत की मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें यूजीनाल 71 प्रतिशत, यूजीनाल मिथाइल ईथर 20 प्रतिशत तथा कार्वाकोल 3 प्रतिशत होता है। इसके पत्तों में थोड़ी मात्रा में `केरोटीन` और विटामिन `सी` भी होती है।

ज्यादा डिटेल्स में जानने के लिए निचे दी गयी विडियो देखें >>

हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यधिक महत्व दिया गया है। तुलसी की पुजा सभी घरों में की जाती है और इसी लिए तुलसी घर-घर में लगाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे होते हैं वहां मच्छर, सांप, बिच्छू व हानिकारक कीड़े आदि नहीं उत्पन्न होते।

तुलसी की पत्तियां हाथ जोड़कर या मन में तुलसी के प्रति सम्मान और श्रद्धा रखते हुए जितनी आवश्यकता हो उतनी ही तोड़नी चाहिए। इसकी पत्तियां तोड़ते समय ध्यान रखें कि मंजरी के आसपास की पत्तियां तोड़ने से पौधा और जल्दी बढ़ता है। अत: मंजरी के पास की पत्तियां ही तोड़ना चाहिए। पूर्णिमा, अमावस्या, संक्रान्तिकाल, कार्तिक, द्वादशी, रविवार, शाम के समय, रात एवं दिन के बारह बजे के आसपास तुलसी की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। तेल की मालिश कराने के बाद बिना नहाए, स्त्रियों के मासिक धर्म के समय अथवा किसी प्रकार की अन्य अशुद्धता के समय तुलसी के पौधे को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे पौधे जल्दी सूख जाते हैं। यदि पत्तों में छेद दिखाई देने लगे तो कंडे (छाणे) की राख ऊपर छिड़क देने से उत्तम फल मिलता है।

हानिकारक प्रभाव

चरक संहिता के अनुसार तुलसी के साथ दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे कुष्ठ रोग होने की संभावना रहती है। कार्तिक के महीने में तुलसी के पत्ते पान के साथ सेवन करने से शारीरिक कष्ट हो सकता है। तुलसी का अधिक मात्रा में सेवन करना मस्तिष्क के लिए हानिकारक होता है।

Source: www.rajivdixitji.com

ये घरेलु उपाय किडनी को स्वस्थ रखते है !

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जिस तरह हम अपने घर में पानी के फिल्टर की सफाई बराबर करते हैं, उसी तरह हमारे शरीर के फिल्टर, यानी कि किडनी की सफाई भी बराबर करती रहनी चाहिए.

जिससे कि हमारे शरीर की गंदगी आसानी से बाहर जाती रहे.

किडनी हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है, हमारे ब्लड को फ़िल्टर कर गंदगी साफ कर देता है. इसलिए हमारे किडनी को साफ रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि हमारा स्वास्थ्य अच्छा बना रहे.

हल्दी

अगर आपको अपनी किडनी साफ करनी है तो हल्दी खाइए। इसे अपने भोजन में डालकर अथवा छोटे टुकड़ों में खाया जाए, क्योंकि इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं।

धनिया

किडनी में स्टोन के इलाज के लिए धनिया को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे किडनी रोग की दवाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसे भोजन में इस्तेमाल किया जाता है।

अदरक

यह शरीर में खून की सफाई के साथ-साथ किडनी से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है एवं किडनी को स्वस्थ रखता है।

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दही

इसमें अच्छे प्रकार का बैक्टीरिया पाया जाता है, जो किडनी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। यह बैक्टीरिया उसमें से गंदगी को बाहर निकलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

जामुन

इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। इसमें यूरिक एसिड और यूरिया को निकालने की क्षमता होती हैं

कद्दू के बीज

इस बीज में एंटी ऑक्सीडेंट मिनरल और विटामिन पाए जाते हैं। यह किडनी को किसी भी प्रकार के फ्री रेडिकल से बचा लेते हैं।

सिर्फ 2 बूंद गर्म पानी के साथ मौत को छोड़ सभी बीमारियाँ जड़ से ख़त्म

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सोडियम, कैल्शियम और आयरन भरपूर कलौंजी का इस्तेमाल कई तरह की दवाईयां बनाने के लिए किया जाता है। कलौंजी खाने से भी कई बीमारियां दूर हो जाती है लेकिन आज हम आपको इसके तेल के फायदों के बारे में बताने जा रहें है। कार्बोहाइडे्ट, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन्स के गुणों से भरपूर कलौंजी का तेल कई बीमारियों को दूर करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीआॅक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण कैंसर जैसी बीमारी से आपको बचाता है। मंहगी दवाइयों पर पैसे खर्च करने की बजाए आप भोजन में कलौंजी का तेल इस्तेमाल करके कई प्रॉब्लम को दूर भी कर सकते है और यह आपको कई बीमारियों से बचाता भी है। तो आइए जानते है कलौंजी के तेल से दूर होने वाली समस्याओं के बारे में।

रामबाण औषधि है कलौंजी का तेल

कलौंजी का तेल कैंसर, डायबीटिज़, सर्दी-जुकाम, पीलिया, बवासीर, मोतियाबिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द, सफेद दाग, लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, गंजापन जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है.

1- कैंसर

कलौंजी का तेल शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को विकसित होने से रोकता है और उन्हें नष्ट करता है. यह कैंसर रोगियों में स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है.

कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लेना चाहिए.

2 – खांसी और दमा

खांसी और दमा की शिकायत होने पर छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन चम्मच कलौंजी का तेल रोज़ पीएं और पानी में तेल डालकर उसका भाप लें.

3 – डायबीटिज़

डायबीटिज़ के मरीज़ों को एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके को पीस कर चूर्ण बना लेना चाहिए. आधे चम्मच कलौंजी के तेल के साथ इस चूर्ण को रोज़ नाश्ते के पहले एक महीने तक लेने से आराम मिलता है.

4 – किडनी स्टोन

पाव भर पिसी हुई कलौंजी को शहद में अच्छी तरह से मिला लें. इसमें से दो चम्मच मिश्रण और एक चम्मच कलौंजी के तेल को एक कप गर्म पानी के साथ मिलाकर रोज़ नाश्ते से पहले लें. गुर्दे की पथरी से परेशान लोगों को कलौंजी का तेल फायदा करता है.

5 – ह्दय रोग और ब्लड प्रेशर

जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक चम्मच कलौंजी का तेल मिला लें. तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें. लगातार एक महीने तक ऐसा करने से पीड़ित को आराम मिलता है.

6 – कमर दर्द और गठिया

कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें. और एक चम्मच कलौंजी का तेल दिन में तीन बार सेवन करें. 15 दिन मे बहुत आराम मिलेगा.

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7 – सिरदर्द

लगातार सिरदर्द होने पर माथे और सिर के दोनों तरफ कान के आस-पास कलौंजी का तेल लगाएं और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल का सेवन करें.  कुछ सप्ताह बाद सिरदर्द पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

8 – आंखों की समस्या के लिए

रोज़ सोने के पहले पलकों और आंखों के आस-पास कलौंजी का तेल लगाने और एक चम्मच तेल को एक कप गाजर के रस के साथ एक महीने तक लेने से नेत्र रोग से पीड़ित व्यक्ति को फायदा होता है.

9 – बालों की समस्या करे दूर

बालों में नींबू का रस अच्छी तरह से लगाए. 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें. सूखे बालो में कलौंजी का तेल लगाएं. एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बंद हो जाएगा.

बालों में रुसी होने पर दस ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल हल्का गर्म करें उसमें 30 ग्राम पिसी हुई मेहंदी को मिलाकर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धोकर शैंपू कर लें.

10 – सुंदर और आकर्षक चेहरे के लिए

एक चम्मच कलौंजी का तेल, एक चम्मच जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर मसाज करें और एक घंटे बाद चेहरा धो लें. कुछ दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा.

11 – मानसिक तनाव करता है दूर

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डालकर लेने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है. एक चम्मच तेल, 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ खाने से याददाश्त अच्छी होती है.

12 – स्त्री गुप्त रोग

स्त्रियों के रोग जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, डिलेवरी के बाद दुर्बलता व रक्त स्त्राव में कलौंजी का तेल काफी फायदेमंद होता है. थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डालकर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर दिन में दो बार पिएं. बैंगन अचार, अंडा और मछली से परहेज करें.

13 – सफेद दाग और कुष्ठ रोग

शरीर पर सफेद दाग और कुष्ठ रोग हो जाने पर 15 दिन तक रोज़ाना पहले सेब का सिरका शरीर पर मलें फिर कलौंजी का तेल मलें.

14 – एचआईवी

कलौंजी के औषधिय गुणों की जांच के लिए अमेरिका में एक शोध के दौरान एचआईवी पीड़ित व्यक्ति को रोज़  कलौंजी, लहसुन और शहद का कैप्सुल दिया गया. कुछ दिनों बाद यह पाया गया कि पीड़ित व्यक्ति में शरीर की रक्षा करनेवाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रुप से बढ़ोत्तरी हुई थी.

15- पुरुष गुप्त रोग

स्वप्न दोष, स्तंभन दोष, नपुंसकता जैसे रोगों में एक कप सेब के रस में आधा चम्मच तेल मिलाकर दिन में दो बार 21 दिन तक पिएं. थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज़ मलने से फायदा होता है.

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